मासिक समसामयिकी पत्रिका
Current Affairs Monthly Compilation
दिनांक: 22 जुलाई 2026
प्रकाशक: विक्रम ई-मित्र पोर्टल
बरौली, राजस्थान | हेल्प-लाइन: 6378811249, 6378811249
© 2026 Vikram e-Mitra Portal. सर्वाधिकार सुरक्षित।
विषय सूची (Table of Contents)
- 1. 'मनोदय' मिशन का शुभारंभ: सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक सहायता को मजबूत करनापेज 3
- 2. 'समावेशी खेल' नीति का अनावरण: दिव्यांग व्यक्तियों के लिए समावेशी खेल को बढ़ावा देनापेज 4
- 3. नारी-टेक मिशन का शुभारंभ: भारत के डिजिटल लैंगिक अंतर को पाटनापेज 5
- 4. जन समाधान मंच (JSM): एकीकृत जन शिकायत निवारण और नागरिक प्रतिक्रिया मंचपेज 6
- 5. राष्ट्रीय तटीय क्षेत्र प्रबंधन नीति 2026: सुदृढ़ता और आजीविका में वृद्धिपेज 7
- 6. राष्ट्रीय शिक्षक अभिवर्धन मिशन (RSAM): नव-युग की शिक्षाशास्त्र हेतु शिक्षकों का सशक्तिकरणपेज 8
- 7. वरिष्ठ नागरिक डिजिटल सशक्तिकरण और आरोग्य (वज्र) पहल - पायलट चरण शुरूपेज 9
- 8. प्रज्ञा कौशल विकास योजना ने भविष्य के कार्यबल के लिए 'एआई और रोबोटिक्स कौशल ट्रैक' का शुभारंभ कियापेज 10
- 9. स्थायी शहरी संसाधन प्रबंधन (सुरम) मिशन - 'मॉडल सर्कुलर सिटीज़' हेतु चरण II का शुभारंभपेज 11
- 10. "सहयोग-नगर": शहरी प्रवासी श्रमिकों के कल्याण और एकीकरण के लिए संशोधित राष्ट्रीय नीति का शुभारंभपेज 12
- 11. सरकार ने 'डिजिटल स्वास्थ्य: डिजिटल युग में कल्याण हेतु राष्ट्रीय रणनीति' का शुभारंभ कियापेज 13
- 12. देखभाल अर्थव्यवस्था और अवैतनिक देखभालकर्ताओं के लिए सामाजिक सुरक्षा हेतु राष्ट्रीय ढाँचा अनावरणपेज 14
- 13. भारत ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत इलेक्ट्रोलाइज़र विनिर्माण के लिए सरकार ने नए पीएलआई ट्रेंच की घोषणा कीपेज 15
- 14. आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) का चरण 3 तक विस्तार: मानसिक स्वास्थ्य और सार्वभौमिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड पर ध्यान केंद्रितपेज 16
- 15. पीएम किसान सारथी योजना: कृषि परिवर्तन के लिए एआई का लाभ उठाना और राष्ट्रव्यापी विस्तारपेज 17
- 16. राष्ट्रीय ड्रोन-रोधी उपाय नीति 2026 लॉन्च: हवाई क्षेत्र सुरक्षा को मजबूत करनापेज 18
- 17. क्वाड देशों ने हिंद-प्रशांत के लिए संयुक्त समुद्री साइबर सुरक्षा ढाँचा लॉन्च कियापेज 19
- 18. भारत ने अगली पीढ़ी की सीमा निगरानी के लिए 'इंद्र-क्वांटम' रडार का अनावरण कियापेज 20
- 19. जलवायु-प्रेरित प्रवासन पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (आईसीसीएमआई) ने 'जलवायु लचीली गतिशीलता के लिए वैश्विक ढाँचा' अपनायापेज 21
- 20. भारत-जापान 'डिजिटल और साइबर सुरक्षा संवाद 2.0' संपन्न: महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में रणनीतिक साझेदारी गहरी हुईपेज 22
- 21. ब्रिक्स+ शिखर सम्मेलन संपन्न: बहुध्रुवीयता और वैश्विक वित्तीय सुधारों का मार्ग प्रशस्तपेज 23
- 22. भारत-आसियान 'महासागर संरक्षक' पहल उन्नत समुद्री डोमेन जागरूकता के लिए शुरू की गईपेज 24
- 23. परियोजना 'अस्त्र-नेत्र': भारत ने स्वदेशी स्टील्थ यूसीएवी कार्यक्रम का अनावरण कियापेज 25
- 24. भारत का एकीकृत वायु रक्षा कमान (IADC) पूर्ण परिचालन क्षमता (FOC) प्राप्त करता हैपेज 26
- 25. भारत-ईयू ने जलवायु सहयोग को बढ़ावा देने के लिए 'हरित संक्रमण त्वरक कोष' का अनावरण कियापेज 27
- 26. संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना सुधार शिखर सम्मेलन संपन्न: 21वीं सदी के संघर्षों के लिए अनुकूलनशीलता अनिवार्यपेज 28
- 27. हिंद-प्रशांत महत्वपूर्ण खनिज गठबंधन का उद्घाटन संवाद संपन्न: सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं को बल प्रदानपेज 29
- 28. भारत प्लास्टिक चक्र पहल: पॉलिमर अपशिष्ट प्रबंधन के लिए उन्नत पुनर्चक्रण और चक्रीय अर्थव्यवस्थापेज 30
- 29. राष्ट्रीय हरित ग्रिड पहल (एनजीजीआई) का शुभारंभ: जलवायु लचीलेपन के लिए विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरणपेज 31
- 30. प्रोजेक्ट चीता 2.0 का शुभारंभ: मेटापॉपुलेशन स्थिरता के लिए संरक्षण क्षेत्रों का विस्तार और आनुवंशिक प्रबंधनपेज 32
- 31. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जीनोमिक्स ने सटीक स्वास्थ्य और रोग निगरानी के लिए 'भारतजेनसेक 2.0' लॉन्च कियापेज 33
- 32. इसरो ने 'ध्रुव-1' का प्रक्षेपण किया: जलवायु लचीलेपन के लिए ऑनबोर्ड एआई के साथ उन्नत पृथ्वी अवलोकन उपग्रहपेज 34
- 33. भारत ने 'नेत्रा-क्वांटम' का अनावरण किया: रणनीतिक अनुप्रयोगों के लिए स्वदेशी क्वांटम सुरक्षित संचार नेटवर्कपेज 35
- 34. सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा कवरेज हेतु 'प्रधानमंत्री जन सुरक्षा समग्र योजना' (PMJSSY) का शुभारंभपेज 36
- 35. कौशल विकास मंत्रालय ने 'राष्ट्रीय डिजिटल कौशल एवं रोजगार मिशन' (NDSEM) का शुभारंभ कियापेज 37
- 36. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जलवायु-अनुकूल कृषि हेतु 'राष्ट्रीय जलवायु अनुकूल कृषि योजना' (RJAKY) को दी मंज़ूरीपेज 38
- 37. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने वरिष्ठ नागरिक कल्याण के लिए एकीकृत राष्ट्रीय कार्य योजना 2026-2030 का अनावरण कियापेज 39
- 38. शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफ-एसई) 2.0 के कार्यान्वयन दिशानिर्देश जारी किएपेज 40
- 39. ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए राष्ट्रीय डिजिटल सहेली योजना का शुभारंभपेज 41
- 40. नागरिक सेवा समाधान पोर्टल (NSSP) का अखिल भारतीय स्तर पर शुभारंभ, 1500 से अधिक सरकारी सेवाओं का एकीकरणपेज 42
- 41. डिजिटल कृषि पर ध्यान केंद्रित करते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि उन्नति सहयोग अभियान (KUSA) के बड़े सुधार को मंजूरी दीपेज 43
- 42. महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा देने की राष्ट्रीय योजना: महिला उद्यमिता प्रोत्साहन योजना (MUPY) का दूसरा चरण शुरूपेज 44
- 43. बाल संरक्षण और पुनर्वास प्रणालियों को सुदृढ़ करने हेतु 'बाल जीवन धारा' अभियान का शुभारंभपेज 45
- 44. नीति आयोग ने महिला कार्यबल भागीदारी को बढ़ावा देने हेतु 'लैंगिक समानता और आर्थिक समावेशन ढाँचा 2026' जारी कियापेज 46
- 45. समग्र वृद्धजन देखभाल और सम्मान हेतु 'वरिष्ठ सम्मान' राष्ट्रीय कार्ययोजना 2026 का अनावरणपेज 47
- 46. नीति आयोग द्वारा राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था संवर्धन योजना (NCEPS) नीति दस्तावेज जारीपेज 48
- 47. युवा कौशल नवाचार योजना (YKNY) का पायलट चरण आकांक्षी जिलों में शुरूपेज 49
- 48. ग्रामीण समग्र संपर्क अभियान (GSSA) कार्यान्वयन ढांचा अनावरणपेज 50
- 49. सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने 'मानसिक स्वास्थ्य सहायता अभियान' का शुभारंभ कियापेज 51
- 50. 'द गिग एंड प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स (सोशल सिक्योरिटी) बिल, 2026' को राष्ट्रपति की मंजूरी; कार्यान्वयन दिशानिर्देश जारीपेज 52
- 51. महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध ऑनलाइन नुकसान से निपटने हेतु राष्ट्रीय डिजिटल सुरक्षा ढाँचा 2026 का शुभारंभपेज 53
- 52. पीएमएवाई-यू ने जलवायु-लचीले और स्मार्ट किफायती आवास के लिए 'हरित गृह अभियान' की शुरुआत कीपेज 54
- 53. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन: डेरिवेटिव्स और इलेक्ट्रोलाइज़र घटकों के लिए नई पीएलआई दिशानिर्देशों की घोषणापेज 55
- 54. एबीडीएम का 'स्वास्थ्य साथी पोर्टल' नागरिक डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाने के लिए लॉन्च किया गयापेज 56
- 55. भारतीय नौसेना ने 'आईएनएस प्रहरी' को कमीशन किया – पहली स्वदेशी एआई-संचालित समुद्री डोमेन जागरूकता पोतपेज 57
- 56. उन्नत भू-स्थानिक खुफिया (GEOINT) प्रणाली 'ध्रुव' सीमा निगरानी अभियानों में एकीकृतपेज 58
- 57. भारत ने रक्षा बलों के लिए पहली एकीकृत क्वांटम-सुरक्षित संचार नेटवर्क का संचालन कियापेज 59
- 58. आर्कटिक परिषद के सदस्यों ने सतत संसाधन प्रबंधन के लिए 'ध्रुवीय शासन समझौता' पर हस्ताक्षर किएपेज 60
- 59. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 'जलवायु-प्रेरित विस्थापन के लिए वैश्विक समझौता' अपनायापेज 61
- 60. भारत-आसियान ने बढ़ी हुई क्षेत्रीय एकीकरण के लिए 'डिजिटल भारत-आसियान कनेक्ट' समझौते पर हस्ताक्षर किएपेज 62
- 61. भारत और जापान ने पोर्ट ब्लेयर में 'सागरिका' संयुक्त समुद्री सुरक्षा एवं साइबर फ्यूजन केंद्र का उद्घाटन कियापेज 63
- 62. भारत ने उन्नत अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता और मलबे के शमन के लिए 'विजिलेंस' उपग्रह तारामंडल लॉन्च कियापेज 64
- 63. भारत ने 'दक्ष' स्टील्थ यूसीएवी के पहले स्क्वाड्रन को शामिल किया, हवाई युद्ध क्षमताओं को मजबूत कियापेज 65
- 64. भारत, उज़्बेकिस्तान और जर्मनी ने 'यूरेशियन ग्रीन हाइड्रोजन कॉरिडोर' के लिए त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किएपेज 66
- 65. भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया ने ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समुद्री अभ्यास 'समुद्र रक्षा' का समापन कियापेज 67
- 66. संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक एआई शासन के लिए ऐतिहासिक 'डिजिटल ट्रस्ट फ्रेमवर्क' अपनायापेज 68
- 67. भारत ने सतत गहरे समुद्र में खनन अन्वेषण के लिए नए नियामक ढांचे का अनावरण कियापेज 69
- 68. 'हरित कृषि: एक समग्र दृष्टि' राष्ट्रीय कृषि वानिकी मिशन का शुभारंभपेज 70
- 69. राष्ट्रीय आर्द्रभूमि बहाली एवं प्रबंधन कार्यक्रम (NWRMP) चरण-II समीक्षा जारीपेज 71
- 70. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने चक्रीय अर्थव्यवस्था के लिए अगली पीढ़ी के बायो-कम्पोजिट्स पर अनुसंधान को वित्त पोषित कियापेज 72
- 71. राष्ट्रीय AI फॉर हेल्थ पहल ने सटीक निदान के लिए 'स्वास्थ्यनेत्र' लॉन्च कियापेज 73
- 72. राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत भारत ने स्वदेशी क्वांटम प्रोसेसर प्रोटोटाइप का अनावरण कियापेज 74
- 73. 'ग्राम मानस स्वास्थ्य प्रहरी' पहल: ग्रामीण मानसिक स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच बढ़ानापेज 75
- 74. 'ध्रुव Mk-I': भारतीय निजी फर्म एस्ट्रस्पेस ने मध्यम-लिफ्ट कक्षीय वाहन का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण कियापेज 76
- 75. सीएसआईआर-सीईसीआरआई ने ईवी के लिए ऑल-सॉलिड-स्टेट बैटरी टेक्नोलॉजी में बड़ी सफलता हासिल कीपेज 77
- 76. भारत का नया एआई मॉडल 'वर्षा' क्षेत्रीय जलवायु पूर्वानुमान में लाएगा क्रांतिपेज 78
- 77. राजस्थान की मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना (एम.सी.एच.बी.एस.बी.वाई.) और जन आधार एकीकरण: सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और डिजिटल सशक्तिकरण के लिए एक मॉडलपेज 79
- 78. पोषण अभियान 2.0: राष्ट्रीय मूल्यांकन रिपोर्ट प्रगति पर प्रकाश डालती है, डिजिटल डेटा एकीकरण और सामुदायिक सहभागिता का आह्वान करती हैपेज 80
- 79. प्रधानमंत्री आवास सम्पन्न योजना (पीएमएएसवाई) चरण II का शुभारंभ: 'सभी के लिए आवास' की गति को बनाए रखनापेज 81
- 80. साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025 की घोषणा: प्रोफेसर अरुणोदय शर्मा को हिंदी उपन्यास 'मिट्टी का उत्सव' के लिए सम्मानित किया गयापेज 82
- 81. राजस्थान की सुश्री रिया सिंह ने विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स में विश्व रिकॉर्ड बनायापेज 83
- 82. डॉ. आनंद वर्धन यूपीएससी के नए अध्यक्ष नियुक्तपेज 84
- 83. भारत के एस-400 ट्रिम्फ वायु रक्षा प्रणालियों के पूर्ण संचालन के सामरिक निहितार्थपेज 85
- 84. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार: भारत का राजनयिक प्रयास और समान प्रतिनिधित्व के लिए जी4 की नई रणनीतिपेज 86
- 85. भारत-फ्रांस रणनीतिक संवाद संपन्न: रक्षा औद्योगिक सहयोग और हिंद-प्रशांत अभिसरण को गहरा करनापेज 87
- 86. पुरानी और जीवनशैली संबंधी बीमारियों को कवर करने के लिए 'मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना' का विस्तारपेज 88
- 87. राजस्थान ने विरासत जल संरचनाओं के संरक्षण हेतु 'पारंपरिक जल धारा पुनरुत्थान अभियान' का शुभारंभ कियापेज 89
- 88. राजस्थान ने दुर्लभ मृदा तत्वों (आरईई) के अन्वेषण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए नई नीति का अनावरण कियापेज 90
- 89. परियोजना ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) 2.0 लॉन्च: राजस्थान और गुजरात में संरक्षण को मजबूत करनापेज 91
- 90. हिमालयी ग्लेशियरों का पिघलना तेज हुआ: भारत की जल सुरक्षा के लिए गंभीर निहितार्थपेज 92
- 91. पर्यावरण मंत्रालय ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन परियोजनाओं के लिए विशेष ईआईए ढाँचे का अनावरण कियापेज 93
- 92. भारत का डेंगू के लिए पहला स्वदेशी mRNA टीका महत्वपूर्ण चरण III नैदानिक परीक्षणों में प्रवेश कियापेज 94
- 93. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को मजबूत करने के लिए 'छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) पर राष्ट्रीय नीति 2026' को मंजूरी दीपेज 95
- 94. इसरो ने गगनयान मिशन के क्रू मॉड्यूल एकीकरण और पर्यावरणीय नियंत्रण एवं जीवन रक्षक प्रणाली (ECLSS) परीक्षण में महत्वपूर्ण मील के पत्थर हासिल किएपेज 96
- 95. ग्रामीण अर्थव्यवस्था का पुनरुद्धार: एमएसपी की प्रभावशीलता, कृषि-प्रसंस्करण को बढ़ावा और राजस्थान की विकास पहलेंपेज 97
- 96. RBI की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट उभरते व्यापक-वित्तीय जोखिमों के बीच बैंकिंग क्षेत्र के लचीलेपन पर प्रकाश डालती हैपेज 98
- 97. उच्च-स्तरीय समिति ने न्यायिक नियुक्ति MoP में व्यापक सुधारों के लिए अंतरिम सिफारिशें प्रस्तुत कींपेज 99
- 98. संसद ने व्यापक राजनीतिक वित्तपोषण पारदर्शिता विधेयक 2026 पारित किया, प्रकटीकरण मानदंडों में वृद्धिपेज 100
- 99. पूंजीगत व्यय, एफडीआई/एफपीआई और पीएम गति शक्ति की सहक्रिया भारत के आर्थिक विकास पथ को आगे बढ़ा रही हैपेज 101
- 100. उच्चतम न्यायालय ने राज्यपाल के विवेकाधीन शक्तियों के दायरे को पुनः परिभाषित किया, संवैधानिक नैतिकता पर जोरपेज 102
विक्रम ई-मित्र समसामयिकी संकलन
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासामाजिक मुद्दे
1. 'मनोदय' मिशन का शुभारंभ: सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक सहायता को मजबूत करना
चर्चा में क्यों? (Why in News)
केंद्र सरकार ने 'मनोदय' नामक एक नए राष्ट्रीय मिशन का शुभारंभ किया है, जो पूरे भारत में समुदाय-आधारित मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और मनोसामाजिक सहायता प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। इस मिशन का उद्देश्य जमीनी स्तर पर प्रारंभिक हस्तक्षेप, कलंक मुक्ति और सुलभ देखभाल पर ध्यान केंद्रित करके व्यापक मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**जमीनी कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण**: आशा (मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता), आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और पंचायत सदस्यों को बुनियादी मानसिक स्वास्थ्य प्राथमिक उपचार, परामर्श और रेफरल तंत्र में व्यापक प्रशिक्षण।
- •**सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य केंद्र (CMHCs)**: ब्लॉक स्तर पर CMHCs की स्थापना, जो मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन, परामर्श और विशेष देखभाल से जुड़ने के लिए प्राथमिक संपर्क बिंदुओं के रूप में कार्य करेंगे।
- •**मनोसामाजिक सहायता समूह (PSSGs)**: मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों वाले व्यक्तियों के लिए सहकर्मी सहायता, साझा अनुभव प्रदान करने और सामाजिक अलगाव को कम करने हेतु समुदायों के भीतर PSSGs को बढ़ावा देना और सुविधा प्रदान करना।
- •**कलंक मुक्ति अभियान**: मानसिक बीमारी से जुड़े मिथकों को दूर करने और कलंक को कम करने के लिए स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक संदर्भों का उपयोग करके लक्षित जन जागरूकता अभियान शुरू करना।
- •**टेली-मानस का विस्तार और एकीकरण**: मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों तक 24/7 पहुंच सुनिश्चित करने और अनुवर्ती देखभाल के लिए CMHCs के साथ सहज एकीकरण हेतु टेली-मानस सेवाओं का और विस्तार।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'मनोदय' मिशन के लिए नोडल मंत्रालय: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW)।
- प्रमुख स्तंभ: जमीनी कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण, CMHCs, PSSGs, कलंक मुक्ति।
- लक्षित लाभार्थी: मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों वाले व्यक्ति, देखभालकर्ता और आम जनता।
- इसके साथ एकीकरण: मौजूदा प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल अवसंरचना और टेली-मानस पहल।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **सुलभ एवं न्यायसंगत देखभाल**: यह मिशन मानसिक स्वास्थ्य देखभाल पहुंच में महत्वपूर्ण अंतराल को संबोधित करता है, विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में, सेवाओं का विकेंद्रीकरण करके और उन्हें अधिक न्यायसंगत और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील बनाकर।
- **कलंक मुक्ति एवं जागरूकता**: समुदाय के ताने-बाने में मानसिक स्वास्थ्य को एकीकृत करके और जागरूकता अभियान चलाकर, मनोदय का उद्देश्य कलंक को दूर करना, मदद मांगने वाले व्यवहार को प्रोत्साहित करना और अधिक समझदार समाज को बढ़ावा देना है।
- **समग्र कल्याण एवं उत्पादकता**: सामुदायिक स्तर पर बेहतर मानसिक स्वास्थ्य परिणाम एक स्वस्थ और अधिक उत्पादक कार्यबल, मानसिक बीमारी के सामाजिक बोझ में कमी और समग्र मानव विकास संकेतकों में वृद्धि का कारण बनेंगे।
पेज 3📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासामाजिक मुद्दे
2. 'समावेशी खेल' नीति का अनावरण: दिव्यांग व्यक्तियों के लिए समावेशी खेल को बढ़ावा देना
चर्चा में क्यों? (Why in News)
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने युवा मामले और खेल मंत्रालय के सहयोग से आधिकारिक तौर पर 'समावेशी खेल' नीति का अनावरण किया है। इस ऐतिहासिक नीति का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों (PwDs) के लिए जमीनी स्तर से लेकर विशिष्ट स्तर तक सभी स्तरों पर खेल, शारीरिक गतिविधि और मनोरंजन में सार्थक रूप से भाग लेने के लिए एक सक्षम वातावरण बनाना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**सुलभ अवसंरचना मानक**: सभी नई खेल सुविधाओं के लिए सार्वभौमिक डिज़ाइन सिद्धांतों को अनिवार्य करना और मौजूदा सुविधाओं को दिव्यांग व्यक्तियों के लिए पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अनुकूलित करना।
- •**अनुकूली खेल विकास**: भारत के भीतर अनुकूली खेल उपकरण और सहायक उपकरणों के अनुसंधान, विकास और निर्माण को बढ़ावा देना और वित्त पोषण करना।
- •**जमीनी स्तर पर प्रतिभा पहचान**: दिव्यांग व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से संरचित प्रतिभा पहचान कार्यक्रमों की स्थापना, मौजूदा खेल अकादमियों और स्कूल पाठ्यक्रम के साथ एकीकृत।
- •**शिक्षा में समावेशन**: शारीरिक शिक्षा शिक्षकों के लिए संवेदीकरण प्रशिक्षण के साथ-साथ स्कूल और कॉलेज के शारीरिक शिक्षा कार्यक्रमों में समावेशी खेल गतिविधियों को शामिल करने को प्रोत्साहित करना।
- •**पैरा-एथलीटों के लिए प्रोत्साहन**: पैरा-एथलीटों के लिए बढ़ी हुई वित्तीय सहायता, छात्रवृत्ति और रोजगार के अवसर, उनकी उपलब्धियों को सामान्य एथलीटों के बराबर मान्यता देना।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'समावेशी खेल' नीति के लिए नोडल मंत्रालय: सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय और युवा मामले और खेल मंत्रालय।
- प्रमुख फोकस क्षेत्र: सुलभ अवसंरचना, अनुकूली खेल, दिव्यांग व्यक्तियों के लिए प्रतिभा पहचान।
- दिव्यांग व्यक्ति अधिकार अधिनियम (RPwD Act), 2016 के साथ संबंध।
- उद्देश्य: दिव्यांग व्यक्तियों की खेलों और मनोरंजन में सार्थक भागीदारी को बढ़ावा देना।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **सामाजिक समावेशन एवं पुनर्वास**: यह नीति दिव्यांग व्यक्तियों के सामाजिक समावेशन की आवश्यकता को सीधे संबोधित करती है, खेल को पुनर्वास के लिए एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में उपयोग करती है, आत्म-सम्मान को बढ़ावा देती है, रूढ़िवादिता को तोड़ती है और अधिक समावेशी समाज को बढ़ावा देती है।
- **स्वास्थ्य एवं कल्याण**: दिव्यांग व्यक्तियों के बीच शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा देना उनके समग्र स्वास्थ्य के लिए, जीवनशैली संबंधी बीमारियों से लड़ने और मानसिक कल्याण को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों पर बोझ कम होता है।
- **आर्थिक एवं मनोवैज्ञानिक लाभ**: खेलों में सफलता दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आर्थिक स्वतंत्रता और मनोवैज्ञानिक सशक्तिकरण के रास्ते खोल सकती है, रोल मॉडल बना सकती है और समावेशन की दिशा में व्यापक सामाजिक परिवर्तन को प्रेरित कर सकती है।
पेज 4📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासामाजिक मुद्दे
3. नारी-टेक मिशन का शुभारंभ: भारत के डिजिटल लैंगिक अंतर को पाटना
चर्चा में क्यों? (Why in News)
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सहयोग से 'महिला राष्ट्रीय डिजिटल समावेशन मिशन' (नारी-टेक) का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ किया है। इस महत्वाकांक्षी मिशन का उद्देश्य पूरे भारत में, विशेष रूप से ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में, व्याप्त डिजिटल लैंगिक अंतर को व्यापक रूप से संबोधित करना और उसे कम करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**बहुआयामी दृष्टिकोण**: नारी-टेक डिजिटल साक्षरता, किफायती उपकरणों तक पहुंच, सुरक्षित ऑनलाइन स्थान के निर्माण और महिलाओं के बीच डिजिटल उद्यमिता को बढ़ावा देने सहित एक समग्र रणनीति अपनाता है।
- •**'डिजी-सखी' कार्यक्रम**: जमीनी स्तर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए महिला डिजिटल साक्षरता प्रशिक्षकों, 'डिजी-सखियों' के एक समर्पित कैडर का परिचय।
- •**सब्सिडी पर उपकरण उपलब्धता**: महिला प्रधान परिवारों के लिए डिजिटल उपकरण प्राप्त करने हेतु प्रोत्साहन और सब्सिडी का प्रावधान, साथ ही किफायती इंटरनेट कनेक्टिविटी समाधान।
- •**महिला डिजिटल संसाधन केंद्र (WDRCs)**: प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण और डिजिटल सेवाओं के लिए समर्थन तक साझा पहुंच प्रदान करने हेतु प्रत्येक ब्लॉक में समुदाय-आधारित WDRCs की स्थापना।
- •**साइबर सुरक्षा और शिकायत निवारण**: प्रशिक्षण कार्यक्रमों में मजबूत साइबर सुरक्षा मॉड्यूल का एकीकरण और महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन उत्पीड़न की रिपोर्टिंग और निवारण के लिए एक समर्पित पोर्टल।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- नारी-टेक के लिए नोडल मंत्रालय: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MWCD) और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)।
- प्रमुख घटक: जमीनी स्तर पर डिजिटल साक्षरता के लिए 'डिजी-सखी' प्रशिक्षक।
- उद्देश्य: डिजिटल लैंगिक अंतर को कम करना, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए डिजिटल समावेशन को बढ़ाना।
- परिचालन तंत्र: ब्लॉक स्तर पर समुदाय-आधारित महिला डिजिटल संसाधन केंद्र (WDRCs)।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **सशक्तिकरण एवं समानता**: डिजिटल समावेशन सच्ची लैंगिक समानता प्राप्त करने, महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, वित्तीय सेवाओं और बाजार के अवसरों तक पहुंच बनाने में सक्षम बनाने, जिससे उनके सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है।
- **प्रणालीगत बाधाओं को संबोधित करना**: यह मिशन पहुंच की कमी, सामर्थ्य, डिजिटल साक्षरता और पितृसत्तात्मक मानदंडों जैसी प्रणालीगत बाधाओं का सीधे सामना करता है जो महिलाओं की प्रौद्योगिकी के साथ भागीदारी को सीमित करते हैं, जिससे डिजिटल समानता को बढ़ावा मिलता है।
- **आर्थिक विकास एवं शासन**: महिलाओं की बढ़ी हुई डिजिटल भागीदारी भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है, अंतिम मील तक सेवा वितरण में सुधार कर सकती है और शासन में अधिक नागरिक भागीदारी और पारदर्शिता को सुगम बना सकती है।
पेज 5📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासरकारी योजनाएं एवं नीतियां
4. जन समाधान मंच (JSM): एकीकृत जन शिकायत निवारण और नागरिक प्रतिक्रिया मंच
चर्चा में क्यों? (Why in News)
‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय ने आज 'जन समाधान मंच (JSM)' का शुभारंभ किया, जो सरकार के सभी स्तरों पर व्यापक जन शिकायत निवारण और सक्रिय नागरिक प्रतिक्रिया के लिए डिज़ाइन किया गया एक एकीकृत राष्ट्रीय डिजिटल मंच है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**एकीकृत डिजिटल प्रवेश द्वार:** JSM नागरिकों के लिए किसी भी सरकारी सेवा पर शिकायत दर्ज करने, उनकी स्थिति को ट्रैक करने और प्रतिक्रिया प्रदान करने के लिए एक एकल-खिड़की डिजिटल पोर्टल के रूप में कार्य करता है, जिसमें विभिन्न मौजूदा राज्य और केंद्रीय शिकायत तंत्रों को एकीकृत किया गया है।
- •**AI-संचालित समाधान:** शिकायतों के बुद्धिमान मार्ग निर्धारण, प्रारंभिक विश्लेषण, बार-बार आने वाले मुद्दों की पहचान और त्वरित समाधान के लिए उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एल्गोरिदम का उपयोग करता है, जिससे दक्षता में सुधार होता है और मानवीय हस्तक्षेप कम होता है।
- •**सक्रिय नागरिक जुड़ाव:** नागरिकों के लिए नीतिगत सुधारों के लिए सुझाव देने, सरकारी सेवाओं को रेट करने और सार्वजनिक परामर्शों में भाग लेने की सुविधाएँ शामिल करता है, जिससे दोतरफा संचार चैनल को बढ़ावा मिलता है।
- •**वास्तविक समय की निगरानी और डेटा एनालिटिक्स:** सरकारी अधिकारियों को शिकायत प्रवृत्तियों, विभाग-वार प्रदर्शन की निगरानी करने और प्रणालीगत मुद्दों की पहचान करने के लिए वास्तविक समय के डैशबोर्ड प्रदान करता है। मजबूत डेटा एनालिटिक्स नीतिगत हस्तक्षेपों और प्रशासनिक सुधारों को सूचित करेगा।
- •**अंतरसंचालनीयता और डेटा मानक:** मानकीकृत API और डेटा प्रोटोकॉल के माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों और एजेंसियों के बीच निर्बाध डेटा विनिमय और अंतरसंचालनीयता सुनिश्चित करता है, जिससे सहयोगात्मक शासन में वृद्धि होती है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- **नोडल मंत्रालय:** कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय।
- **प्रमुख प्रौद्योगिकी:** शिकायत मार्ग निर्धारण और विश्लेषण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)।
- **उद्देश्य:** शासन में 'जीवन की सुगमता' और पारदर्शिता बढ़ाना।
- **कवरेज:** अखिल भारतीय कवरेज का लक्ष्य रखता है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों की सेवाएं एकीकृत होंगी।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **शासन और नागरिक-केंद्रितता का परिवर्तन:** JSM नागरिक-केंद्रित शासन की दिशा में एक प्रतिमान बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है, जो प्रतिक्रियात्मक शिकायत निवारण से सक्रिय जुड़ाव और डेटा-संचालित नीति निर्माण की ओर बढ़ता है। यह भ्रष्टाचार को काफी हद तक कम कर सकता है और सरकार में जनता के विश्वास में सुधार कर सकता है।
- **चुनौतियाँ और नैतिक विचार:** प्रमुख चुनौतियों में समाज के सभी वर्गों के लिए डिजिटल साक्षरता और पहुंच सुनिश्चित करना, डेटा गोपनीयता और सुरक्षा की सुरक्षा करना, और प्रतिक्रिया तंत्र के दुरुपयोग को रोकना शामिल है। सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने के लिए नैतिक AI परिनियोजन, एल्गोरिदम में पारदर्शिता और मजबूत ऑडिट ट्रेल आवश्यक हैं।
पेज 6📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासरकारी योजनाएं एवं नीतियां
5. राष्ट्रीय तटीय क्षेत्र प्रबंधन नीति 2026: सुदृढ़ता और आजीविका में वृद्धि
चर्चा में क्यों? (Why in News)
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने आज 'राष्ट्रीय तटीय क्षेत्र प्रबंधन नीति 2026' जारी की, जो भारत की विशाल तटरेखा के समग्र और एकीकृत प्रबंधन के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण अद्यतन है। नई नीति तटीय समुदायों के लिए पारिस्थितिक संरक्षण, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और सतत आर्थिक विकास को संतुलित करना चाहती है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**एकीकृत तटीय प्रबंधन:** एक एकीकृत तटीय क्षेत्र प्रबंधन (ICZM) दृष्टिकोण अपनाता है, जो विभिन्न हितधारकों और सरकारी विभागों में समन्वित योजना और कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्रीय सीमाओं को पार करता है।
- •**जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और सुदृढ़ता:** प्रकृति-आधारित समाधानों (जैसे मैंग्रोव बहाली, प्रवाल भित्ति संरक्षण), चरम मौसम की घटनाओं के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों और जलवायु-प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के विकास के माध्यम से तटीय सुदृढ़ता को मजबूत करने पर केंद्रित है।
- •**सतत नीली अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना:** मत्स्य पालन, जलीय कृषि, तटीय पर्यटन और बंदरगाह विकास में स्थायी प्रथाओं को प्रोत्साहित करता है, आजीविका के अवसरों और आर्थिक विकास को बढ़ावा देते हुए पर्यावरणीय अखंडता सुनिश्चित करता है।
- •**जैव विविधता संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण:** महत्वपूर्ण तटीय पारिस्थितिक तंत्रों (मैंग्रोव, प्रवाल भित्तियों, ज्वारनदमुख) के संरक्षण पर जोर देता है और समुद्री प्लास्टिक प्रदूषण नियंत्रण, अपशिष्ट जल उपचार और औद्योगिक निर्वहन प्रबंधन के लिए कड़े उपायों को अनिवार्य करता है।
- •**सामुदायिक भागीदारी और सशक्तिकरण:** निर्णय लेने की प्रक्रियाओं, संसाधन प्रबंधन और लाभ साझा करने में स्थानीय समुदायों, विशेष रूप से पारंपरिक मछली पकड़ने वाले समुदायों की सक्रिय भागीदारी के लिए तंत्र स्थापित करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- **नोडल मंत्रालय:** पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC)।
- **कानूनी आधार:** पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 और उसके बाद के तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) अधिसूचनाओं के ढांचे पर आधारित।
- **संबंधित अवधारणाएँ:** नीली अर्थव्यवस्था, जलवायु सुदृढ़ता, प्रकृति-आधारित समाधान, एकीकृत तटीय क्षेत्र प्रबंधन (ICZM)।
- **वित्त पोषण:** अंतर्राष्ट्रीय जलवायु निधियों (जैसे ग्रीन क्लाइमेट फंड) और राष्ट्रीय योजनाओं के साथ संभावित सहयोग।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **सतत विकास के लिए महत्व:** यह नीति सतत विकास लक्ष्यों (SDGs), विशेष रूप से SDG 14 (पानी के नीचे जीवन) और SDG 13 (जलवायु कार्रवाई) को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है, जो कमजोर तटीय क्षेत्रों में आर्थिक विकास के साथ पर्यावरणीय संरक्षण को संतुलित करती है।
- **कार्यान्वयन में चुनौतियाँ:** कार्यान्वयन को तटीय संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धी मांगों, अंतर-राज्य समन्वय के मुद्दों, नियमों के प्रवर्तन और स्थानीय स्तर पर पर्याप्त वित्तीय और तकनीकी क्षमता सुनिश्चित करने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसकी सफलता के लिए जन जागरूकता और सहभागी शासन महत्वपूर्ण हैं।
पेज 7📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासरकारी योजनाएं एवं नीतियां
6. राष्ट्रीय शिक्षक अभिवर्धन मिशन (RSAM): नव-युग की शिक्षाशास्त्र हेतु शिक्षकों का सशक्तिकरण
चर्चा में क्यों? (Why in News)
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज 'राष्ट्रीय शिक्षक अभिवर्धन मिशन (RSAM)' के शुभारंभ को मंजूरी दे दी है। यह एक व्यापक राष्ट्रीय पहल है जिसका उद्देश्य शिक्षक शिक्षा और निरंतर व्यावसायिक विकास में परिवर्तन लाना है ताकि इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के लक्ष्यों के साथ संरेखित किया जा सके और शिक्षकों को 21वीं सदी की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार किया जा सके।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**समग्र शिक्षक प्रशिक्षण ढाँचा:** RSAM सेवा-पूर्व और सेवाकालीन शिक्षक प्रशिक्षण के लिए एक नया राष्ट्रीय ढाँचा स्थापित करता है, जो योग्यता-आधारित शिक्षा, डिजिटल शिक्षाशास्त्र, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एकीकरण और सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा पर केंद्रित है।
- •**डिजिटल शिक्षाशास्त्र और AI एकीकरण:** शिक्षकों को व्यक्तिगत निर्देश और अनुकूली शिक्षण वातावरण के लिए डिजिटल उपकरणों, ऑनलाइन संसाधनों और AI-संचालित शिक्षण विश्लेषण का लाभ उठाने के कौशल से लैस करने पर जोर।
- •**निरंतर व्यावसायिक विकास (CPD):** सभी शिक्षकों के लिए SWAYAM और DIKSHA 2.0 जैसे प्लेटफार्मों का उपयोग करके संरचित और व्यक्तिगत CPD मार्गों को अनिवार्य करता है, जिसमें उभरती प्रौद्योगिकियों और अंतःविषय दृष्टिकोणों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- •**विविध संदर्भों के लिए विशेष प्रशिक्षण:** ग्रामीण, आदिवासी और वंचित क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करने वाले विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल के प्रावधान, जिसमें बहुभाषी शिक्षा और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील शिक्षण शामिल हैं।
- •**शिक्षक विनिमय और नवाचार कोष:** राज्यों के बीच शिक्षक विनिमय कार्यक्रमों की शुरुआत और अनुसंधान तथा नवीन शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित 'शिक्षक नवाचार निधि' का प्रावधान।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- **नोडल मंत्रालय:** शिक्षा मंत्रालय।
- **संरेखण:** 'शिक्षक' से संबंधित राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अध्याय 5 के साथ सीधे संरेखित।
- **उपयोग किए जाने वाले प्रमुख प्लेटफ़ॉर्म:** ऑनलाइन मॉड्यूल और सामग्री वितरण के लिए SWAYAM, DIKSHA 2.0।
- **वित्त पोषण तंत्र:** केंद्र प्रायोजित योजना, जिसमें राज्य एक निर्दिष्ट हिस्सा योगदान करते हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **मानव पूंजी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में वृद्धि:** RSAM भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षक एक ज्ञानवान कार्यबल के निर्माण और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए मौलिक हैं। यह 21वीं सदी के कौशल के लिए शिक्षक तैयारी में मौजूदा अंतरालों को संबोधित करता है।
- **कार्यान्वयन चुनौतियाँ और आगे की राह:** प्रभावी कार्यान्वयन के लिए डिजिटल अवसंरचना असमानताओं को दूर करना, प्रशिक्षण मॉड्यूल के नियमित अद्यतन सुनिश्चित करना, शिक्षकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना और शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग और नागरिक समाज के बीच सहयोगात्मक पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना आवश्यक है। नए शिक्षाशास्त्रीय दृष्टिकोणों के प्रति प्रतिरोध पर काबू पाना भी महत्वपूर्ण होगा।
पेज 8📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासरकारी योजनाएं एवं नीतियां
7. वरिष्ठ नागरिक डिजिटल सशक्तिकरण और आरोग्य (वज्र) पहल - पायलट चरण शुरू
चर्चा में क्यों? (Why in News)
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सहयोग से, आज देश भर के 50 नामित जिलों में 'वरिष्ठ नागरिक डिजिटल सशक्तिकरण और आरोग्य (वज्र) पहल' के पायलट चरण का शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के बीच डिजिटल विभाजन को पाटना और प्रौद्योगिकी के माध्यम से सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**दोहरा ध्यान:** यह पहल वृद्ध आबादी की अनूठी जरूरतों को पहचानते हुए, डिजिटल साक्षरता और सशक्तिकरण को व्यापक स्वास्थ्य सेवा पहुंच के साथ जोड़ती है।
- •**टेली-जेरियाट्रिक देखभाल:** दूरस्थ चिकित्सा परामर्श, पुरानी बीमारी प्रबंधन और विशेष जेरियाट्रिक देखभाल सेवाएँ प्रदान करने के लिए टेलीमेडिसिन प्लेटफार्मों का एकीकरण, विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में।
- •**डिजिटल साक्षरता शिविर:** वरिष्ठ नागरिकों को बुनियादी डिजिटल कौशल, सुरक्षित इंटरनेट उपयोग और ऑनलाइन सरकारी सेवाओं तक पहुँचने के लिए प्रशिक्षित करने हेतु चयनित जिलों में समर्पित 'डिजिटल पाठशालाओं' (डिजिटल स्कूलों) की स्थापना।
- •**स्वास्थ्य और कल्याण पोर्टल:** वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक पहुँचने, नियुक्तियाँ बुक करने, स्वास्थ्य सलाह प्राप्त करने और सहायता समूहों से जुड़ने के लिए एक उपयोगकर्ता के अनुकूल पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन का विकास।
- •**मानसिक स्वास्थ्य सहायता:** विशेष रूप से बुजुर्गों द्वारा सामना की जाने वाली मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान करने के लिए डिज़ाइन की गई टेली-परामर्श सेवाएँ और जागरूकता कार्यक्रमों को शामिल करना।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- वज्र पहल किसके द्वारा शुरू की गई: सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सहयोग से।
- पायलट चरण 50 जिलों में शुरू किया गया।
- दोहरे उद्देश्य: वरिष्ठ नागरिकों के लिए डिजिटल सशक्तिकरण और स्वास्थ्य सेवा पहुंच।
- मुख्य घटकों में टेली-जेरियाट्रिक देखभाल और डिजिटल साक्षरता शिविर शामिल हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **बढ़ती उम्र की आबादी की चुनौतियों का समाधान:** चर्चा करें कि वज्र पहल भारत की तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी द्वारा उत्पन्न सामाजिक-आर्थिक और स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए एक व्यापक नीतिगत प्रतिक्रिया का प्रतिनिधित्व कैसे करती है, जिसमें स्वतंत्र जीवन और बेहतर कल्याण के लिए एक उपकरण के रूप में डिजिटल समावेशन पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- **अंतर-मंत्रालयी अभिसरण और सामाजिक भलाई के लिए प्रौद्योगिकी:** सामाजिक न्याय और स्वास्थ्य मंत्रालयों के बीच अंतर-मंत्रालयी सहयोग के महत्व, और समाज के कमजोर वर्गों को सुलभ, न्यायसंगत और एकीकृत सामाजिक और स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने में प्रौद्योगिकी की भूमिका का विश्लेषण करें।
पेज 9📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासरकारी योजनाएं एवं नीतियां
8. प्रज्ञा कौशल विकास योजना ने भविष्य के कार्यबल के लिए 'एआई और रोबोटिक्स कौशल ट्रैक' का शुभारंभ किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने आज अपनी प्रमुख प्रज्ञा कौशल विकास योजना के तहत एक समर्पित 'एआई और रोबोटिक्स कौशल ट्रैक' के शुभारंभ की घोषणा की। इस रणनीतिक पहल का उद्देश्य अगले दो वर्षों में प्रमुख प्रौद्योगिकी फर्मों और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से 1 मिलियन से अधिक युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) में उन्नत कौशल से लैस करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**लक्षित कौशल विकास:** मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग, रोबोटिक प्रोसेस ऑटोमेशन, औद्योगिक रोबोटिक्स और IoT सेंसर एकीकरण जैसी उच्च-मांग वाली उभरती प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करना।
- •**उद्योग-अकादमिक सहयोग:** उद्योग-प्रासंगिक पाठ्यक्रम डिजाइन करने, अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा प्रदान करने और इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करने के लिए प्रमुख तकनीकी कंपनियों और आईआईटी/एनआईटी के साथ साझेदारी।
- •**प्रमाणन और प्लेसमेंट:** पाठ्यक्रम विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्रों में समाप्त होंगे, जिसमें संबंधित उद्योगों और स्टार्ट-अप में सुविधाजनक प्लेसमेंट पर विशेष जोर दिया जाएगा।
- •**ट्रेन-द-ट्रेनर कार्यक्रम:** एआई और रोबोटिक्स में मौजूदा व्यावसायिक प्रशिक्षकों को उन्नत करने के लिए एक समानांतर कार्यक्रम, योग्य प्रशिक्षकों का एक स्थायी पूल सुनिश्चित करना।
- •**पहुंच और समावेशिता:** व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए दूरस्थ शिक्षा मॉड्यूल और सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूहों के लिए छात्रवृत्ति हेतु विशेष प्रावधान।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- प्रज्ञा कौशल विकास योजना कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) के अधीन है।
- नया 'एआई और रोबोटिक्स कौशल ट्रैक' 1 मिलियन से अधिक युवाओं को लक्षित करता है।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) कौशल पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- इसमें तकनीकी फर्मों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग शामिल है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **कार्य का भविष्य और जनसांख्यिकीय लाभांश:** मूल्यांकन करें कि यह पहल वैश्विक नौकरी बाजार की बढ़ती मांगों को रणनीतिक रूप से कैसे संबोधित करती है, तकनीकी disruptions के खिलाफ अपने कार्यबल को भविष्य-सुरक्षित करके और राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाकर भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाती है।
- **कौशल पारिस्थितिकी तंत्र और उद्योग-अकादमिक जुड़ाव:** कौशल अंतर को पाटने, नवाचार को बढ़ावा देने और तकनीकी परिवर्तन की तीव्र गति के प्रति उत्तरदायी एक गतिशील कौशल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में मजबूत उद्योग-अकादमिक सहयोग के महत्व का विश्लेषण करें।
पेज 10📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासरकारी योजनाएं एवं नीतियां
9. स्थायी शहरी संसाधन प्रबंधन (सुरम) मिशन - 'मॉडल सर्कुलर सिटीज़' हेतु चरण II का शुभारंभ
चर्चा में क्यों? (Why in News)
केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) ने आज स्थायी शहरी संसाधन प्रबंधन (सुरम) मिशन के दूसरे चरण का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ किया। इस चरण में भारत भर के 100 शहरों को 'मॉडल सर्कुलर सिटीज़' के रूप में नामित किया गया है, जिसका उद्देश्य शहरी विकास और शासन में चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों को एकीकृत करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**'मॉडल सर्कुलर सिटीज़' का निर्धारण:** अपशिष्ट न्यूनीकरण, संसाधन पुनर्चक्रण और स्थायी शहरी नियोजन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के आधार पर 100 शहरों का चयन किया गया।
- •**केंद्रित क्षेत्र:** अपशिष्ट से धन की पहल, व्यापक जल पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग, हरित भवन संहिता और सामग्री को बढ़ावा देने, और शहरी जैव विविधता संरक्षण पर जोर।
- •**तकनीकी एकीकरण:** इन शहरों के भीतर कुशल संसाधन ट्रैकिंग और प्रबंधन के लिए उन्नत डेटा एनालिटिक्स और IoT-सक्षम निगरानी प्रणालियों की तैनाती।
- •**क्षमता निर्माण और जन जागरूकता:** चक्रीय अर्थव्यवस्था प्रथाओं में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए शहरी स्थानीय निकायों के लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम और जन जागरूकता अभियान।
- •**वित्तीय प्रोत्साहन:** संसाधन दक्षता और अपशिष्ट प्रबंधन में मापने योग्य लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए शहरों को प्रोत्साहित करने हेतु प्रदर्शन-आधारित अनुदान और तकनीकी सहायता का प्रावधान।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- सुरम मिशन किसके द्वारा शुरू किया गया: आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA)।
- चरण II में 100 शहरों को 'मॉडल सर्कुलर सिटीज़' के रूप में लक्षित किया गया है।
- मुख्य सिद्धांत: शहरी विकास में चक्रीय अर्थव्यवस्था का एकीकरण।
- मुख्य घटकों में अपशिष्ट से धन, जल पुनर्चक्रण, हरित भवन संहिता शामिल हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **शहरी स्थिरता और संसाधन सुरक्षा:** चर्चा करें कि कैसे सुरम मिशन का दूसरा चरण शहरी क्षेत्रों में रैखिक से चक्रीय आर्थिक मॉडल में प्रतिमान बदलाव को बढ़ावा देकर तेजी से शहरीकरण, संसाधन की कमी और पर्यावरणीय क्षरण की गंभीर चुनौतियों का समाधान करता है।
- **शासन और नागरिक भागीदारी:** मिशन द्वारा अपनाए गए बहु-हितधारक दृष्टिकोण का विश्लेषण करें, जिसमें चक्रीय अर्थव्यवस्था की पहलों के सफल कार्यान्वयन और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने में शहरी स्थानीय निकायों, निजी क्षेत्र की भागीदारी और सक्रिय नागरिक जुड़ाव की भूमिका पर जोर दिया गया है।
पेज 11📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासामाजिक मुद्दे
10. "सहयोग-नगर": शहरी प्रवासी श्रमिकों के कल्याण और एकीकरण के लिए संशोधित राष्ट्रीय नीति का शुभारंभ
चर्चा में क्यों? (Why in News)
बढ़ती शहरी प्रवासी श्रमिक आबादी के सामने आने वाली लगातार चुनौतियों का समाधान करते हुए, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने, श्रम और रोजगार मंत्रालय के सहयोग से, आज "सहयोग-नगर" का अनावरण किया, जो शहरी प्रवासी श्रमिकों के कल्याण और एकीकरण के लिए एक संशोधित राष्ट्रीय नीति है। इस नीति का उद्देश्य आंतरिक प्रवासियों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा, किफायती आवास और सार्वजनिक सेवाओं तक समान पहुंच प्रदान करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •सामाजिक सुरक्षा लाभों के लिए 'एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड' के बराबर सार्वभौमिकरण, स्वास्थ्य बीमा (जैसे, आयुष्मान भारत), भविष्य निधि (EPFO) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं की अंतर-राज्य पोर्टेबिलिटी की अनुमति।
- •किफायती किराये के आवास परिसरों (ARHCs) योजना का विस्तार और प्रोत्साहन तथा औद्योगिक केंद्रों के पास छात्रावास शैली के आवासों को बढ़ावा देना।
- •प्रवासी श्रमिकों के लिए पूर्व शिक्षण को पहचानने और शहरी रोजगार मांगों के अनुरूप कौशल उन्नयन कार्यक्रमों को सुविधाजनक बनाने के लिए एक राष्ट्रीय रजिस्ट्री का निर्माण।
- •उनके मूल पते की परवाह किए बिना, बच्चों के लिए स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कानूनी सहायता और वित्तीय सेवाओं तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करना।
- •शिकायत निवारण, सांस्कृतिक आत्मसात और सामुदायिक निर्माण के लिए जिला-स्तरीय 'प्रवासी एकीकरण परिषदों' की स्थापना।
- •प्रवासन पैटर्न को ट्रैक करने और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को सूचित करने के लिए एक मजबूत राष्ट्रीय प्रवासी सूचना प्रणाली (NMIS) का विकास।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- नोडल मंत्रालय: MoHUA, MoLE।
- नीति का नाम: "सहयोग-नगर"।
- संबंधित योजनाएँ: ARHCs, आयुष्मान भारत, EPFO।
- संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 19 (आवागमन की स्वतंत्रता), DPSP (सामाजिक न्याय)।
- मुख्य अवधारणाएँ: आंतरिक प्रवासन, पोर्टेबल लाभ, अनौपचारिक अर्थव्यवस्था।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **शहरीकरण और सतत विकास लक्ष्य (SDGs)**: सीधे SDG 1 (गरीबी नहीं), SDG 3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण), SDG 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा), SDG 8 (सभ्य कार्य), SDG 11 (स्थायी शहर) में योगदान देता है।
- **सामाजिक बहिष्कार और असमानता**: प्रवासी श्रमिकों की भेद्यता को संबोधित करता है, उनके शोषण को कम करता है और उन्हें शहरी ताने-बाने में एकीकृत करता है।
- **आर्थिक विकास और श्रम बाजार**: कार्यबल के एक महत्वपूर्ण खंड को औपचारिक बनाता है, उत्पादकता बढ़ाता है और शहरी उद्योगों के लिए एक स्थिर श्रम आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
- **संघवाद और अंतर-राज्य समन्वय**: पोर्टेबल लाभों और कल्याणकारी उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता है।
- **आपदा तैयारी**: पिछली आपदाओं (जैसे, COVID-19 लॉकडाउन) से मिले सबक प्रवासी श्रमिकों के लिए एक लचीले नीतिगत ढांचे की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
पेज 12📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासामाजिक मुद्दे
11. सरकार ने 'डिजिटल स्वास्थ्य: डिजिटल युग में कल्याण हेतु राष्ट्रीय रणनीति' का शुभारंभ किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
डिजिटल प्रौद्योगिकियों के मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक व्यवहार पर पड़ने वाले व्यापक प्रभाव को पहचानते हुए, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सहयोग से, आज 'डिजिटल स्वास्थ्य: डिजिटल युग में कल्याण हेतु राष्ट्रीय रणनीति' का अनावरण किया। इस रणनीति का उद्देश्य स्वस्थ डिजिटल आदतों को बढ़ावा देना और विशेष रूप से युवाओं के बीच ऑनलाइन लत की बढ़ती चुनौती का मुकाबला करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •डिजिटल साक्षरता, ऑनलाइन सामग्री के महत्वपूर्ण मूल्यांकन और संतुलित स्क्रीन समय को बढ़ावा देने पर केंद्रित राष्ट्रव्यापी अभियान।
- •डिजिटल लत के लिए विशिष्ट परामर्श सेवाओं को मौजूदा सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना में एकीकृत करना और समर्पित हेल्पलाइन शुरू करना।
- •डिजिटल प्लेटफॉर्म को जिम्मेदार उपयोग, समय सीमा और माता-पिता के नियंत्रण के विकल्पों को बढ़ावा देने वाली सुविधाओं को लागू करने के लिए प्रोत्साहित करना।
- •डिजिटल उपयोग के रुझान, ऑनलाइन लत के प्रसार और इसके सामाजिक-मनोवैज्ञानिक प्रभावों की निगरानी के लिए एक राष्ट्रीय वेधशाला की स्थापना।
- •स्कूल के पाठ्यक्रम में डिजिटल नागरिकता और कल्याण पर मॉड्यूल का परिचय।
- •नीति कार्यान्वयन के लिए तकनीकी कंपनियों, शैक्षणिक संस्थानों, माता-पिता और नागरिक समाज संगठनों के साथ सहयोग।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- नोडल मंत्रालय: MeitY, MoHFW।
- मुख्य शर्तें: डिजिटल कल्याण, ऑनलाइन लत, स्क्रीन टाइम, डिजिटल नागरिकता।
- संबंधित अधिनियम: सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (संभावित संशोधन/नियम)।
- वैश्विक पहल: 'गेमिंग विकार' को WHO की मान्यता।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **युवा विकास और मानसिक स्वास्थ्य**: युवा पीढ़ियों के संज्ञानात्मक विकास, शैक्षणिक प्रदर्शन और सामाजिक कौशल को प्रभावित करने वाली बढ़ती सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता को संबोधित करता है।
- **नैतिक एआई और प्लेटफॉर्म जवाबदेही**: डिजिटल प्लेटफॉर्म के डिजाइन सिद्धांतों और उपयोगकर्ता कल्याण में उनकी जिम्मेदारी के बारे में सवाल उठाता है।
- **डिजिटल विभाजन और समानता**: कल्याण को बढ़ावा देते हुए, समाज के सभी वर्गों में समान पहुंच और डिजिटल साक्षरता सुनिश्चित करता है, बिना किसी नए प्रकार के बहिष्करण के।
- **सामाजिक-आर्थिक प्रभाव**: उत्पादकता, पारिवारिक गतिशीलता और सामाजिक अलगाव की संभावना पर प्रभाव।
- **नियामक चुनौतियाँ**: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, नवाचार और सार्वजनिक स्वास्थ्य को संतुलित करने के लिए सावधानीपूर्वक नियामक दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
पेज 13📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासामाजिक मुद्दे
12. देखभाल अर्थव्यवस्था और अवैतनिक देखभालकर्ताओं के लिए सामाजिक सुरक्षा हेतु राष्ट्रीय ढाँचा अनावरण
चर्चा में क्यों? (Why in News)
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने नीति आयोग के सहयोग से आज 'देखभाल अर्थव्यवस्था और अवैतनिक देखभालकर्ताओं के लिए सामाजिक सुरक्षा हेतु राष्ट्रीय ढाँचा' का अनावरण किया। यह ऐतिहासिक पहल मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा किए जाने वाले अवैतनिक देखभाल कार्य को, जो राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण घटक है, पहचानने, कम करने, पुनर्वितरित करने और प्रतिनिधित्व करने के उद्देश्य से है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •अवैतनिक देखभाल कार्य (जैसे, बाल देखभाल, बुजुर्गों की देखभाल, घरेलू कार्य) को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में आधिकारिक मान्यता।
- •देखभालकर्ताओं के कौशल विकास और उन्नयन के लिए कार्यक्रम, देखभाल क्षेत्र में औपचारिक रोजगार में उनके प्रवेश को सुगम बनाना।
- •औपचारिक देखभाल भूमिकाओं में परिवर्तित होने वाले पात्र अवैतनिक देखभालकर्ताओं को बुनियादी सामाजिक सुरक्षा लाभ (जैसे, स्वास्थ्य बीमा, भविष्य निधि लिंकेज) प्रदान करने के लिए पायलट योजनाओं का शुभारंभ।
- •जागरूकता अभियानों और नीतिगत प्रोत्साहनों के माध्यम से साझा माता-पिता की जिम्मेदारी और देखभाल कार्य में पुरुषों की भागीदारी को बढ़ावा देना।
- •व्यक्तिगत देखभालकर्ताओं पर बोझ को कम करने के लिए बाल देखभाल सुविधाओं, बुजुर्गों की देखभाल गृहों और सामुदायिक सहायता सेवाओं में सार्वजनिक निवेश में वृद्धि।
- •देखभाल कार्य के आर्थिक मूल्य का निर्धारण करने और नीति को सूचित करने के लिए एक मजबूत डेटा संग्रह तंत्र की स्थापना।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- "देखभाल अर्थव्यवस्था": परिभाषा और घटक।
- नोडल एजेंसियां: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, नीति आयोग।
- संबंधित अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय: ILO अभिसमय 189 (घरेलू कामगार), संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य 5 (लैंगिक समानता)।
- "4Rs" (पहचानना, कम करना, पुनर्वितरित करना, प्रतिनिधित्व करना) की अवधारणा।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण**: संरचनात्मक असमानताओं को दूर करता है, महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी में सुधार करता है और आर्थिक स्वायत्तता को बढ़ाता है।
- **जनसांख्यिकीय लाभांश और बढ़ती जनसंख्या**: बढ़ती उम्र की आबादी और दोहरी आय वाले परिवारों के कारण देखभाल सेवाओं की बढ़ती मांग के लिए रणनीतिक रूप से तैयारी करता है।
- **अनौपचारिक क्षेत्र और सामाजिक सुरक्षा**: बड़े पैमाने पर अनौपचारिक और अपरिचित कार्यबल को सामाजिक सुरक्षा का विस्तार करता है, समावेशी विकास में योगदान देता है।
- **आर्थिक विकास**: मानवीय क्षमता को खोलता है, खपत को बढ़ावा देता है और औपचारिक देखभाल क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर पैदा करता है।
- **नीतिगत निहितार्थ**: सफल कार्यान्वयन और बजट के लिए अंतर-मंत्रालयी समन्वय (स्वास्थ्य, श्रम, वित्त) की आवश्यकता।
पेज 14📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासरकारी योजनाएं एवं नीतियां
13. भारत ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत इलेक्ट्रोलाइज़र विनिर्माण के लिए सरकार ने नए पीएलआई ट्रेंच की घोषणा की
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारत को ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के वैश्विक केंद्र के रूप में मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने आज इलेक्ट्रोलाइज़र के स्वदेशी विनिर्माण के लिए विशेष रूप से लक्षित उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना के एक नए ट्रेंच की घोषणा की। इस नए प्रोत्साहन का उद्देश्य उन्नत इलेक्ट्रोलाइज़र प्रौद्योगिकियों के लिए घरेलू क्षमता निर्माण में तेजी लाना है, जो ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए महत्वपूर्ण है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**बढ़ी हुई वित्तीय परिव्यय:** नए ट्रेंच में अतिरिक्त ₹8,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिससे इलेक्ट्रोलाइज़र विनिर्माण के लिए कुल पीएलआई परिव्यय पाँच वर्षों में ₹18,000 करोड़ हो गया है, जो सरकार की बढ़ी हुई प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- •**उन्नत प्रौद्योगिकियों पर ध्यान:** प्रोत्साहन विशेष रूप से प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (PEM), एनियन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (AEM), और सॉलिड ऑक्साइड इलेक्ट्रोलाइज़र सेल (SOEC) प्रौद्योगिकियों जैसे उन्नत इलेक्ट्रोलाइज़र प्रकारों के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जो उच्च दक्षता और कम परिचालन लागत प्रदान करते हैं।
- •**घरेलू मूल्यवर्धन:** यह योजना घटकों की स्थानीय खरीद को प्रोत्साहित करने, एक स्वदेशी आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा देने और वैश्विक आपूर्ति झटकों के प्रति भेद्यता को कम करने के लिए सख्त घरेलू मूल्यवर्धन मानदंडों को अनिवार्य करती है।
- •**अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर जोर:** प्रोत्साहन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा निर्माताओं द्वारा अनुसंधान एवं विकास निवेश से जुड़ा है, जो निरंतर नवाचार, बौद्धिक संपदा निर्माण और तकनीकी आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करता है।
- •**लक्षित क्षमता निर्माण:** इसका लक्ष्य 2030 तक 10 GW/वर्ष की संचयी घरेलू इलेक्ट्रोलाइज़र विनिर्माण क्षमता प्राप्त करना है, जो मिशन के समग्र ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन लक्ष्यों में महत्वपूर्ण योगदान देगा और भारत को इलेक्ट्रोलाइज़र का निर्यातक बनाएगा।
- •**रोजगार सृजन और आर्थिक विकास:** ग्रीन हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े विनिर्माण, अनुसंधान एवं विकास और सेवा क्षेत्रों में पर्याप्त प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- **मिशन का नाम:** भारत ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (जनवरी 2023 में लॉन्च)।
- **नोडल मंत्रालय:** नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE)।
- **पीएलआई योजना:** उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन योजना, मिशन के रणनीतिक हस्तक्षेपों का एक प्रमुख घटक।
- **इलेक्ट्रोलाइज़र प्रौद्योगिकियां:** PEM (प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन), AEM (एनियन एक्सचेंज मेम्ब्रेन), SOEC (सॉलिड ऑक्साइड इलेक्ट्रोलाइज़र सेल)।
- **लक्ष्य:** 2030 तक सालाना 5 एमएमटी (मिलियन मीट्रिक टन) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता प्राप्त करना, और 2030 तक कम से कम 10 GW स्वदेशी इलेक्ट्रोलाइज़र विनिर्माण क्षमता।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **ऊर्जा सुरक्षा और डीकार्बोनाइजेशन मार्ग:** विश्लेषण करें कि इलेक्ट्रोलाइज़र के लिए पीएलआई योजना जीवाश्म ईंधन और आयातित प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता कम करके भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। ग्रीन हाइड्रोजन को विभिन्न क्षेत्रों (जैसे परिवहन, उद्योग) में एक स्वच्छ ऊर्जा वाहक के रूप में बढ़ावा देकर भारत के नेट-जीरो लक्ष्यों और वैश्विक जलवायु प्रतिबद्धताओं को प्राप्त करने में इसकी भूमिका पर चर्चा करें।
- **'मेक इन इंडिया' और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का विकास:** उन्नत स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के लिए एक मजबूत घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने, रोजगार सृजन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और ग्रीन हाइड्रोजन उपकरण उत्पादन में भारत को वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करने की योजना की क्षमता का मूल्यांकन करें। संबद्ध उद्योगों और एमएसएमई पर इसके गुणक प्रभाव की जांच करें।
- **ग्रीन हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में चुनौतियाँ:** विनिर्माण और उत्पादन सुविधाओं की स्थापना के लिए उच्च प्रारंभिक पूंजी लागत, कुशल कार्यबल की आवश्यकता, हाइड्रोजन परिवहन और भंडारण के लिए बुनियादी ढांचे का विकास, और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसी बाधाओं पर चर्चा करें। ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र के सतत विकास के लिए नीतिगत उपायों का सुझाव दें, जिसमें अनुसंधान एवं विकास सहायता और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग शामिल हैं।
पेज 15📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासरकारी योजनाएं एवं नीतियां
14. आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) का चरण 3 तक विस्तार: मानसिक स्वास्थ्य और सार्वभौमिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड पर ध्यान केंद्रित
चर्चा में क्यों? (Why in News)
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के तीसरे चरण को मंजूरी दे दी, जो भारत के डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना में एक बड़ी छलांग का संकेत है। यह विस्तार राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के निर्बाध एकीकरण को प्राथमिकता देता है और प्रत्येक नागरिक के लिए 'सार्वभौमिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड' (यूएचआर) के लिए एक मजबूत ढांचा स्थापित करने का लक्ष्य रखता है, जिससे सुलभ और व्यापक स्वास्थ्य सेवा की परिकल्पना और मजबूत होगी।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का एकीकरण:** मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक समर्पित डिजिटल मॉड्यूल की शुरुआत, जो एबीडीएम ढांचे के माध्यम से टेली-काउंसलिंग, ऑनलाइन नुस्खे और रेफरल मार्गों की अनुमति देगा।
- •**सार्वभौमिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड (UHR):** व्यक्तियों के लिए सभी स्वास्थ्य रिकॉर्ड (नैदानिक, निदान, टीकाकरण) को उनके आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (ABHA) से जुड़े एक ही, सुरक्षित, सहमति-आधारित डिजिटल भंडार में मानकीकृत और एकीकृत करने की एक नई पहल।
- •**उन्नत ABHA कार्यक्षमता:** ABHA (पूर्व में स्वास्थ्य आईडी) का डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने के लिए प्राथमिक पहचानकर्ता के रूप में विस्तारित उपयोग, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य सहायता और UHR प्रबंधन शामिल है।
- •**इंटरऑपरेबल डिजिटल रजिस्ट्री:** निर्बाध डेटा विनिमय के लिए हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स रजिस्ट्री (HPR), हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (HFR), और अन्य डिजिटल रजिस्ट्री का आगे विकास और एकीकरण।
- •**टेलीमेडिसिन और ई-फ़ार्मेसी का विस्तार:** मौजूदा टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म को मजबूत करना और नियामक निरीक्षण के तहत ई-फ़ार्मेसी सेवाओं के दायरे का विस्तार करना, विशेष रूप से पुरानी बीमारी प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य दवाओं के लिए।
- •**डेटा सुरक्षा और गोपनीयता:** रोगी की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत डेटा एन्क्रिप्शन, सहमति प्रबंधन प्रोटोकॉल और अद्यतन डेटा संरक्षण ढांचे का पालन।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- **मूल लॉन्च:** आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) सितंबर 2021 में लॉन्च किया गया (अगस्त 2020 में पायलट)।
- **नोडल एजेंसी:** स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA)।
- **प्रमुख घटक:** ABHA (आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता), HPR, HFR, स्वास्थ्य रिकॉर्ड (अब UHR पर ध्यान केंद्रित)।
- **चरण 3 में नया फोकस:** मानसिक स्वास्थ्य एकीकरण, सार्वभौमिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड (UHR)।
- **मूल योजना:** आयुष्मान भारत, भारत सरकार की एक प्रमुख पहल।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) और व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा की प्राप्ति:** विश्लेषण करें कि एबीडीएम चरण 3 स्वास्थ्य सेवाओं, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य भी शामिल है, को विशेष रूप से कम सेवा वाले क्षेत्रों में अधिक सुलभ, किफायती और व्यापक बनाकर UHC प्राप्त करने में कैसे योगदान देता है। प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना और सेवा वितरण को मजबूत करने में इसकी भूमिका पर चर्चा करें।
- **स्वास्थ्य सेवा में डिजिटल परिवर्तन और डेटा प्रशासन:** स्वास्थ्य रिकॉर्ड और सेवाओं के बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण द्वारा प्रस्तुत अवसरों और चुनौतियों का मूल्यांकन करें, जिसमें डिजिटल साक्षरता, समान पहुंच, डेटा अंतर-संचालनीयता के मुद्दे और विश्वास बनाने के लिए एक मजबूत डेटा संरक्षण ढांचे (जैसे डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम) का महत्वपूर्ण महत्व शामिल है।
- **भारत में मानसिक स्वास्थ्य बोझ को संबोधित करना:** चर्चा करें कि एबीडीएम में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का समर्पित एकीकरण मानसिक बीमारी के कलंक को दूर करने, टेली-परामर्श और डिजिटल मार्गों के माध्यम से देखभाल तक पहुंच में सुधार करने और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम लक्ष्यों और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी 3) के अनुरूप एक स्वस्थ और अधिक उत्पादक आबादी में योगदान करने में कैसे मदद कर सकता है।
पेज 16📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासरकारी योजनाएं एवं नीतियां
15. पीएम किसान सारथी योजना: कृषि परिवर्तन के लिए एआई का लाभ उठाना और राष्ट्रव्यापी विस्तार
चर्चा में क्यों? (Why in News)
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने आज पीएम किसान सारथी योजना के प्रारंभिक चरण की व्यापक प्रभाव आकलन रिपोर्ट का अनावरण किया, जो व्यक्तिगत कृषि सलाहकार सेवाएं प्रदान करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) का लाभ उठाती है। रिपोर्ट में लाभार्थी किसानों के लिए फसल उपज, इनपुट लागत अनुकूलन और बाजार पहुंच में उल्लेखनीय सुधार पर प्रकाश डाला गया है, जिससे इसके राष्ट्रव्यापी विस्तार और अन्य कृषि योजनाओं के साथ एकीकरण की तत्काल घोषणा की गई है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**एआई-संचालित व्यक्तिगत सलाह:** इष्टतम बुवाई अवधि, सिंचाई प्रबंधन, कीट और रोग नियंत्रण, और पोषक तत्व अनुप्रयोग पर वास्तविक समय, फसल-विशिष्ट और स्थान-आधारित सलाह प्रदान करता है।
- •**बाजार खुफिया एकीकरण:** किसानों को बेहतर रिटर्न प्राप्त करने में मदद करने के लिए वास्तविक समय बाजार मूल्य, मांग पूर्वानुमान और फसल कटाई के बाद के प्रबंधन अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।
- •**मौसम और जलवायु लचीलापन:** स्थानीयकृत मौसम अलर्ट जारी करने और सूखा और बाढ़ प्रबंधन रणनीतियों सहित जलवायु-लचीली खेती पद्धतियों का सुझाव देने के लिए उन्नत मौसम संबंधी डेटा को एकीकृत करता है।
- •**डिजिटल प्लेटफॉर्म पहुंच:** एक बहुभाषी मोबाइल एप्लिकेशन और वेब पोर्टल के माध्यम से सुलभ, विभिन्न भाषाई समूहों में विविध कृषि समुदाय तक पहुंच सुनिश्चित करता है।
- •**इनपुट और ऋण लिंकेज:** कृषि इनपुट, ऋण सुविधाओं और बीमा उत्पादों के लिए सरकारी सब्सिडी योजनाओं के साथ सहज लिंकेज की सुविधा प्रदान करता है।
- •**कौशल वृद्धि मॉड्यूल:** किसानों के लिए आधुनिक खेती तकनीकों, जैविक खेती और मूल्यवर्धन प्रक्रियाओं पर इंटरैक्टिव मॉड्यूल शामिल हैं।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- **लॉन्च वर्ष:** 2025 (काल्पनिक, 2026 की खबर के संदर्भ में)।
- **नोडल मंत्रालय:** कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय।
- **प्रमुख प्रौद्योगिकी:** आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल), बिग डेटा एनालिटिक्स।
- **उद्देश्य:** बढ़ी हुई उत्पादकता और किसान आय के लिए व्यक्तिगत, डेटा-संचालित कृषि सलाहकार और बाजार लिंकेज प्रदान करना।
- **लाभार्थी:** पूरे भारत में छोटे और सीमांत किसान।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **किसानों की आय दोगुनी करना और सतत कृषि:** जोखिमों को कम करके, इनपुट को अनुकूलित करके और बाजार पहुंच में सुधार करके किसानों की आय दोगुनी करने के दीर्घकालिक लक्ष्य को प्राप्त करने में योजना की क्षमता पर चर्चा करें। डेटा-संचालित संसाधन प्रबंधन और जलवायु-लचीली सलाह के माध्यम से सतत कृषि पद्धतियों में इसके योगदान का विश्लेषण करें।
- **ग्रामीण परिवर्तन में प्रौद्योगिकी की भूमिका:** मूल्यांकन करें कि एआई/एमएल एकीकरण ज्ञान अंतराल को कैसे पाट सकता है, किसानों को समय पर जानकारी के साथ सशक्त बना सकता है, और पारंपरिक कृषि पद्धतियों से परे ग्रामीण आजीविका को बदल सकता है, जिससे समावेशी विकास और ग्रामीण संकट को कम करने में योगदान मिल सके।
- **डिजिटल कृषि में चुनौतियां और अवसर:** डिजिटल साक्षरता, दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी, डेटा गोपनीयता और मजबूत शिकायत निवारण तंत्र की आवश्यकता से संबंधित चुनौतियों की जांच करें। साथ ही, एग्रीटेक नवाचार, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और मापनीयता के अवसरों पर प्रकाश डालें।
पेज 17📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकारक्षा एवं सुरक्षा
16. राष्ट्रीय ड्रोन-रोधी उपाय नीति 2026 लॉन्च: हवाई क्षेत्र सुरक्षा को मजबूत करना
चर्चा में क्यों? (Why in News)
आज गृह मंत्रालय (MHA) ने व्यापक राष्ट्रीय ड्रोन-रोधी उपाय नीति (NDCMP) 2026 का अनावरण किया, जिसका उद्देश्य दुष्ट ड्रोन का पता लगाने, पहचानने और उन्हें बेअसर करने के लिए एक मजबूत राष्ट्रीय ढाँचा तैयार करना है, जिससे भारत की हवाई क्षेत्र सुरक्षा मजबूत होगी।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •यह नीति महत्वपूर्ण राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे, सामरिक रक्षा प्रतिष्ठानों और प्रमुख शहरी केंद्रों के आसपास उन्नत ड्रोन का पता लगाने, ट्रैक करने और जैमिंग सिस्टम के चरणबद्ध परिनियोजन को अनिवार्य करती है।
- •ड्रोन खतरों के प्रति समन्वित प्रतिक्रिया के लिए एक बहु-एजेंसी कमान और नियंत्रण संरचना स्थापित करती है, जिसमें केंद्रीय अर्धसैनिक बल, राज्य पुलिस विभाग और विशेष खुफिया इकाइयां शामिल हैं।
- •खतरे को बेअसर करने के लिए निर्देशित ऊर्जा हथियार (DEWs), काइनेटिक इंटरसेप्टर और साइबर-टेकओवर सिस्टम सहित अत्याधुनिक ड्रोन-रोधी प्रौद्योगिकियों के स्वदेशी विकास और खरीद पर जोर देती है।
- •ड्रोन संचालन के लिए कड़े नियामक अपडेट, सुरक्षित ड्रोन उपयोग पर मजबूत जन जागरूकता अभियान और विकसित ड्रोन खतरों पर खुफिया जानकारी साझा करने के लिए उन्नत अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के प्रावधान शामिल हैं।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- राष्ट्रीय ड्रोन-रोधी उपाय नीति (NDCMP) 2026 गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा शुरू की गई।
- इसका उद्देश्य दुष्ट ड्रोन का मुकाबला करना और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और सामरिक स्थानों की रक्षा करना है।
- मुख्य प्रौद्योगिकियों में पता लगाना, जैमिंग, निर्देशित ऊर्जा हथियार, काइनेटिक इंटरसेप्टर और साइबर-टेकओवर शामिल हैं।
- खतरे की प्रतिक्रिया के लिए एक बहु-एजेंसी कमान और नियंत्रण संरचना स्थापित करता है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **आंतरिक सुरक्षा अनिवार्यता और विकसित होता खतरा परिदृश्य:** NDCMP 2026 शत्रुतापूर्ण ड्रोन द्वारा उत्पन्न बढ़ते और विविध खतरे के लिए एक महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया है, जिसमें सीमा पार तस्करी और जासूसी से लेकर संभावित आतंकवादी हमले और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सेवाओं में बाधा डालना शामिल है। यह नीति एक तेजी से विकसित हो रही और असममित सुरक्षा चुनौती के खिलाफ भारत की आंतरिक सुरक्षा वास्तुकला को काफी मजबूत करते हुए, एक बहुत आवश्यक एकीकृत और संरचित राष्ट्रीय प्रतिक्रिया प्रदान करती है।
- **तकनीकी आत्मनिर्भरता और नियामक ढाँचा:** यह नीति राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता को कम करते हुए, स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा देते हुए, ड्रोन-विरोधी प्रौद्योगिकी क्षेत्र के भीतर 'मेक इन इंडिया' पहल का समर्थन करती है। साथ ही, यह एक गतिशील नियामक ढाँचे के विकास को आवश्यक बनाता है जो ड्रोन-आधारित आर्थिक गतिविधियों के प्रचार को कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के साथ प्रभावी ढंग से संतुलित कर सके, जिससे जिम्मेदार नवाचार सुनिश्चित हो और जोखिमों को कम किया जा सके।
पेज 18📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकारक्षा एवं सुरक्षा
17. क्वाड देशों ने हिंद-प्रशांत के लिए संयुक्त समुद्री साइबर सुरक्षा ढाँचा लॉन्च किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
आज क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन में, भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने हिंद-प्रशांत के लिए एक संयुक्त समुद्री साइबर सुरक्षा ढाँचा (JMCSF) स्थापित करने की घोषणा की, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण समुद्री बुनियादी ढांचे के लिए बढ़ते साइबर खतरों के खिलाफ क्षेत्रीय लचीलापन बढ़ाना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •यह ढाँचा मुख्य रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों, प्रमुख बंदरगाहों, पानी के नीचे संचार केबलों और समुद्री डिजिटल बुनियादी ढांचे सहित महत्वपूर्ण समुद्री संपत्तियों को राज्य-प्रायोजित और गैर-राज्य साइबर-हमलावरों से बचाने पर केंद्रित है।
- •प्रमुख घटकों में उन्नत खुफिया जानकारी साझा करना, संयुक्त साइबर खतरा विश्लेषण, समन्वित घटना प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री हितधारकों के लिए व्यापक क्षमता निर्माण कार्यक्रम शामिल हैं।
- •सदस्य देशों के बीच वास्तविक समय की जानकारी के आदान-प्रदान, खतरे की खुफिया जानकारी के प्रसार और परिचालन समन्वय के लिए एक केंद्रीय केंद्र के रूप में कार्य करने के लिए 'क्वाड समुद्री साइबर फ्यूजन केंद्र' स्थापित किया जाएगा।
- •यह पहल साइबरस्पेस में अंतरराष्ट्रीय कानून और मानदंडों के पालन पर जोर देती है, एक स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित हिंद-प्रशांत समुद्री क्षेत्र को बढ़ावा देती है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- क्वाड देशों (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) द्वारा स्थापित संयुक्त समुद्री साइबर सुरक्षा ढाँचा (JMCSF)।
- प्राथमिक उद्देश्य: हिंद-प्रशांत में समुद्री साइबर सुरक्षा को बढ़ाना।
- केंद्रित क्षेत्र: शिपिंग लेन, बंदरगाह, पानी के नीचे केबल, समुद्री डिजिटल बुनियादी ढाँचा।
- 'क्वाड समुद्री साइबर फ्यूजन केंद्र' की स्थापना शामिल है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **भू-राजनीतिक प्रभाव और क्षेत्रीय स्थिरता:** JMCSF हिंद-प्रशांत में एक प्रमुख शुद्ध सुरक्षा प्रदाता के रूप में क्वाड की उभरती भूमिका को मजबूत करता है, अपने सहयोग को पारंपरिक सैन्य और आर्थिक क्षेत्रों से महत्वपूर्ण साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में विस्तारित करता है। यह ढाँचा क्षेत्र में संशोधनवादी शक्तियों से बढ़ते साइबर खतरों का मुकाबला करने के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे स्थिरता, नियम-आधारित व्यवस्था और साझा समृद्धि को बढ़ावा मिलता है।
- **आर्थिक सुरक्षा और राष्ट्रीय रक्षा का प्रतिच्छेदन:** यह पहल मजबूत साइबर सुरक्षा और वैश्विक आर्थिक समृद्धि के बीच महत्वपूर्ण और अविभाज्य संबंध को रेखांकित करती है, जो सुरक्षित समुद्री परिवहन और डिजिटल बुनियादी ढांचे पर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं की अत्यधिक निर्भरता को देखते हुए है। इन महत्वपूर्ण समुद्री डिजिटल संपत्तियों की सुरक्षा सीधे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं, आर्थिक लचीलेपन और विघटनकारी और संभावित रूप से अपंग करने वाले साइबर-हमलों के खिलाफ राष्ट्रीय रक्षा हितों की रक्षा करती है।
पेज 19📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकारक्षा एवं सुरक्षा
18. भारत ने अगली पीढ़ी की सीमा निगरानी के लिए 'इंद्र-क्वांटम' रडार का अनावरण किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारत ने अपने पहले पूर्ण स्वदेशी क्वांटम रडार प्रणाली 'इंद्र-क्वांटम' का सफलतापूर्वक परीक्षण और अनावरण किया है, जो सीमा निगरानी और चोरी-रोधी क्षमताओं में क्रांति लाने के लिए तैयार है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा प्रमुख निजी रक्षा फर्मों के एक संघ के सहयोग से विकसित किया गया।
- •स्टील्थ विमान/मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) और संभावित भूमिगत या उप-सतह खतरों का पता लगाने के लिए क्वांटम उलझाव के सिद्धांतों का उपयोग करता है।
- •पारंपरिक रडार प्रणालियों की तुलना में बेहतर रेंज, रिज़ॉल्यूशन और पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग तकनीकों के प्रति अभूतपूर्व प्रतिरक्षा प्रदान करता है।
- •वास्तविक समय की स्थितिजन्य जागरूकता बढ़ाने के लिए भारत की उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं के महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए प्रारंभिक परिनियोजन चरणों की योजना बनाई गई है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'इंद्र-क्वांटम' भारत का पहला स्वदेशी क्वांटम रडार सिस्टम है।
- DRDO द्वारा निजी क्षेत्र के सहयोग से विकसित किया गया।
- पता लगाने के लिए क्वांटम उलझाव के सिद्धांतों पर काम करता है।
- प्राथमिक अनुप्रयोग सीमा निगरानी और चोरी-रोधी अभियान हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **सामरिक महत्व और आत्मनिर्भर भारत:** 'इंद्र-क्वांटम' का अनावरण भारत के स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण छलांग को चिह्नित करता है, जिससे महत्वपूर्ण सामरिक क्षेत्रों में राष्ट्र की आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) काफी मजबूत होती है। यह उन्नत क्षमता तकनीकी रूप से परिष्कृत विरोधियों के खिलाफ भारत की निवारक क्षमता को बढ़ाने, उनकी चोरी की क्षमताओं को बेअसर करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- **वैश्विक तकनीकी कौशल और भविष्य का अनुसंधान एवं विकास:** यह विकास भारत को विश्व स्तर पर अत्याधुनिक क्वांटम संवेदन क्षमताओं वाले कुछ चुनिंदा देशों में से एक के रूप में स्थापित करता है। यह न केवल युद्ध के विकसित होते स्पेक्ट्रम में एक जबरदस्त लाभ प्रदान करता है, बल्कि क्वांटम रक्षा प्रौद्योगिकियों में भविष्य के अनुसंधान और विकास के लिए महत्वपूर्ण रास्ते भी खोलता है, जिससे संभावित रूप से क्वांटम रक्षा निर्यात और उन्नत अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास सहयोग हो सकता है।
पेज 20📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाअंतर्राष्ट्रीय संबंध
19. जलवायु-प्रेरित प्रवासन पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (आईसीसीएमआई) ने 'जलवायु लचीली गतिशीलता के लिए वैश्विक ढाँचा' अपनाया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
नई दिल्ली, भारत में आयोजित जलवायु-प्रेरित प्रवासन पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (आईसीसीएमआई) आज 'जलवायु लचीली गतिशीलता के लिए वैश्विक ढाँचा' को सर्वसम्मति से अपनाने के साथ संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक समझौते का उद्देश्य दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन-प्रेरित विस्थापन और प्रवासन द्वारा उत्पन्न बढ़ती चुनौतियों के लिए एक व्यापक अंतर्राष्ट्रीय नीति प्रतिक्रिया प्रदान करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •'जलवायु लचीली गतिशीलता के लिए वैश्विक ढाँचा' अपनाया गया, जिसमें जलवायु परिवर्तन को मानव विस्थापन और प्रवासन का एक महत्वपूर्ण चालक माना गया।
- •जलवायु प्रवासियों के नियोजित पुनर्वास, स्वैच्छिक वापसी और एकीकरण के लिए सिद्धांत स्थापित किए गए, जिसमें मानवाधिकारों और गरिमा पर जोर दिया गया।
- •जलवायु-प्रभावित समुदायों और मेजबान देशों के लिए उन्नत अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, बोझ-साझाकरण और वित्तीय सहायता के तंत्र।
- •संवेदनशील क्षेत्रों में अनुकूलन उपायों, क्षमता निर्माण और आजीविका बहाली का समर्थन करने के लिए 'जलवायु गतिशीलता कोष' का शुभारंभ।
- •जलवायु-प्रेरित प्रवासन पैटर्न को बेहतर ढंग से समझने और भविष्यवाणी करने के लिए डेटा संग्रह, अनुसंधान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में सुधार के लिए प्रतिबद्धता।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- प्रवासन के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) अग्रणी अंतरसरकारी संगठन है।
- 'जलवायु शरणार्थी' या 'जलवायु प्रवासी' वे व्यक्ति होते हैं जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण विस्थापित होते हैं।
- जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) जलवायु परिवर्तन पर प्राथमिक अंतर्राष्ट्रीय संधि है।
- अनुकूलन उपायों से तात्पर्य जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए की गई कार्रवाइयों से है।
- नई दिल्ली, भारत ने आईसीसीएमआई 2026 की मेजबानी की।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- एक वैश्विक ढाँचे को अपनाना जलवायु-प्रेरित प्रवासन के मानवीय और भू-राजनीतिक आयामों को कानूनी रूप से पहचानने और संबोधित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो तदर्थ प्रतिक्रियाओं से आगे बढ़ता है।
- ढाँचे में मेजबान और योगदानकर्ता के रूप में भारत की भूमिका वैश्विक जलवायु कार्रवाई और मानवीय कूटनीति में उसके बढ़ते नेतृत्व को उजागर करती है, विशेष रूप से जलवायु प्रभावों के प्रति उसकी संवेदनशीलता को देखते हुए।
- 'जलवायु गतिशीलता कोष' जलवायु-प्रेरित विस्थापन से सबसे अधिक प्रभावित देशों का समर्थन करने के लिए समर्पित वित्तीय तंत्रों की एक लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करता है।
- समान बोझ-साझाकरण सुनिश्चित करने में चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं, विशेष रूप से विकसित और विकासशील देशों के बीच, और ढाँचे के सिद्धांतों को प्रभावी राष्ट्रीय नीतियों में बदलने में।
- इस ढाँचे में जलवायु और प्रवासन नीतियों को एकीकृत करने की क्षमता है, जिससे तीव्र पर्यावरणीय परिवर्तन के युग में सतत विकास और मानव सुरक्षा के लिए एक अधिक समग्र दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलेगा।
पेज 21📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाअंतर्राष्ट्रीय संबंध
20. भारत-जापान 'डिजिटल और साइबर सुरक्षा संवाद 2.0' संपन्न: महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में रणनीतिक साझेदारी गहरी हुई
चर्चा में क्यों? (Why in News)
टोक्यो में आयोजित भारत-जापान 'डिजिटल और साइबर सुरक्षा संवाद' का दूसरा संस्करण आज संपन्न हुआ, जिसमें दोनों देशों ने एक स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित डिजिटल स्थान को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। यह संवाद विकसित हो रहे वैश्विक साइबर खतरों और लचीले डिजिटल बुनियादी ढांचे के बढ़ते महत्व के बीच सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित था।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •'सुरक्षित डिजिटल इंडो-पैसिफिक' पर संयुक्त घोषणापत्र अपनाया गया, जिसमें महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना की सुरक्षा में सहयोग पर जोर दिया गया।
- •आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), 5जी और क्वांटम कंप्यूटिंग सुरक्षा जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति।
- •साइबर सुरक्षा में क्षमता निर्माण और कौशल विकास के लिए पहल शुरू की गई, जिसमें संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम और विशेषज्ञ आदान-प्रदान शामिल हैं।
- •हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर खरीद में जोखिमों को कम करने के लिए एक नए 'डिजिटल आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन कार्य समूह' की स्थापना के प्रति प्रतिबद्धता।
- •राज्य-प्रायोजित साइबर हमलों और साइबर-अपराध सिंडिकेट्स का मुकाबला करने के लिए विस्तारित खुफिया-साझाकरण तंत्र।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- भारत और जापान चतुर्भुज सुरक्षा संवाद (क्वाड) के सदस्य हैं।
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र भारत-जापान रणनीतिक सहयोग के लिए एक प्रमुख फोकस क्षेत्र है।
- 'महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना' उन प्रणालियों को संदर्भित करती है जिनकी व्यवधान से राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा या सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
- 5G ब्रॉडबैंड सेलुलर नेटवर्क के लिए पांचवीं पीढ़ी का प्रौद्योगिकी मानक है।
- क्वांटम कंप्यूटिंग एक उभरती हुई तकनीक है जो क्वांटम-मैकेनिकल घटनाओं का उपयोग करती है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- यह संवाद डिजिटल परिवर्तन और राष्ट्रीय सुरक्षा के बढ़ते अभिसरण को रेखांकित करता है, जिससे साइबर सुरक्षा हिंद-प्रशांत में भारत-जापान की रणनीतिक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण तत्व बन जाती है।
- एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग दोनों देशों के लिए तकनीकी संप्रभुता और भविष्य के खतरों के खिलाफ लचीलापन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
- 'डिजिटल आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन कार्य समूह' वैश्विक प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखलाओं में महत्वपूर्ण कमजोरियों को संबोधित करता है, विश्वसनीय साझेदारियों और विविध स्रोतों को बढ़ावा देता है।
- परिष्कृत राज्य और गैर-राज्य साइबर अभिनेताओं के खिलाफ सक्रिय रक्षा रणनीतियों को विकसित करने के लिए उन्नत खुफिया जानकारी साझा करना महत्वपूर्ण है।
- यह साझेदारी लोकतांत्रिक राष्ट्रों के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करती है जो डिजिटल अधिनायकवाद का मुकाबला करते हुए सुरक्षित और खुले डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करना चाहते हैं।
पेज 22📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाअंतर्राष्ट्रीय संबंध
21. ब्रिक्स+ शिखर सम्मेलन संपन्न: बहुध्रुवीयता और वैश्विक वित्तीय सुधारों का मार्ग प्रशस्त
चर्चा में क्यों? (Why in News)
20-22 जुलाई, 2026 तक प्रिटोरिया, दक्षिण अफ्रीका में आयोजित बहुप्रतीक्षित वार्षिक ब्रिक्स+ शिखर सम्मेलन आज वैश्विक आर्थिक शासन को पुनर्गठित करने और अधिक समावेशी अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण घोषणाओं के साथ संपन्न हुआ। विस्तारित गुट के नेताओं ने प्रमुख भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श किया।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •'प्रिटोरिया घोषणा' को अपनाया गया, जिसमें एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और सुधारित बहुपक्षवाद के प्रति प्रतिबद्धता पर जोर दिया गया।
- •अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्रा व्यापार तंत्र को मजबूत करने पर चर्चा केंद्रित रही।
- •ब्रिक्स+ गुट के आगे विस्तार के लिए एक रोडमैप पर विचार-विमर्श किया गया, जिसमें कई नए देशों ने इसमें शामिल होने में रुचि व्यक्त की।
- •प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढाँचे और सतत विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ाने की प्रतिबद्धता।
- •सदस्य देशों के बीच सहयोगात्मक अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए एक नए 'ब्रिक्स+ इनोवेशन और प्रौद्योगिकी कोष' को मंजूरी दी गई।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- ब्रिक्स+ मूल ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) समूह का एक विस्तारित प्रारूप है।
- शंघाई में मुख्यालय वाला न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) ब्रिक्स गुट की वित्तीय शाखा के रूप में कार्य करता है।
- 'डी-डॉलराइजेशन' की अवधारणा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और वित्त में अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को कम करने को संदर्भित करती है।
- दक्षिण अफ्रीका 2026 ब्रिक्स+ शिखर सम्मेलन का मेजबान देश है।
- 'प्रिटोरिया घोषणा' शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख परिणामी दस्तावेज़ है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- ब्रिक्स+ का विस्तार और स्थानीय मुद्रा व्यापार पर ध्यान मौजूदा एकध्रुवीय वैश्विक वित्तीय वास्तुकला को चुनौती देने और बहुध्रुवीयता को बढ़ावा देने का एक ठोस प्रयास दर्शाता है।
- ब्रिक्स+ के भीतर आर्थिक एकीकरण और प्रौद्योगिकी साझाकरण पर चर्चा में भारत की सक्रिय भागीदारी वैश्विक शासन मानदंडों को आकार देने में उसके बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करती है।
- दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देते हुए, गुट को अपने सदस्यों के बीच विविध आर्थिक हितों और भू-राजनीतिक संरेखणों को समायोजित करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
- 'ब्रिक्स+ इनोवेशन और प्रौद्योगिकी कोष' में स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को बढ़ावा देने और विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए पश्चिमी प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भरता कम करने की क्षमता है।
- शिखर सम्मेलन के परिणाम बाहरी आर्थिक दबावों के खिलाफ अधिक स्वायत्तता और लचीलापन चाहने वाले क्षेत्रीय आर्थिक गुटों की ओर एक व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाते हैं।
पेज 23📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकारक्षा एवं सुरक्षा
22. भारत-आसियान 'महासागर संरक्षक' पहल उन्नत समुद्री डोमेन जागरूकता के लिए शुरू की गई
चर्चा में क्यों? (Why in News)
क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण विकास में, भारत और दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) ने संयुक्त रूप से 'महासागर संरक्षक' पहल शुरू की है। इस सहयोगात्मक ढांचे का उद्देश्य समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA) को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विकसित हो रही पारंपरिक और गैर-पारंपरिक समुद्री सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने के लिए अधिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •'महासागर संरक्षक' पहल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में वास्तविक समय सूचना साझाकरण, खुफिया संलयन और समन्वित निगरानी संचालन के लिए एक बहुस्तरीय तंत्र स्थापित करती है।
- •यह आसियान सदस्य देशों की नौसेनाओं और तटरक्षकों के लिए क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण पर केंद्रित है, जिसमें समुद्री कानून प्रवर्तन और खोज और बचाव में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना शामिल है।
- •यह पहल समुद्री डकैती, समुद्र में सशस्त्र डकैती, अवैध, असूचित और अनियमित (IUU) मछली पकड़ने और पर्यावरणीय अपराधों जैसी महत्वपूर्ण समुद्री चुनौतियों का समाधान करेगी।
- •महत्वपूर्ण समुद्री संचार लेन (SLOCs) और महत्वपूर्ण पानी के नीचे के बुनियादी ढांचे की निगरानी के लिए संयुक्त गश्त, समुद्री अभ्यास और निगरानी संपत्तियों की तैनाती को बढ़ावा देता है।
- •अंतर्राष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (UNCLOS) के पालन पर जोर देता है, जिससे नेविगेशन और ओवरफ्लाइट की स्वतंत्रता सुनिश्चित होती है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- आसियान दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के दस देशों से बना एक क्षेत्रीय अंतरसरकारी संगठन है।
- MDA का तात्पर्य समुद्री डोमेन से संबंधित किसी भी चीज़ की प्रभावी समझ से है जो सुरक्षा, संरक्षा, अर्थव्यवस्था या पर्यावरण को प्रभावित कर सकती है।
- UNCLOS (समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन) समुद्री गतिविधियों को नियंत्रित करने वाली अंतर्राष्ट्रीय संधि है।
- यह पहल भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत के लिए उसके दृष्टिकोण का समर्थन करती है।
- HadR (मानवीय सहायता और आपदा राहत) सहयोग इस पहल का एक प्रमुख घटक है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **भू-राजनीतिक महत्व और क्षेत्रीय स्थिरता:** 'महासागर संरक्षक' पहल हिंद-प्रशांत में एक नेट सुरक्षा प्रदाता के रूप में भारत की भूमिका को पुष्ट करती है, कुछ शक्तियों द्वारा बढ़ते मुखरता का मुकाबला करती है और एक नियम-आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देती है। यह क्षेत्रीय नौसेनाओं के बीच विश्वास और अंतरसंचालनीयता को बढ़ावा देता है, जो स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
- **गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों और आर्थिक समृद्धि का समाधान:** MDA को मजबूत करके और अवैध गतिविधियों के खिलाफ सहयोग को बढ़ावा देकर, यह पहल सीधे महत्वपूर्ण समुद्री लेन की सुरक्षा, समुद्री संसाधनों की रक्षा और व्यापार के अबाधित प्रवाह को सुनिश्चित करने में योगदान करती है। यह भारत और आसियान सदस्य देशों की आर्थिक समृद्धि और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए सर्वोपरि है, जो समुद्री व्यापार पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं।
पेज 24📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकारक्षा एवं सुरक्षा
23. परियोजना 'अस्त्र-नेत्र': भारत ने स्वदेशी स्टील्थ यूसीएवी कार्यक्रम का अनावरण किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर "परियोजना अस्त्र-नेत्र" का अनावरण किया, जो भारतीय वायु सेना के लिए अगली पीढ़ी के स्टील्थ मानवरहित लड़ाकू हवाई वाहनों (UCAVs) के विकास और तैनाती के लिए एक महत्वाकांक्षी नया स्वदेशी कार्यक्रम है। यह पहल उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों में रणनीतिक स्वायत्तता प्राप्त करने और अपनी एयरोस्पेस क्षमताओं को मजबूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •परियोजना अस्त्र-नेत्र का उद्देश्य कम अवलोकनीय विशेषताओं वाले उन्नत स्टील्थ यूसीएवी को डिजाइन, विकसित और निर्मित करना है, जिससे विरोधी हवाई क्षेत्र में गहरी पैठ बनाई जा सके।
- •यूसीएवी स्वायत्त मिशन योजना, लक्ष्य पहचान, सटीक हमला क्षमताओं और झुंड रणनीति के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शामिल करेंगे।
- •स्वदेशी प्रणोदन प्रणालियों, उन्नत एवियोनिक्स, परिष्कृत सेंसर पेलोड और सुरक्षित डेटा लिंक विकसित करने पर केंद्रित है।
- •यह कार्यक्रम DRDO, HAL, निजी रक्षा उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों को शामिल करते हुए एक सहयोगात्मक प्रयास है, जो एक मजबूत 'मेक इन इंडिया' पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देता है।
- •इन यूसीएवी को मानवयुक्त विमानों के वफादार विंगमैन के रूप में कार्य करने, स्वतंत्र निगरानी और स्ट्राइक मिशन करने और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध संचालन करने की कल्पना की गई है, जिससे IAF की युद्धक शक्ति में काफी वृद्धि होगी।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- UCAV का अर्थ मानवरहित लड़ाकू हवाई वाहन है।
- DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) परियोजना अस्त्र-नेत्र के लिए नोडल एजेंसी है।
- स्टील्थ तकनीक विमान के रडार, इन्फ्रारेड, दृश्य और ध्वनिक संकेतों को कम करती है।
- यह कार्यक्रम रक्षा विनिर्माण में 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के साथ संरेखित है।
- अस्त्र-नेत्र से संभावित स्पिन-ऑफ प्रौद्योगिकियां भारत के नागरिक एयरोस्पेस क्षेत्र को लाभ पहुंचा सकती हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **हवाई युद्ध का भविष्य और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता:** स्वदेशी स्टील्थ यूसीएवी का विकास हवाई युद्ध के विकसित होते युग में भारत के रणनीतिक बढ़त को बनाए रखने, विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने और स्वतंत्र सैन्य अभियानों और क्षेत्र में शक्ति प्रदर्शन की अपनी क्षमता को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- **रक्षा औद्योगिक आधार और तकनीकी कौशल को बढ़ावा:** परियोजना अस्त्र-नेत्र भारत के रक्षा औद्योगिक आधार के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करेगा, नवाचार को बढ़ावा देगा, उच्च-तकनीकी रोजगार सृजित करेगा, और महत्वपूर्ण दोहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकियों (AI, उन्नत सामग्री, स्वायत्त प्रणाली) के विकास को गति देगा, जिससे भारत रक्षा नवाचार में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित होगा।
पेज 25📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकारक्षा एवं सुरक्षा
24. भारत का एकीकृत वायु रक्षा कमान (IADC) पूर्ण परिचालन क्षमता (FOC) प्राप्त करता है
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारत के बहुप्रतीक्षित एकीकृत वायु रक्षा कमान (IADC) को आधिकारिक तौर पर पूर्ण परिचालन क्षमता प्राप्त करने की घोषणा की गई है, जो राष्ट्र के संयुक्त थिएटर कमांड प्रयासों और उच्च रक्षा प्रबंधन सुधारों में एक परिवर्तनकारी मील का पत्थर है। यह घोषणा सभी सशस्त्र बलों में वर्षों की रणनीतिक योजना, तकनीकी एकीकरण और संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यासों के बाद हुई है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •IADC भारतीय वायु सेना (IAF), भारतीय सेना और भारतीय नौसेना की सभी वायु रक्षा संपत्तियों को एक एकल कमान संरचना के तहत एकीकृत करता है, जिससे तालमेल और परिचालन दक्षता बढ़ती है।
- •यह भारतीय उपमहाद्वीप में हवाई खतरों के खिलाफ वास्तविक समय खतरे के आकलन, प्रारंभिक चेतावनी और समन्वित प्रतिक्रिया के लिए एक केंद्रीकृत कमान और नियंत्रण प्रणाली प्रदान करता है।
- •इसमें उन्नत स्वदेशी और आयातित प्रौद्योगिकियां शामिल हैं, जिनमें नेटवर्क्ड रडार, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) सिस्टम, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAM) सिस्टम और इंटरसेप्टर विमान शामिल हैं।
- •इसका उद्देश्य एक सहज वायु रक्षा छाता बनाना है, जिससे प्रयासों के विखंडन को समाप्त किया जा सके और बहु-डोमेन परिचालन वातावरण में त्वरित निर्णय लेने को सुनिश्चित किया जा सके।
- •FOC भारत की बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) सहित जटिल हवाई हमलों को रोकने और निष्क्रिय करने की बढ़ी हुई क्षमता को दर्शाता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- IADC चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के नेतृत्व में भारत की व्यापक थिएटर कमांड ड्राइव का हिस्सा है।
- यह S-400 मिसाइल सिस्टम, आकाश SAMs, स्वदेशी रडार (जैसे आरुध्रा), और राफेल/Su-30MKI विमान जैसी संपत्तियों को एकीकृत करता है।
- यह कमान एक एकीकृत वायु रक्षा कमांडर के तहत कार्य करती है, जो एकल बिंदु जिम्मेदारी सुनिश्चित करती है।
- IADC भारत की जिम्मेदारी के क्षेत्र (AoR) और उससे आगे के हवाई क्षेत्र की निगरानी करने की क्षमता को बढ़ाता है।
- यह मौजूदा वायु कमानों से अलग है और मुख्य रूप से रक्षात्मक प्रति-वायु अभियानों पर केंद्रित है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए रणनीतिक निहितार्थ:** IADC दो-मोर्चे वाले युद्ध की स्थिति और उभरते हवाई खतरों के खिलाफ भारत की रक्षा क्षमताओं को काफी मजबूत करता है, जिससे प्रतिरोध बढ़ता है और प्रतिक्रिया समय कम होता है। यह महत्वपूर्ण रक्षा बुनियादी ढांचे में आत्मनिर्भरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
- **उच्च रक्षा प्रबंधन और संयुक्तता में सुधार:** IADC का सफल संचालन भारतीय सशस्त्र बलों के बीच अधिक संयुक्तता और एकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य के थिएटर कमांडों के लिए एक मिसाल कायम करता है और संसाधन आवंटन और परिचालन तालमेल को अनुकूलित करता है। यह अंतर-सेवा समन्वय और कमान विखंडन की लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों का समाधान करता है।
पेज 26📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाअंतर्राष्ट्रीय संबंध
25. भारत-ईयू ने जलवायु सहयोग को बढ़ावा देने के लिए 'हरित संक्रमण त्वरक कोष' का अनावरण किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
आज भारत और यूरोपीय संघ ने ब्रुसेल्स में संयुक्त रूप से 'हरित संक्रमण त्वरक कोष' (जीटीएएफ) का शुभारंभ किया, जो उनकी मौजूदा हरित रणनीतिक साझेदारी के तहत एक ऐतिहासिक पहल है। इस कोष का उद्देश्य भारत और अन्य विकासशील देशों में टिकाऊ प्रौद्योगिकियों और जलवायु-लचीले बुनियादी ढांचे में निवेश को उत्प्रेरित करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •जीटीएएफ हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण, चक्रीय अर्थव्यवस्था समाधान और टिकाऊ शहरी विकास पर केंद्रित परियोजनाओं के लिए मिश्रित वित्त, तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण सहायता प्रदान करेगा।
- •भारतीय और यूरोपीय उद्यमों तथा अनुसंधान संस्थानों के बीच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त अनुसंधान एवं विकास पहलों को सुविधाजनक बनाने की प्रतिबद्धता।
- •निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए बैंक योग्य हरित परियोजनाओं की पहचान करने, विकसित करने और कार्यान्वित करने के लिए एक संयुक्त 'टिकाऊ बुनियादी ढांचा मंच' की स्थापना।
- •सीमा पार निवेश और बाजार पहुंच को सुव्यवस्थित करने के लिए हरित प्रौद्योगिकियों के लिए नियामक ढांचे और मानकों को संरेखित करने पर जोर।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- भारत और यूरोपीय संघ द्वारा हरित संक्रमण त्वरक कोष (जीटीएएफ) का शुभारंभ।
- फोकस क्षेत्र: हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, चक्रीय अर्थव्यवस्था, टिकाऊ शहरी विकास।
- तंत्र: मिश्रित वित्त, तकनीकी सहायता, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण।
- व्यापक ढांचा: भारत-ईयू हरित रणनीतिक साझेदारी।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **जलवायु कार्रवाई पर रणनीतिक अभिसरण:** जीटीएएफ भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी के गहन होने का प्रतीक है, जो पारंपरिक व्यापारिक संबंधों से परे जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान करता है। यह पेरिस समझौते के लक्ष्यों के प्रति साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है और उत्तर-दक्षिण सहयोग के लिए एक मॉडल प्रदर्शित करता है जो जलवायु वित्त के जोखिम को कम कर सकता है और विश्व स्तर पर डीकार्बोनाइजेशन प्रयासों को गति दे सकता है।
- **भारत के हरित विकास पथ के लिए निहितार्थ:** भारत के लिए, जीटीएएफ यूरोपीय पूंजी, अत्याधुनिक हरित प्रौद्योगिकियों और विशेषज्ञता तक महत्वपूर्ण पहुंच प्रदान करता है, जो इसके महत्वाकांक्षी नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों (जैसे 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता) को प्राप्त करने और हरित हाइड्रोजन के लिए एक वैश्विक केंद्र बनने के लिए महत्वपूर्ण है। यह स्वदेशी विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ावा देगा, हरित रोजगार सृजित करेगा और वैश्विक जलवायु क्षेत्र में भारत के नेतृत्व को बढ़ाएगा, विशेष रूप से न्यायसंगत और समान ऊर्जा संक्रमणों की वकालत करने में।
पेज 27📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाअंतर्राष्ट्रीय संबंध
26. संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना सुधार शिखर सम्मेलन संपन्न: 21वीं सदी के संघर्षों के लिए अनुकूलनशीलता अनिवार्य
चर्चा में क्यों? (Why in News)
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आज संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों (यूएन पीकेओ) पर एक उच्च-स्तरीय शिखर सम्मेलन संपन्न हुआ, जिसमें 'एक नए युग के लिए शांति स्थापना (पीएनई) जनादेश' नामक एक नए ढांचे को अपनाया गया। इसका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र मिशनों को विकसित हो रही वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए आधुनिक बनाना है। शिखर सम्मेलन ने प्रौद्योगिकी के एकीकरण और तीव्र तैनाती क्षमताओं को बढ़ाने पर जोर दिया।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •पीकेओ जनादेश में एआई-संचालित निगरानी, ड्रोन प्रौद्योगिकी और सुरक्षित संचार प्रणालियों जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करने के लिए 'डिजिटल शांति स्थापना पहल' को मंजूरी।
- •जलवायु-प्रेरित संघर्षों और शहरी युद्ध परिदृश्यों से निपटने के लिए नए दिशानिर्देश, जिसमें सामुदायिक जुड़ाव, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और जटिल परिस्थितियों में नागरिकों की सुरक्षा पर जोर दिया गया है।
- •सदस्य देशों द्वारा 'रैपिड रिस्पांस रिजर्व फोर्स' स्थापित करने की प्रतिबद्धता, जो उभरते या बढ़ते संकटों में तत्काल तैनाती के लिए पूर्व-पहचानित और प्रशिक्षित इकाइयाँ प्रदान करेगी।
- •लैंगिक-उत्तरदायी शांति स्थापना पर बढ़ा हुआ ध्यान, जिसका लक्ष्य सभी रैंकों में महिलाओं के उच्च प्रतिनिधित्व और परिचालन योजना में लैंगिक दृष्टिकोणों को एकीकृत करना है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- यूएन पीकेओ शिखर सम्मेलन में 'एक नए युग के लिए शांति स्थापना (पीएनई) जनादेश' अपनाया गया।
- सुधार के प्रमुख क्षेत्र: प्रौद्योगिकी एकीकरण (एआई, ड्रोन), जलवायु-प्रेरित संघर्ष, शहरी युद्ध, तीव्र प्रतिक्रिया, लैंगिक-उत्तरदायी शांति स्थापना।
- भारत यूएन पीकेओ में सबसे बड़े सैन्य योगदानकर्ताओं में से एक है।
- संबंधित संयुक्त राष्ट्र पहलें: एक्शन फॉर पीसकीपिंग (ए4पी), यूएन पीसकीपिंग पर साझा प्रतिबद्धताओं की घोषणा।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना के लिए चुनौतियाँ और अवसर:** आधुनिक संघर्ष असममित युद्ध, शहरी वातावरण, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और साइबर खतरों से चिह्नित हैं, जो पारंपरिक शांति स्थापना मॉडल को कम प्रभावी बनाते हैं। पीएनई जनादेश तकनीकी प्रगति और लचीले परिचालन सिद्धांतों को शामिल करके इस अंतर को पाटने का अवसर प्रदान करता है, लेकिन इसकी सफलता सदस्य देशों की निरंतर राजनीतिक इच्छाशक्ति और वित्तीय योगदान पर निर्भर करती है।
- **भारत का रुख और योगदान:** भारत, संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना में एक लंबे समय से और महत्वपूर्ण योगदानकर्ता, ने लगातार मजबूत जनादेश, स्पष्ट जुड़ाव के नियम और शांति सैनिकों के लिए अधिक सुरक्षा की वकालत की है। प्रौद्योगिकी और तीव्र प्रतिक्रिया पर जोर प्रभावी शांति स्थापना के लिए भारत के प्रस्तावों के अनुरूप है। भारत पीएनई जनादेश के कार्यान्वयन में योगदान करने के लिए अपने अनुभव और तकनीकी क्षमताओं का लाभ उठा सकता है, जिससे एक जिम्मेदार वैश्विक अभिनेता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के रूप में अपनी भूमिका और मजबूत होगी।
पेज 28📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाअंतर्राष्ट्रीय संबंध
27. हिंद-प्रशांत महत्वपूर्ण खनिज गठबंधन का उद्घाटन संवाद संपन्न: सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं को बल प्रदान
चर्चा में क्यों? (Why in News)
आज टोक्यो में नवगठित हिंद-प्रशांत महत्वपूर्ण खनिज गठबंधन (आईपीसीएमए), जिसमें भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा शामिल हैं, ने अपना उद्घाटन मंत्रिस्तरीय संवाद संपन्न किया। संवाद हरित ऊर्जा परिवर्तन और उन्नत प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और उन्हें सुरक्षित करने की रणनीतियों पर केंद्रित था।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •सदस्य देशों और भागीदार देशों में महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण, निष्कर्षण, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण में सहयोगात्मक निवेश के लिए एक रूपरेखा पर समझौता।
- •भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण डेटा और बाजार खुफिया जानकारी साझा करने, पारदर्शिता बढ़ाने और सूचना विषमता को कम करने के लिए 'हिंद-प्रशांत खनिज डेटा विनिमय' का शुभारंभ।
- •टिकाऊ और जिम्मेदार खनन प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण खनिज परियोजनाओं के लिए सामान्य पर्यावरणीय, सामाजिक और शासन (ईएसजी) मानकों को स्थापित करने की प्रतिबद्धता।
- •वैकल्पिक प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों को विकसित करने और एकल-स्रोत आपूर्ति पर निर्भरता कम करने के लिए संयुक्त उद्यमों की खोज।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- हिंद-प्रशांत महत्वपूर्ण खनिज गठबंधन (आईपीसीएमए) के सदस्य: भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा।
- महत्वपूर्ण खनिज: लिथियम, कोबाल्ट, निकल, दुर्लभ पृथ्वी तत्व (आरईई), आदि।
- उद्देश्य: आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाना, भू-राजनीतिक निर्भरता कम करना।
- संबंधित पहलें: खनिज सुरक्षा भागीदारी (एमएसपी), भारत की महत्वपूर्ण खनिज रणनीति।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **भू-राजनीतिक महत्व:** आईपीसीएमए समान विचारधारा वाले लोकतंत्रों द्वारा महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं के शस्त्रीकरण का मुकाबला करने, आर्थिक लचीलापन बढ़ाने और वैश्विक औद्योगिक मूल्य श्रृंखलाओं, विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा और उच्च-तकनीकी क्षेत्रों के लिए जोखिम कम करने के लिए एक रणनीतिक कदम का प्रतिनिधित्व करता है। यह एक स्वतंत्र, खुले और समृद्ध क्षेत्र को सुनिश्चित करने की व्यापक हिंद-प्रशांत रणनीति के अनुरूप है।
- **भारत की भूमिका और लाभ:** भारत के महत्वपूर्ण खनिज भंडार, इलेक्ट्रिक वाहनों और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए बढ़ती घरेलू मांग और इसकी रणनीतिक स्थिति इसे एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करती है। आईपीसीएमए में भागीदारी उन्नत खनन प्रौद्योगिकियों, निवेश और बाजार विविधीकरण तक पहुंच प्रदान करती है, जो इसके 'आत्मनिर्भर भारत' के उद्देश्यों को मजबूत करती है और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
पेज 29📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकापर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
28. भारत प्लास्टिक चक्र पहल: पॉलिमर अपशिष्ट प्रबंधन के लिए उन्नत पुनर्चक्रण और चक्रीय अर्थव्यवस्था
चर्चा में क्यों? (Why in News)
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 'भारत प्लास्टिक चक्र पहल' का अनावरण किया है, जो उन्नत पुनर्चक्रण प्रौद्योगिकियों और एक मजबूत चक्रीय अर्थव्यवस्था ढांचे के माध्यम से प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन को बदलने के उद्देश्य से एक व्यापक राष्ट्रीय रणनीति है। इस पहल का उद्देश्य प्लास्टिक प्रदूषण कोB बड़े पैमाने पर कम करना, संसाधन उपयोग को अनुकूलित करना और स्थायी पॉलिमर समाधानों में नवाचार को बढ़ावा देना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •उन्नत पुनर्चक्रण प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा: रासायनिक पुनर्चक्रण (पायरोलिसिस, गैसीकरण, डिपोलाइमराइजेशन) जैसी प्रौद्योगिकियों के लिए महत्वपूर्ण निवेश और नीतिगत सहायता, ताकि मिश्रित और कम मूल्य वाले प्लास्टिक कचरे को संसाधित किया जा सके जिससे पारंपरिक यांत्रिक पुनर्चक्रण जूझ रहा है।
- •मजबूत विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी (ईपीआर) ढांचा: सख्त प्रवर्तन, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रवाह की डिजिटल ट्रैकिंग, और उत्पादकों को पुनर्नवीनीकरण सामग्री का उपयोग करने और पुनर्चक्रण क्षमता के लिए डिजाइन करने के लिए प्रोत्साहन के साथ संशोधित ईपीआर दिशानिर्देश।
- •राष्ट्रीय सामग्री पुनर्प्राप्ति और छँटाई सुविधाएं (एमआरएसएफ): पुनर्चक्रण से पहले अपशिष्ट संग्रह, अलगाव और प्रसंस्करण की दक्षता में सुधार के लिए प्रमुख शहरी केंद्रों में अत्याधुनिक एमआरएसएफ की स्थापना।
- •जैव-आधारित और बायोडिग्रेडेबल पॉलिमर के लिए अनुसंधान और विकास: पारंपरिक प्लास्टिक पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक सामग्रियों में अनुसंधान और विकास के लिए धन, साथ ही उनके पर्यावरणीय प्रदर्शन के लिए स्पष्ट मानक और प्रमाणन।
- •जन जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन अभियान: जिम्मेदार प्लास्टिक खपत, स्रोत पर अलगाव, और पुनर्चक्रण के महत्व पर नागरिकों को शिक्षित करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान का शुभारंभ।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- एक 'चक्रीय अर्थव्यवस्था' का उद्देश्य संसाधनों को यथासंभव लंबे समय तक उपयोग में रखना, उपयोग के दौरान उनसे अधिकतम मूल्य निकालना, फिर प्रत्येक सेवा जीवन के अंत में उत्पादों और सामग्रियों को पुनर्प्राप्त और पुनर्जीवित करना है।
- विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी (ईपीआर) एक नीतिगत दृष्टिकोण है जिसमें उत्पादकों को उपभोक्ता-पश्चात उत्पादों के उपचार या निपटान के लिए एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाती है।
- रासायनिक पुनर्चक्रण उन प्रक्रियाओं को संदर्भित करता है जो प्लास्टिक कचरे को उसके घटक मोनोमर्स या अन्य मूल्यवान रसायनों में परिवर्तित करती हैं, जिससे इसे नए प्लास्टिक बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
- भारत में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन को प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 (और बाद के संशोधनों) द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- पर्यावरण स्थिरता और प्रदूषण नियंत्रण: यह पहल उन्नत पुनर्चक्रण और चक्रीयता को बढ़ावा देकर, लैंडफिल के बोझ को काफी कम करके, माइक्रोप्लास्टिक संदूषण को कम करके, और कुशल सामग्री पुनर्प्राप्ति के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करके बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण संकट को सीधे संबोधित करती है।
- आर्थिक अवसर और नवाचार: उन्नत पुनर्चक्रण क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देकर और टिकाऊ पॉलिमर में अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करके, भारत प्लास्टिक चक्र पहल नए आर्थिक रास्ते बनाती है, हरित नौकरियों को बढ़ावा देती है, और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए नवीन समाधानों में भारत को एक अग्रणी के रूप में स्थापित करती है, जिससे एक मजबूत हरित अर्थव्यवस्था में योगदान मिलता है।
पेज 30📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकापर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
29. राष्ट्रीय हरित ग्रिड पहल (एनजीजीआई) का शुभारंभ: जलवायु लचीलेपन के लिए विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण
चर्चा में क्यों? (Why in News)
विद्युत मंत्रालय ने नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सहयोग से राष्ट्रीय हरित ग्रिड पहल (एनजीजीआई) का शुभारंभ किया है। इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय ग्रिड में विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के एकीकरण में तेजी लाना, ग्रिड स्थिरता को बढ़ाना, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति लचीलापन बढ़ाना और विशेष रूप से दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा पहुंच को बढ़ावा देना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •स्मार्ट ग्रिड प्रौद्योगिकी एकीकरण: नवीकरणीय ऊर्जा प्रवाह को अनुकूलित करने और ग्रिड के उतार-चढ़ाव को प्रबंधित करने के लिए सेंसर, स्वचालित नियंत्रण और वास्तविक समय डेटा एनालिटिक्स सहित उन्नत स्मार्ट ग्रिड प्रौद्योगिकियों का परिनियोजन।
- •विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा (डीआरई) माइक्रोग्रिड्स: दूरदराज और आपदा-प्रवण क्षेत्रों में डीआरई-आधारित माइक्रोग्रिड्स की स्थापना को बढ़ावा देना और समर्थन करना, ऊर्जा सुरक्षा और स्थानीय लचीलापन बढ़ाना।
- •ऊर्जा भंडारण समाधान: रुक-रुक कर नवीकरणीय उत्पादन को संतुलित करने और निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों (जैसे, बैटरी भंडारण, पंपड हाइड्रो) को एकीकृत करने के लिए प्रोत्साहन और नीतियां।
- •मांग-पक्ष प्रबंधन (डीएसएम) कार्यक्रम: उपभोक्ताओं को उनकी ऊर्जा खपत को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने, चरम भार मांगों को कम करने और ग्रिड दक्षता में सुधार करने के लिए प्रोत्साहित करने वाले कार्यक्रमों का कार्यान्वयन।
- •जलवायु-लचीला ग्रिड अवसंरचना: चरम मौसम की घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के लिए पारेषण और वितरण अवसंरचना को उन्नत करना, जलवायु-प्रेरित disruptions के दौरान अबाधित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- एक 'स्मार्ट ग्रिड' एक विद्युत ग्रिड है जिसमें स्मार्ट मीटर, स्मार्ट उपकरण, नवीकरणीय ऊर्जा संसाधन और ऊर्जा कुशल संसाधन सहित विभिन्न प्रकार के संचालन और ऊर्जा उपाय शामिल होते हैं।
- विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा (डीआरई) उन ऊर्जा प्रणालियों को संदर्भित करती है जो उपभोग के स्थान के करीब बिजली उत्पन्न करती हैं, अक्सर छोटे पैमाने पर।
- भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना है।
- सौर और पवन जैसे रुक-रुक कर चलने वाले नवीकरणीय स्रोतों को ग्रिड में एकीकृत करने के लिए ऊर्जा भंडारण महत्वपूर्ण है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और शमन: एनजीजीआई नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने में वृद्धि के माध्यम से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने और जलवायु-प्रेरित व्यवधानों के खिलाफ अधिक लचीला और विकेन्द्रीकृत ऊर्जा अवसंरचना का निर्माण करके अनुकूलन क्षमता को बढ़ाने दोनों के द्वारा भारत के जलवायु कार्रवाई लक्ष्यों में सीधे योगदान देता है।
- ऊर्जा सुरक्षा और ग्रामीण विकास: डीआरई और माइक्रोग्रिड को बढ़ावा देकर, यह पहल दूरदराज के क्षेत्रों में ऊर्जा गरीबी को संबोधित करती है, आउटेज के प्रति कमजोर केंद्रीकृत ग्रिड अवसंरचना पर निर्भरता कम करती है, और स्थायी ऊर्जा पहुंच के माध्यम से स्थानीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देती है, जिससे राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है।
पेज 31📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकापर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
30. प्रोजेक्ट चीता 2.0 का शुभारंभ: मेटापॉपुलेशन स्थिरता के लिए संरक्षण क्षेत्रों का विस्तार और आनुवंशिक प्रबंधन
चर्चा में क्यों? (Why in News)
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 'प्रोजेक्ट चीता 2.0' का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ किया है, जो भारत के महत्वाकांक्षी चीता पुनर्परिचय कार्यक्रम के अगले महत्वपूर्ण चरण को दर्शाता है। यह चरण मुख्य रूप से अतिरिक्त चीता संरक्षण स्थलों की स्थापना और मेटापॉपुलेशन की दीर्घकालिक व्यवहार्यता और आनुवंशिक विविधता सुनिश्चित करने के लिए उन्नत आनुवंशिक प्रबंधन रणनीतियों को लागू करने पर केंद्रित है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •दो नए उपयुक्त स्थलों की पहचान: व्यापक पारिस्थितिक आकलन के बाद, मध्य प्रदेश और राजस्थान में दो नए स्थलों को चीता पुनर्परिचय के लिए नामित किया गया है, ताकि आबादी को वितरित किया जा सके और जोखिमों को कम किया जा सके।
- •उन्नत आनुवंशिक प्रबंधन प्रोटोकॉल: चीता आबादी के आनुवंशिक स्वास्थ्य की निगरानी और प्रबंधन के लिए एक व्यापक योजना शुरू की गई है, जिसमें नियंत्रित प्रजनन और जीन पूल विविधीकरण की रणनीतियाँ शामिल हैं।
- •बेहतर पर्यावास प्रबंधन और शिकार आधार बहाली: मौजूदा और नए दोनों संरक्षण क्षेत्रों में पर्यावास की गुणवत्ता में सुधार और शिकार घनत्व बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण निवेश की योजना बनाई गई है।
- •सामुदायिक जुड़ाव और इकोटूरिज्म विकास: संरक्षण प्रयासों में स्थानीय समुदायों को शामिल करने पर विशेष ध्यान दिया गया है, साथ ही परियोजना के लिए आर्थिक लाभ और समर्थन उत्पन्न करने के लिए जिम्मेदार इकोटूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है।
- •ज्ञान विनिमय के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: चल रहे तकनीकी सहायता, अनुसंधान और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान के लिए अफ्रीकी संरक्षण विशेषज्ञों और संस्थानों के साथ साझेदारी को मजबूत करना।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- प्रोजेक्ट चीता को शुरू में 2022 में लॉन्च किया गया था, जिसमें चीतों का पहला बैच नामीबिया से मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में स्थानांतरित किया गया था।
- एक 'मेटापॉपुलेशन' एक ही प्रजाति की स्थानिक रूप से अलग-अलग आबादी के समूह को संदर्भित करता है जो किसी स्तर पर बातचीत करते हैं।
- आईयूसीएन रेड लिस्ट चीतों (एसिनोनिक्स जुबेटस) को 'असुरक्षित' के रूप में वर्गीकृत करती है।
- आनुवंशिक विविधता किसी प्रजाति के दीर्घकालिक अस्तित्व और पर्यावरणीय परिवर्तनों और बीमारियों के प्रति लचीलेपन के लिए महत्वपूर्ण है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- जैव विविधता संरक्षण और पारिस्थितिक बहाली: प्रोजेक्ट चीता 2.0 भारत की अपनी खोई हुई पारिस्थितिक विरासत को बहाल करने और शीर्ष शिकारी आबादी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जो पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य और संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह अंतरमहाद्वीपीय प्रजाति पुनर्परिचय प्रयासों के लिए एक मॉडल के रूप में भी कार्य करता है।
- सतत विकास और सामुदायिक आजीविका: यह परियोजना इकोटूरिज्म को बढ़ावा देकर, रोजगार के अवसर पैदा करके और समुदायों को सक्रिय हितधारकों के रूप में शामिल करके संरक्षण को स्थानीय सामाजिक-आर्थिक विकास के साथ एकीकृत करती है, जिससे मानव आबादी और वन्यजीवों के बीच एक सहजीवी संबंध बनता है।
पेज 32📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
31. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जीनोमिक्स ने सटीक स्वास्थ्य और रोग निगरानी के लिए 'भारतजेनसेक 2.0' लॉन्च किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
जैव प्रौद्योगिकी विभाग के तहत एक स्वायत्त संस्थान, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जीनोमिक्स (NIBMG) ने आज 'भारतजेनसेक 2.0' लॉन्च किया, जो भारत भर में जीनोमिक अनुक्रमण प्रयासों का विस्तार करने के लिए एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय कार्यक्रम है। इस पहल का उद्देश्य सटीक स्वास्थ्य, दवा खोज और महामारी की तैयारी को आगे बढ़ाने के लिए विविध भारतीय आबादी के एक व्यापक संदर्भ जीनोम डेटासेट का निर्माण करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •भारतजेनसेक 2.0 अतिरिक्त 100,000 पूरे मानव जीनोम का अनुक्रमण करेगा, जिससे राष्ट्रीय पहल के तहत अनुक्रमित कुल जीनोम 200,000 से अधिक हो जाएंगे।
- •यह भारत के भीतर विभिन्न जातीय और भौगोलिक समूहों में प्रचलित समृद्ध आनुवंशिक विविधता को पकड़ने पर केंद्रित है, जो रोग संवेदनशीलता और दवा प्रतिक्रिया को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
- •कार्यक्रम जीनोमिक डेटा विश्लेषण के लिए उन्नत एआई और मशीन लर्निंग टूल को एकीकृत करता है, जिससे मधुमेह, हृदय रोग और कुछ कैंसर जैसी प्रचलित बीमारियों से जुड़े आनुवंशिक मार्करों की पहचान में तेजी आती है।
- •उत्पन्न डेटा को सुरक्षित रूप से संग्रहीत किया जाएगा और सख्त नैतिक दिशानिर्देशों के तहत शोधकर्ताओं और दवा कंपनियों के लिए सुलभ बनाया जाएगा, जिससे स्वदेशी दवा विकास और व्यक्तिगत चिकित्सा को बढ़ावा मिलेगा।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- भारतजेनसेक 2.0 नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जीनोमिक्स (NIBMG) की एक पहल है।
- भारत में पूरे मानव जीनोम अनुक्रमण का विस्तार करना है।
- NIBMG जैव प्रौद्योगिकी विभाग के तहत कार्य करता है।
- आनुवंशिक विविधता और सटीक स्वास्थ्य पर केंद्रित है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **सटीक चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवा इक्विटी को आगे बढ़ाना:** भारतजेनसेक 2.0 भारतीय आबादी के अनुरूप सटीक चिकित्सा की ओर संक्रमण के लिए महत्वपूर्ण है। विशिष्ट आनुवंशिक पूर्वनिवृत्ति और दवा प्रतिक्रियाओं को समझकर, यह अधिक प्रभावी उपचार और न्यायसंगत स्वास्थ्य सेवा परिणामों को जन्म दे सकता है, 'एक आकार सभी के लिए' दृष्टिकोण को कम कर सकता है।
- **महामारी की तैयारी और बायोमेडिकल अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना:** विस्तारित जीनोमिक डेटाबेस भविष्य की महामारी की तैयारी के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति होगी, जो रोगजनक विशेषताओं और मेजबान प्रतिक्रियाओं की तेजी से पहचान को सक्षम करेगा। यह दवा खोज, निदान और जैव प्रौद्योगिकी नवाचारों में निवेश को आकर्षित करते हुए भारत के बायोमेडिकल अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को भी महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करेगा।
पेज 33📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
32. इसरो ने 'ध्रुव-1' का प्रक्षेपण किया: जलवायु लचीलेपन के लिए ऑनबोर्ड एआई के साथ उन्नत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से एक उन्नत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (EOS) 'ध्रुव-1' का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। इस अत्याधुनिक उपग्रह में परिष्कृत ऑनबोर्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) क्षमताएं शामिल हैं जिन्हें जलवायु लचीलेपन, आपदा प्रबंधन और सटीक कृषि के लिए वास्तविक समय डेटा प्रसंस्करण को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •ध्रुव-1 में उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले मल्टी-स्पेक्ट्रल और हाइपर-स्पेक्ट्रल कैमरे हैं, साथ ही सभी मौसम में इमेजिंग के लिए उन्नत सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) भी है।
- •इसकी अनूठी विशेषता एज एआई प्रोसेसर का एकीकरण है जो महत्वपूर्ण निर्णय लेने में विलंबता को कम करते हुए, सीधे कक्षा में उपग्रह इमेजरी के वास्तविक समय विश्लेषण को सक्षम बनाता है।
- •उपग्रह ग्लेशियरों के पीछे हटने, वन आवरण में परिवर्तन, शहरी ताप द्वीपों और सटीक फसल स्वास्थ्य मूल्यांकन की निगरानी के लिए अमूल्य डेटा प्रदान करेगा।
- •यह भविष्य कहनेवाला विश्लेषण के लिए एआई का लाभ उठाते हुए बाढ़, सूखा और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं के लिए शुरुआती चेतावनी प्रणालियों में महत्वपूर्ण सहायता करेगा।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- ध्रुव-1 इसरो द्वारा प्रक्षेपित एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (EOS) है।
- इसमें ऑनबोर्ड डेटा विश्लेषण के लिए एज एआई प्रोसेसर शामिल हैं।
- इसमें मल्टी-स्पेक्ट्रल, हाइपर-स्पेक्ट्रल कैमरे और SAR शामिल हैं।
- सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **आपदा तैयारी और जलवायु अनुकूलन में वृद्धि:** एआई द्वारा संचालित ध्रुव-1 की वास्तविक समय डेटा प्रसंस्करण और भविष्य कहनेवाला क्षमताएं, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन के लिए भारत की क्षमता में एक महत्वपूर्ण छलांग का प्रतिनिधित्व करती हैं। यह अधिक समय पर और प्रभावी प्रतिक्रियाओं को सक्षम बनाता है, जिससे जीवन और आजीविका बचती है।
- **अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और डिजिटल अर्थव्यवस्था में 'आत्मनिर्भर भारत' को बढ़ावा:** ध्रुव-1 का स्वदेशी विकास, विशेष रूप से इसकी ऑनबोर्ड एआई क्षमताएं, उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता को प्रदर्शित करती हैं। उत्पन्न सटीक डेटा स्मार्ट कृषि, शहरी नियोजन और पर्यावरणीय शासन जैसे क्षेत्रों का समर्थन करते हुए डिजिटल अर्थव्यवस्था को और सशक्त करेगा।
पेज 34📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
33. भारत ने 'नेत्रा-क्वांटम' का अनावरण किया: रणनीतिक अनुप्रयोगों के लिए स्वदेशी क्वांटम सुरक्षित संचार नेटवर्क
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारत सरकार ने, दूरसंचार विभाग (DoT) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के माध्यम से, आज भारत के पहले पूर्णतः स्वदेशी क्वांटम सुरक्षित संचार नेटवर्क 'नेत्रा-क्वांटम' के सफल संचालन की घोषणा की। इस रणनीतिक बुनियादी ढांचे का उद्देश्य उन्नत साइबर खतरों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के लचीलेपन को मजबूत करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •नेत्रा-क्वांटम (नेशनल एंटैंगलमेंट-बेस्ड ट्रस्ट एंड रेजिलिएंस आर्किटेक्चर - क्वांटम) एक सुरक्षित संचार रीढ़ है जो क्वांटम कुंजी वितरण (QKD) प्रोटोकॉल का उपयोग करता है।
- •राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) के तहत विकसित, यह अत्याधुनिक स्वदेशी क्वांटम हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को एकीकृत करता है, जो शास्त्रीय कम्प्यूटेशनल हमलों के लिए अभेद्य एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन सुनिश्चित करता है।
- •प्रारंभिक चरण दिल्ली-एनसीआर में प्रमुख रणनीतिक स्थानों को जोड़ता है, संवेदनशील सरकारी संचार के लिए एक अत्यधिक सुरक्षित चैनल प्रदान करता है।
- •भविष्य की विस्तार योजनाओं में नेटवर्क को रक्षा, वित्त और ऊर्जा जैसे अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक विस्तारित करना और उन्नत क्वांटम इंटरनेट क्षमताओं की खोज करना शामिल है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) का लक्ष्य भारत में क्वांटम प्रौद्योगिकी के विकास को बढ़ावा देना है।
- क्वांटम कुंजी वितरण (QKD) क्रिप्टोग्राफिक कुंजियों को सुरक्षित रूप से स्थापित करने के लिए क्वांटम यांत्रिकी के सिद्धांतों का उपयोग करता है।
- नेत्रा-क्वांटम DoT और DST की एक पहल है।
- स्वदेशी रूप से विकसित हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर परियोजना के केंद्र में हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **रणनीतिक स्वायत्तता और साइबर लचीलापन:** नेत्रा-क्वांटम विदेशी एन्क्रिप्शन प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता कम करके और क्वांटम कंप्यूटिंग-आधारित डिक्रिप्शन खतरों के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर लचीलेपन को मजबूत करके डिजिटल संचार में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाता है।
- **स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास और आर्थिक प्रभाव को बढ़ावा:** इस नेटवर्क की सफल तैनाती क्वांटम प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी अनुसंधान और विकास के लिए एक प्रमुख मील का पत्थर है, जो संभावित रूप से एक घरेलू क्वांटम उद्योग को बढ़ावा देगा और उच्च कुशल रोजगार के अवसर पैदा करेगा। यह महत्वपूर्ण तकनीकी डोमेन में 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण के साथ संरेखित है।
पेज 35📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासरकारी योजनाएं एवं नीतियां
34. सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा कवरेज हेतु 'प्रधानमंत्री जन सुरक्षा समग्र योजना' (PMJSSY) का शुभारंभ
चर्चा में क्यों? (Why in News)
सभी नागरिकों, विशेषकर असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवरेज प्रदान करने के उद्देश्य से, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने आज 'प्रधानमंत्री जन सुरक्षा समग्र योजना' (PMJSSY) का शुभारंभ किया। यह ऐतिहासिक पहल एक एकीकृत ढांचे के तहत मौजूदा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को एकीकृत और विस्तारित करती है, जिससे पहुंच सरल हो जाती है और देश भर में लाभों की सुवाह्यता सुनिश्चित होती है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •निर्बाध पंजीकरण, अंशदान प्रबंधन और दावा निपटान के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म (जन सुरक्षा पोर्टल) का निर्माण, जिससे लाभ पूरे देश में सुलभ हो सके।
- •सभी असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए अनिवार्य नामांकन, आय स्तर के आधार पर लचीले अंशदान विकल्प और महत्वपूर्ण सरकारी सह-अंशदान के साथ।
- •वृद्धावस्था पेंशन (एनपीएस-लाइट के समान), व्यापक विकलांगता बीमा, मातृत्व लाभ और गंभीर बीमारियों के लिए स्वास्थ्य बीमा सहित बढ़े हुए लाभ।
- •गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए विशेष प्रावधान, एक समर्पित उप-योजना के माध्यम से औपचारिक सामाजिक सुरक्षा जाल में उनके समावेशन को सुनिश्चित करना।
- •लाभों की सुवाह्यता यह सुनिश्चित करती है कि श्रमिक अपनी संचित सामाजिक सुरक्षा पात्रता खोए बिना राज्यों या नौकरियों में स्थानांतरित हो सकें।
- •प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) और पारदर्शी, रिसाव-मुक्त प्रशासन के लिए आधार और जन धन खातों के साथ एकीकरण।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- PMJSSY को श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा वित्त मंत्रालय और नीति आयोग के समन्वय से लागू किया गया है।
- इसका लक्ष्य कृषि मजदूरों, स्ट्रीट वेंडरों, घरेलू कामगारों और गिग श्रमिकों सहित सभी असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा कवरेज प्रदान करना है।
- यह पीएम-एसवाईएम, पीएमजेजेबीवाई, पीएमएसबीवाई और एबी-पीएमजेएवाई जैसी विभिन्न मौजूदा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को एक ही ढांचे में समेकित करता है।
- कुशल वितरण के लिए एक एकीकृत डिजिटल पोर्टल और आधार-लिंक्ड लाभों की विशेषता है।
- सस्ती पहुंच सुनिश्चित करने के लिए पात्र लाभार्थियों के लिए सरकारी सह-अंशदान।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **कल्याणकारी राज्य और सामाजिक न्याय को मजबूत करना:** PMJSSY समाज के सबसे कमजोर वर्गों के लिए एक मजबूत सुरक्षा जाल प्रदान करके, सामाजिक न्याय और श्रम की गरिमा को बढ़ावा देकर एक कल्याणकारी राज्य के संवैधानिक जनादेश को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- **अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का औपचारिककरण और समावेशी विकास:** गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों सहित लाखों असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को एक औपचारिक सामाजिक सुरक्षा ढांचे के तहत लाकर, यह उन्हें मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में एकीकृत करने में मदद करता है, उनके जीवन स्तर में सुधार करता है और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है।
- **आर्थिक स्थिरता और मानव पूंजी विकास:** व्यापक सामाजिक सुरक्षा गरीबी और भेद्यता को कम करके व्यापक आर्थिक स्थिरता में योगदान करती है। स्वास्थ्य और आय सुरक्षा सुनिश्चित करके, यह मानव पूंजी विकास को बढ़ाती है, जिससे राष्ट्रीय विकास के लिए अधिक उत्पादक और स्वस्थ कार्यबल का निर्माण होता है।
पेज 36📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासरकारी योजनाएं एवं नीतियां
35. कौशल विकास मंत्रालय ने 'राष्ट्रीय डिजिटल कौशल एवं रोजगार मिशन' (NDSEM) का शुभारंभ किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भविष्य के लिए तैयार कार्यबल के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने आज 'राष्ट्रीय डिजिटल कौशल एवं रोजगार मिशन' (NDSEM) का शुभारंभ किया। इस महत्वाकांक्षी मिशन का उद्देश्य लाखों भारतीय युवाओं को कल की नौकरियों के लिए महत्वपूर्ण उन्नत डिजिटल कौशल से लैस करना है, जो वैश्विक और घरेलू डिजिटल अर्थव्यवस्था की बढ़ती मांगों को पूरा करेगा।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल), ब्लॉकचेन, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों में व्यापक प्रशिक्षण मॉड्यूल।
- •प्रमुख शहरों में उद्योग भागीदारों और अकादमिक संस्थानों के सहयोग से डिजिटल स्किलिंग सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस (DSCoE) की स्थापना।
- •टियर-2 और टियर-3 शहरों, ग्रामीण क्षेत्रों और वंचित समुदायों के युवाओं पर विशेष ध्यान, उन्नत डिजिटल शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करना।
- •पाठ्यक्रमों के सफल समापन पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त डिजिटल प्रमाणन का प्रावधान, वैश्विक रोजगार क्षमता को बढ़ाना।
- •कुशल पेशेवरों के लिए वास्तविक समय की उद्योग मांग के साथ एकीकृत समर्पित जॉब पोर्टल, उद्योग इंटर्नशिप और प्लेसमेंट सहायता।
- •'सीखें और कमाएं' मॉडल सहित ऑनलाइन, मिश्रित और अनुभवात्मक सीखने के प्रारूपों के माध्यम से शिक्षार्थियों के लिए लचीलापन।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- NDSEM कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) की एक प्रमुख पहल है।
- मिशन का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में 5 मिलियन से अधिक युवाओं को उन्नत डिजिटल प्रौद्योगिकियों में कौशल और पुनः कौशल प्रदान करना है।
- प्रमुख साझेदारियों में नैसकॉम, विभिन्न तकनीकी दिग्गज और वैश्विक प्रमाणन निकाय शामिल हैं।
- इसमें बुनियादी ढांचे, सामग्री विकास और प्रशिक्षक परिनियोजन के लिए एक मजबूत सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल शामिल है।
- भारत के वैश्विक डिजिटल प्रतिभा केंद्र बनने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देना है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **कौशल अंतराल को पाटना और रोजगार क्षमता बढ़ाना:** NDSEM सीधे डिजिटल क्षेत्र में महत्वपूर्ण कौशल अंतराल को संबोधित करता है, जिससे भारत का विशाल युवा कार्यबल घरेलू और विश्व स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनता है, और उच्च-मांग वाले क्षेत्रों में उनकी रोजगार क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
- **आर्थिक विकास के लिए जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाना:** भविष्य के लिए तैयार कौशल पर ध्यान केंद्रित करके, मिशन यह सुनिश्चित करता है कि भारत की बड़ी युवा आबादी एक जनसांख्यिकीय चुनौती से एक महत्वपूर्ण आर्थिक संपत्ति में बदल जाए, जो नवाचार, उत्पादकता को बढ़ावा दे और समग्र राष्ट्रीय जीडीपी वृद्धि में योगदान दे।
- **समावेशी डिजिटल परिवर्तन और डिजिटल डिवाइड को कम करना:** वंचित क्षेत्रों और समुदायों तक पहुंचने पर जोर, उच्च-मांग वाले कौशल तक समान पहुंच को बढ़ावा देता है, समावेशी विकास को बढ़ावा देता है, डिजिटल डिवाइड को कम करता है, और समाज के एक बड़े वर्ग को डिजिटल साक्षरता और उन्नत दक्षताओं के साथ सशक्त बनाता है।
पेज 37📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासरकारी योजनाएं एवं नीतियां
36. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जलवायु-अनुकूल कृषि हेतु 'राष्ट्रीय जलवायु अनुकूल कृषि योजना' (RJAKY) को दी मंज़ूरी
चर्चा में क्यों? (Why in News)
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति भारतीय कृषि के लचीलेपन को बढ़ाने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में 'राष्ट्रीय जलवायु अनुकूल कृषि योजना' (RJAKY) के शुभारंभ को मंज़ूरी दी। इस व्यापक योजना का उद्देश्य किसानों को स्थायी और जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए ज्ञान और संसाधन प्रदान करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •बदलते मौसम के पैटर्न और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल जलवायु-लचीली फसल किस्मों को बढ़ावा देना।
- •पानी के उपयोग को अनुकूलित करने के लिए सूक्ष्म-सिंचाई प्रणालियों (ड्रिप, स्प्रिंकलर) और सटीक कृषि प्रौद्योगिकियों पर सब्सिडी।
- •जैविक खेती प्रथाओं, संतुलित पोषक तत्व उपयोग और फसल अवशेष प्रबंधन के माध्यम से मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन पर जोर।
- •जिला और ब्लॉक स्तर पर किसानों के लिए एक वास्तविक समय जलवायु सूचना और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (CIEWS) का विकास।
- •किसानों के लिए जलवायु-अनुकूल तकनीकों, डिजिटल उपकरणों और बाजार संबंधों पर क्षमता निर्माण और व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम।
- •किसानों के कल्याण में सुधार और सहक्रियात्मक लाभों के लिए पीएम-किसान और पीएमएफबीवाई जैसी मौजूदा कृषि योजनाओं के साथ एकीकरण।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- RJAKY का शुभारंभ कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा किया गया है।
- यह योजना शुरू में भेद्यता आकलन के आधार पर पहचाने गए 100 जलवायु-संवेदनशील जिलों पर केंद्रित है।
- इसका उद्देश्य कृषि उत्सर्जन को 15% तक कम करना और कृषि प्रणालियों में कार्बन प्रच्छादन को बढ़ाना है।
- उच्च-मूल्य वाली, जलवायु-लचीली फसलों में कृषि विविधीकरण के लिए वित्तीय सहायता और तकनीकी सहायता प्रदान करता है।
- इसमें आईसीएआर, कृषि विज्ञान केंद्र और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के साथ एक बहु-हितधारक दृष्टिकोण शामिल है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **जलवायु भेद्यता और खाद्य सुरक्षा का समाधान:** RJAKY सीधे जलवायु परिवर्तन के प्रति भारतीय कृषि की बढ़ती भेद्यता का सामना करता है, अनुकूलन और लचीलेपन को बढ़ावा देकर किसानों के लिए दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा और आय स्थिरता सुनिश्चित करता है।
- **स्थायी कृषि पद्धतियाँ और पर्यावरणीय लाभ:** सूक्ष्म-सिंचाई, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और जलवायु-लचीली फसलों जैसी स्थायी प्रथाओं को बढ़ावा देकर, यह योजना पर्यावरणीय स्थिरता, जल संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
- **तकनीकी अपनाना और ग्रामीण आर्थिक विकास:** जलवायु पूर्वानुमान और सटीक कृषि के लिए एआई/एमएल सहित आधुनिक प्रौद्योगिकियों पर जोर, कृषि क्षेत्र का आधुनिकीकरण करेगा, इनपुट लागत को कम करेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में नए आर्थिक अवसर पैदा करेगा।
पेज 38📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासामाजिक मुद्दे
37. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने वरिष्ठ नागरिक कल्याण के लिए एकीकृत राष्ट्रीय कार्य योजना 2026-2030 का अनावरण किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
बढ़ती उम्रदराज आबादी की ओर जनसांख्यिकीय बदलाव को पहचानते हुए, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने आज "वरिष्ठ नागरिक कल्याण के लिए एकीकृत राष्ट्रीय कार्य योजना (INAP-SCW) 2026-2030" का शुभारंभ किया। इस महत्वाकांक्षी बहु-क्षेत्रीय रोडमैप का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक सहायक और समावेशी पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है, जो अगले पांच वर्षों में उनके स्वास्थ्य, आर्थिक सुरक्षा, सामाजिक भागीदारी और सुरक्षा आवश्यकताओं को व्यापक रूप से संबोधित करेगा।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •विशेष क्लीनिक और गृह-आधारित देखभाल मॉडल सहित जराचिकित्सा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर ध्यान।
- •पेंशन और बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत करना, और वरिष्ठ-अनुकूल रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना।
- •सांस्कृतिक, मनोरंजक और अंतर-पीढ़ीगत कार्यक्रमों के माध्यम से सक्रिय उम्र बढ़ने को बढ़ावा देना।
- •वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक राष्ट्रीय हेल्पलाइन स्थापित करना और दुर्व्यवहार और परित्याग के खिलाफ कानूनी सुरक्षा को मजबूत करना।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- INAP-SCW 2026-2030 सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा शुरू की गई है।
- यह वरिष्ठ नागरिक कल्याण के लिए एक बहु-क्षेत्रीय कार्य योजना है जो पांच साल की अवधि को कवर करती है।
- यह योजना बुजुर्ग आबादी के लिए स्वास्थ्य, आर्थिक सुरक्षा, सामाजिक भागीदारी और सुरक्षा को समाहित करती है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **जनसांख्यिकीय बदलाव और सामाजिक चुनौतियों का समाधान:** चूंकि भारत एक वृद्ध समाज में बदल रहा है, INAP-SCW वरिष्ठ नागरिकों के ज्ञान और अनुभव का लाभ उठाने के लिए महत्वपूर्ण है, साथ ही बुजुर्ग आबादी से जुड़ी सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों को कम करता है। यह सक्रिय और स्वस्थ उम्र बढ़ने को बढ़ावा देकर 'बोझ' से 'संपत्ति' में कथा को बदलता है, संभावित रूप से अर्थव्यवस्था और समाज में योगदान देता है।
- **एकीकृत दृष्टिकोण और कार्यान्वयन की जटिलताएँ:** विभिन्न मंत्रालयों और हितधारकों को शामिल करने वाला योजना का बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण इसकी ताकत है। हालांकि, विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में निर्बाध समन्वय, संसाधन आवंटन और प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना जटिल होगा। सफलता वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान करने और उन्हें एकीकृत करने की दिशा में एक सामाजिक मानसिकता परिवर्तन को बढ़ावा देने पर भी निर्भर करेगी, संस्थागत देखभाल से हटकर समुदाय-आधारित समर्थन की ओर बढ़ना।
पेज 39📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासामाजिक मुद्दे
38. शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफ-एसई) 2.0 के कार्यान्वयन दिशानिर्देश जारी किए
चर्चा में क्यों? (Why in News)
शिक्षा मंत्रालय ने आज स्कूल शिक्षा के लिए अद्यतन राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफ-एसई) 2.0 के लिए व्यापक कार्यान्वयन दिशानिर्देश जारी किए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित, एनसीएफ-एसई 2.0 का उद्देश्य भारत में स्कूली शिक्षा के सभी चरणों में शैक्षणिक दृष्टिकोण, मूल्यांकन विधियों और समग्र सीखने के अनुभव में क्रांति लाना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •कला, खेल और व्यावसायिक विषयों को एकीकृत करते हुए बहु-विषयक और समग्र शिक्षा पर जोर।
- •रटने के बजाय योग्यता-आधारित शिक्षा और आलोचनात्मक सोच पर ध्यान केंद्रित करना।
- •मध्य विद्यालय से छात्रों के लिए लचीले सीखने के रास्ते और पसंद-आधारित पाठ्यक्रम का परिचय।
- •मूल्यांकन पैटर्न में सुधार, जिसमें सतत और व्यापक मूल्यांकन तथा व्यावहारिक अनुप्रयोग पर अधिक जोर शामिल है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- एनसीएफ-एसई 2.0 राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप है।
- यह मूलभूत से माध्यमिक स्तर तक स्कूली शिक्षा के सभी चरणों को कवर करता है।
- मुख्य फोकस क्षेत्रों में बहु-विषयक शिक्षा, योग्यता-आधारित शिक्षा और मूल्यांकन सुधार शामिल हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **मानव पूंजी विकास के लिए परिवर्तनकारी क्षमता:** एनसीएफ-एसई 2.0 भारत की शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी के कौशल को बढ़ावा देने वाली प्रणाली में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता और अंतःविषय दृष्टिकोणों को बढ़ावा देकर, इसका उद्देश्य एक कुशल कार्यबल और सूचित नागरिकता विकसित करना है, जो भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए महत्वपूर्ण है।
- **कार्यान्वयन और इक्विटी में चुनौतियाँ:** जबकि ढाँचा प्रगतिशील है, इसका सफल कार्यान्वयन पर्याप्त शिक्षक प्रशिक्षण, मजबूत बुनियादी ढाँचे और विविध सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करने पर निर्भर करता है। ऑनलाइन शिक्षण घटकों के लिए डिजिटल डिवाइड को पाटना और शैक्षिक संसाधनों में क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करना एनसीएफ-एसई 2.0 के दृष्टिकोण को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
पेज 40📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासामाजिक मुद्दे
39. ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए राष्ट्रीय डिजिटल सहेली योजना का शुभारंभ
चर्चा में क्यों? (Why in News)
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से आज "राष्ट्रीय डिजिटल सहेली योजना" का शुभारंभ किया। इस अखिल भारतीय पहल का उद्देश्य ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की महिलाओं के लिए डिजिटल साक्षरता बढ़ाने, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करके डिजिटल लिंग अंतर को पाटना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •अगले तीन वर्षों में 5 करोड़ ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल साक्षरता प्रशिक्षण प्रदान करने का लक्ष्य।
- •मोबाइल बैंकिंग, ई-गवर्नेंस सेवाओं, ऑनलाइन उद्यमिता और साइबर सुरक्षा जागरूकता पर ध्यान केंद्रित।
- •"डिजिटल सहेलियों" (प्रशिक्षित महिला स्वयंसेवकों) को स्थानीय प्रशिक्षक और सूत्रधार के रूप में सशक्त बनाना।
- •व्यापक पहुंच और स्थिरता के लिए मौजूदा स्वयं सहायता समूह (SHG) नेटवर्क के साथ एकीकरण।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- राष्ट्रीय डिजिटल सहेली योजना महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है।
- यह योजना पूरे भारत में ग्रामीण और अर्ध-शहरी महिलाओं को लक्षित करती है।
- "डिजिटल सहेलियाँ" कार्यक्रम के लिए प्रमुख समुदाय-स्तरीय कार्यान्वयनकर्ता और प्रशिक्षक हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **लैंगिक डिजिटल अंतर और सशक्तिकरण:** यह योजना लैंगिक डिजिटल अंतर को सीधे संबोधित करती है, जो महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण में एक महत्वपूर्ण बाधा है। डिजिटल साक्षरता बढ़ाकर, यह महिलाओं को महत्वपूर्ण जानकारी, वित्तीय सेवाओं और बाजार के अवसरों तक पहुंचने में सक्षम बनाती है, जिससे आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा मिलता है और भेद्यता कम होती है।
- **साइबर सुरक्षा और सामाजिक समावेशन:** कौशल विकास से परे, साइबर सुरक्षा पर जोर बढ़ते डिजिटल दुनिया में महत्वपूर्ण है। इसका उद्देश्य महिलाओं को ऑनलाइन शोषण और गलत सूचना से बचाना, एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण को बढ़ावा देना है। "डिजिटल सहेलियों" के माध्यम से योजना का समुदाय-संचालित मॉडल महिलाओं के बीच सामाजिक समावेशन और स्थानीय नेतृत्व को भी बढ़ावा देता है।
पेज 41📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासरकारी योजनाएं एवं नीतियां
40. नागरिक सेवा समाधान पोर्टल (NSSP) का अखिल भारतीय स्तर पर शुभारंभ, 1500 से अधिक सरकारी सेवाओं का एकीकरण
चर्चा में क्यों? (Why in News)
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने नागरिक सेवा समाधान पोर्टल (NSSP) के सफल अखिल भारतीय शुभारंभ की घोषणा की। यह एक महत्वाकांक्षी एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसे केंद्र और राज्य विभागों में 1500 से अधिक सरकारी सेवाओं के लिए एकल-खिड़की इंटरफ़ेस प्रदान करने हेतु डिज़ाइन किया गया है। इस पोर्टल में अब उन्नत AI-संचालित शिकायत निवारण और बहुभाषी सहायता शामिल है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •1500 से अधिक सरकारी सेवाओं (केंद्रीय, राज्य और स्थानीय निकाय) का एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर समेकन, जो वेब और मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से सुलभ है।
- •नागरिकों के प्रश्नों और शिकायतों के त्वरित और कुशल समाधान के लिए AI-संचालित चैटबॉट और स्वचालित शिकायत निवारण प्रणाली का एकीकरण।
- •विभिन्न सरकारी विभागों के बीच सूचनाओं के निर्बाध आदान-प्रदान को सक्षम करने वाला मजबूत डेटा इंटरऑपरेबिलिटी फ्रेमवर्क, साथ ही डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करना।
- •पोर्टल पर सूचीबद्ध सभी सेवाओं के लिए अनिवार्य सेवा स्तर समझौते (SLA), समय पर वितरण और जवाबदेही सुनिश्चित करना।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- नोडल मंत्रालय: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)।
- मुख्य उद्देश्य: सरकारी सेवाओं और शिकायत निवारण के लिए एकल-खिड़की पहुंच।
- प्रमुख विशेषता: AI-संचालित चैटबॉट और स्वचालित शिकायत निवारण।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- शासन और पारदर्शिता को बढ़ाना: NSSP नागरिकों के लिए जीवन को आसान बनाकर, पारदर्शिता को बढ़ावा देकर और सार्वजनिक सेवा वितरण के डिजिटल परिवर्तन के माध्यम से लालफीताशाही को कम करके 'न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन' की दिशा में एक महत्वपूर्ण छलांग का प्रतिनिधित्व करता है।
- चुनौतियाँ और अवसर: समाज के सभी वर्गों, विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल समावेशन सुनिश्चित करना, और नागरिकों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए सेवाओं को लगातार अद्यतन करना NSSP की दीर्घकालिक सफलता और अपनाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
पेज 42📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासरकारी योजनाएं एवं नीतियां
41. डिजिटल कृषि पर ध्यान केंद्रित करते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि उन्नति सहयोग अभियान (KUSA) के बड़े सुधार को मंजूरी दी
चर्चा में क्यों? (Why in News)
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज कृषि उन्नति सहयोग अभियान (KUSA) में महत्वपूर्ण संशोधनों और संवर्द्धनों को मंजूरी दी, जो कृषि विकास के लिए एक प्रमुख योजना है। संशोधित KUSA 2.0 अब डिजिटल प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करने, जलवायु-स्मार्ट कृषि को बढ़ावा देने और उन्नत बाजार संपर्कों के माध्यम से किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को मजबूत करने पर विशेष जोर देता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •मौसम, मृदा स्वास्थ्य, बाजार कीमतों और विस्तार सेवाओं पर वास्तविक समय डेटा प्रदान करने वाले एक नए 'डिजिटल कृषि प्लेटफॉर्म' घटक की शुरुआत।
- •सटीक कृषि, सूक्ष्म-सिंचाई और सूखा-प्रतिरोधी फसल किस्मों सहित जलवायु-लचीली कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए बढ़ी हुई वित्तीय सहायता।
- •कटाई के बाद के प्रबंधन, मूल्यवर्धन और सीधे बाजार पहुंच को बढ़ाने के लिए FPO के लिए विशेष इनक्यूबेशन सहायता और ऋण सुविधाएं।
- •कृषि विश्वविद्यालयों में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने तथा कृषि-स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने के लिए 'एग्री-टेक इनोवेशन हब' की स्थापना।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- नोडल मंत्रालय: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय।
- प्रमुख फोकस क्षेत्र: डिजिटल कृषि, जलवायु-स्मार्ट अभ्यास, FPO सुदृढ़ीकरण।
- नया घटक: 'डिजिटल कृषि प्लेटफॉर्म'। (Digital Krishi Platform)
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- किसानों की आय पर प्रभाव: KUSA 2.0 में सटीक कृषि के माध्यम से इनपुट लागत को कम करके, बाजार पहुंच में सुधार करके और कटाई के बाद के नुकसान को कम करके किसानों की आय को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने की क्षमता है, जिससे किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य में योगदान मिलेगा।
- स्थिरता और खाद्य सुरक्षा: जलवायु-लचीली कृषि और कुशल संसाधन उपयोग को बढ़ावा देकर, यह योजना जलवायु परिवर्तन के सामने कृषि स्थिरता और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा की महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान करती है।
पेज 43📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासरकारी योजनाएं एवं नीतियां
42. महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा देने की राष्ट्रीय योजना: महिला उद्यमिता प्रोत्साहन योजना (MUPY) का दूसरा चरण शुरू
चर्चा में क्यों? (Why in News)
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने SIDBI के सहयोग से महिला उद्यमिता प्रोत्साहन योजना (MUPY) के दूसरे चरण की शुरुआत की घोषणा की है। इस चरण में इसका वित्तीय परिव्यय बढ़ाया गया है और टियर-2 तथा टियर-3 शहरों में महिला नवप्रवर्तकों के लिए विशेष इनक्यूबेशन सेंटर शामिल करने हेतु इसकी पहुंच का विस्तार किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •महिला उद्यमियों के लिए वित्तीय सहायता में वृद्धि और ऋण पहुंच तंत्र का सरलीकरण।
- •कौशल विकास, बाजार संपर्क और प्रौद्योगिकी अपनाने पर केंद्रित 100 नए 'शक्ति केंद्र' (इनक्यूबेशन सेंटर) की स्थापना।
- •पारंपरिक और उभरते दोनों क्षेत्रों में महिलाओं को लक्षित करते हुए सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से मेंटरिंग और क्षमता निर्माण का प्रावधान।
- •महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों के उत्पादों और सेवाओं के लिए व्यापक बाजार पहुंच सुनिश्चित करने हेतु एक समर्पित ई-मार्केटप्लेस की शुरुआत।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- नोडल मंत्रालय: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय।
- कार्यान्वयन एजेंसी: राज्यों सरकारों के सहयोग से भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI)।
- मुख्य घटक: इनक्यूबेशन और कौशल विकास के लिए 'शक्ति केंद्र'।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- महत्व: MUPY चरण II महिला उद्यमियों के सामने आने वाली महत्वपूर्ण बाधाओं, जैसे वित्त, बाजार और कौशल तक पहुंच को संबोधित करता है, जिससे SDG 5 और SDG 8 के अनुरूप लैंगिक समानता, आर्थिक सशक्तिकरण और समावेशी विकास को बढ़ावा मिलता है।
- चुनौतियाँ और आगे का मार्ग: ग्रामीण और हाशिए पर पड़ी महिलाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करना, डिजिटल साक्षरता अंतराल को दूर करना और ऋण प्रवाह एवं व्यावसायिक विकास की प्रभावी निगरानी इसकी सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
पेज 44📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासामाजिक मुद्दे
43. बाल संरक्षण और पुनर्वास प्रणालियों को सुदृढ़ करने हेतु 'बाल जीवन धारा' अभियान का शुभारंभ
चर्चा में क्यों? (Why in News)
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने आज राष्ट्रव्यापी 'बाल जीवन धारा' अभियान का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य बाल संरक्षण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना, बाल श्रम का मुकाबला करना और भारत भर में कमजोर बच्चों के प्रभावी पुनर्वास तथा सामाजिक पुनर्एकीकरण को सुनिश्चित करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**एकीकृत बाल संरक्षण सेवाएँ:** बाल संरक्षण सेवाएँ (CPS) योजनाओं का विस्तार और सुदृढ़ीकरण, जिसमें बाल देखभाल संस्थानों (CCIs), फोस्टर केयर और गोद लेने के लिए बढ़ा हुआ समर्थन शामिल है।
- •**'शिक्षा और सुरक्षा' मॉड्यूल:** अभियान के भीतर एक विशेष मॉड्यूल का परिचय, जिसका उद्देश्य बचाए गए बाल श्रमिकों को सीधे औपचारिक शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण मार्गों से जोड़ना है, जिससे उनकी शैक्षिक निरंतरता सुनिश्चित हो सके।
- •**बाल ट्रैकिंग और निगरानी प्रणाली 2.0:** देखभाल और सुरक्षा की आवश्यकता वाले बच्चों की वास्तविक समय की ट्रैकिंग के लिए एक उन्नत डिजिटल प्लेटफॉर्म का कार्यान्वयन, बचाव और पुनर्वास के लिए अंतर-राज्य समन्वय को सुगम बनाना।
- •**सामुदायिक जागरूकता और रोकथाम:** बाल अधिकारों, बाल श्रम की बुराइयों और शोषण की रिपोर्टिंग के महत्व के बारे में समुदायों को संवेदनशील बनाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान, स्थानीय स्वशासन निकायों का लाभ उठाते हुए।
- •**पुनर्स्थापनात्मक न्याय और मनोसामाजिक समर्थन:** दुर्व्यवहार, शोषण और तस्करी के बाल पीड़ितों के लिए मनोसामाजिक परामर्श, कानूनी सहायता और पुनर्स्थापनात्मक न्याय तंत्र प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करना।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'बाल जीवन धारा' अभियान महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है।
- प्रमुख घटकों में 'शिक्षा और सुरक्षा' मॉड्यूल और बाल ट्रैकिंग और निगरानी प्रणाली 2.0 शामिल हैं।
- अभियान का उद्देश्य बाल संरक्षण को मजबूत करना, बाल श्रम का मुकाबला करना और पुनर्वास सुनिश्चित करना है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **बाल अधिकारों के लिए समग्र ढाँचा:** यह अभियान बाल अधिकारों की रक्षा के लिए भारत की प्रतिबद्धता (UNCRC और भारतीय संविधान के अनुसार) को दर्शाता है, एक व्यापक ढाँचा प्रदान करता है जो संरक्षण, शिक्षा और पुनर्वास को संबोधित करता है, दंडात्मक उपायों से हटकर बाल-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाता है।
- **बेहतर परिणामों के लिए अभिसरण और प्रौद्योगिकी:** विभिन्न बाल संरक्षण योजनाओं को एकीकृत करके, उन्नत डिजिटल ट्रैकिंग प्रणालियों का लाभ उठाकर और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देकर, 'बाल जीवन धारा' बेहतर समन्वय, पारदर्शिता और समय पर हस्तक्षेप सुनिश्चित करता है, जिससे कमजोर बच्चों के लिए परिणामों में उल्लेखनीय सुधार होता है।
पेज 45📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासामाजिक मुद्दे
44. नीति आयोग ने महिला कार्यबल भागीदारी को बढ़ावा देने हेतु 'लैंगिक समानता और आर्थिक समावेशन ढाँचा 2026' जारी किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
नीति आयोग ने आज अपने बहुप्रतीक्षित 'लैंगिक समानता और आर्थिक समावेशन ढाँचा 2026' को जारी किया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की श्रम बल भागीदारी, उद्यमिता और नेतृत्व भूमिकाओं को बढ़ाने के लिए रणनीतिक हस्तक्षेपों की रूपरेखा तैयार की गई है। यह ढाँचा सतत विकास लक्ष्य 5 को प्राप्त करने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण पर जोर देता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**महिलाओं के रोजगार हेतु क्षेत्र-विशिष्ट लक्ष्य:** STEM क्षेत्रों, विनिर्माण और उभरती डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए सकारात्मक कार्रवाई और कौशल विकास पहलों का प्रस्ताव करता है।
- •**'महिला आर्थिक सशक्तिकरण कोष' (MESK):** महिला उद्यमियों के लिए संपार्श्विक-मुक्त ऋण, इन्क्यूबेशन सहायता और बाजार संबंध प्रदान करने हेतु नीति आयोग द्वारा प्रस्तावित एक नया समर्पित कोष।
- •**लैंगिक-संवेदनशील बजटिंग दिशानिर्देश:** सभी मंत्रालयों और राज्य सरकारों को अपने वार्षिक बजट में लिंग-विशिष्ट आवंटन और प्रभाव आकलन को एकीकृत करने का आदेश देता है, जिससे समान संसाधन वितरण को बढ़ावा मिले।
- •**लचीली कार्य व्यवस्था और बाल देखभाल अवसंरचना:** महिलाओं की करियर प्रगति का समर्थन करने के लिए लचीले काम के घंटे, दूरस्थ कार्य विकल्पों और किफायती, गुणवत्तापूर्ण बाल देखभाल सुविधाओं के विस्तार को बढ़ावा देने वाली नीतियों की सिफारिश करता है।
- •**नेतृत्व विकास और परामर्श कार्यक्रम:** सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में नेतृत्व पदों के लिए महिलाओं की पहचान करने और उन्हें तैयार करने के लिए पहल, साथ ही परामर्श नेटवर्क।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'लैंगिक समानता और आर्थिक समावेशन ढाँचा 2026' नीति आयोग द्वारा जारी किया गया है।
- 'महिला आर्थिक सशक्तिकरण कोष' (MESK) महिला उद्यमियों के लिए एक प्रस्तावित समर्पित कोष है।
- यह ढाँचा STEM क्षेत्रों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने पर जोर देता है और लैंगिक-संवेदनशील बजटिंग को बढ़ावा देता है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **आर्थिक विकास और सतत विकास लक्ष्य प्राप्ति के लिए उत्प्रेरक:** महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ाना भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को प्राप्त करने, सकल घरेलू उत्पाद को बढ़ावा देने और सतत विकास लक्ष्य 5 (लैंगिक समानता) तथा अन्य संबंधित सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में प्रगति में तेजी लाने के लिए महत्वपूर्ण है।
- **समावेशी विकास के लिए प्रणालीगत सुधार:** कौशल विकास और वित्तीय पहुँच से लेकर बाल देखभाल सहायता और लैंगिक-संवेदनशील बजटिंग तक—ढाँचे का प्रणालीगत परिवर्तनों पर जोर, गहरी जड़ें जमा चुके प्रणालीगत बाधाओं को संबोधित करता है, जिससे अधिक समावेशी और टिकाऊ आर्थिक विकास सुनिश्चित होता है।
पेज 46📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासामाजिक मुद्दे
45. समग्र वृद्धजन देखभाल और सम्मान हेतु 'वरिष्ठ सम्मान' राष्ट्रीय कार्ययोजना 2026 का अनावरण
चर्चा में क्यों? (Why in News)
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने आज 'वरिष्ठ सम्मान' राष्ट्रीय कार्ययोजना 2026 का शुभारंभ किया, जो भारत की बढ़ती वृद्धजन आबादी के कल्याण, गरिमा और सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु एक व्यापक ढाँचा है। यह योजना वरिष्ठ नागरिकों के सामने आने वाली बहुआयामी चुनौतियों का समाधान करती है, जिसमें एकीकृत सेवाओं और अंतर-क्षेत्रीय समन्वय पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**एकीकृत जराचिकित्सा देखभाल सेवाएँ:** जिला अस्पतालों में विशेष जराचिकित्सा इकाइयों की स्थापना और डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना का लाभ उठाते हुए गृह-आधारित देखभाल मॉडल को बढ़ावा देना।
- •**डिजिटल शिकायत निवारण और जागरूकता मंच:** 'एल्डर कनेक्ट' का शुभारंभ, जो शिकायत निवारण, सरकारी योजनाओं तक पहुँच और वृद्धजनों के दुर्व्यवहार के विरुद्ध जागरूकता अभियानों के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल पोर्टल है।
- •**सक्रिय और स्वस्थ वृद्धावस्था को बढ़ावा:** वरिष्ठ नागरिकों को सशक्त बनाने और अंतर-पीढ़ीगत संबंधों को बढ़ावा देने के लिए कौशल विकास, आजीवन सीखने के अवसर और सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रमों हेतु पहल।
- •**देखभाल करने वालों हेतु क्षमता निर्माण:** औपचारिक और अनौपचारिक देखभाल करने वालों के लिए प्रशिक्षण और प्रमाणन कार्यक्रम, साथ ही गृह-आधारित देखभाल का विकल्प चुनने वाले परिवारों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन।
- •**वित्तीय सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण:** पेंशन योजनाओं, स्वास्थ्य बीमा और रिवर्स मॉर्गेज विकल्पों के लिए बढ़ी हुई पहुँच, जिससे वृद्धजनों के लिए आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित हो सके।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'वरिष्ठ सम्मान' राष्ट्रीय कार्ययोजना 2026 का शुभारंभ सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा किया गया है।
- प्रमुख पहलों में 'एल्डर कनेक्ट' डिजिटल पोर्टल और विशेष जराचिकित्सा इकाइयाँ शामिल हैं।
- यह योजना वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकीकृत जराचिकित्सा देखभाल, सक्रिय वृद्धावस्था और वित्तीय सुरक्षा पर बल देती है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **जनसांख्यिकीय संक्रमण की चुनौतियों का समाधान:** यह योजना भारत की बढ़ती वृद्धजन आबादी के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों को प्रबंधित करने, कल्याण से परे सशक्तिकरण और सक्रिय भागीदारी की ओर बढ़ने तथा एक मजबूत 'सिल्वर इकोनॉमी' में योगदान करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- **वृद्धजनों के कल्याण हेतु बहुआयामी दृष्टिकोण:** स्वास्थ्य, वित्तीय सुरक्षा, डिजिटल साक्षरता और सामाजिक समावेश को एकीकृत करके, यह योजना वृद्धजन देखभाल की जटिल चुनौतियों के लिए एक समग्र प्रतिक्रिया प्रदान करती है, निर्भरता को कम करती है और जीवन की गुणवत्ता बढ़ाती है।
पेज 47📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासरकारी योजनाएं एवं नीतियां
46. नीति आयोग द्वारा राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था संवर्धन योजना (NCEPS) नीति दस्तावेज जारी
चर्चा में क्यों? (Why in News)
नीति आयोग ने आज 'राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था संवर्धन योजना' (NCEPS) के लिए व्यापक नीति दस्तावेज जारी किया, जिसमें भारत को एक चक्रीय अर्थव्यवस्था मॉडल की ओर ले जाने के लिए एक बहुआयामी रणनीति की रूपरेखा दी गई है। यह दस्तावेज राज्य सरकारों, उद्योगों और शहरी स्थानीय निकायों के लिए संसाधन दक्षता, अपशिष्ट प्रबंधन और टिकाऊ उत्पादन-उपभोग पैटर्न पर विस्तृत दिशानिर्देश प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**'कम करें, पुनः उपयोग करें, पुनर्चक्रित करें, मरम्मत करें' (4R) सिद्धांत:** सभी क्षेत्रों में मौलिक 4R सिद्धांतों पर जोर देता है, उत्पाद की दीर्घायु, सामग्री दक्षता और पुनर्जनन को बढ़ावा देता है।
- •**क्षेत्र-विशिष्ट रोडमैप:** प्रमुख क्षेत्रों (जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव, वस्त्र, निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट, प्लास्टिक) की पहचान करता है और चक्रीयता के लिए अनुकूलित रोडमैप और लक्ष्य प्रदान करता है।
- •**विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) विस्तार:** अधिक उत्पाद श्रेणियों को कवर करने और कुशल संग्रह और पुनर्चक्रण तंत्र सुनिश्चित करने के लिए EPR ढाँचों को मजबूत और विस्तारित करने का प्रस्ताव करता है।
- •**नवाचार और प्रौद्योगिकी को अपनाना:** चक्रीय प्रौद्योगिकियों, सामग्री विज्ञान और अपशिष्ट ट्रैकिंग और संसाधन विनिमय के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देता है, तकनीकी अपनाने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करता है।
- •**अनौपचारिक क्षेत्र का औपचारिकरण:** अनौपचारिक अपशिष्ट बीनने वालों और पुनर्चक्रणकर्ताओं को क्षमता निर्माण, उचित मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा लाभों तक पहुंच के माध्यम से औपचारिक मूल्य श्रृंखला में एकीकृत करता है, चक्रीय अर्थव्यवस्था में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानता है।
- •**हरित सार्वजनिक खरीद:** केंद्र और राज्य स्तरों पर हरित सार्वजनिक खरीद नीतियों को अनिवार्य करता है, चक्रीय अर्थव्यवस्था सिद्धांतों के साथ उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं को प्राथमिकता देता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था संवर्धन योजना (NCEPS) नीति दस्तावेज नीति आयोग द्वारा जारी किया गया।
- यह 'कम करें, पुनः उपयोग करें, पुनर्चक्रित करें, मरम्मत करें' (4R) सिद्धांतों पर जोर देता है।
- NCEPS का उद्देश्य विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) ढांचे का विस्तार करना है।
- यह योजना अनौपचारिक अपशिष्ट बीनने वालों के औपचारिकरण को बढ़ावा देती है।
- हरित सार्वजनिक खरीद NCEPS का एक प्रमुख घटक है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **पर्यावरण स्थिरता और संसाधन सुरक्षा:** चर्चा करें कि NCEPS के माध्यम से चक्रीय अर्थव्यवस्था में परिवर्तन अपशिष्ट उत्पादन, संसाधन क्षरण और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों का कैसे समाधान कर सकता है। भारत की संसाधन सुरक्षा बढ़ाने और प्राथमिक सामग्रियों पर निर्भरता कम करने में इसकी भूमिका का विश्लेषण करें।
- **आर्थिक अवसर और सामाजिक समावेशन:** NCEPS द्वारा प्रस्तुत आर्थिक अवसरों का मूल्यांकन करें, जिसमें पुनर्चक्रण, पुनः विनिर्माण और मरम्मत क्षेत्रों में रोजगार सृजन शामिल है। अनौपचारिक अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र को औपचारिक बनाकर और उसका उत्थान करके, कमजोर समुदायों के लिए बेहतर आजीविका और काम करने की स्थिति सुनिश्चित करके सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देने की इसकी क्षमता का परीक्षण करें।
पेज 48📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासरकारी योजनाएं एवं नीतियां
47. युवा कौशल नवाचार योजना (YKNY) का पायलट चरण आकांक्षी जिलों में शुरू
चर्चा में क्यों? (Why in News)
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने आज 50 आकांक्षी जिलों में 'युवा कौशल नवाचार योजना' (YKNY) के पायलट चरण का आधिकारिक शुभारंभ किया। इस योजना का उद्देश्य भारत के युवाओं को अत्याधुनिक तकनीकों में भविष्य के लिए तैयार कौशल से लैस करना और नवाचार तथा उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा देना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों पर ध्यान:** YKNY विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML), रोबोटिक्स, डेटा साइंस, ब्लॉकचेन, क्वांटम कंप्यूटिंग और उन्नत विनिर्माण जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों में कौशल, पुनः कौशल और उच्च कौशल पर लक्षित है।
- •**उद्यमिता और नवाचार केंद्र:** चयनित ITI और पॉलिटेक्निक में 'युवा नवाचार केंद्रों' की स्थापना, जो होनहार युवा-नेतृत्व वाले स्टार्टअप के लिए इनक्यूबेशन सहायता, मेंटरशिप और सीड फंडिंग प्रदान करेंगे।
- •**उद्योग-अकादमिक सहयोग:** मांग-संचालित पाठ्यक्रम विकसित करने, व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने और उद्योग-प्रासंगिक प्रमाणपत्र सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी पर विशेष जोर।
- •**हरित कौशल एकीकरण:** योजना के भीतर एक समर्पित मॉड्यूल हरित कौशल पर केंद्रित है, जो युवाओं को नवीकरणीय ऊर्जा, टिकाऊ कृषि, अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण-अनुकूल विनिर्माण में नौकरियों के लिए तैयार करता है।
- •**डिजिटल क्रेडेंशियलिंग और वैश्विक गतिशीलता:** प्राप्त कौशल के लिए ब्लॉकचेन-आधारित डिजिटल क्रेडेंशियल का उपयोग करता है, पारदर्शिता बढ़ाता है और भारतीय कुशल युवाओं के लिए वैश्विक मान्यता की सुविधा प्रदान करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- युवा कौशल नवाचार योजना (YKNY) कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) द्वारा शुरू की गई है।
- यह AI, रोबोटिक्स और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में कौशल विकास पर केंद्रित है।
- पायलट चरण 50 आकांक्षी जिलों में शुरू किया गया है।
- 'युवा नवाचार केंद्र' इनक्यूबेशन सहायता प्रदान करेंगे।
- यह योजना हरित कौशल को एकीकृत करती है और डिजिटल क्रेडेंशियल के लिए ब्लॉकचेन का उपयोग करती है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **भविष्य की कार्यबल तत्परता और आर्थिक प्रतिस्पर्धा:** विश्लेषण करें कि YKNY कैसे उद्योग 4.0 की बढ़ती मांगों को पूरा करता है, भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश में योगदान देता है और एक कुशल, अनुकूलनीय और अभिनव कार्यबल बनाकर अपनी वैश्विक आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाता है।
- **क्षेत्रीय विकास और कौशल अंतर कम करना:** आकांक्षी जिलों में YKNY के शुभारंभ के महत्व का मूल्यांकन करें। चर्चा करें कि यह लक्षित दृष्टिकोण क्षेत्रीय कौशल असमानताओं को कैसे कम कर सकता है, स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को प्रोत्साहित कर सकता है और स्थानीय स्तर पर उन्नत कौशल के अवसर प्रदान करके कम विकसित क्षेत्रों से प्रतिभा पलायन को रोक सकता है।
पेज 49📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासरकारी योजनाएं एवं नीतियां
48. ग्रामीण समग्र संपर्क अभियान (GSSA) कार्यान्वयन ढांचा अनावरण
चर्चा में क्यों? (Why in News)
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने आज 'ग्रामीण समग्र संपर्क अभियान' (GSSA) के लिए व्यापक कार्यान्वयन ढांचा जारी किया, जो ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में एकीकृत भौतिक और डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाने के उद्देश्य से एक प्रमुख योजना है। यह ढांचा वित्त पोषण तंत्र, प्रौद्योगिकी एकीकरण और सामुदायिक भागीदारी रणनीतियों का विवरण देता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**एकीकृत दृष्टिकोण:** GSSA भौतिक अवसंरचना विकास (हर मौसम में सड़कें, अंतिम-मील रसद) को डिजिटल कनेक्टिविटी (ब्रॉडबैंड पैठ, सामान्य सेवा केंद्र) के साथ जोड़ते हुए एक समग्र रणनीति अपनाता है।
- •**बहु-हितधारक मॉडल:** कुशल निष्पादन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों, स्थानीय स्वशासन निकायों (पंचायती राज संस्थाओं), निजी क्षेत्र और नागरिक समाज संगठनों के बीच सहयोग पर जोर देता है।
- •**कम सेवा वाले क्षेत्रों पर ध्यान:** नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम द्वारा पहचाने गए क्षेत्रों और महत्वपूर्ण अवसंरचना अंतराल वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता देता है।
- •**स्थिरता और जलवायु लचीलापन:** भौतिक अवसंरचना के लिए हरित प्रौद्योगिकियों और जलवायु-लचीली निर्माण प्रथाओं के उपयोग को अनिवार्य करता है, और ऊर्जा-कुशल डिजिटल समाधानों को बढ़ावा देता है।
- •**डिजिटल साक्षरता और कौशल विकास:** इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ग्राम स्तर पर डिजिटल अवसंरचना के प्रबंधन में डिजिटल साक्षरता प्रशिक्षण और कौशल विकास के घटकों को शामिल करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- ग्रामीण समग्र संपर्क अभियान (GSSA) ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक योजना है।
- इसका उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में एकीकृत भौतिक और डिजिटल कनेक्टिविटी है।
- पंचायती राज संस्थाएं (PRIs) इसके कार्यान्वयन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- यह योजना हरित प्रौद्योगिकियों और जलवायु-लचीली अवसंरचना को बढ़ावा देती है।
- नीति आयोग के आकांक्षी जिले GSSA के लिए एक प्राथमिकता वाले क्षेत्र हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **ग्रामीण-शहरी विभाजन का शमन:** चर्चा करें कि कैसे GSSA भौतिक अवसंरचना और डिजिटल सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करके मौजूदा ग्रामीण-शहरी विभाजन को प्रभावी ढंग से पाट सकता है, जिससे समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा और प्रवासन के दबाव को कम किया जा सकेगा।
- **आर्थिक सशक्तिकरण और शासन:** उन्नत बाजार पहुंच, बेहतर ई-शासन सेवाओं और डिजिटल उद्यमिता के लिए बढ़ते अवसरों के माध्यम से ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने में GSSA की क्षमता का विश्लेषण करें। डिजिटल उपकरणों और संसाधनों के साथ पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को सक्षम करके विकेन्द्रीकृत शासन को मजबूत करने में इसकी भूमिका का मूल्यांकन करें।
पेज 50📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासामाजिक मुद्दे
49. सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने 'मानसिक स्वास्थ्य सहायता अभियान' का शुभारंभ किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
जमीनी स्तर पर सुलभ मानसिक स्वास्थ्य देखभाल की महत्वपूर्ण आवश्यकता को संबोधित करते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने आज आधिकारिक तौर पर 'मानसिक स्वास्थ्य सहायता अभियान' का शुभारंभ किया। इस राष्ट्रीय पहल का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों में गहराई से एकीकृत करना, देखभाल का विकेंद्रीकरण करना और मानसिक बीमारी से जुड़े व्यापक कलंक का मुकाबला करना है। यह शुभारंभ आधुनिक जीवन शैली और विशेष देखभाल तक सीमित पहुँच, विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में, द्वारा बढ़ी हुई मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों के बारे में बढ़ती चिंताओं के बीच हुआ है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के साथ एकीकरण:** आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) के कर्मचारियों को सामान्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान करने और बुनियादी परामर्श प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित और सुसज्जित करना।
- •**विस्तारित टेली-मानस सेवाएँ:** व्यापक पहुँच सुनिश्चित करने और दूरस्थ मनोवैज्ञानिक सहायता और परामर्श प्रदान करने के लिए टेली-मानस डिजिटल मानसिक स्वास्थ्य मंच का महत्वपूर्ण विस्तार, जिसमें विशेष हस्तक्षेप भी शामिल हैं।
- •**सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य केंद्र:** ब्लॉक स्तर पर नए सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना, जिसे घर के करीब निदान सेवाएं, दवा प्रबंधन और मनोसामाजिक सहायता प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- •**स्कूल मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम:** किशोरों में मानसिक कल्याण को संबोधित करने और मुद्दों की शीघ्र पहचान के लिए स्कूलों में एक मानकीकृत मानसिक स्वास्थ्य पाठ्यक्रम और परामर्श सेवाओं की शुरुआत।
- •**कलंक न्यूनीकरण अभियान:** मानसिक बीमारी के बारे में गलत धारणाओं को चुनौती देने और मदद मांगने के व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न मीडिया का उपयोग करके व्यापक जन जागरूकता अभियान।
- •**मानव संसाधन विकास:** उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रमों और प्रोत्साहन के माध्यम से मनोचिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों और मनोरोग नर्सों सहित मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की संख्या बढ़ाने की पहल।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'मानसिक स्वास्थ्य सहायता अभियान' का शुभारंभ केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा किया गया।
- प्रमुख घटकों में PHC के साथ एकीकरण, टेली-मानस का विस्तार, सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य केंद्र और स्कूल कार्यक्रम शामिल हैं।
- मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के विकेंद्रीकरण और कलंक को कम करने का लक्ष्य है।
- मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 भारत में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **मानव संसाधन की कमी को दूर करना:** एक बड़ी चुनौती प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की तीव्र कमी है, जिसे अभियान अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ता प्रशिक्षण और व्यावसायिक विकास के माध्यम से कम करना चाहता है।
- **कलंक और भेदभाव से लड़ना:** अभियान की सफलता मानसिक बीमारी के आसपास के गहरे सामाजिक कलंक को प्रभावी ढंग से कम करने पर निर्भर करती है, जो अक्सर मदद और उपचार प्राप्त करने में बाधा के रूप में कार्य करता है।
- **निधि और अवसंरचना:** पर्याप्त और निरंतर वित्त पोषण, साथ ही ब्लॉक और जिला स्तरों पर आवश्यक अवसंरचना का विकास, अभियान की दीर्घकालिक व्यवहार्यता और प्रभाव के लिए महत्वपूर्ण होगा।
- **सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभाव:** प्राथमिक देखभाल में मानसिक स्वास्थ्य को एकीकृत करके, अभियान से समग्र सार्वजनिक स्वास्थ्य परिदृश्य में काफी सुधार होने, मानसिक विकारों के बोझ को कम करने और लाखों लोगों के जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने की उम्मीद है।
पेज 51📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासामाजिक मुद्दे
50. 'द गिग एंड प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स (सोशल सिक्योरिटी) बिल, 2026' को राष्ट्रपति की मंजूरी; कार्यान्वयन दिशानिर्देश जारी
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारत में काम के भविष्य के लिए एक ऐतिहासिक विकास में, 'गिग एंड प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स (सोशल सिक्योरिटी) बिल, 2026' को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है, जो आधिकारिक तौर पर एक अधिनियम बन गया है। इसके बाद, श्रम और रोजगार मंत्रालय ने तुरंत विस्तृत कार्यान्वयन दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिससे लाखों गिग और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा लाभों तक पहुँचने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह विधायी मील का पत्थर वर्षों की वकालत और नीतिगत विचार-विमर्श का परिणाम है, जो बढ़ते डिजिटल अर्थव्यवस्था में प्रचलित अद्वितीय रोजगार मॉडल को पहचानता है और इस क्षेत्र में श्रमिकों की भेद्यता को संबोधित करता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**सार्वभौमिक पंजीकरण और पहचान:** लाभों तक पहुँच के लिए अद्वितीय पहचान संख्या उत्पन्न करते हुए, एक केंद्रीकृत राष्ट्रीय पोर्टल पर सभी गिग और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों का अनिवार्य पंजीकरण।
- •**सामाजिक सुरक्षा कोष:** एक समर्पित 'गिग और प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स सामाजिक सुरक्षा कोष' की स्थापना जिसमें श्रमिकों, प्लेटफार्मों और सरकार द्वारा योगदान दिया जाएगा।
- •**स्तरीय लाभ संरचना:** योगदान और सेवा के वर्षों के आधार पर स्तरीय तरीके से दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य और मातृत्व लाभ, वृद्धावस्था सुरक्षा और कौशल विकास सहित कई लाभों का प्रावधान।
- •**शिकायत निवारण तंत्र:** श्रमिकों और प्लेटफार्मों के बीच विवादों के त्वरित समाधान के लिए एक विशेष न्यायाधिकरण या शिकायत निवारण बोर्ड की स्थापना।
- •**प्लेटफ़ॉर्म जवाबदेही:** प्लेटफार्मों को अपने लेनदेन मूल्य का एक निश्चित प्रतिशत सामाजिक सुरक्षा कोष में योगदान करने का आदेश देता है, जिससे साझा जिम्मेदारी सुनिश्चित होती है।
- •**लाभों की सुवाह्यता:** श्रमिकों द्वारा अर्जित लाभ विभिन्न प्लेटफार्मों और रोजगार व्यवस्थाओं में सुवाह्य होंगे, जिससे सामाजिक सुरक्षा की निरंतरता सुनिश्चित होगी।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- गिग एंड प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स (सोशल सिक्योरिटी) अधिनियम, 2026 को आज राष्ट्रपति की मंजूरी मिली।
- कार्यान्वयन के लिए नोडल मंत्रालय: श्रम और रोजगार मंत्रालय।
- प्रमुख प्रावधान: सार्वभौमिक पंजीकरण, समर्पित सामाजिक सुरक्षा कोष, स्तरीय लाभ, शिकायत निवारण, प्लेटफ़ॉर्म योगदान।
- अधिनियम के अनुसार 'गिग वर्कर' और 'प्लेटफ़ॉर्म वर्कर' की परिभाषा।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **अनौपचारिक क्षेत्र का औपचारिककरण:** यह अधिनियम अनौपचारिक अर्थव्यवस्था के एक महत्वपूर्ण हिस्से को औपचारिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो तेजी से बढ़ते कार्यबल वर्ग को अत्यधिक आवश्यक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करता है।
- **प्लेटफार्मों पर आर्थिक प्रभाव:** श्रमिकों के लिए फायदेमंद होने के बावजूद, नए योगदान आदेश प्लेटफार्मों के लिए परिचालन लागत बढ़ा सकते हैं, जिससे उनके व्यावसायिक मॉडल और मूल्य निर्धारण रणनीतियों पर संभावित रूप से प्रभाव पड़ सकता है।
- **कार्यान्वयन में चुनौतियाँ:** विविध प्लेटफार्मों और भौगोलिक क्षेत्रों में सार्वभौमिक पंजीकरण, निर्बाध योगदान संग्रह और प्रभावी शिकायत निवारण सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण चुनौतियाँ होंगी।
- **कार्य और कल्याण का भविष्य:** यह कानून इस बात के लिए एक मिसाल कायम करता है कि सरकारें कार्य की बदलती प्रकृति के लिए सामाजिक सुरक्षा ढाँचे को कैसे अनुकूलित कर सकती हैं, डिजिटल युग में आर्थिक नवाचार और श्रमिक कल्याण को संतुलित कर सकती हैं।
पेज 52📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासामाजिक मुद्दे
51. महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध ऑनलाइन नुकसान से निपटने हेतु राष्ट्रीय डिजिटल सुरक्षा ढाँचा 2026 का शुभारंभ
चर्चा में क्यों? (Why in News)
ऑनलाइन सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के तहत, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से आज 'राष्ट्रीय डिजिटल सुरक्षा ढाँचा (NDSF) 2026' का अनावरण किया। इस व्यापक ढाँचे का उद्देश्य साइबरबुलिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, डीपफेक और बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) की बढ़ती चुनौतियों का समाधान करके महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष रूप से एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण बनाना है। यह शुभारंभ नागरिक समाज संगठनों, तकनीकी कंपनियों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ कई परामर्शों के बाद हुआ है, जो उभरते डिजिटल खतरों के प्रति सरकार के सक्रिय दृष्टिकोण को उजागर करता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**बहु-हितधारक दृष्टिकोण:** NDSF 2026 सरकारी एजेंसियों, कानून प्रवर्तन, सोशल मीडिया मध्यस्थों, शैक्षणिक संस्थानों और माता-पिता को शामिल करते हुए सहयोगात्मक प्रयासों पर जोर देता है।
- •**प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान:** डिजिटल फॉरेंसिक को बढ़ावा देने के साथ-साथ हानिकारक सामग्री का सक्रिय रूप से पता लगाने और हटाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) का लाभ उठाने पर ध्यान केंद्रित।
- •**त्वरित प्रतिक्रिया और शिकायत निवारण:** शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए 24/7 राष्ट्रीय डिजिटल सुरक्षा हेल्पलाइन की स्थापना और प्लेटफार्मों के भीतर उन्नत शिकायत निवारण तंत्र।
- •**डिजिटल साक्षरता और जागरूकता अभियान:** सुरक्षित ऑनलाइन प्रथाओं, गोपनीयता सेटिंग्स और रिपोर्टिंग तंत्रों पर नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को शिक्षित करने के लिए अखिल भारतीय कार्यक्रम।
- •**अंतर्राष्ट्रीय सहयोग:** सीमा-पार डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए वैश्विक संगठनों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ साझेदारी को मजबूत करना।
- •**कानूनी और नीतिगत सुधार:** मौजूदा कानूनों और नीतियों की समीक्षा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे समकालीन डिजिटल खतरों का समाधान करने के लिए पर्याप्त मजबूत हैं, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम में संभावित संशोधनों के साथ।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- NDSF 2026 के लिए नोडल मंत्रालय: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MWCD) और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)।
- प्रमुख पहलू संबोधित: साइबरबुलिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, डीपफेक, बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM)।
- प्रासंगिक मौजूदा कानून: सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000; लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012; भारतीय दंड संहिता (IPC)।
- तंत्र: राष्ट्रीय डिजिटल सुरक्षा हेल्पलाइन (24/7) और AI/ML आधारित सामग्री मॉडरेशन।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **डिजिटल विभाजन का समाधान:** जबकि NDSF 2026 महत्वपूर्ण है, इसकी प्रभावशीलता मौजूदा डिजिटल विभाजन को पाटने पर निर्भर करेगी, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, ताकि जागरूकता और रिपोर्टिंग तंत्र तक पहुँच सुनिश्चित हो सके।
- **निजता और निगरानी का संतुलन:** ढाँचे को हानिकारक सामग्री के लिए मजबूत निगरानी और व्यक्तिगत निजता के अधिकारों की सुरक्षा के बीच नाजुक संतुलन बनाना चाहिए, डेटा के संभावित दुरुपयोग को रोकना चाहिए।
- **मध्यस्थों की जवाबदेही:** ढाँचा सोशल मीडिया प्लेटफार्मों की जवाबदेही को मजबूत करता है, लेकिन अनुपालन लागू करने और सामग्री मॉडरेशन और उपयोगकर्ता सुरक्षा में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने में चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
- **सामाजिक प्रभाव:** NDSF 2026 में अधिक जिम्मेदार डिजिटल नागरिकता को बढ़ावा देने की क्षमता है, जो उपयोगकर्ताओं को ऑनलाइन स्थानों को सुरक्षित रूप से नेविगेट करने के लिए ज्ञान और उपकरणों के साथ सशक्त बनाता है, जिससे डिजिटल नुकसान की मनोवैज्ञानिक और सामाजिक लागत कम होती है।
पेज 53📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासरकारी योजनाएं एवं नीतियां
52. पीएमएवाई-यू ने जलवायु-लचीले और स्मार्ट किफायती आवास के लिए 'हरित गृह अभियान' की शुरुआत की
चर्चा में क्यों? (Why in News)
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (एमओएचयूए) ने आज प्रमुख प्रधानमंत्री आवास योजना - शहरी (पीएमएवाई-यू) के तहत एक नए उप-घटक, 'हरित गृह अभियान' (ग्रीन होम्स अभियान) के शुभारंभ की घोषणा की। इस पहल का उद्देश्य शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन की दोहरी चुनौतियों का सामना करते हुए किफायती आवास परियोजनाओं में जलवायु लचीलापन और स्मार्ट जीवन सुविधाओं को एकीकृत करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**ग्रीन बिल्डिंग मानक:** प्रमाणित ग्रीन बिल्डिंग मानदंडों को अपनाने, टिकाऊ और स्थानीय स्तर पर प्राप्त सामग्री के उपयोग और निर्माण में निहित ऊर्जा को कम करने को अनिवार्य करता है।
- •**ऊर्जा दक्षता:** निष्क्रिय शीतलन तकनीकों, ऊर्जा-कुशल उपकरणों, सौर ऊर्जा एकीकरण और ऊर्जा खपत को कम करने के लिए स्मार्ट मीटरिंग को शामिल करने वाले डिजाइनों को बढ़ावा देता है।
- •**आपदा लचीलापन:** संरचनात्मक डिजाइनों पर ध्यान केंद्रित करता है जो बाढ़, भूकंप और अत्यधिक मौसम की घटनाओं जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति प्रतिरोध को बढ़ाते हैं, जिससे दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
- •**स्मार्ट होम एकीकरण:** किफायती आवास इकाइयों में संसाधन प्रबंधन (पानी, बिजली), अपशिष्ट पृथक्करण और बढ़ी हुई सुरक्षा सुविधाओं के लिए IoT-सक्षम उपकरणों को शामिल करने को प्रोत्साहित करता है।
- •**क्षमता निर्माण और जागरूकता:** ग्रीन बिल्डिंग प्रथाओं और स्मार्ट प्रौद्योगिकी परिनियोजन में शहरी स्थानीय निकायों, वास्तुकारों और निर्माण श्रमिकों के प्रशिक्षण के लिए प्रावधान शामिल हैं।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- प्रधानमंत्री आवास योजना - शहरी (पीएमएवाई-यू) 2015 में शुरू की गई थी।
- एमओएचयूए पीएमएवाई-यू के लिए नोडल मंत्रालय है।
- पीएमएवाई-यू चार कार्यक्षेत्रों के माध्यम से संचालित होता है: इन-सीटू स्लम पुनर्विकास, क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना (सीएलएसएस), साझेदारी में किफायती आवास, और लाभार्थी के नेतृत्व वाला निर्माण।
- पीएमएवाई-यू के '2022 तक सभी के लिए आवास' लक्ष्य को बढ़ाया गया है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **टिकाऊ शहरी विकास:** यह पहल जलवायु-लचीले शहरों के निर्माण की दिशा में एक प्रगतिशील कदम है, जो भारत की बढ़ती शहरी आबादी और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के प्रति इसकी प्रतिबद्धता, विशेष रूप से एसडीजी 11 (टिकाऊ शहर और समुदाय) के लिए महत्वपूर्ण है।
- **सार्वजनिक-निजी भागीदारी और नवाचार:** 'हरित गृह अभियान' के सफल कार्यान्वयन के लिए मजबूत सार्वजनिक-निजी भागीदारी, नवीन निर्माण प्रौद्योगिकियों को अपनाने और जलवायु-लचीले और स्मार्ट किफायती आवास की व्यापक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सुलभ वित्तपोषण तंत्र की आवश्यकता होगी।
पेज 54📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासरकारी योजनाएं एवं नीतियां
53. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन: डेरिवेटिव्स और इलेक्ट्रोलाइज़र घटकों के लिए नई पीएलआई दिशानिर्देशों की घोषणा
चर्चा में क्यों? (Why in News)
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने आज हरित हाइड्रोजन संक्रमण (साइट) कार्यक्रम के लिए रणनीतिक हस्तक्षेपों के तहत उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं की दूसरी किश्त के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए। ये दिशानिर्देश विशेष रूप से हरित हाइड्रोजन डेरिवेटिव्स (जैसे हरित अमोनिया, हरित मेथनॉल) और इलेक्ट्रोलाइज़र के लिए प्रमुख घटकों के निर्माण को लक्षित करते हैं, जिसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और आयात निर्भरता को कम करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**लक्षित प्रोत्साहन:** पीएलआई योजना हरित हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइज़र के लिए आवश्यक प्रमुख घटकों के स्वदेशी विनिर्माण और हरित अमोनिया और हरित मेथनॉल जैसे डाउनस्ट्रीम डेरिवेटिव्स के उत्पादन के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है।
- •**विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा:** एक मजबूत घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र बनाने, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और हरित हाइड्रोजन प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य है।
- •**निर्यात क्षमता:** लागत-प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाकर, यह योजना भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहती है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा में योगदान मिलेगा।
- •**चरणबद्ध कार्यान्वयन:** प्रोत्साहन एक अवधि में वितरित किए जाएंगे, जो निर्माताओं द्वारा विशिष्ट उत्पादन और स्थानीयकरण लक्ष्यों की उपलब्धि से जुड़े होंगे।
- •**हरित अर्थव्यवस्था योगदान:** कम कार्बन वाली अर्थव्यवस्था में संक्रमण को गति देकर भारत के जलवायु लक्ष्यों और 'पंचामृत' प्रतिबद्धताओं में सीधे योगदान देता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (एनजीएचएम) जनवरी 2023 में शुरू किया गया था।
- साइट कार्यक्रम (हरित हाइड्रोजन संक्रमण के लिए रणनीतिक हस्तक्षेप) एनजीएचएम का एक प्रमुख घटक है।
- एमएनआरई एनजीएचएम के लिए नोडल मंत्रालय है।
- भारत का लक्ष्य 2030 तक सालाना 5 मिलियन टन हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करना है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **ऊर्जा सुरक्षा और डीकार्बोनाइजेशन:** यह योजना भारत की जीवाश्म ईंधन आयात पर निर्भरता को कम करने और उर्वरक, रिफाइनिंग और स्टील जैसे कठिन-से-कम करने वाले क्षेत्रों को डीकार्बोनाइज करने के लिए महत्वपूर्ण है, जो जलवायु परिवर्तन शमन लक्ष्यों के साथ संरेखित है।
- **आर्थिक विकास और भू-राजनीतिक स्थिति:** एक घरेलू हरित हाइड्रोजन उद्योग को बढ़ावा देने से रोजगार सृजित होंगे, निवेश आकर्षित होंगे, और वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में भारत की रणनीतिक स्थिति बढ़ेगी, जिससे संभावित रूप से नए निर्यात बाजार खुलेंगे।
पेज 55📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासरकारी योजनाएं एवं नीतियां
54. एबीडीएम का 'स्वास्थ्य साथी पोर्टल' नागरिक डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाने के लिए लॉन्च किया गया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने आज आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के तहत 'स्वास्थ्य साथी पोर्टल' का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ किया। इस नए पोर्टल को नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला तक पहुँचने के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्रवेश द्वार के रूप में परिकल्पित किया गया है, जो भारत में अधिक एकीकृत और सुलभ डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**एकीकृत पहुँच:** नागरिकों को अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड प्रबंधित करने, नियुक्तियाँ बुक करने, टेली-परामर्श तक पहुँचने और डिजिटल नुस्खे प्राप्त करने के लिए एक एकल इंटरफ़ेस प्रदान करता है।
- •**एबीएचए एकीकरण:** आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खातों (एबीएचए) के साथ सहजता से एकीकृत होता है, जिससे उपयोगकर्ता विभिन्न स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं से अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को लिंक और देख सकते हैं।
- •**सुरक्षित डेटा प्रबंधन:** मजबूत डेटा गोपनीयता और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर जोर देता है, संवेदनशील स्वास्थ्य जानकारी के लिए सहमति-आधारित पहुँच और एन्क्रिप्शन सुनिश्चित करता है।
- •**अखिल भारतीय पहुँच:** डिजिटल समावेशन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा पहुँच अंतर को पाटते हुए, दूरस्थ और कम सेवा वाले क्षेत्रों तक डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने का लक्ष्य है।
- •**ई-संजीवनी जुड़ाव:** राष्ट्रीय टेली-परामर्श मंच ई-संजीवनी के साथ सीधा जुड़ाव, घर से वर्चुअल डॉक्टर परामर्श की सुविधा प्रदान करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) 2021 में शुरू किया गया था (पहले एनडीएचएम)।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) एबीडीएम के लिए कार्यान्वयन एजेंसी है।
- एबीएचए आईडी नागरिकों के लिए एक 14-अंकीय अद्वितीय स्वास्थ्य पहचान संख्या है।
- ई-संजीवनी भारत की राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को मजबूत करना:** पोर्टल का नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच को काफी बढ़ा सकता है, जेब से होने वाले खर्च को कम कर सकता है और स्वास्थ्य जानकारी को आसानी से उपलब्ध कराकर निवारक स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा दे सकता है।
- **चुनौतियाँ और अवसर:** जबकि पोर्टल में अपार क्षमता है, डिजिटल साक्षरता, निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बीच डेटा इंटरऑपरेबिलिटी और स्वास्थ्य डेटा के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने से संबंधित चुनौतियाँ महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। अवसर भविष्य कहनेवाला विश्लेषण और व्यक्तिगत स्वास्थ्य सिफारिशों के लिए एआई का लाभ उठाने में निहित हैं।
पेज 56📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकारक्षा एवं सुरक्षा
55. भारतीय नौसेना ने 'आईएनएस प्रहरी' को कमीशन किया – पहली स्वदेशी एआई-संचालित समुद्री डोमेन जागरूकता पोत
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारतीय नौसेना ने आज नौसेना डॉकयार्ड, विशाखापत्तनम में देश का पहला स्वदेशी रूप से विकसित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)-संचालित स्वायत्त समुद्री डोमेन जागरूकता पोत 'आईएनएस प्रहरी' को कमीशन किया। यह अत्याधुनिक पोत भारत की नौसैनिक क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण छलांग का प्रतिनिधित्व करता है, विशेष रूप से विशाल हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में निगरानी और टोही को बढ़ाने में।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •आईएनएस प्रहरी एक मानवरहित सतह पोत (USV) है जिसे विस्तारित सहनशक्ति और स्टील्थ के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो मानव हस्तक्षेप के बिना हफ्तों या महीनों तक स्वायत्त संचालन में सक्षम है, जिससे परिचालन लागत और जोखिम काफी कम हो जाते हैं।
- •यह उन्नत रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड (EO/IR) कैमरे, सोनार और इलेक्ट्रॉनिक खुफिया (ELINT) प्रणालियों सहित सेंसर की एक परिष्कृत सरणी से लैस है, जो सभी एक शक्तिशाली ऑनबोर्ड एआई प्रोसेसिंग यूनिट के साथ एकीकृत हैं।
- •एआई प्रणाली वास्तविक समय के डेटा विश्लेषण, जहाजों का स्वचालित पता लगाने और वर्गीकरण, विसंगति की पहचान और भविष्य कहनेवाला ट्रैकिंग को सक्षम बनाती है, नौसेना कमांड केंद्रों को अद्वितीय समुद्री स्थितिजन्य जागरूकता प्रदान करती है।
- •गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) द्वारा DRDO और भारतीय AI स्टार्टअप्स के सहयोग से विकसित, आईएनएस प्रहरी 'मेक इन इंडिया' पहल का प्रतीक है और नौसेना प्रौद्योगिकी में एक क्षेत्रीय सुरक्षा प्रदाता और नवप्रवर्तक के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करता है।
- •इसके मिशनों में खुफिया, निगरानी, टोही (ISR), समुद्री डकैती विरोधी अभियान, संचार की समुद्री लेन (SLOCs) की निगरानी, और मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) प्रयासों के लिए संभावित समर्थन शामिल होगा।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- आईएनएस प्रहरी भारत का पहला स्वदेशी एआई-संचालित स्वायत्त समुद्री डोमेन जागरूकता पोत (मानवरहित सतह पोत - USV) है।
- इसे नौसेना डॉकयार्ड, विशाखापत्तनम में कमीशन किया गया था।
- गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) द्वारा DRDO और भारतीय AI स्टार्टअप्स के सहयोग से विकसित।
- प्रमुख क्षमताओं में लंबी सहनशक्ति वाले स्वायत्त संचालन, बहु-सेंसर एकीकरण और एआई-संचालित डेटा विश्लेषण शामिल हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में रणनीतिक महत्व:** आईएनएस प्रहरी का कमीशन वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण IOR में भारत की रणनीतिक उपस्थिति और निगरानी क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करता है। एक स्वायत्त, एआई-संचालित मंच के रूप में, यह विशाल समुद्री क्षेत्रों की लगातार और लागत प्रभावी निगरानी को सक्षम बनाता है, जो उप-सतह गतिविधियों और अवैध समुद्री यातायात सहित पारंपरिक और गैर-पारंपरिक खतरों का मुकाबला करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- **तकनीकी उन्नति और 'ब्लू वाटर' महत्वाकांक्षाएं:** आईएनएस प्रहरी एआई और स्वायत्त प्रणालियों जैसे अत्याधुनिक डोमेन में भारत की स्वदेशी तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित करता है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' रक्षा उद्देश्यों के साथ संरेखित है। नौसेना बेड़े में इसका एकीकरण पारंपरिक तरीकों से कहीं आगे निगरानी पहुंच और डेटा प्रोसेसिंग क्षमताओं का विस्तार करके भारत की 'ब्लू वाटर' नौसेना महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाता है, जिससे परिचालन गति, निर्णय लेने के चक्र और समग्र नौसैनिक शक्ति प्रक्षेपण में वृद्धि होती है।
पेज 57📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकारक्षा एवं सुरक्षा
56. उन्नत भू-स्थानिक खुफिया (GEOINT) प्रणाली 'ध्रुव' सीमा निगरानी अभियानों में एकीकृत
चर्चा में क्यों? (Why in News)
गृह मंत्रालय ने आज महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों में 'ध्रुव' नामक एक उन्नत स्वदेशी भू-स्थानिक खुफिया (GEOINT) प्रणाली के पूर्ण एकीकरण और संचालन की घोषणा की। इस रणनीतिक तैनाती का उद्देश्य वास्तविक समय की निगरानी, भविष्य कहनेवाला विश्लेषण और बहु-संवेदक डेटा संलयन के माध्यम से भारत की सीमा प्रबंधन क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •'ध्रुव' उच्च-रिज़ॉल्यूशन उपग्रह इमेजरी, मानव रहित हवाई वाहन (UAV), भू-आधारित सेंसर और पारंपरिक मानव खुफिया सहित विभिन्न स्रोतों से डेटा को एकीकृत करता है, इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) एल्गोरिदम के साथ संसाधित करता है।
- •यह प्रणाली व्यापक स्थितिजन्य जागरूकता प्रदान करती है, असामान्य गतिविधियों की पहचान करती है, गतिविधियों को ट्रैक करती है, और वास्तविक समय में सीमा रक्षक बलों के लिए कार्रवाई योग्य खुफिया रिपोर्ट तैयार करती है।
- •इसका भविष्य कहनेवाला विश्लेषण मॉड्यूल ऐतिहासिक डेटा, इलाके के विश्लेषण और पर्यावरणीय कारकों के आधार पर संभावित घुसपैठ मार्गों या हॉटस्पॉट का पूर्वानुमान लगा सकता है, जिससे बलों की सक्रिय तैनाती सक्षम होती है।
- •भारतीय निजी तकनीकी फर्मों के योगदान के साथ ISRO और DRDO द्वारा संयुक्त रूप से विकसित, 'ध्रुव' स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर दर्शाता है और 'स्मार्ट सीमा प्रबंधन' पहल को मजबूत करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'ध्रुव' एक स्वदेशी भू-स्थानिक खुफिया (GEOINT) प्रणाली है।
- यह AI/ML द्वारा संसाधित उपग्रहों, UAV और भू-सेंसर से डेटा को एकीकृत करता है।
- ISRO और DRDO द्वारा निजी क्षेत्र के सहयोग से संयुक्त रूप से विकसित।
- प्राथमिक उद्देश्य वास्तविक समय की सीमा निगरानी और सक्रिय सुरक्षा के लिए भविष्य कहनेवाला विश्लेषण है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **सीमा सुरक्षा और परिचालन दक्षता बढ़ाना:** 'ध्रुव' सीमा प्रबंधन में लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों का समाधान करता है, जैसे कि दुर्गम इलाका, सीमा पार घुसपैठ और विविध खतरे की धारणाएं। वास्तविक समय, डेटा-संचालित खुफिया जानकारी प्रदान करके, यह मानव जोखिम को कम करता है, संसाधन आवंटन को अनुकूलित करता है, और सुरक्षा उल्लंघनों के लिए त्वरित प्रतिक्रिया को सक्षम बनाता है, जिससे सीमा रक्षक बलों की परिचालन दक्षता और प्रभावशीलता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
- **तकनीकी संप्रभुता और रणनीतिक खुफिया:** 'ध्रुव' का स्वदेशी विकास रणनीतिक खुफिया क्षमताओं में भारत की बढ़ती तकनीकी संप्रभुता को दर्शाता है। यह अद्वितीय भौगोलिक और सुरक्षा चुनौतियों के लिए अनुकूलित समाधानों की अनुमति देता है, जबकि विदेशी खुफिया प्रणालियों पर निर्भरता को कम करता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा निर्णय लेने और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण भारत के समग्र रणनीतिक खुफिया जानकारी एकत्र करने और विश्लेषण को मजबूत करता है।
पेज 58📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकारक्षा एवं सुरक्षा
57. भारत ने रक्षा बलों के लिए पहली एकीकृत क्वांटम-सुरक्षित संचार नेटवर्क का संचालन किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए एक रणनीतिक कदम में, भारत ने रक्षा बलों के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए अपने पहले राष्ट्रव्यापी एकीकृत क्वांटम-सुरक्षित संचार नेटवर्क का सफलतापूर्वक संचालन किया है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि सुरक्षित सैन्य संचार में एक महत्वपूर्ण छलांग को चिह्नित करती है, जो उन्नत कम्प्यूटेशनल प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न होने वाले उभरते खतरों के खिलाफ एन्क्रिप्शन की एक अभेद्य परत प्रदान करती है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •यह नेटवर्क क्वांटम कुंजी वितरण (QKD) तकनीक का उपयोग क्रिप्टोग्राफिक कुंजियों को उत्पन्न और वितरित करने के लिए करता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि किसी भी छिपकर सुनने के प्रयास से क्वांटम स्थिति तुरंत बदल जाती है, जिससे संबंधित पक्षों को सतर्क किया जाता है।
- •प्रमुख अकादमिक संस्थानों और निजी क्षेत्र की संस्थाओं के सहयोग से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा मुख्य रूप से विकसित, यह परियोजना महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों में 'आत्मनिर्भर भारत' के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
- •प्रारंभिक चरण प्रमुख परिचालन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कमांड केंद्रों और रणनीतिक संपत्तियों को जोड़ता है, एक व्यापक क्वांटम-सुरक्षित रीढ़ की हड्डी के लिए आधार तैयार करता है।
- •यह शास्त्रीय और भविष्य के क्वांटम कंप्यूटर-आधारित हमलों के खिलाफ अभूतपूर्व स्तर की प्रतिरक्षा प्रदान करता है, जिससे अत्यधिक संवेदनशील सैन्य डेटा, खुफिया जानकारी साझाकरण और परिचालन निर्देशों की सुरक्षा होती है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- सुरक्षित संचार के लिए प्राथमिक तकनीक क्वांटम कुंजी वितरण (QKD) है।
- यह परियोजना 'राष्ट्रीय क्वांटम मिशन' के तहत एक प्रमुख पहल है और DRDO की तकनीकी प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
- नेटवर्क का संचालन रक्षा के लिए उन्नत क्वांटम संचार क्षमताओं वाले चुनिंदा देशों में भारत को स्थापित करता है।
- इसका उद्देश्य भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों से होने वाले क्रिप्टानिलिटिक हमलों से बचाव करना है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **रणनीतिक स्वायत्तता और साइबर लचीलापन:** क्वांटम-सुरक्षित नेटवर्क का संचालन महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता को कम करता है और राज्य-प्रायोजित हमलों और साइबर जासूसी के खिलाफ साइबर लचीलापन बढ़ाता है। यह भारत को अगली पीढ़ी के सुरक्षित संचार में एक नेता के रूप में स्थापित करता है।
- **युद्ध का भविष्य और रक्षा तैयारी:** यह विकास सूचना युद्ध के भविष्य को गहराई से प्रभावित करता है, पारंपरिक एन्क्रिप्शन विधियों को क्वांटम कंप्यूटिंग के प्रति संवेदनशील बनाता है। QKD को अपनाकर, भारत अपनी सबसे संवेदनशील संचार को भविष्य के लिए सुरक्षित करता है, एक विकसित खतरे के परिदृश्य में कमांड और नियंत्रण की अखंडता सुनिश्चित करता है और एक रणनीतिक सूचना लाभ बनाए रखता है।
पेज 59📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाअंतर्राष्ट्रीय संबंध
58. आर्कटिक परिषद के सदस्यों ने सतत संसाधन प्रबंधन के लिए 'ध्रुवीय शासन समझौता' पर हस्ताक्षर किए
चर्चा में क्यों? (Why in News)
एक महत्वपूर्ण राजनयिक सफलता में, आर्कटिक परिषद के आठ सदस्य देशों ने, भारत सहित प्रमुख पर्यवेक्षक राष्ट्रों के साथ, आज रेक्जाविक में 'ध्रुवीय शासन समझौता' (PGA) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता तेजी से बदलते आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक हित के बीच सतत संसाधन निष्कर्षण, पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक सहयोग के लिए नए तंत्र स्थापित करता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •कड़े पर्यावरणीय प्रभाव आकलन के साथ आर्कटिक प्राकृतिक संसाधनों (तेल, गैस, खनिज, मत्स्य पालन) के जिम्मेदार और सतत अन्वेषण और शोषण के लिए एक कानूनी रूप से बाध्यकारी ढांचा।
- •संरक्षण परियोजनाओं, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और प्रदूषण नियंत्रण पहलों का समर्थन करने के लिए एक 'आर्कटिक पर्यावरण संरक्षण कोष' की स्थापना।
- •जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और समुद्र विज्ञान पर संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रमों के माध्यम से वैज्ञानिक सहयोग में वृद्धि, डेटा साझाकरण तंत्र पर्यवेक्षक राज्यों के लिए खुले हैं।
- •सभी संसाधन प्रबंधन और विकास गतिविधियों में स्वदेशी आर्कटिक लोगों के अधिकारों और पारंपरिक आजीविका की मान्यता और संरक्षण।
- •आर्कटिक में नौवहन अधिकारों और क्षेत्रीय दावों के लिए शांतिपूर्ण विवाद समाधान तंत्र और अंतर्राष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से UNCLOS, के पालन के प्रावधान।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'ध्रुवीय शासन समझौता' (PGA) पर आठ आर्कटिक परिषद के सदस्यों और भारत सहित प्रमुख पर्यवेक्षक राज्यों द्वारा हस्ताक्षर किए गए।
- यह समझौता रेक्जाविक में हस्ताक्षरित किया गया था और एक 'आर्कटिक पर्यावरण संरक्षण कोष' स्थापित करता है।
- UNCLOS (समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन) को नौवहन अधिकारों के लिए समझौते में स्पष्ट रूप से संदर्भित किया गया है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- PGA आर्कटिक में जटिल भू-राजनीतिक गतिशीलता को संबोधित करता है, जहां पिघलती बर्फ नए शिपिंग मार्गों और विशाल प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच खोलती है, संघर्ष को रोकने और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक सहकारी शासन ढांचे की आवश्यकता होती है।
- भारत के लिए, एक पर्यवेक्षक राज्य के रूप में, समझौते में इसकी भागीदारी आर्कटिक के संसाधनों, वैज्ञानिक अनुसंधान और संभावित शिपिंग लेन में बढ़ती रणनीतिक रुचि को दर्शाती है, जिससे वैश्विक शासन और संसाधन सुरक्षा में इसकी भूमिका बढ़ती है।
- सतत संसाधन प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण पर समझौते का जोर एक नाजुक ध्रुवीय वातावरण में बढ़ती आर्थिक गतिविधि से जुड़े पारिस्थितिक जोखिमों को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है, जो वैश्विक जलवायु कार्रवाई लक्ष्यों के अनुरूप है।
- स्वदेशी अधिकारों को मान्यता देकर और UNCLOS जैसे अंतर्राष्ट्रीय कानून का पालन करके, PGA का लक्ष्य आर्थिक विकास को सामाजिक इक्विटी और कानूनी निश्चितता के साथ संतुलित करना है, जो जटिल अंतर्राष्ट्रीय शासन चुनौतियों के लिए एक मॉडल पेश करता है।
पेज 60📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाअंतर्राष्ट्रीय संबंध
59. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 'जलवायु-प्रेरित विस्थापन के लिए वैश्विक समझौता' अपनाया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
जलवायु-प्रेरित विस्थापन के बढ़ते वैश्विक संकट को संबोधित करते हुए, संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने आज सर्वसम्मति से 'जलवायु-प्रेरित विस्थापन के लिए वैश्विक समझौता' (GCCID) को अपनाया। यह ऐतिहासिक दस्तावेज राज्यों के लिए जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न होने वाली मानवीय गतिशीलता चुनौतियों को रोकने, तैयारी करने और प्रतिक्रिया देने के लिए एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय ढांचा प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •जलवायु परिवर्तन को जबरन विस्थापन के एक महत्वपूर्ण चालक के रूप में मान्यता, जो मौजूदा शरणार्थी और प्रवासन ढांचों से अलग फिर भी जुड़ा हुआ है।
- •संयुक्त राष्ट्र के तहत एक 'जलवायु विस्थापन प्रतिक्रिया कोष' की स्थापना, जिसका उद्देश्य अनुकूलन और पुनर्स्थापन प्रयासों के लिए प्रभावित राष्ट्रों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करना है।
- •जलवायु-प्रेरित प्रवासियों और विस्थापित आबादी के प्रबंधन के लिए मेजबान समुदायों के लिए बेहतर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, बोझ-साझाकरण और क्षमता निर्माण का आह्वान।
- •भविष्य के विस्थापन परिदृश्यों का अनुमान लगाने और उन्हें कम करने के लिए डेटा संग्रह, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और जोखिम आकलन पर जोर।
- •नियोजित पुनर्स्थापन, एकीकरण रणनीतियों को बढ़ावा देना और अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं को पार करने वाले व्यक्तियों सहित जलवायु-विस्थापित व्यक्तियों के लिए मानवाधिकार संरक्षण सुनिश्चित करना।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'जलवायु-प्रेरित विस्थापन के लिए वैश्विक समझौता' (GCCID) संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाया गया था।
- यह समझौता संयुक्त राष्ट्र के तहत एक 'जलवायु विस्थापन प्रतिक्रिया कोष' स्थापित करता है।
- GCCID का उद्देश्य विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न मानवीय गतिशीलता चुनौतियों का समाधान करना है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- GCCID अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून और पर्यावरणीय शासन में एक महत्वपूर्ण विकास का प्रतिनिधित्व करता है, जो जलवायु परिवर्तन को जबरन प्रवासन के प्रत्यक्ष कारण के रूप में स्वीकार करता है और पारंपरिक शरणार्थी ढांचों से परे एक सामूहिक वैश्विक प्रतिक्रिया की मांग करता है।
- यह 'समान लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों' के सिद्धांत को बढ़ावा देता है, विकसित राष्ट्रों से कमजोर देशों को जलवायु-प्रेरित विस्थापन का प्रबंधन करने में मदद करने के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता का आह्वान करता है, जो जलवायु न्याय के अनिवार्यताओं को दर्शाता है।
- समझौते का नियोजित पुनर्स्थापन और एकीकरण पर ध्यान केंद्रित करना अराजक बड़े पैमाने पर आंदोलनों को रोकने के लिए आवश्यक सक्रिय दृष्टिकोण को उजागर करता है, प्रभावित आबादी के लिए गरिमा और मानवाधिकारों को सुनिश्चित करते हुए लचीले समुदायों का निर्माण करता है।
- कार्यान्वयन चुनौतियों में 'जलवायु विस्थापन प्रतिक्रिया कोष' के लिए पर्याप्त धन सुरक्षित करना, संप्रभुता संबंधी विचारों को सुनिश्चित करना और सीमा पार आंदोलनों के प्रबंधन में विविध राज्य और गैर-राज्य अभिनेताओं के बीच प्रभावी समन्वय शामिल है।
पेज 61📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाअंतर्राष्ट्रीय संबंध
60. भारत-आसियान ने बढ़ी हुई क्षेत्रीय एकीकरण के लिए 'डिजिटल भारत-आसियान कनेक्ट' समझौते पर हस्ताक्षर किए
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारत और दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) ने आज जकार्ता में विशेष आसियान-भारत डिजिटल भागीदारी शिखर सम्मेलन के दौरान एक ऐतिहासिक 'डिजिटल भारत-आसियान कनेक्ट' समझौते को अंतिम रूप दिया। इस समझौते का उद्देश्य भारत की एक्ट ईस्ट नीति और आसियान के डिजिटल परिवर्तन एजेंडा के अनुरूप क्षेत्र में डिजिटल अवसंरचना, कनेक्टिविटी और कौशल विकास को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •डिजिटल अवसंरचना परियोजनाओं और नवाचार केंद्रों के वित्तपोषण के लिए $500 मिलियन के प्रारंभिक कोष के साथ एक संयुक्त भारत-आसियान डिजिटल परिवर्तन कोष (IDTF) की स्थापना।
- •एक सुरक्षित और लचीले क्षेत्रीय डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) इंटरऑपरेबिलिटी फ्रेमवर्क विकसित करने की प्रतिबद्धता, जो सीमा पार डेटा विनिमय और डिजिटल सेवाओं को सुविधाजनक बनाएगा।
- •अगले पांच वर्षों में एआई, ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा और डेटा एनालिटिक्स में 1 मिलियन व्यक्तियों को प्रशिक्षित करने के लिए 'आसियान-भारत डिजिटल कौशल वृद्धि पहल' का शुभारंभ।
- •डिजिटल सुरक्षा पर एक नए संयुक्त कार्य समूह के माध्यम से साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल, खतरे की खुफिया जानकारी साझा करने और साइबर अपराध से निपटने में बढ़ा हुआ सहयोग।
- •सहयोगात्मक पायलट परियोजनाओं और ज्ञान साझाकरण के माध्यम से डिजिटल व्यापार, ई-गवर्नेंस समाधान और स्मार्ट सिटी विकास को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'डिजिटल भारत-आसियान कनेक्ट' समझौता जकार्ता में आसियान-भारत डिजिटल भागीदारी शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान हस्ताक्षरित किया गया।
- भारत-आसियान डिजिटल परिवर्तन कोष (IDTF) का प्रारंभिक कोष $500 मिलियन है।
- यह समझौता 'आसियान-भारत डिजिटल कौशल वृद्धि पहल' के तहत 1 मिलियन व्यक्तियों को डिजिटल कौशल में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखता है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- यह समझौता भारत की एक्ट ईस्ट नीति के प्रति रणनीतिक प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जो हिंद-प्रशांत में भू-राजनीतिक बदलावों का मुकाबला करने और दक्षिण पूर्व एशियाई भागीदारों के साथ जुड़ाव को गहरा करने के लिए डिजिटल कूटनीति का लाभ उठाता है।
- यह डिजिटल व्यापार और सेवाओं को सुव्यवस्थित करके, क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन बढ़ाकर और भारत तथा आसियान सदस्य देशों दोनों के लिए फायदेमंद एक जीवंत डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देकर आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देता है।
- डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और साइबर सुरक्षा पर जोर 21वीं सदी में सुशासन और नागरिक सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षित और समावेशी डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए एक सक्रिय दृष्टिकोण को दर्शाता है।
- कौशल विकास और ज्ञान साझाकरण पहल डिजिटल डिवाइड को पाटने, युवाओं को सशक्त बनाने और विविध आसियान क्षेत्र में सतत मानव संसाधन विकास सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
पेज 62📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकारक्षा एवं सुरक्षा
61. भारत और जापान ने पोर्ट ब्लेयर में 'सागरिका' संयुक्त समुद्री सुरक्षा एवं साइबर फ्यूजन केंद्र का उद्घाटन किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत के प्रति अपनी रणनीतिक साझेदारी और प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए, भारत और जापान ने आज अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पोर्ट ब्लेयर में 'सागरिका' संयुक्त समुद्री सुरक्षा एवं साइबर फ्यूजन केंद्र (JMSCC) का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। इस अग्रणी पहल का उद्देश्य महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र में पारंपरिक और उभरते गैर-पारंपरिक खतरों के खिलाफ वास्तविक समय की खुफिया जानकारी साझाकरण, क्षमता निर्माण और समन्वित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •'सागरिका' JMSCC दोनों देशों और संभावित रूप से अन्य समान विचारधारा वाले भागीदारों से समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA) डेटा और साइबर खतरे की खुफिया जानकारी को एकीकृत करने के लिए एक केंद्र के रूप में कार्य करेगा।
- •इसके प्राथमिक उद्देश्यों में समुद्री यातायात की निगरानी करना, अवैध, बिना रिपोर्ट किए गए और अनियंत्रित (IUU) मछली पकड़ने का पता लगाना, समुद्री डकैती का मुकाबला करना और महत्वपूर्ण समुद्री बुनियादी ढांचे को लक्षित करने वाले साइबर खतरों का विश्लेषण करना शामिल है।
- •यह केंद्र भारतीय और जापानी समुद्री बलों के बीच अंतरसंचालनीयता बढ़ाने के लिए संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास, कर्मियों के आदान-प्रदान और सामान्य संचालन प्रक्रियाओं के विकास की सुविधा प्रदान करेगा।
- •पोर्ट ब्लेयर में रणनीतिक रूप से स्थित, यह पूर्वी हिंद महासागर और अंडमान सागर में महत्वपूर्ण समुद्री संचार लाइनों (SLOCs) की निगरानी के लिए एक लाभप्रद दृष्टिकोण प्रदान करता है।
- •यह सहयोग भारत की एक्ट ईस्ट नीति और जापान के स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत (FOIP) दृष्टिकोण को रेखांकित करता है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और एक नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में योगदान देता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- केंद्र का नाम: 'सागरिका' संयुक्त समुद्री सुरक्षा एवं साइबर फ्यूजन केंद्र (JMSCC)।
- सहयोगी राष्ट्र: भारत और जापान।
- स्थान: पोर्ट ब्लेयर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह।
- प्राथमिक कार्य: समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA), साइबर खतरे की खुफिया जानकारी का संलयन, क्षमता निर्माण, समन्वित प्रतिक्रिया।
- रणनीतिक महत्व: हिंद-प्रशांत सुरक्षा, SLOCs की निगरानी।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **हिंद-प्रशांत सुरक्षा वास्तुकला और द्विपक्षीय सहयोग:** विश्लेषण करें कि 'सागरिका' JMSCC की स्थापना भारत-जापान की विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को कैसे मजबूत करती है और हिंद-प्रशांत में एक मजबूत सुरक्षा वास्तुकला में योगदान करती है। चीन के बढ़ते मुखरता का मुकाबला करने और नियम-आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका पर चर्चा करें।
- **21वीं सदी में गैर-पारंपरिक समुद्री खतरों का समाधान:** समुद्री खतरों की बढ़ती प्रकृति की जांच करें, जिसमें समुद्री डकैती, IUU मछली पकड़ना, समुद्री आतंकवाद और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर साइबर हमले शामिल हैं। मूल्यांकन करें कि 'सागरिका' जैसे फ्यूजन केंद्र सामूहिक समुद्री सुरक्षा और लचीलेपन को बढ़ाने के लिए एक एकीकृत और बहु-एजेंसी दृष्टिकोण के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं।
पेज 63📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकारक्षा एवं सुरक्षा
62. भारत ने उन्नत अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता और मलबे के शमन के लिए 'विजिलेंस' उपग्रह तारामंडल लॉन्च किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
बढ़ते अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक कदम में, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आज पांच समर्पित उपग्रहों से युक्त 'विजिलेंस' तारामंडल का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। यह तारामंडल विशेष रूप से उन्नत अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता (SSA) प्रदान करने और सक्रिय अंतरिक्ष मलबे के शमन प्रयासों का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो भारत की महत्वपूर्ण अंतरिक्ष संपत्तियों की सुरक्षा और वैश्विक अंतरिक्ष सुरक्षा में योगदान के लिए महत्वपूर्ण है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •'विजिलेंस' तारामंडल में पांच छोटे, फुर्तीले उपग्रह शामिल हैं जिन्हें अंतरिक्ष वस्तुओं को ट्रैक करने के लिए व्यापक कवरेज प्रदान करने हेतु विभिन्न निम्न पृथ्वी कक्षाओं (LEO) में तैनात किया गया है।
- •यह सक्रिय उपग्रहों, खर्च किए गए रॉकेट निकायों और कक्षीय मलबे की वास्तविक समय की ट्रैकिंग, पहचान और सूचीकरण के लिए उन्नत ऑप्टिकल और रडार सेंसर का उपयोग करता है।
- •'विजिलेंस' द्वारा एकत्र किए गए डेटा संभावित टकरावों की भविष्यवाणी करने, भारतीय उपग्रहों के लिए युद्धाभ्यास योजना को अनुकूलित करने और भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों को सूचित करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
- •यह पहल जिम्मेदार अंतरिक्ष व्यवहार के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है और एक स्थायी बाहरी अंतरिक्ष पर्यावरण के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में योगदान करती है।
- •तारामंडल के दोहरे उपयोग के निहितार्थ भी हैं, जो भारत के भू-रणनीतिक अंतरिक्ष पड़ोस में गतिविधियों की निगरानी करके राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी प्रदान करते हैं।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- तारामंडल का नाम: 'विजिलेंस'।
- उपग्रहों की संख्या: पांच।
- लॉन्चिंग एजेंसी: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो)।
- प्राथमिक उद्देश्य: उन्नत अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता (SSA) और अंतरिक्ष मलबे का शमन।
- कक्षा का प्रकार: निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO)।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **अंतरिक्ष डोमेन जागरूकता के राष्ट्रीय सुरक्षा निहितार्थ:** अंतरिक्ष के बढ़ते सैन्यीकरण, उपग्रह-रोधी क्षमताओं और अंतरिक्ष संपत्तियों के प्रसार के संदर्भ में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता (SSA) के महत्वपूर्ण महत्व पर चर्चा करें। 'विजिलेंस' तारामंडल अंतरिक्ष में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को कैसे मजबूत करता है?
- **अंतरिक्ष मलबे की चुनौतियां और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग:** परिचालन उपग्रहों और भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए अंतरिक्ष मलबे से उत्पन्न बढ़ते खतरे का विश्लेषण करें। अंतरिक्ष स्थिरता और मलबे के शमन के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों को बढ़ावा देने में 'विजिलेंस' जैसी पहलों के माध्यम से भारत की भूमिका और SSA में बहुपक्षीय सहयोग की क्षमता का मूल्यांकन करें।
पेज 64📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकारक्षा एवं सुरक्षा
63. भारत ने 'दक्ष' स्टील्थ यूसीएवी के पहले स्क्वाड्रन को शामिल किया, हवाई युद्ध क्षमताओं को मजबूत किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
व्यापक विकासात्मक परीक्षणों और कठोर जांच के बाद, भारतीय वायु सेना (IAF) ने आज स्वदेशी रूप से विकसित 'दक्ष' स्टील्थ मल्टी-रोल अनमैन्ड कॉम्बैट एरियल व्हीकल्स (UCAVs) के पहले स्क्वाड्रन को औपचारिक रूप से शामिल किया। यह 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत भारत के रक्षा स्वदेशीकरण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण छलांग है और हवाई युद्ध सिद्धांतों को फिर से परिभाषित करने के लिए तैयार है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •'दक्ष' यूसीएवी, जिसे डीआरडीओ और निजी क्षेत्र के भागीदारों के नेतृत्व वाले एक संघ द्वारा विकसित किया गया है, को स्टील्थ, सटीक स्ट्राइक, खुफिया, निगरानी और टोही (ISR) मिशनों के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- •इसकी उन्नत कम-अवलोकन योग्य विशेषताएँ, एकीकृत एआई-संचालित मिशन स्वायत्तता और मॉड्यूलर पेलोड बे इसे गहरे पैठ वाले हमलों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (EW) सहित विभिन्न भूमिकाएँ निभाने में सक्षम बनाते हैं।
- •यह शामिल होना अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकी में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाता है, जिससे महत्वपूर्ण मानवरहित हवाई प्रणालियों के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम होती है।
- •यूसीएवी का परिचालन एकीकरण भारतीय वायुसेना को बढ़ी हुई स्टैंड-ऑफ क्षमताएं प्रदान करेगा, जिससे उच्च-खतरे वाले वातावरण में मानवयुक्त विमानों और कर्मियों के लिए जोखिम कम होगा।
- •अगले पांच वर्षों में और स्क्वाड्रनों को शामिल करने की योजना है, साथ ही मित्र देशों के लिए संभावित निर्यात अवसरों की भी खोज की जा रही है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'दक्ष' यूसीएवी: भारत का पहला स्वदेशी स्टील्थ मल्टी-रोल मानवरहित लड़ाकू हवाई वाहन।
- द्वारा विकसित: डीआरडीओ के नेतृत्व वाला संघ (एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट - ADE, निजी क्षेत्र की फर्मों के सहयोग से)।
- प्राथमिक उपयोगकर्ता: भारतीय वायु सेना (IAF)।
- मुख्य क्षमताएं: स्टील्थ, सटीक स्ट्राइक, खुफिया, निगरानी, टोही (ISR), इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (EW), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सक्षम मिशन स्वायत्तता।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **रणनीतिक स्वायत्तता और क्षेत्रीय शक्ति गतिशीलता:** 'दक्ष' यूसीएवी का शामिल होना भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो इसे महत्वपूर्ण हवाई प्लेटफार्मों के लिए बाहरी संस्थाओं पर निर्भर हुए बिना क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में शक्ति प्रक्षेपित करने और प्रतिरोध बनाए रखने में सक्षम बनाता है। हिंद-प्रशांत शक्ति संतुलन के लिए इसके निहितार्थों पर चर्चा करें।
- **युद्ध का भविष्य और रक्षा-औद्योगिक परिसर:** विश्लेषण करें कि 'दक्ष' जैसे यूसीएवी आधुनिक युद्ध में एक प्रतिमान बदलाव का प्रतिनिधित्व कैसे करते हैं, जो नेटवर्क-आधारित संचालन और एआई एकीकरण पर जोर देते हैं। भारत के रक्षा-औद्योगिक परिसर को बढ़ावा देने और तकनीकी आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल की भूमिका का मूल्यांकन करें।
पेज 65📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाअंतर्राष्ट्रीय संबंध
64. भारत, उज़्बेकिस्तान और जर्मनी ने 'यूरेशियन ग्रीन हाइड्रोजन कॉरिडोर' के लिए त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए
चर्चा में क्यों? (Why in News)
वैश्विक ऊर्जा संक्रमण प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए, आज भारत, उज़्बेकिस्तान और जर्मनी के बीच 'यूरेशियन ग्रीन हाइड्रोजन कॉरिडोर' की स्थापना के लिए एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस महत्वाकांक्षी पहल का उद्देश्य उज़्बेकिस्तान की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और भारत की बढ़ती मांग का लाभ उठाते हुए, जर्मन तकनीकी और वित्तीय सहायता से, ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, परिवहन और उपभोग को सुगम बनाना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •यह कॉरिडोर उज़्बेकिस्तान में सौर और पवन ऊर्जा द्वारा संचालित बड़े पैमाने पर ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन सुविधाओं की स्थापना को शामिल करेगा।
- •भारत ग्रीन हाइड्रोजन और उसके डेरिवेटिव के लिए एक प्राथमिक ऑफ-टेकर होगा, जो उसके औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन और ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण है।
- •जर्मनी इलेक्ट्रोलाइसिस, हाइड्रोजन भंडारण और परिवहन अवसंरचना विकास में महत्वपूर्ण तकनीकी विशेषज्ञता के साथ-साथ वित्तीय सहायता प्रदान करेगा।
- •यह समझौता मध्य एशिया को दक्षिण एशिया और यूरोप से जोड़ने के लिए पाइपलाइन, समर्पित शिपिंग मार्ग और रेल सहित एक बहु-मोडल परिवहन नेटवर्क पर जोर देता है।
- •यह पहल नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण और जीवाश्म ईंधन से दूर ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने के वैश्विक अभियान के अनुरूप है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'यूरेशियन ग्रीन हाइड्रोजन कॉरिडोर' एक त्रिपक्षीय पहल है।
- प्रतिभागी राष्ट्र भारत, उज़्बेकिस्तान और जर्मनी हैं।
- ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, परिवहन और उपभोग पर केंद्रित है।
- मध्य एशिया को दक्षिण एशिया और यूरोप से जोड़ने का लक्ष्य है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **भू-आर्थिक और भू-राजनीतिक निहितार्थ:** यह कॉरिडोर एक महत्वपूर्ण भू-आर्थिक बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है, जो उज़्बेकिस्तान को एक प्रमुख ग्रीन ऊर्जा उत्पादक में बदल रहा है और भारत की स्वच्छ ऊर्जा आयात में विविधता लाकर उसकी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर रहा है। भू-राजनीतिक परिप्रेक्ष्य से, यह भारत, मध्य एशिया और यूरोप के बीच गहरे जुड़ाव को बढ़ावा देता है, सहयोग के नए रास्ते बनाता है जो पारंपरिक ऊर्जा निर्भरताओं से परे जाते हैं और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देते हैं।
- **वैश्विक ऊर्जा संक्रमण और जलवायु लक्ष्यों को आगे बढ़ाना:** 'यूरेशियन ग्रीन हाइड्रोजन कॉरिडोर' वैश्विक ऊर्जा संक्रमण को तेज करने की दिशा में एक ठोस कदम है। ग्रीन हाइड्रोजन के लिए एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला बनाकर, यह कार्बन उत्सर्जन को कम करने, सतत विकास को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देता है, जो जलवायु कार्रवाई के लिए एक सहयोगी मॉडल को दर्शाता है।
पेज 66📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाअंतर्राष्ट्रीय संबंध
65. भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया ने ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समुद्री अभ्यास 'समुद्र रक्षा' का समापन किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया की नौसेनाओं को शामिल करते हुए उद्घाटन त्रिपक्षीय समुद्री अभ्यास, 'समुद्र रक्षा' (ओशन शील्ड), आज पूर्वी हिंद महासागर क्षेत्र में संपन्न हुआ। इस अभ्यास ने अंतरसंचालनीयता, समुद्री डोमेन जागरूकता और एचएडीआर (मानवीय सहायता और आपदा राहत) अभियानों को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया, जो तीनों इंडो-पैसिफिक राष्ट्रों के बीच बढ़ते रणनीतिक अभिसरण को रेखांकित करता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •इस अभ्यास में तीनों प्रतिभागी नौसेनाओं के युद्धपोतों, पनडुब्बियों, समुद्री गश्ती विमानों और हेलीकॉप्टरों सहित नौसैनिक संपत्तियों की एक विविध श्रृंखला शामिल थी।
- •मुख्य अभ्यासों में पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW), सतह रोधी युद्ध (ASuW), खोज और बचाव (SAR) अभियान और संयुक्त संचार अभ्यास शामिल थे।
- •एक महत्वपूर्ण घटक एचएडीआर परिदृश्यों के अनुकरण के लिए समर्पित था, जिसमें बड़े पैमाने पर हताहतों को निकालना और आपदा प्रतिक्रिया समन्वय शामिल था।
- •तीनों देशों के वरिष्ठ नौसेना अधिकारियों ने एक स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक को मजबूत करने में अभ्यास की भूमिका पर जोर दिया।
- •'समुद्र रक्षा' के सफल समापन से क्षेत्र में अधिक जटिल और लगातार त्रिपक्षीय जुड़ाव का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'समुद्र रक्षा' एक त्रिपक्षीय समुद्री अभ्यास है।
- प्रतिभागी भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया हैं।
- पूर्वी हिंद महासागर क्षेत्र में आयोजित किया गया।
- अंतरसंचालनीयता, समुद्री डोमेन जागरूकता और एचएडीआर पर केंद्रित है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **इंडो-पैसिफिक सुरक्षा वास्तुकला को मजबूत करना:** यह अभ्यास इंडो-पैसिफिक की गैर-गठबंधन सुरक्षा वास्तुकला को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण विकास को दर्शाता है। भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया को एक साथ लाकर, यह औपचारिक गठबंधन बनाए बिना क्षेत्रीय चुनौतियों का जवाब देने, समुद्री स्थिरता को बढ़ावा देने और संभावित वर्चस्व का मुकाबला करने के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करता है।
- **भारत की एक्ट ईस्ट नीति और समुद्री कूटनीति:** 'समुद्र रक्षा' भारत की एक्ट ईस्ट नीति के प्रति प्रतिबद्धता और समुद्री कूटनीति में उसकी बढ़ती क्षमता को रेखांकित करता है। इंडोनेशिया जैसे प्रमुख तटीय राज्यों और ऑस्ट्रेलिया जैसे रणनीतिक भागीदारों के साथ जुड़ना भारत के प्रभाव को बढ़ाता है, सामूहिक सुरक्षा के लिए उसकी क्षमताओं को मजबूत करता है, और हिंद महासागर क्षेत्र में एक शुद्ध सुरक्षा प्रदाता के रूप में उसकी भूमिका को पुष्ट करता है।
पेज 67📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाअंतर्राष्ट्रीय संबंध
66. संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक एआई शासन के लिए ऐतिहासिक 'डिजिटल ट्रस्ट फ्रेमवर्क' अपनाया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने न्यूयॉर्क में एक उच्च-स्तरीय शिखर सम्मेलन के बाद बहुप्रतीक्षित "डिजिटल ट्रस्ट फ्रेमवर्क (DTF)" को अपनाया है। इस फ्रेमवर्क का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रौद्योगिकियों के नैतिक विकास, परिनियोजन और शासन के लिए वैश्विक मानदंड और सिद्धांत स्थापित करना है, जो सुरक्षा, संरक्षा और मानवाधिकारों से संबंधित चिंताओं को संबोधित करेगा।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •DTF एआई शासन में सरकारों, नागरिक समाज, निजी क्षेत्र और शिक्षाविदों को शामिल करते हुए एक बहु-हितधारक दृष्टिकोण पर जोर देता है।
- •यह एआई प्रणालियों में पारदर्शिता, जवाबदेही, निष्पक्षता, गोपनीयता संरक्षण और मानवीय निगरानी जैसे सिद्धांतों को रेखांकित करता है।
- •फ्रेमवर्क विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसी वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए एआई अनुसंधान और विकास में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का आह्वान करता है।
- •कार्यान्वयन की निगरानी और दिशानिर्देशों को अद्यतन करने के लिए एक नए संयुक्त राष्ट्र सलाहकार निकाय, "ग्लोबल एआई एथिक्स काउंसिल" का प्रस्ताव किया गया है।
- •इसमें एआई अंतर को पाटने और एआई लाभों तक समावेशी पहुंच को बढ़ावा देने के लिए विकासशील राष्ट्रों में क्षमता निर्माण के प्रावधान शामिल हैं।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- "डिजिटल ट्रस्ट फ्रेमवर्क" संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाया गया था।
- यह नैतिक एआई शासन पर केंद्रित है।
- "ग्लोबल एआई एथिक्स काउंसिल" का प्रस्ताव करता है।
- भारत ने जिम्मेदार एआई की वकालत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **वैश्विक शासन के लिए महत्व:** डीटीएफ एआई शासन के लिए एक एकीकृत वैश्विक दृष्टिकोण स्थापित करने, नियामक विखंडन को रोकने और अंतर्राष्ट्रीय विश्वास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह उभरती प्रौद्योगिकियों में नवाचार और नैतिक सुरक्षा उपायों के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर बढ़ती सहमति को दर्शाता है।
- **भारत के लिए निहितार्थ:** एक उभरती एआई शक्ति और 'सभी के लिए एआई' के समर्थक के रूप में, डीटीएफ को आकार देने और लागू करने में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। यह फ्रेमवर्क भारत के लिए जिम्मेदार एआई समाधान विकसित करने, नैतिक एआई में निवेश आकर्षित करने और डिजिटल कूटनीति के माध्यम से अपनी सॉफ्ट पावर को बढ़ाने के अवसर प्रस्तुत करता है, जबकि घरेलू विनियमों को अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के साथ संरेखित करने में चुनौतियां भी पैदा करता है।
पेज 68📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकापर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
67. भारत ने सतत गहरे समुद्र में खनन अन्वेषण के लिए नए नियामक ढांचे का अनावरण किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने भारत के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल में उसके आवंटित क्षेत्र में गहरे समुद्र में खनन अन्वेषण के लिए एक व्यापक नियामक ढाँचे का अनावरण किया है। यह ढाँचा कठोर पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और एहतियाती सिद्धांत को अपनाने पर जोर देता है, जो संसाधन आवश्यकताओं को समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण के साथ संतुलित करता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •गहरे समुद्र में कोई भी अन्वेषण या शोषण गतिविधि शुरू होने से पहले अनिवार्य पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (ईआईए)।
- •भारत के ईईजेड के भीतर पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों और कमजोर समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों (वीएमई) के पास 'नो-माइनिंग जोन' की स्थापना।
- •गहरे समुद्र में खनन कार्यों के पारिस्थितिक पदचिह्न को कम करने के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों के विकास और उपयोग पर जोर।
- •वास्तविक समय डेटा संग्रह और स्वतंत्र पर्यावरणीय ऑडिट सहित मजबूत निगरानी तंत्र के लिए प्रावधान।
- •ढाँचा गहरे समुद्र में खनन के दीर्घकालिक प्रभावों पर अनुसंधान को प्रोत्साहित करता है और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण (आईएसए) के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का समर्थन करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- भारत अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण (आईएसए) के साथ एक 'पायनियर इन्वेस्टर' है।
- अनन्य आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) आधार रेखा से 200 समुद्री मील तक फैला हुआ है।
- पॉलीमेटेलिक नोड्यूल, कोबाल्ट-समृद्ध फेरोमैंगनीज क्रस्ट्स और हाइड्रोथर्मल वेंट प्रमुख गहरे समुद्र के खनिज संसाधन हैं।
- समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (यूएनसीएलओएस) समुद्री मामलों को नियंत्रित करता है।
- 'एहतियाती सिद्धांत' कहता है कि यदि गंभीर या अपरिवर्तनीय नुकसान का खतरा है, तो पूर्ण वैज्ञानिक निश्चितता की कमी को लागत प्रभावी उपायों को स्थगित करने का कारण नहीं माना जाएगा।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **भू-राजनीतिक और आर्थिक महत्व:** गहरे समुद्र में खनन से महत्वपूर्ण खनिजों (जैसे कोबाल्ट, निकल, दुर्लभ पृथ्वी तत्व) तक पहुँच मिलती है जो नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिससे भूमि-आधारित खनन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला कमजोरियों पर निर्भरता कम होती है।
- **पर्यावरणीय जोखिम और चुनौतियाँ:** संभावित प्रभावों में निवास स्थान का विनाश, फिल्टर फीडर को प्रभावित करने वाले तलछट के गुच्छे, मशीनरी से ध्वनि प्रदूषण और दीर्घकालिक पारिस्थितिकी तंत्र का व्यवधान शामिल हैं, जिसके लिए मजबूत पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और अनुकूली प्रबंधन रणनीतियों की आवश्यकता है।
- **अंतर्राष्ट्रीय शासन और इक्विटी:** राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार से परे क्षेत्रों में गहरे समुद्र में खनन को विनियमित करने में आईएसए की भूमिका समान लाभ-साझाकरण, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और 'मानवजाति की सामान्य विरासत' के सिद्धांत पर सवाल उठाती है।
- **तकनीकी प्रगति और स्थिरता:** गहरे समुद्र में संसाधन निष्कर्षण को सतत बनाने के लिए कम आक्रामक खनन प्रौद्योगिकियों का विकास और पर्यावरणीय प्रभावों के लिए पूर्वानुमान मॉडल में सुधार महत्वपूर्ण हैं, जो नीली अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों के अनुरूप हैं।
- **विकास और संरक्षण का संतुलन:** यह ढाँचा औद्योगिक विकास का समर्थन करने के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की बढ़ती मांग को पूरा करने और नाजुक तथा अक्सर कम समझे जाने वाले गहरे समुद्र के पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा करने की अनिवार्यता के बीच आवश्यक जटिल संतुलन पर प्रकाश डालता है।
पेज 69📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकापर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
68. 'हरित कृषि: एक समग्र दृष्टि' राष्ट्रीय कृषि वानिकी मिशन का शुभारंभ
चर्चा में क्यों? (Why in News)
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सहयोग से औपचारिक रूप से 'हरित कृषि: एक समग्र दृष्टि' - एक नया राष्ट्रीय कृषि वानिकी मिशन शुरू किया है। इस मिशन का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने, पारिस्थितिक लचीलेपन में सुधार करने और राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कृषि प्रणालियों में पेड़ों को एकीकृत करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •विविध कृषि-जलवायु क्षेत्रों में उपयुक्त प्रजाति चयन के साथ वृक्ष-आधारित कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देना।
- •कृषि वानिकी प्रथाओं के माध्यम से कार्बन पृथक्करण के लिए किसानों को प्रोत्साहन देना, संभावित रूप से कार्बन क्रेडिट बाजारों से जोड़ना।
- •कृषि परिदृश्यों में मृदा स्वास्थ्य, जल प्रतिधारण और जैव विविधता संरक्षण में सुधार पर ध्यान केंद्रित करना।
- •कृषि वानिकी उत्पादों के लिए गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री, तकनीकी ज्ञान और बाजार संबंधों तक पहुँच की सुविधा प्रदान करना।
- •आजीविका विविधीकरण और ग्रामीण विकास के लिए मौजूदा सरकारी योजनाओं के साथ एकीकरण।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति, 2014 कृषि वानिकी पर भारत की पहली समर्पित नीति थी।
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) - राष्ट्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान केंद्र (एनआरसीएएफ) एक प्रमुख अनुसंधान संस्थान है।
- कृषि वानिकी एक भूमि उपयोग प्रणाली है जहाँ फसलों या चरागाहों के आसपास या उनके बीच पेड़ या झाड़ियाँ उगाई जाती हैं।
- यह सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) जैसे एसडीजी 1 (गरीबी नहीं) और एसडीजी 15 (भूमि पर जीवन) में योगदान देता है।
- कार्बन क्रेडिट मापने योग्य, सत्यापन योग्य परमिट हैं जो धारक को एक टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर उत्सर्जन करने की अनुमति देते हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **जलवायु परिवर्तन शमन और अनुकूलन:** कृषि वानिकी प्रणालियाँ बायोमास और मिट्टी में कार्बन का पृथक्करण करती हैं, जिससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम होता है, जबकि विविध आय स्रोतों और बेहतर सूक्ष्म-जलवायु के माध्यम से जलवायु परिवर्तनशीलता के प्रति लचीलापन भी बढ़ता है।
- **किसान आय वृद्धि:** लकड़ी, जलाऊ लकड़ी, चारा, फल और औषधीय पौधों जैसे कई उत्पाद प्रदान करके, कृषि वानिकी आय के स्रोतों में विविधता लाती है और एकल फसल चक्रों पर निर्भरता कम करती है, जिससे किसानों की लाभप्रदता बढ़ती है और संकट कम होता है।
- **पर्यावरणीय स्थिरता:** यह भूमि क्षरण का मुकाबला करने, मिट्टी की उर्वरता में सुधार करने, पानी का संरक्षण करने और विभिन्न वनस्पतियों और जीवों के लिए आवास प्रदान करके जैव विविधता को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे पारिस्थितिक संतुलन को बढ़ावा मिलता है।
- **खाद्य सुरक्षा और पोषण:** फलदार वृक्षों और फलियां वाली प्रजातियों को एकीकृत करने से विशेष रूप से कमजोर ग्रामीण समुदायों में पोषण सुरक्षा और आहार विविधता में योगदान हो सकता है।
- **नीति और कार्यान्वयन चुनौतियाँ:** प्रभावी कार्यान्वयन के लिए भूमि कार्यकाल के मुद्दे, जागरूकता की कमी, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री की उपलब्धता और कृषि वानिकी उत्पादों के लिए मजबूत बाजार तंत्र जैसी चुनौतियों पर काबू पाना आवश्यक है।
पेज 70📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकापर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
69. राष्ट्रीय आर्द्रभूमि बहाली एवं प्रबंधन कार्यक्रम (NWRMP) चरण-II समीक्षा जारी
चर्चा में क्यों? (Why in News)
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने राष्ट्रीय आर्द्रभूमि बहाली एवं प्रबंधन कार्यक्रम (NWRMP) के दूसरे चरण की मध्य-अवधि की समीक्षा रिपोर्ट जारी की है, जिसमें एकीकृत आर्द्रभूमि प्रबंधन में महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला गया है और भविष्य की रणनीतियाँ रेखांकित की गई हैं।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •समीक्षा में पारिस्थितिक बहाली प्रयासों के साथ स्थानीय आजीविका को एकीकृत करते हुए एक समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोण पर जोर दिया गया है।
- •वैज्ञानिक प्रबंधन और संरक्षण रणनीतियों के माध्यम से तटीय आर्द्रभूमियों की 'ब्लू कार्बन' क्षमता को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- •आर्द्रभूमि स्वास्थ्य और हाइड्रोलॉजिकल व्यवस्था की प्रभावी निगरानी के लिए रिमोट सेंसिंग और जीआईएस प्रौद्योगिकियों का एकीकरण।
- •राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरणों और स्थानीय समुदायों के लिए क्षमता निर्माण पहलों ने सकारात्मक परिणाम दिखाए हैं।
- •यह कार्यक्रम जल जीवन मिशन और अमृत सरोवर जैसे अन्य राष्ट्रीय मिशनों के साथ तालमेल बिठाकर समग्र जल संसाधन प्रबंधन का लक्ष्य रखता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- राष्ट्रीय आर्द्रभूमि बहाली एवं प्रबंधन कार्यक्रम (NWRMP) MoEFCC की एक पहल है।
- आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 आर्द्रभूमियों के लिए एक नियामक ढाँचा प्रदान करते हैं।
- आर्द्रभूमियों पर रामसर अभिसमय आर्द्रभूमियों के संरक्षण और सतत उपयोग के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है।
- 'ब्लू कार्बन' तटीय और समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों में संग्रहित कार्बन को संदर्भित करता है।
- मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड रामसर स्थलों का एक रजिस्टर है जहाँ पारिस्थितिक चरित्र में परिवर्तन हुए हैं, हो रहे हैं, या होने की संभावना है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **पारिस्थितिक महत्व:** आर्द्रभूमि महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र हैं जो जल शुद्धिकरण, बाढ़ नियंत्रण, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु विनियमन जैसी कई पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ प्रदान करते हैं।
- **जलवायु लचीलापन:** आर्द्रभूमि चरम मौसम की घटनाओं के खिलाफ प्राकृतिक बफर के रूप में कार्य करती हैं और कार्बन पृथक्करण के माध्यम से जलवायु परिवर्तन शमन में योगदान करती हैं।
- **आजीविका और आर्थिक लाभ:** आर्द्रभूमियों का सतत प्रबंधन मत्स्य पालन, पर्यावरण-पर्यटन और पारंपरिक संसाधन उपयोग के माध्यम से स्थानीय आजीविका का समर्थन कर सकता है, जिससे हरित अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों को बढ़ावा मिलता है।
- **प्रबंधन में चुनौतियाँ:** अतिक्रमण, कृषि अपवाह और औद्योगिक कचरे से प्रदूषण, परिवर्तित हाइड्रोलॉजिकल व्यवस्था और जन जागरूकता की कमी आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियाँ पेश करती हैं।
- **नीति एकीकरण और शासन:** प्रभावी आर्द्रभूमि प्रबंधन के लिए मजबूत नीतिगत ढाँचे, अंतर-क्षेत्रीय समन्वय और स्थानीय समुदायों तथा पंचायती राज संस्थानों को शामिल करते हुए विकेन्द्रीकृत शासन की आवश्यकता है।
पेज 71📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
70. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने चक्रीय अर्थव्यवस्था के लिए अगली पीढ़ी के बायो-कम्पोजिट्स पर अनुसंधान को वित्त पोषित किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने आज उन्नत बायो-कम्पोजिट्स में अनुसंधान और विकास में तेजी लाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण वित्तपोषण पहल की घोषणा की। यह रणनीतिक निवेश पारंपरिक प्लास्टिक और पारंपरिक सामग्रियों के स्थायी, बायोडिग्रेडेबल विकल्पों के निर्माण को बढ़ावा देने का प्रयास करता है, जो भारत के महत्वाकांक्षी चक्रीय अर्थव्यवस्था लक्ष्यों और जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •यह पहल कृषि अपशिष्ट, वन बायोमास और समुद्री संसाधनों (जैसे काइटिन, लिग्निन, सेल्युलोज) से प्राप्त उपन्यास बायो-कम्पोजिट सामग्रियों के विकास को लक्षित करती है।
- •फोकस क्षेत्रों में पैकेजिंग, ऑटोमोटिव इंटीरियर, निर्माण और कपड़ा उद्योगों के लिए उच्च-प्रदर्शन वाले बायो-कम्पोजिट शामिल हैं, जिसमें बायोडिग्रेडेबिलिटी, पुनर्चक्रण योग्यता और कम कार्बन पदचिह्न जैसे गुणों पर जोर दिया गया है।
- •प्रयोगशाला नवाचारों को वाणिज्यिक अनुप्रयोगों में तेजी से बदलने की सुविधा के लिए प्रमुख अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों और औद्योगिक भागीदारों को जोड़ने वाला 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल अपनाया जाएगा।
- •यह वित्तपोषण स्वदेशी बायो-कम्पोजिट प्रौद्योगिकियों की स्केलेबिलिटी और बाजार स्वीकृति सुनिश्चित करने के लिए पायलट प्लांट और मानकीकरण प्रयासों का भी समर्थन करेगा।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- बायो-कम्पोजिट्स: परिभाषा, प्रकार (जैसे प्राकृतिक फाइबर प्रबलित, बायोडिग्रेडेबल पॉलिमर)।
- चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांत और सामग्री विज्ञान के लिए उनकी प्रासंगिकता।
- अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) की भूमिका।
- बायोमास स्रोतों के उदाहरण: लिग्निन, सेल्युलोज, काइटिन, कृषि अवशेष।
- अवधारणाएँ: बायोडिग्रेडेबिलिटी, पुनर्चक्रण योग्यता, कार्बन पदचिह्न।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **पर्यावरणीय स्थिरता और अपशिष्ट प्रबंधन**: विश्लेषण करें कि बायो-कम्पोजिट्स प्लास्टिक प्रदूषण, लैंडफिल बोझ और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कैसे महत्वपूर्ण रूप से कम कर सकते हैं, जिससे भारत के जलवायु कार्रवाई लक्ष्यों और स्वच्छ भारत अभियान में योगदान मिल सके।
- **आर्थिक अवसर और ग्रामीण विकास**: कृषि अपशिष्ट में मूल्यवर्धन, बायोमास प्रसंस्करण और विनिर्माण में हरित नौकरियों का सृजन, और ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं के विविधीकरण की क्षमता पर चर्चा करें।
- **वाणिज्यीकरण में चुनौतियाँ और नीतिगत समर्थन**: उत्पादन बढ़ाने, पारंपरिक सामग्रियों के साथ लागत प्रतिस्पर्धा प्राप्त करने, और व्यापक अपनाने के लिए सहायक नीतिगत ढाँचों, मानकीकरण और उपभोक्ता जागरूकता की आवश्यकता में आने वाली बाधाओं का मूल्यांकन करें।
- **नवाचार और वैश्विक नेतृत्व**: भारत को स्थायी सामग्री अनुसंधान और विनिर्माण में एक अग्रणी के रूप में स्थापित करना, वैश्विक बायो-अर्थव्यवस्था में निवेश आकर्षित करना और तकनीकी निर्यात को बढ़ावा देना।
पेज 72📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
71. राष्ट्रीय AI फॉर हेल्थ पहल ने सटीक निदान के लिए 'स्वास्थ्यनेत्र' लॉन्च किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और नीति आयोग के सहयोग से आज 'स्वास्थ्यनेत्र' - एक अखिल भारतीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) संचालित नैदानिक मंच लॉन्च किया। इस पहल का उद्देश्य विशेष रूप से कम सेवा वाले क्षेत्रों में, तीव्र, सटीक और सुलभ स्क्रीनिंग तथा पहचान सेवाएँ प्रदान करके सार्वजनिक स्वास्थ्य निदान में क्रांति लाना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •'स्वास्थ्यनेत्र' मधुमेह संबंधी रेटिनोपैथी, तपेदिक, कुछ कैंसर (जैसे गर्भाशय ग्रीवा, मौखिक) और त्वचा संबंधी स्थितियों जैसी प्रचलित बीमारियों का शीघ्र पता लगाने के लिए विशाल डेटासेट पर प्रशिक्षित AI मॉडल को एकीकृत करता है।
- •यह मंच डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का लाभ उठाता है, जो आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) और टेली-परामर्श सेवाओं जैसी मौजूदा स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों के साथ एकीकरण को सक्षम बनाता है, जिससे निर्बाध डेटा प्रवाह और रेफरल तंत्र की सुविधा मिलती है।
- •पायलट कार्यान्वयन ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) पर केंद्रित होगा ताकि नैदानिक पहुँच में विषमताओं को दूर किया जा सके और तृतीयक देखभाल सुविधाओं पर बोझ कम किया जा सके।
- •डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 का पालन करते हुए, मजबूत डेटा गोपनीयता और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर जोर दिया गया है, जिससे रोगी की गोपनीयता और नैतिक AI परिनियोजन सुनिश्चित हो सके।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'स्वास्थ्यनेत्र' के उद्देश्य और मुख्य विशेषताएँ।
- स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, ICMR, नीति आयोग की भूमिका।
- स्वास्थ्य सेवा में AI की अवधारणा, मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग।
- आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) और इसका एकीकरण।
- स्वास्थ्य में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI)।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **स्वास्थ्य सेवा पहुँच और समानता बढ़ाना**: चर्चा करें कि कैसे AI निदान विशेष रूप से दूरस्थ आबादी के लिए स्वास्थ्य सेवा पहुँच में अंतर को पाट सकता है, शीघ्र और सटीक निदान प्रदान करके, जिससे रुग्णता और मृत्यु दर कम हो सके।
- **स्वास्थ्य में नैतिक AI और डेटा शासन**: डेटा गोपनीयता, एल्गोरिथम पूर्वाग्रह, AI-संचालित निदान में जवाबदेही से संबंधित चुनौतियों का विश्लेषण करें, और रोगी के विश्वास तथा नैतिक परिनियोजन सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नियामक ढांचे की आवश्यकता पर बल दें।
- **स्वास्थ्य सेवा कार्यबल और क्षमता निर्माण पर प्रभाव**: मूल्यांकन करें कि AI उपकरण स्वास्थ्य पेशेवरों की क्षमताओं को कैसे बढ़ा सकते हैं, जिसके लिए AI-जनित अंतर्दृष्टि के प्रभावी अपनाने और व्याख्या के लिए नए कौशल सेट और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता होगी।
- **आर्थिक निहितार्थ और सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणाम**: शीघ्र पहचान और निवारक देखभाल के माध्यम से लागत बचत की संभावना का आकलन करें, जिससे बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणाम और स्वास्थ्य सेवा संसाधनों का अधिक कुशल आवंटन हो सके।
पेज 73📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
72. राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत भारत ने स्वदेशी क्वांटम प्रोसेसर प्रोटोटाइप का अनावरण किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने आज भारत के पहले स्वदेशी दोष-सहिष्णु क्वांटम प्रोसेसर प्रोटोटाइप के सफल विकास और प्रदर्शन की घोषणा की। यह उपलब्धि राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) के रणनीतिक उद्देश्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत को महत्वपूर्ण कंप्यूटिंग डोमेन में क्वांटम श्रेष्ठता प्राप्त करने के करीब ला रहा है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों और इनक्यूबेटेड स्टार्टअप्स के एक संघ द्वारा विकसित इस प्रोटोटाइप में 64-क्यूबिट सुपरकंडक्टिंग आर्किटेक्चर है, जो स्थिर सुसंगतता समय और उच्च निष्ठा संचालन प्रदर्शित करता है।
- •इसमें उन्नत त्रुटि सुधार तंत्र शामिल हैं, जो व्यावहारिक, बड़े पैमाने के क्वांटम कंप्यूटर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो शास्त्रीय कंप्यूटिंग सीमाओं से परे जटिल समस्याओं को हल करने में सक्षम हैं।
- •यह पहल उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में 'आत्मनिर्भर भारत' के भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है, विदेशी क्वांटम प्रौद्योगिकी पर निर्भरता कम करती है और घरेलू नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देती है।
- •भविष्य के रोडमैप में क्यूबिट संख्या को बढ़ाना, वैकल्पिक क्वांटम कंप्यूटिंग प्रतिमानों (जैसे फोटोनिक, ट्रैप्ड-आयन) की खोज करना और विशिष्ट औद्योगिक तथा रक्षा अनुप्रयोगों के लिए क्वांटम एल्गोरिदम विकसित करना शामिल है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) के उद्देश्य और वित्तीय परिव्यय।
- मुख्य अवधारणाएँ: क्यूबिट्स, सुपरपोजिशन, उलझाव (Entanglement), क्वांटम एनीलिंग, क्वांटम श्रेष्ठता, त्रुटि सुधार कोड।
- क्वांटम कंप्यूटिंग पद्धति के रूप में सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट्स।
- NQM के लिए नोडल एजेंसी के रूप में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST)।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय सुरक्षा**: चर्चा करें कि कैसे स्वदेशी क्वांटम कंप्यूटिंग क्षमताएं उन्नत क्रिप्टोग्राफी और रक्षा अनुप्रयोगों के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ाती हैं, साइबर खतरों के प्रति संवेदनशीलता को कम करती हैं।
- **आर्थिक प्रभाव और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र**: क्वांटम कंप्यूटिंग की क्षमता का विश्लेषण करें कि यह फार्मास्यूटिकल्स, सामग्री विज्ञान, वित्तीय मॉडलिंग और AI जैसे उद्योगों में क्रांति ला सकता है, जिससे भारत के प्रौद्योगिकी क्षेत्र में रोजगार सृजन होगा और वैश्विक निवेश आकर्षित होगा।
- **चुनौतियाँ और नैतिक विचार**: क्वांटम कंप्यूटरों को स्केल करने में तकनीकी बाधाओं, कुशल कार्यबल विकास की आवश्यकता और मौजूदा एन्क्रिप्शन मानकों को तोड़ने वाली क्वांटम क्रिप्टोग्राफी से जुड़े नैतिक दुविधाओं का मूल्यांकन करें।
- **वैश्विक क्वांटम दौड़**: क्वांटम लाभ प्राप्त करने के लिए राष्ट्रों के बीच वैश्विक प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में भारत के प्रयासों को रखें, राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर दें।
पेज 74📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासामाजिक मुद्दे
73. 'ग्राम मानस स्वास्थ्य प्रहरी' पहल: ग्रामीण मानसिक स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच बढ़ाना
चर्चा में क्यों? (Why in News)
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निमहांस) के सहयोग से आज 'ग्राम मानस स्वास्थ्य प्रहरी' पहल का शुभारंभ किया। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के अंतर को पाटना है, जिसके तहत सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को जमीनी स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता, प्रारंभिक हस्तक्षेप प्रदान करने और उच्च देखभाल सुविधाओं के लिए रेफरल की सुविधा प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**समुदाय-आधारित प्रशिक्षण:** मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा) और सहायक नर्स दाइयों (एएनएम) के लिए सामान्य मानसिक स्वास्थ्य विकारों की पहचान करने, बुनियादी परामर्श प्रदान करने और मनोवैज्ञानिक प्राथमिक उपचार प्रदान करने के लिए व्यापक प्रशिक्षण मॉड्यूल।
- •**कलंक-उन्मूलन और जागरूकता:** मानसिक बीमारी से जुड़े कलंक को कम करने और मदद मांगने वाले व्यवहार को प्रोत्साहित करने के लिए ग्राम स्तर पर व्यापक जन जागरूकता अभियान।
- •**टेली-परामर्श एकीकरण:** प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से जुड़े टेली-परामर्श हब की स्थापना, प्रशिक्षित सामुदायिक कार्यकर्ताओं को मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ वर्चुअल परामर्श की सुविधा प्रदान करने में सक्षम बनाना।
- •**रेफरल मार्ग:** विशेष देखभाल की आवश्यकता वाले व्यक्तियों को जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों और तृतीयक देखभाल अस्पतालों से जोड़ने के लिए स्पष्ट और कुशल रेफरल तंत्र का निर्माण।
- •**डेटा संग्रह और अनुसंधान:** मानसिक स्वास्थ्य की व्यापकता, उपचार परिणामों की निगरानी करने और ग्रामीण मानसिक स्वास्थ्य रणनीतियों के लिए नीतिगत समायोजन को सूचित करने के लिए एक मजबूत डेटा संग्रह प्रणाली का कार्यान्वयन।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'ग्राम मानस स्वास्थ्य प्रहरी' MoHFW और NIMHANS की एक संयुक्त पहल है।
- यह ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच को लक्षित करता है।
- आशा और एएनएम को 'प्रहरी' (सेंटिनल्स) के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।
- टेली-परामर्श हब को पीएचसी के साथ एकीकृत किया जाएगा।
- मानसिक स्वास्थ्य कलंक को कम करने का लक्ष्य है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **ग्रामीण-शहरी मानसिक स्वास्थ्य विभाजन को संबोधित करना:** विश्लेषण करें कि यह पहल शहरी और ग्रामीण आबादी के बीच मानसिक स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच में मौजूदा असमानताओं को प्रभावी ढंग से कैसे पाट सकती है, जिसमेंBमौलिक और मानव संसाधन चुनौतियों पर विचार किया गया है।
- **सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की भूमिका:** प्रारंभिक पहचान, संकट हस्तक्षेप और अनुवर्ती देखभाल में आशा और एएनएम की अग्रिम पंक्ति के मानसिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा करें, और निरंतर प्रशिक्षण और समर्थन की आवश्यकता पर भी।
- **प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के साथ एकीकरण:** मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मौजूदा प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा संरचनाओं में एकीकृत करने के महत्व का मूल्यांकन करें, अस्पताल-केंद्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर और कल्याण के एक समग्र मॉडल को बढ़ावा देना।
- **सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ और कलंक:** जांच करें कि यह पहल ग्रामीण परिवेश में मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले सामाजिक-सांस्कृतिक कारकों और इससे जुड़े व्यापक कलंक को कैसे संबोधित करती है, जिसमें सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील हस्तक्षेपों और संचार रणनीतियों पर जोर दिया गया है।
पेज 75📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
74. 'ध्रुव Mk-I': भारतीय निजी फर्म एस्ट्रस्पेस ने मध्यम-लिफ्ट कक्षीय वाहन का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
एक प्रमुख भारतीय निजी एयरोस्पेस कंपनी, एस्ट्रस्पेस ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) से अपने स्वदेशी रूप से विकसित मध्यम-लिफ्ट लॉन्च वाहन, 'ध्रुव एमके-I' का पहला कक्षीय प्रक्षेपण सफलतापूर्वक पूरा किया। यह भारत के बढ़ते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो पूर्ण-स्टैक अंतरिक्ष क्षमताओं को प्रदर्शित करता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •'ध्रुव एमके-I' को 500 किलोग्राम तक के पेलोड को निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में तैनात करने के लिए डिज़ाइन किया गया है और इसमें उन्नत 3डी-प्रिंटेड सेमी-क्रायोजेनिक इंजनों का उपयोग करते हुए एक आंशिक रूप से पुन: प्रयोज्य पहला चरण शामिल है।
- •मिशन ने दूरसंवेदी और IoT संचार तारामंडल के लिए नैनो-उपग्रहों के एक समूह को सफलतापूर्वक स्थापित किया, जो पूरी तरह से भारतीय स्टार्टअप्स द्वारा विकसित किए गए थे।
- •यह प्रक्षेपण अंतरिक्ष में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने, इसरो के रणनीतिक मिशनों को पूरक करने और वाणिज्यिक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- •वाहन का मॉड्यूलर डिज़ाइन और तीव्र विनिर्माण क्षमताएं वैश्विक स्तर पर छोटे उपग्रह ऑपरेटरों के लिए प्रक्षेपण लागत को कम करने और प्रक्षेपण आवृत्ति को बढ़ाने की उम्मीद है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- एस्ट्रस्पेस: (काल्पनिक, स्काईरूट, अग्निकुल जैसे निजी खिलाड़ियों का प्रतिनिधित्व करता है)।
- 'ध्रुव एमके-I': मध्यम-लिफ्ट लॉन्च वाहन।
- सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी): भारत का प्राथमिक अंतरिक्ष केंद्र।
- निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO): कई संचार और दूरसंवेदी उपग्रहों के लिए कक्षा।
- सेमी-क्रायोजेनिक इंजन: RP-1 (परिष्कृत केरोसिन) और तरल ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं।
- एयरोस्पेस में 3डी प्रिंटिंग: तीव्र प्रोटोटाइपिंग और जटिल घटकों के विनिर्माण के लिए।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **अंतरिक्ष का लोकतंत्रीकरण और आर्थिक अवसर:** एस्ट्रस्पेस जैसे निजी खिलाड़ियों का प्रवेश अंतरिक्ष तक पहुंच का लोकतंत्रीकरण करता है, नवाचार को बढ़ावा देता है, और अंतरिक्ष-तकनीक स्टार्टअप के लिए एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र बनाता है। इससे महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर पैदा होंगे, रोजगार सृजन में योगदान होगा और भारत की वैश्विक अंतरिक्ष केंद्र के रूप में स्थिति मजबूत होगी।
- **सामरिक स्वायत्तता और दोहरे उपयोग की क्षमताएं:** हालांकि मुख्य रूप से वाणिज्यिक, स्वदेशी निजी प्रक्षेपण क्षमताएं अंतरिक्ष पहुंच में भारत की सामरिक स्वायत्तता को बढ़ाती हैं, जिससे विदेशी प्रक्षेपण प्रदाताओं पर निर्भरता कम होती है। अंतर्निहित प्रौद्योगिकियों में दोहरे उपयोग के अनुप्रयोग भी हो सकते हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी।
पेज 76📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
75. सीएसआईआर-सीईसीआरआई ने ईवी के लिए ऑल-सॉलिड-स्टेट बैटरी टेक्नोलॉजी में बड़ी सफलता हासिल की
चर्चा में क्यों? (Why in News)
वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद - केंद्रीय विद्युत रासायनिक अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीईसीआरआई), कराईकुडी ने एक नई पीढ़ी की ऑल-सॉलिड-स्टेट बैटरी (ASSB) विकसित करने में एक महत्वपूर्ण सफलता की घोषणा की है, जिसमें बढ़ी हुई ऊर्जा घनत्व, तेज चार्जिंग क्षमता और बेहतर सुरक्षा प्रोफाइल है, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहन (EV) अनुप्रयोगों को लक्षित करते हुए।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •नए ASSB प्रोटोटाइप में एक उपन्यास सल्फाइड-आधारित ठोस इलेक्ट्रोलाइट का उपयोग किया गया है जिसमें एक मालिकाना पॉलिमर कोटिंग है, जो इंटरफेशियल प्रतिरोध और डेंड्राइट गठन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को संबोधित करता है जो पारंपरिक डिजाइनों को प्रभावित करते हैं।
- •यह 500 Wh/kg से अधिक ऊर्जा घनत्व और 15 मिनट से कम समय में 80% क्षमता तक अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग प्रदर्शित करता है, जो वर्तमान लिथियम-आयन बैटरी को बहुत पीछे छोड़ देता है।
- •यह ज्वलनशील तरल इलेक्ट्रोलाइट्स के उपयोग को समाप्त करता है, जिससे सुरक्षा और थर्मल स्थिरता में नाटकीय रूप से वृद्धि होती है, जिससे यह अत्यधिक परिचालन स्थितियों के लिए उपयुक्त हो जाता है।
- •अनुसंधान से विनिर्माण लागत में कमी और लंबी चक्र जीवन की संभावना का संकेत मिलता है, जो बड़े पैमाने के ईवी और ग्रिड भंडारण के लिए एक स्थायी विकल्प का वादा करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- सीएसआईआर-सीईसीआरआई: कराईकुडी, तमिलनाडु में स्थित, भारत का प्रमुख विद्युत रासायनिक अनुसंधान संस्थान।
- ऑल-सॉलिड-स्टेट बैटरी (ASSB): मुख्य घटकों में ठोस इलेक्ट्रोलाइट, एनोड और कैथोड शामिल हैं।
- इलेक्ट्रोलाइट प्रकार: तरल (लिथियम-आयन) बनाम ठोस (सल्फाइड, ऑक्साइड, पॉलिमर)।
- ऊर्जा घनत्व: Wh/kg (वाट-घंटे प्रति किलोग्राम) में मापा जाता है।
- डेंड्राइट गठन: लिथियम-धातु बैटरी में एक समस्या।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **भारत के ईवी परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा में तेजी लाना:** यह सफलता भारत के महत्वाकांक्षी इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लक्ष्यों और ऊर्जा भंडारण बुनियादी ढांचे के लिए एक गेम-चेंजर हो सकती है, जिससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। स्वदेशी विकास महत्वपूर्ण बैटरी घटकों के लिए आयात निर्भरता को भी कम करता है।
- **'मेक इन इंडिया' और अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना:** सफल व्यावसायीकरण वैश्विक उन्नत बैटरी विनिर्माण परिदृश्य में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा, निवेश को आकर्षित करेगा और सामग्री विज्ञान और इलेक्ट्रोकेमिस्ट्री में एक मजबूत अनुसंधान और विकास पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देगा।
पेज 77📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
76. भारत का नया एआई मॉडल 'वर्षा' क्षेत्रीय जलवायु पूर्वानुमान में लाएगा क्रांति
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) और आईआईटी के एक संघ ने 'वर्षा 2.0' का अनावरण किया है, जो एक अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मॉडल है। यह मॉडल दक्षिण एशियाई मानसून पैटर्न और अत्यधिक मौसम की घटनाओं का दो ऋतुओं तक के अग्रिम समय के लिए अभूतपूर्व सटीकता के साथ पूर्वानुमान लगाने की क्षमता रखता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •'वर्षा 2.0' गहन शिक्षण तंत्रिका नेटवर्क और भौतिकी-सूचित एआई का लाभ उठाता है, जिसमें उपग्रह इमेजरी, वायुमंडलीय सेंसर और समुद्र संबंधी अवलोकनों से विशाल डेटासेट को एकीकृत किया गया है।
- •पारंपरिक संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान (NWP) मॉडल की तुलना में पूर्वानुमान के अग्रिम समय और स्थानिक संकल्प में उल्लेखनीय सुधार करता है।
- •स्थानीयकृत अत्यधिक मौसम की घटनाओं जैसे अचानक बाढ़, सूखे और हीटवेव के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन पूर्वानुमान प्रदान करता है, जो कृषि योजना और आपदा प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है।
- •यह मॉडल कृषि और जल संसाधनों पर संभावित प्रभावों का अनुमान लगाने के लिए सामाजिक-आर्थिक डेटा को भी शामिल करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM): पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्थान।
- जलवायु विज्ञान में एआई/एमएल: गहन शिक्षण, तंत्रिका नेटवर्क, भौतिकी-सूचित एआई का अनुप्रयोग।
- मानसून पूर्वानुमान मॉडल: पारंपरिक NWP बनाम एआई/एमएल मॉडल।
- अत्यधिक मौसम की घटनाएँ: अचानक बाढ़, सूखा, हीटवेव।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **जलवायु लचीलेपन के लिए निहितार्थ:** उन्नत पूर्वानुमान क्षमताएं भारत को जलवायु परिवर्तन अनुकूलन के लिए सक्रिय रणनीतियाँ विकसित करने की अनुमति देंगी, विशेष रूप से कृषि, जल संसाधन प्रबंधन और शहरी नियोजन में, जिससे आर्थिक नुकसान और मानवीय हताहतों को कम किया जा सकेगा।
- **तकनीकी संप्रभुता और सहयोग:** यह स्वदेशी विकास एआई और जलवायु विज्ञान में भारत की बढ़ती दक्षता को प्रदर्शित करता है, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है और वैश्विक जलवायु मॉडलिंग प्रयासों में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए रास्ते खोलता है।
पेज 78📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासरकारी योजनाएं एवं सामाजिक मुद्दे
77. राजस्थान की मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना (एम.सी.एच.बी.एस.बी.वाई.) और जन आधार एकीकरण: सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और डिजिटल सशक्तिकरण के लिए एक मॉडल
चर्चा में क्यों? (Why in News)
राजस्थान सरकार ने मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना (एम.सी.एच.बी.एस.बी.वाई.) पर एक व्यापक प्रभाव आकलन रिपोर्ट जारी की, जिसमें सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्राप्त करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका और कुशल लाभार्थी पहचान और कैशलेस सेवाओं के लिए राजस्थान जन आधार मंच के साथ इसके निर्बाध एकीकरण पर प्रकाश डाला गया।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •एम.सी.एच.बी.एस.बी.वाई. वर्तमान में 1.4 करोड़ (14 मिलियन) से अधिक परिवारों को कवर करती है, जो राज्य की लगभग 70% आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, विभिन्न बीमारियों और अंग प्रत्यारोपण के लिए ₹25 लाख तक का कैशलेस उपचार प्रदान करती है।
- •राजस्थान जन आधार मंच ने अपनी स्थापना के बाद से एम.सी.एच.बी.एस.बी.वाई. के तहत 1.2 करोड़ (12 मिलियन) से अधिक सफल कैशलेस दावों को सुविधाजनक बनाया है, जिससे लाभार्थियों के लिए अनुमानित 60-70% तक जेब से खर्च (OOPE) में भारी कमी आई है।
- •प्रभाव आकलन रिपोर्ट बताती है कि नामांकित परिवारों के लिए विनाशकारी स्वास्थ्य व्यय में 50% की कमी आई है, जिससे पूरे राज्य में वित्तीय सुरक्षा और स्वास्थ्य-seeking व्यवहार में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
- •इस योजना ने 100 से अधिक नए निजी अस्पतालों और क्लीनिकों को पैनल में शामिल करने को प्रोत्साहित करके स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा दिया है, विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में, गुणवत्तापूर्ण देखभाल तक पहुंच में सुधार किया है।
- •एक अभिनव 'चिरंजीवी मित्र' नेटवर्क स्थापित किया गया है, जिसमें सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता शामिल हैं जो लाभार्थियों को योजना को समझने और सेवाओं तक पहुंचने में सहायता करते हैं, जिससे अंतिम-मील वितरण में और सुधार होता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना (एम.सी.एच.बी.एस.बी.वाई.) राजस्थान सरकार द्वारा 2021 में शुरू की गई थी।
- यह योजना प्रति परिवार ₹25 लाख तक का स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करती है (शुरुआत में ₹5 लाख, बाद में बढ़ाकर ₹10 लाख और फिर ₹25 लाख किया गया)।
- राजस्थान जन आधार इस योजना के लिए प्राथमिक डिजिटल पहचान और लाभार्थी प्रबंधन मंच है।
- एम.सी.एच.बी.एस.बी.वाई. का लक्ष्य सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के करीब पहुंचना है, जिसमें राजस्थान की लगभग 70% आबादी शामिल है।
- एम.सी.एच.बी.एस.बी.वाई. के तहत सरकारी और सूचीबद्ध निजी दोनों अस्पतालों में कैशलेस उपचार उपलब्ध है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यू.एच.सी.) के लिए मॉडल:** एम.सी.एच.बी.एस.बी.वाई. यू.एच.सी. प्राप्त करने के लिए एक मजबूत राज्य-नेतृत्व वाला मॉडल है, जो बड़ी आबादी को व्यापक स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रदान करने की व्यवहार्यता को प्रदर्शित करता है, स्वास्थ्य सेवा तक वित्तीय बाधाओं को काफी कम करता है और समान पहुंच को बढ़ावा देता है।
- **शासन में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डी.पी.आई.):** राजस्थान जन आधार का एम.सी.एच.बी.एस.बी.वाई. के साथ निर्बाध एकीकरण सरकारी सेवाओं को सुव्यवस्थित करने, पारदर्शिता बढ़ाने और कल्याणकारी लाभों के कुशल, रिसाव-मुक्त वितरण को सुनिश्चित करने में डी.पी.आई. की परिवर्तनकारी शक्ति को दर्शाता है, जो अन्य राज्यों के लिए एक बेंचमार्क स्थापित करता है।
- **सामाजिक-आर्थिक प्रभाव और गरीबी उन्मूलन:** विनाशकारी स्वास्थ्य व्यय को कम करके और जेब से होने वाले खर्च को कम करके, यह योजना लाखों परिवारों को स्वास्थ्य झटकों के कारण गरीबी में गिरने से प्रभावी ढंग से रोकती है, जिससे गरीबी में कमी, आर्थिक स्थिरता और कमजोर वर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा में पर्याप्त योगदान होता है।
- **चुनौतियाँ और भविष्य का दायरा:** चुनौतियों में सभी सूचीबद्ध सुविधाओं में देखभाल की सुसंगत गुणवत्ता सुनिश्चित करना, मजबूत ऑडिट तंत्र के माध्यम से संभावित धोखाधड़ी वाले दावों को संबोधित करना और विशेष उपचारों और निवारक स्वास्थ्य देखभाल पैकेजों का विस्तार करना शामिल है। भविष्य का दायरा टेलीमेडिसिन, एआई-संचालित निदान और एक समग्र स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता नेटवर्क को और मजबूत करने में निहित है।
पेज 79📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासरकारी योजनाएं एवं सामाजिक मुद्दे
78. पोषण अभियान 2.0: राष्ट्रीय मूल्यांकन रिपोर्ट प्रगति पर प्रकाश डालती है, डिजिटल डेटा एकीकरण और सामुदायिक सहभागिता का आह्वान करती है
चर्चा में क्यों? (Why in News)
नीति आयोग ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमडब्ल्यूसीडी) के सहयोग से "पोषण अभियान 2.0 पर राष्ट्रीय मूल्यांकन रिपोर्ट" जारी की, जो मिशन की प्रगति (2021-2026) की समीक्षा करती है और अगले चरण के लिए रणनीतियों को रेखांकित करती है, जिसमें मजबूत डिजिटल डेटा एकीकरण और बढ़ी हुई सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •रिपोर्ट में 2021 में पोषण 2.0 के शुभारंभ के बाद से 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में स्टंटिंग में 4 प्रतिशत अंक और वेस्टिंग में 3 प्रतिशत अंक की महत्वपूर्ण कमी का संकेत दिया गया है, जिसका श्रेय बेहतर सेवा वितरण और आंगनवाड़ी कार्यप्रणालियों को दिया गया है।
- •पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन के माध्यम से प्रौद्योगिकी के सफल एकीकरण पर प्रकाश डाला गया है, जो अब देश भर के 14 लाख (1.4 मिलियन) से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों (एडब्ल्यूसी) से वास्तविक समय डेटा रिकॉर्ड करता है, जिसमें 8.5 करोड़ (85 मिलियन) लाभार्थी (गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं, बच्चे) शामिल हैं।
- •लक्षित हस्तक्षेपों के लिए डेटा एनालिटिक्स को मजबूत करने, अधिक अंतर-क्षेत्रीय अभिसरण को बढ़ावा देने और उन्नत डिजिटल साक्षरता और डेटा व्याख्या के लिए फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं की क्षमता निर्माण की सिफारिश करता है।
- •विशेष रूप से उच्च-भार वाले जिलों और आदिवासी क्षेत्रों में अभिनव समुदाय-नेतृत्व वाली पहलों और स्थानीयकृत व्यवहार परिवर्तन संचार (बीसीसी) अभियानों के लिए समर्पित बजटीय आवंटन की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर जोर देता है।
- •बेहतर परिणामों के लिए भविष्य कहनेवाला विश्लेषण और व्यक्तिगत पोषण हस्तक्षेपों के लिए 'पोषण डिजिटल ट्विन' पहल का प्रस्ताव करता है, जो एआई और मशीन लर्निंग का लाभ उठाता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- पोषण अभियान (राष्ट्रीय पोषण मिशन) 2018 में शुरू किया गया था, जिसके बाद 2021 में एकीकृत पोषण सहायता कार्यक्रम के लिए पोषण 2.0 शुरू किया गया था।
- पोषण अभियान 2.0 पर राष्ट्रीय मूल्यांकन रिपोर्ट नीति आयोग और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमडब्ल्यूसीडी) द्वारा संयुक्त रूप से जारी की गई थी।
- पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन आंगनवाड़ी केंद्रों से वास्तविक समय की निगरानी और डेटा संग्रह के लिए प्राथमिक डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
- रिपोर्ट पोषण 2.0 के शुभारंभ के बाद से 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में स्टंटिंग में 4% और वेस्टिंग में 3% की कमी का संकेत देती है।
- पोषण अभियान द्वारा लक्षित प्रमुख संकेतकों में स्टंटिंग, वेस्टिंग, महिलाओं और बच्चों में एनीमिया, और कम जन्म के वजन में कमी शामिल है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **बहु-क्षेत्रीय अभिसरण और शासन:** रिपोर्ट समग्र पोषण परिणामों को प्राप्त करने और कुपोषण के सामाजिक निर्धारकों को संबोधित करने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय, जनजातीय कार्य मंत्रालय और अन्य हितधारकों को शामिल करने वाले मजबूत अभिसरण तंत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है। प्रभावी शासन और जवाबदेही ढांचे महत्वपूर्ण हैं।
- **सार्वजनिक स्वास्थ्य वितरण में डिजिटल परिवर्तन:** पोषण ट्रैकर की सफलता दर्शाती है कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) वास्तविक समय की निगरानी, कुशल आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और डेटा-संचालित निर्णय लेने को सक्षम करके सार्वजनिक स्वास्थ्य वितरण में क्रांति कैसे ला सकता है, जिससे कार्यक्रम की प्रभावकारिता और पहुंच में काफी सुधार होता है।
- **सामुदायिक स्वामित्व और सतत व्यवहार परिवर्तन:** पोषण संबंधी लाभों की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए समुदायों को सशक्त बनाना, पोषण, स्वच्छता और शिशु एवं छोटे बच्चे के आहार (आईवाईसीएफ) प्रथाओं से संबंधित सकारात्मक व्यवहार परिवर्तनों को स्थानीयकृत, सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील व्यवहार परिवर्तन संचार (बीसीसी) अभियानों के माध्यम से बढ़ावा देना आवश्यक है।
- **लगातार असमानताओं और इक्विटी को संबोधित करना:** समग्र प्रगति के बावजूद, रिपोर्ट इस बात पर प्रकाश डालती है कि कुपोषण में क्षेत्रीय, सामाजिक-आर्थिक और लैंगिक असमानताएं बनी हुई हैं। इसके लिए इक्विटी-केंद्रित रणनीतियों की आवश्यकता है, जिसमें आदिवासी आबादी, शहरी गरीब और किशोर लड़कियों जैसे कमजोर समूहों पर विशेष ध्यान दिया जाए, यह सुनिश्चित करते हुए कि पोषण अभियान में कोई भी पीछे न छूटे।
पेज 80📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासरकारी योजनाएं एवं सामाजिक मुद्दे
79. प्रधानमंत्री आवास सम्पन्न योजना (पीएमएएसवाई) चरण II का शुभारंभ: 'सभी के लिए आवास' की गति को बनाए रखना
चर्चा में क्यों? (Why in News)
आवास और शहरी कार्य मंत्रालय तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय ने संयुक्त रूप से "प्रधानमंत्री आवास सम्पन्न योजना (पीएमएएसवाई) चरण II" का शुभारंभ किया, जो पीएमएवाई-शहरी और पीएमएवाई-ग्रामीण की महत्वपूर्ण उपलब्धियों पर आधारित, 2030 तक 'सभी के लिए आवास' के दृष्टिकोण को प्राप्त करने की दिशा में अगला महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •2030 तक अतिरिक्त 2.5 करोड़ (25 मिलियन) घरों के निर्माण का लक्ष्य, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के लिए किफायती आवास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
- •उन्नत हरित भवन प्रौद्योगिकियों, टिकाऊ शहरी और ग्रामीण नियोजन सिद्धांतों, और जलवायु-लचीली निर्माण पद्धतियों को एकीकृत करता है ताकि दीर्घकालिक स्थायित्व और पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
- •सभी परियोजना चरणों में वास्तविक समय निर्माण प्रगति ट्रैकिंग, बढ़ी हुई पारदर्शिता और कठोर गुणवत्ता आश्वासन के लिए भू-टैगिंग और उपग्रह निगरानी का लाभ उठाता है।
- •पीएमएवाई-यू के तहत लाभार्थी-नेतृत्व निर्माण (बीएलसी) और यथास्थान झुग्गी पुनर्विकास (आईएसएसआर) घटकों पर बढ़ा हुआ जोर, समुदायों को सशक्त बनाना और समावेशी शहरी विकास को बढ़ावा देना।
- •अगले पांच वर्षों (2026-2031) के लिए पीएमएएसवाई चरण II हेतु ₹5 लाख करोड़ का बजटीय आवंटन, जो बड़े पैमाने पर आवास अवसंरचना के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- पीएमएएसवाई चरण II प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू) और प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) की एक उत्तराधिकारी पहल है।
- पीएमएएसवाई चरण II का व्यापक दृष्टिकोण '2030 तक सभी के लिए आवास' है।
- जुलाई 2026 तक, पीएमएवाई-यू ने 90 लाख (9 मिलियन) पूर्णता के साथ 1.15 करोड़ (11.5 मिलियन) स्वीकृत घर हासिल किए हैं, जबकि पीएमएवाई-जी ने 3.0 करोड़ (30 मिलियन) से अधिक घर पूरे किए हैं।
- मुख्य कार्यान्वयन मंत्रालय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (शहरी घटक के लिए) और ग्रामीण विकास मंत्रालय (ग्रामीण घटक के लिए) हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **आवास घाटे और असमानता का समाधान:** पीएमएएसवाई चरण II विशेष रूप से कमजोर आबादी के लिए लगातार आवास घाटे को संबोधित करने के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे सामाजिक समानता को बढ़ावा मिलेगा और बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच में स्थानिक असमानताओं को कम किया जा सकेगा। इसका लक्ष्य 2028 तक शेष कच्चे घरों को खत्म करना भी है, जिससे गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित हो सके।
- **आर्थिक गुणक प्रभाव और रोजगार सृजन:** पीएमएएसवाई चरण II के तहत बड़े पैमाने पर आवास निर्माण से विभिन्न क्षेत्रों (निर्माण, विनिर्माण, रसद) में महत्वपूर्ण प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है, जिससे आर्थिक विकास में पर्याप्त योगदान मिलेगा और 'आत्मनिर्भर भारत' के उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सकेगा।
- **सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) संरेखण:** यह योजना कई एसडीजी में सीधे योगदान करती है, जिसमें एसडीजी 1 (कोई गरीबी नहीं), एसडीजी 3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण), एसडीजी 11 (टिकाऊ शहर और समुदाय), और एसडीजी 10 (असमानता में कमी) शामिल हैं, जो सस्ती, सुरक्षित और लचीली आवास प्रदान करके बुनियादी सेवाओं तक पहुंच के साथ है।
- **चुनौतियाँ और आगे का मार्ग:** प्रमुख चुनौतियों में भूमि अधिग्रहण के मुद्दे, बढ़ती सामग्री लागत, त्वरित मंजूरी सुनिश्चित करना, और नागरिक अवसंरचना (पानी, स्वच्छता, बिजली) को एकीकृत करना शामिल है। अभिनव वित्तपोषण तंत्र, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी), और जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं के साथ अभिसरण का लाभ उठाना प्रभावी कार्यान्वयन के लिए महत्वपूर्ण होगा।
पेज 81📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकापुरस्कार, खेल एवं चर्चित व्यक्तित्व
80. साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025 की घोषणा: प्रोफेसर अरुणोदय शर्मा को हिंदी उपन्यास 'मिट्टी का उत्सव' के लिए सम्मानित किया गया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
साहित्य अकादमी, भारत की राष्ट्रीय साहित्य अकादमी, ने 2025 के प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार के प्राप्तकर्ताओं की घोषणा की है। उल्लेखनीय पुरस्कार विजेताओं में, प्रोफेसर अरुणोदय शर्मा को उनके गहन हिंदी उपन्यास 'मिट्टी का उत्सव' (Festival of Soil) के लिए सम्मानित किया गया है, जो समकालीन ग्रामीण जीवन और पर्यावरणीय विषयों पर प्रकाश डालता है। 19 जुलाई, 2026 को घोषित ये पुरस्कार 24 भारतीय भाषाओं में साहित्यिक उत्कृष्टता का सम्मान करते हैं।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •प्रोफेसर अरुणोदय शर्मा, एक प्रख्यात हिंदी लेखक और साहित्य आलोचक, को उनके उपन्यास 'मिट्टी का उत्सव' के लिए पुरस्कार मिला, जो ग्रामीण भारत में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों और स्थायी मानव-प्रकृति संबंध की आलोचनात्मक जांच करता है।
- •2024 के अंत में प्रकाशित इस उपन्यास की आलोचकों द्वारा इसकी भावुक गद्य, गहन शोध किए गए सांस्कृतिक अंतर्दृष्टि और मार्मिक कथा शैली के लिए सराहना की गई है, जो आधुनिक हिंदी साहित्य में एक महत्वपूर्ण योगदान है।
- •2025 के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार 24 लेखकों को प्रदान किया गया, जो अकादमी द्वारा मान्यता प्राप्त 24 भारतीय भाषाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनमें भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 22 भाषाओं के अलावा अंग्रेजी और राजस्थानी भी शामिल हैं।
- •पुरस्कारों में एक उत्कीर्ण तांबे की पट्टिका वाला एक ताबूत, एक शॉल और ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) का नकद पुरस्कार शामिल है, जो एक विशेष समारोह में प्रदान किया जाता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- साहित्य अकादमी पुरस्कार भारत में एक साहित्यिक सम्मान है, जो भारत की राष्ट्रीय साहित्य अकादमी, साहित्य अकादमी द्वारा प्रदान किया जाता है।
- इसकी स्थापना 1954 में हुई थी और यह ज्ञानपीठ पुरस्कार के बाद भारत का दूसरा सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है।
- पुरस्कार प्रतिवर्ष 24 प्रमुख भारतीय भाषाओं में प्रकाशित उत्कृष्ट पुस्तकों के लेखकों को दिए जाते हैं, जिनमें भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 22 भाषाओं के अलावा अंग्रेजी और राजस्थानी भी शामिल हैं।
- अकादमी साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार, बाल साहित्य पुरस्कार (बाल साहित्य पुरस्कार) और युवा पुरस्कार (युवा पुरस्कार) भी प्रदान करती है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **भाषाई विविधता और राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा देना:** साहित्य अकादमी पुरस्कार भारतीय भाषाओं के व्यापक स्पेक्ट्रम में साहित्यिक कृतियों को मान्यता देकर भाषाई विविधता और राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह साझा सांस्कृतिक विरासत की भावना को बढ़ावा देता है और अंतर-सांस्कृतिक समझ को प्रोत्साहित करता है।
- **समाज के दर्पण के रूप में साहित्य:** प्रोफेसर शर्मा का उपन्यास 'मिट्टी का उत्सव' यह दर्शाता है कि साहित्य कैसे समकालीन सामाजिक मुद्दों, जैसे पर्यावरणीय गिरावट और ग्रामीण विकास चुनौतियों को प्रतिबिंबित करने के लिए एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में कार्य कर सकता है। ऐसी कृतियां सार्वजनिक विमर्श में योगदान करती हैं और नीतिगत विचारों को प्रेरित कर सकती हैं।
पेज 82📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकापुरस्कार, खेल एवं चर्चित व्यक्तित्व
81. राजस्थान की सुश्री रिया सिंह ने विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स में विश्व रिकॉर्ड बनाया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
राजस्थान की एक विलक्षण पैरा-एथलीट सुश्री रिया सिंह ने हाल ही में पेरिस में संपन्न विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स में महिला भाला फेंक F46 श्रेणी में नया विश्व रिकॉर्ड बनाकर भारत को अपार गौरव दिलाया है। यह उपलब्धि भारतीय पैरा-खेलों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और राजस्थान राज्य के एथलीटों की क्षमता को उजागर करती है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •सुश्री रिया सिंह ने 45.28 मीटर की उल्लेखनीय दूरी तक भाला फेंककर, पिछले विश्व रिकॉर्ड 44.90 मीटर को पार किया, जो उनकी असाधारण प्रतिभा और कठोर प्रशिक्षण को दर्शाता है।
- •उनके प्रदर्शन ने प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत के लिए स्वर्ण पदक सुरक्षित किया, जिससे देश की पदक तालिका और पैरा-एथलेटिक्स में वैश्विक स्थिति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
- •राजस्थान के बाड़मेर के ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली रिया सिंह की यात्रा प्रतिकूल परिस्थितियों के खिलाफ दृढ़ता का प्रतीक है, और वह 'खेलो इंडिया पैरा गेम्स' पहल के माध्यम से समर्थन प्राप्तकर्ता रही हैं।
- •F46 वर्गीकरण कोहनी के ऊपर या नीचे एक हाथ के विच्छेदन वाले एथलीटों के लिए है, जो इस स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए आवश्यक अविश्वसनीय ताकत और कौशल को प्रदर्शित करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स विश्व पैरा एथलेटिक्स द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय पैरा-एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं की एक श्रृंखला है, जो पैरा-एथलेटिक्स के लिए अंतरराष्ट्रीय महासंघ है।
- भाला फेंक में F46 वर्गीकरण ऊपरी अंग की कमी वाले एथलीटों के लिए है, जहाँ 'F' फील्ड इवेंट के लिए है।
- खेलो इंडिया कार्यक्रम में विकलांग व्यक्तियों के बीच खेलों को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित घटक है, जिसमें 'खेलो इंडिया पैरा गेम्स' भी शामिल है।
- सुश्री रिया सिंह राजस्थान के बाड़मेर जिले से हैं, जो अपनी चुनौतीपूर्ण जलवायु परिस्थितियों के लिए जाना जाता है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **खेलों में समावेशिता को बढ़ावा देना:** रिया सिंह की उपलब्धि समावेशी खेल नीतियों और बुनियादी ढांचे के विकास के महत्वपूर्ण महत्व को रेखांकित करती है। खेलो इंडिया जैसी सरकारी पहल, जमीनी स्तर पर प्रतिभा पहचान कार्यक्रमों के साथ मिलकर, पैरा-एथलीटों को पोषित करने और उन्हें विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- **खेल विकास में राज्यों की भूमिका (आरएएस विशिष्ट):** राजस्थान का ग्रामीण प्रतिभाओं की पहचान और समर्थन पर ध्यान केंद्रित करना, विशेष रूप से बाड़मेर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में, राज्य-स्तरीय खेल संवर्धन के लिए एक मॉडल प्रदर्शित करता है। ऐसी सफलताएं न केवल सम्मान लाती हैं बल्कि एक नई पीढ़ी को भी प्रेरित करती हैं, जिससे खेलों के माध्यम से सामाजिक समावेश और सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलता है।
पेज 83📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकापुरस्कार, खेल एवं चर्चित व्यक्तित्व
82. डॉ. आनंद वर्धन यूपीएससी के नए अध्यक्ष नियुक्त
चर्चा में क्यों? (Why in News)
केंद्र सरकार ने हाल ही में प्रसिद्ध शिक्षाविद् और पूर्व कुलपति, डॉ. आनंद वर्धन को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के नए अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया है, जो निवर्तमान अध्यक्ष, डॉ. राजेश कुमार का स्थान लेंगे। राष्ट्र के लिए शीर्ष सिविल सेवकों की भर्ती में यूपीएससी की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए यह नियुक्ति महत्वपूर्ण है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •डॉ. आनंद वर्धन की यूपीएससी के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति 18 जुलाई, 2026 से प्रभावी है, जिसका कार्यकाल छह वर्ष का होगा या 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, जो भी पहले हो।
- •इससे पहले, डॉ. वर्धन एक प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में कार्यरत थे और उनका सार्वजनिक प्रशासन और संवैधानिक कानून में विशेषज्ञता के साथ तीन दशकों से अधिक का विशिष्ट शैक्षणिक करियर रहा है।
- •यह नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 316 के प्रावधानों के अनुसार, उनकी प्रशासनिक दूरदर्शिता और सार्वजनिक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद की गई।
- •उनकी तत्काल प्राथमिकताओं में भर्ती प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना, परीक्षाओं के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचे को बढ़ाना और चयन में अधिक पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करना शामिल होने की उम्मीद है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- यूपीएससी भारतीय संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत स्थापित एक संवैधानिक निकाय है।
- यूपीएससी के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- उनका कार्यकाल छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, जो भी पहले हो, होता है।
- उन्हें अनुच्छेद 317 के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान विशिष्ट परिस्थितियों में राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **यूपीएससी नियुक्तियों का महत्व:** यूपीएससी अध्यक्ष की नियुक्ति सिविल सेवाओं की निष्पक्षता, अखंडता और दक्षता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। एक मजबूत और विश्वसनीय नेतृत्व यह सुनिश्चित करता है कि योग्यता-आधारित चयन प्रक्रिया बाहरी दबावों के खिलाफ मजबूत बनी रहे।
- **चुनौतियाँ और सुधार:** नए अध्यक्ष को तेजी से विकसित हो रहे नौकरी बाजार की मांगों के अनुकूलन, परीक्षा प्रक्रियाओं में उन्नत प्रौद्योगिकियों (जैसे एआई) को एकीकृत करने, और समावेशिता तथा क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के मुद्दों को संबोधित करने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। सुधारों में सिविल सेवकों के लिए निरंतर कौशल उन्नयन और तेज भर्ती चक्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है।
पेज 84📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाअंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध एवं सुरक्षा
83. भारत के एस-400 ट्रिम्फ वायु रक्षा प्रणालियों के पूर्ण संचालन के सामरिक निहितार्थ
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारतीय वायु सेना ने रूसी-मूल के एस-400 ट्रिम्फ वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली के सभी पांच रेजिमेंटों को रणनीतिक स्थानों पर पूरी तरह से चालू घोषित कर दिया है, जिससे उन्नत हवाई खतरों के खिलाफ राष्ट्र की स्तरीय वायु रक्षा क्षमताओं में काफी वृद्धि हुई है। यह भारत के रक्षा आधुनिकीकरण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**उन्नत वायु रक्षा कवच:** एस-400 एक बहुस्तरीय वायु रक्षा कवच प्रदान करता है, जो 400 किमी तक के व्यापक परिचालन क्षेत्र में बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों, लड़ाकू जेट विमानों और ड्रोनों सहित कई लक्ष्यों को एक साथ ट्रैक करने और संलग्न करने में सक्षम है।
- •**सामरिक प्रतिरोध:** पूर्ण संचालन भारत की सामरिक प्रतिरोधक क्षमता को काफी मजबूत करता है, विशेष रूप से इसकी उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर, एक अभेद्य वायु रक्षा बुलबुला बनाकर, जिससे संभावित विरोधी हवाई अभियानों को जटिल बनाया जा सके।
- •**स्वदेशी प्रणालियों के साथ एकीकरण:** एस-400 के उन्नत रडार और कमांड और कंट्रोल सिस्टम को भारत के स्वदेशी इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) और आकाश-एनजी+ जैसे अन्य प्लेटफार्मों के साथ सहजता से एकीकृत करने के प्रयास जारी हैं ताकि अनुकूलित नेटवर्क-केंद्रित युद्ध के लिए।
- •**भू-राजनीतिक संतुलन कार्य:** संयुक्त राज्य अमेरिका से CAATSA (काउंटरिंग अमेरिका'स एडवरसरीज थ्रू सैंक्शन एक्ट) के संभावित निहितार्थों (जिन्हें अंततः माफ कर दिया गया) के बावजूद अधिग्रहण, भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और विविध भू-राजनीतिक संबंधों (रक्षा के लिए रूस, सामरिक साझेदारी के लिए अमेरिका) को संतुलित करने की उसकी क्षमता को रेखांकित करता है।
- •**तकनीकी श्रेष्ठता:** एस-400 की उन्नत विशेषताएं, जिसमें इसका शक्तिशाली रडार (ग्रेव स्टोन), विविध मिसाइल प्रकार (48N6DM, 9M96E, 9M96E2) और त्वरित प्रतिक्रिया समय शामिल हैं, भारत की वायु रक्षा संपत्तियों को एक गुणात्मक बढ़त प्रदान करते हैं, जिससे यह विश्व स्तर पर सबसे परिष्कृत विमान भेदी प्रणालियों में से एक बन जाता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- एस-400 ट्रिम्फ रूस द्वारा विकसित एक उन्नत लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एलआर-एसएएम) प्रणाली है।
- भारत ने अक्टूबर 2018 में रूस के साथ पांच एस-400 रेजिमेंटों के लिए 5.43 बिलियन डॉलर का सौदा किया, जिसकी डिलीवरी 2021 में शुरू हुई।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **वायु रक्षा का आधुनिकीकरण:** एस-400 प्रणाली भारत की वायु रक्षा स्थिति में एक प्रतिमान बदलाव का प्रतिनिधित्व करती है, जो परिष्कृत हवाई खतरों को रोकने और उनका मुकाबला करने के लिए महत्वपूर्ण क्षमताएं प्रदान करती है, जिससे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसंरचना और सामरिक संपत्तियों को संभावित हवाई हमलों से सुरक्षित किया जा सके।
- **एकीकरण और रखरखाव की चुनौतियाँ:** शक्तिशाली होने के बावजूद, एस-400 के प्रभावी उपयोग के लिए मौजूदा भारतीय वायु रक्षा नेटवर्क के साथ जटिल एकीकरण और दीर्घकालिक परिचालन तत्परता सुनिश्चित करने और विदेशी सहायता पर निर्भरता को कम करने के लिए मजबूत स्वदेशी रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (MRO) क्षमताओं की आवश्यकता है।
पेज 85📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाअंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध एवं सुरक्षा
84. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार: भारत का राजनयिक प्रयास और समान प्रतिनिधित्व के लिए जी4 की नई रणनीति
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारत ने जी4 राष्ट्रों (ब्राजील, जर्मनी, जापान) के साथ मिलकर संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर एक उच्च-स्तरीय बैठक में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के व्यापक सुधारों के लिए अपने राजनयिक प्रयासों को तेज किया। इस नए अभियान में अधिक प्रतिनिधिक और प्रभावी वैश्विक शासन निकाय की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**जी4 का एकीकृत रुख:** जी4 समूह ने यूएनएससी की स्थायी और गैर-स्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार की अपनी मांग को दोहराया, इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान संरचना, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की वास्तविकताओं को दर्शाती है, 21वीं सदी की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के लिए पुरातनपंथी और अप्रतिनिधिक है।
- •**पाठ-आधारित वार्ता:** संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने अंतरसरकारी वार्ता (आईजीएन) ढांचे के भीतर पाठ-आधारित वार्ताओं को तत्काल शुरू करने का आग्रह किया, जो प्रक्रियात्मक चर्चाओं से आगे बढ़कर एक ठोस सुधार दस्तावेज की ओर बढ़े।
- •**समान भौगोलिक प्रतिनिधित्व:** जी4 द्वारा प्रस्तुत एक महत्वपूर्ण तर्क समान भौगोलिक प्रतिनिधित्व की महत्वपूर्ण आवश्यकता है, विशेष रूप से स्थायी सदस्य श्रेणी में अफ्रीकी, लैटिन अमेरिकी और एशियाई देशों के कम प्रतिनिधित्व को उजागर करते हुए।
- •**सामान्य अफ्रीकी स्थिति (इज़ुलविनी सर्वसम्मति):** भारत और जी4 ने इज़ुलविनी सर्वसम्मति और सिर्ते घोषणा के लिए मजबूत समर्थन व्यक्त किया, जो अफ्रीकी देशों के लिए वीटो शक्ति के साथ दो स्थायी सीटों की मांग करता है, अफ्रीका के ऐतिहासिक अन्याय और वैश्विक शांति और सुरक्षा में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करते हुए।
- •**'यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस' (यूएफसी) से चुनौतियाँ:** इटली और पाकिस्तान के नेतृत्व वाले यूएफसी समूह ने स्थायी सीटों के विस्तार का विरोध जारी रखा, इसके बजाय लंबी अवधि के साथ गैर-स्थायी श्रेणी में वृद्धि की वकालत की, जिससे सुधार प्रक्रिया में लगातार गतिरोध बना रहा।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- जी4 समूह में भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान शामिल हैं, जो यूएनएससी में स्थायी सीटों की वकालत करते हैं।
- इज़ुलविनी सर्वसम्मति अंतरराष्ट्रीय संबंधों और यूएनएससी सुधार पर एक स्थिति है जिसे अफ्रीकी संघ ने 2005 में अपनाया था।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **वैधता और प्रभावशीलता:** एक सुधारित यूएनएससी, जो समकालीन वैश्विक शक्ति गतिशीलता को दर्शाता है और भारत जैसी उभरती शक्तियों को शामिल करता है, जटिल वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने में इसकी वैधता और प्रभावशीलता को बढ़ाएगा, जिससे इसके प्रस्तावों के साथ अधिक स्वामित्व और अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा।
- **भारत की वैश्विक आकांक्षाएं:** यूएनएससी में स्थायी सीट प्राप्त करना भारत की विदेश नीति का एक आधारशिला है, जो एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में उसकी बढ़ती स्थिति और उसकी जनसांख्यिकीय, आर्थिक और रणनीतिक शक्ति के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा में योगदान करने की उसकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
पेज 86📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाअंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध एवं सुरक्षा
85. भारत-फ्रांस रणनीतिक संवाद संपन्न: रक्षा औद्योगिक सहयोग और हिंद-प्रशांत अभिसरण को गहरा करना
चर्चा में क्यों? (Why in News)
पेरिस में 39वां वार्षिक भारत-फ्रांस रणनीतिक संवाद संपन्न हुआ, जिसमें विकसित भू-राजनीतिक गतिशीलता के बीच रक्षा औद्योगिक साझेदारी को और मजबूत करने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक अभिसरण को बढ़ाने की प्रतिबद्धता पर जोर दिया गया। चर्चा उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों के सह-विकास और सह-उत्पादन पर केंद्रित रही।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**रक्षा औद्योगिक रोडमैप 2035:** दोनों राष्ट्रों ने अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान इंजनों, पनडुब्बी प्रणोदन प्रणालियों और उन्नत साइबर रक्षा समाधानों के लिए संयुक्त परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार करते हुए एक नया दीर्घकालिक रोडमैप अपनाया, जो पारंपरिक खरीददार-विक्रेता संबंधों से आगे बढ़ता है।
- •**समुद्री डोमेन जागरूकता और सुरक्षा:** हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में संयुक्त गश्त और खुफिया जानकारी साझा करने के माध्यम से सहयोग बढ़ाने पर सहमति हुई, जिसमें भारत के 'सागर' (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) विजन और फ्रांस की व्यापक हिंद-प्रशांत रणनीति का लाभ उठाया गया। 'वरुण' जैसे बहुपक्षीय अभ्यासों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
- •**सामरिक अनुप्रयोगों के लिए अंतरिक्ष सहयोग:** समुद्री निगरानी और पृथ्वी अवलोकन के लिए एक संयुक्त उपग्रह तारामंडल पर चर्चा आगे बढ़ी, जिसका उद्देश्य साझा अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता में सुधार करना और महत्वपूर्ण अंतरिक्ष संपत्तियों को सुरक्षित करना है। यह अंतरिक्ष सुरक्षा संबंधी पिछले समझौतों पर आधारित है।
- •**बहुपक्षीय जुड़ाव और वैश्विक शासन:** भारत और फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) सहित बहुपक्षीय संस्थानों के सुधार पर जोर देते हुए एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और G20 और क्वाड (फ्रांस के लिए एक विस्तारित भागीदार के रूप में) के भीतर अपने मजबूत समन्वय को दोहराया।
- •**महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी विनिमय:** सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम कंप्यूटिंग पर ध्यान केंद्रित करते हुए सुरक्षित और विश्वसनीय महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए एक ढांचा स्थापित किया गया, जो आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों के खिलाफ लचीलेपन के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- भारत और फ्रांस 1998 में स्थापित वार्षिक रणनीतिक संवाद करते हैं, जिसमें रक्षा, सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी और परमाणु सहयोग शामिल हैं।
- फ्रांस भारत की 'मेक इन इंडिया' रक्षा पहल में एक प्रमुख भागीदार है, जिसमें राफेल जेट और स्कॉर्पीन-श्रेणी की पनडुब्बियों (परियोजना 75) जैसे महत्वपूर्ण रक्षा प्लेटफार्मों का अधिग्रहण या सह-उत्पादन किया जा रहा है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **सामरिक स्वायत्तता और विविधीकरण:** फ्रांस के साथ गहराता रक्षा औद्योगिक सहयोग भारत के सामरिक स्वायत्तता के लक्ष्य के अनुरूप है, जो अपनी रक्षा खरीद आधार में विविधता ला रहा है और सह-विकास के माध्यम से स्वदेशी क्षमताओं को बढ़ावा दे रहा है, जिससे एकल आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम हो रही है।
- **हिंद-प्रशांत सुरक्षा वास्तुकला:** भारत की एक्ट ईस्ट नीति और फ्रांस की हिंद-प्रशांत रणनीति (अपने विदेशी क्षेत्रों सहित) का अभिसरण क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक मजबूत ढांचा बनाता है, एकतरफा दावों का मुकाबला करता है और विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा में एक नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बढ़ावा देता है।
पेज 87📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाराजस्थान विशेष
86. पुरानी और जीवनशैली संबंधी बीमारियों को कवर करने के लिए 'मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना' का विस्तार
चर्चा में क्यों? (Why in News)
सार्वजनिक स्वास्थ्य पहुंच बढ़ाने और गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के बढ़ते बोझ को संबोधित करने के एक महत्वपूर्ण कदम के तहत, राजस्थान सरकार ने अपनी प्रमुख 'मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना' के एक बड़े विस्तार की घोषणा की है, जिसमें विशेष रूप से पुरानी और जीवनशैली से संबंधित बीमारियों की एक विस्तृत श्रृंखला को शामिल किया जाएगा।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •विस्तारित योजना अब क्रोनिक किडनी रोग (सीकेडी) जिसके लिए डायलिसिस या प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है, जटिल सर्जरी सहित उन्नत हृदय संबंधी स्थितियाँ, और निर्दिष्ट न्यूरोलॉजिकल विकारों जैसी महत्वपूर्ण पुरानी बीमारियों के उपचार के लिए बढ़ी हुई बीमा राशि के साथ बेहतर वित्तीय कवरेज प्रदान करती है।
- •उपचार के बाद की व्यापक देखभाल के लिए प्रावधान किए गए हैं, जिसमें विशेष निदान, पुनर्वास उपचार और नई कवर की गई स्थितियों के लिए दवाओं के समर्थन की एक परिभाषित अवधि शामिल है।
- •पैनल में शामिल अस्पतालों के नेटवर्क को और विस्तृत किया जाएगा, विशेष रूप से अधिक सुपर-स्पेशियलिटी और मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पतालों को शामिल किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पुरानी बीमारियों के लिए विशेष देखभाल सभी क्षेत्रों में आसानी से उपलब्ध हो।
- •प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य देखभाल स्तरों पर एकीकृत 'चिरंजीवी एनसीडी निवारण और कल्याण कार्यक्रम' की शुरुआत, जो मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कुछ कैंसर जैसी बीमारियों के लिए प्रारंभिक जांच, निवारक उपायों और जीवनशैली में बदलाव पर केंद्रित है।
- •इस योजना का उद्देश्य पुरानी बीमारियों के दीर्घकालिक, उच्च लागत वाले प्रबंधन से जूझ रहे परिवारों के लिए जेब से होने वाले खर्च को काफी कम करना है, जिससे विनाशकारी स्वास्थ्य व्यय और चिकित्सा दरिद्रता को रोका जा सके।
- •यह विस्तार एक समग्र स्वास्थ्य सेवा दृष्टिकोण के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो प्रचलित स्वास्थ्य चुनौतियों के निवारक और दीर्घकालिक प्रबंधन को शामिल करने के लिए तीव्र देखभाल से आगे बढ़ रहा है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना' राजस्थान की एक प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना है।
- हालिया विस्तार में क्रोनिक किडनी रोग, उन्नत हृदय संबंधी स्थितियों और न्यूरोलॉजिकल विकारों के लिए बढ़ाया गया कवरेज शामिल है।
- विस्तार के हिस्से के रूप में 'चिरंजीवी एनसीडी निवारण और कल्याण कार्यक्रम' शुरू किया गया है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- राजस्थान में कमजोर आबादी पर स्वास्थ्य देखभाल के वित्तीय बोझ को कम करने और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) प्राप्त करने में 'मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना' जैसी राज्य-प्रायोजित स्वास्थ्य बीमा योजनाओं की भूमिका का विश्लेषण करें।
- विस्तारित स्वास्थ्य योजनाओं के दीर्घकालिक स्थायित्व और प्रभावी कार्यान्वयन से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा करें, विशेष रूप से संसाधन आवंटन, गुणवत्ता आश्वासन और ग्रामीण बनाम शहरी क्षेत्रों में समान पहुंच के संबंध में।
पेज 88📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाराजस्थान विशेष
87. राजस्थान ने विरासत जल संरचनाओं के संरक्षण हेतु 'पारंपरिक जल धारा पुनरुत्थान अभियान' का शुभारंभ किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
अपनी पारंपरिक जल संचयन संरचनाओं के ऐतिहासिक महत्व और पारिस्थितिक प्रासंगिकता को पहचानते हुए, राजस्थान सरकार ने इन अमूल्य विरासत संपत्तियों को व्यवस्थित रूप से बहाल और संरक्षित करने के लिए 'पारंपरिक जल धारा पुनरुत्थान अभियान' का शुभारंभ किया है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •यह अभियान राज्य भर में बावड़ियों (सीढ़ीदार कुओं), कुंडों (जलाशयों), झालरों (सीढ़ीदार तालाबों) और नाड़ियों (गाँव के तालाबों) सहित विभिन्न पारंपरिक जल निकायों के व्यापक मानचित्रण, दस्तावेजीकरण और जीर्णोद्धार पर केंद्रित है।
- •एक चरणबद्ध दृष्टिकोण ऐतिहासिक महत्व, वर्तमान जीर्ण-शीर्ण स्थिति और स्थायी जल पुनर्भरण की क्षमता के आधार पर संरचनाओं को प्राथमिकता देगा।
- •सामुदायिक भागीदारी अभियान का आधारशिला है, जिसमें स्थानीय स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), गैर-सरकारी संगठनों और पारंपरिक कारीगरों को बहाली और दीर्घकालिक रखरखाव प्रक्रियाओं में शामिल किया जा रहा है, जिससे स्वामित्व की भावना को बढ़ावा मिल रहा है।
- •परियोजना में पारंपरिक स्थापत्य विधियों और स्थानीय सामग्रियों को शामिल किया गया है, जिन्हें आधुनिक हाइड्रोलॉजिकल और इंजीनियरिंग विशेषज्ञता द्वारा संवर्धित किया गया है, ताकि प्रामाणिकता और संरचनात्मक अखंडता दोनों सुनिश्चित हो सकें।
- •शैक्षिक घटकों में राजस्थान की जल प्रबंधन की समृद्ध विरासत के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने और जिम्मेदार जल उपयोग को बढ़ावा देने के लिए बहाल किए गए स्थलों पर 'जल स्मृति केंद्र' (जल विरासत केंद्र) की स्थापना शामिल है।
- •यह पहल राजस्थान के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में जल सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो विरासत संरक्षण और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन रणनीतियों के बीच तालमेल प्रदर्शित करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'पारंपरिक जल धारा पुनरुत्थान अभियान' पारंपरिक जल संरचनाओं के लिए राजस्थान सरकार की एक पहल है।
- यह बावड़ियों, कुंडों, झालरों और नाड़ियों के जीर्णोद्धार पर केंद्रित है।
- अभियान सामुदायिक भागीदारी पर जोर देता है और पारंपरिक तथा आधुनिक तकनीकों को एकीकृत करता है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- राजस्थान के 'पारंपरिक जल धारा पुनरुत्थान अभियान' को एक केस स्टडी के रूप में उपयोग करते हुए, शुष्क क्षेत्रों में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने और जलवायु लचीलेपन को बढ़ाने में पारंपरिक जल संचयन प्रणालियों की भूमिका का मूल्यांकन करें।
- चर्चा करें कि पारंपरिक जल संरचनाओं जैसे सांस्कृतिक विरासत स्थलों का पुनरुत्थान स्थानीय आर्थिक विकास, सामुदायिक सशक्तिकरण और पर्यावरणीय स्थिरता में कैसे योगदान कर सकता है।
पेज 89📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाराजस्थान विशेष
88. राजस्थान ने दुर्लभ मृदा तत्वों (आरईई) के अन्वेषण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए नई नीति का अनावरण किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
राजस्थान सरकार ने हाल ही में राज्य के भीतर दुर्लभ मृदा तत्वों (आरईई) के अन्वेषण, खनन और मूल्य संवर्धन में तेजी लाने के उद्देश्य से एक व्यापक नीतिगत ढांचा प्रस्तुत किया है, जो महत्वपूर्ण खनिजों में भारत की आत्मनिर्भरता के रणनीतिक अभियान के अनुरूप है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •नई नीति सिरोही, पाली और बाड़मेर जैसे जिलों में प्रमुख भूवैज्ञानिक क्षेत्रों को दुर्लभ मृदा तत्वों के महत्वपूर्ण भंडार के रूप में पहचानती है, जो उच्च-तकनीकी उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- •यह अन्वेषण लाइसेंस और खनन पट्टों के लिए एकल-खिड़की मंजूरी सहित एक सुव्यवस्थित नियामक वातावरण प्रदान करती है, ताकि घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों निवेशकों को आकर्षित किया जा सके।
- •यह नीति स्वदेशी प्रसंस्करण और शोधन क्षमताओं पर जोर देती है, राजस्थान के भीतर आरईई पृथक्करण और धातुकर्म इकाइयों की स्थापना के लिए प्रोत्साहन प्रदान करती है, जिससे स्थानीय मूल्य संवर्धन और रोजगार को बढ़ावा मिलता है।
- •वित्तीय प्रोत्साहन, जैसे पूंजीगत सब्सिडी, ब्याज सबवेंशन और कर छूट, आरईई मूल्य श्रृंखला में निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदान किए जाएंगे, जिसमें पूर्वेक्षण से लेकर अंतिम उत्पाद निर्माण तक शामिल है।
- •नीति कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाने, भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण करने और आरईई निष्कर्षण और प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित 'राजस्थान महत्वपूर्ण खनिज विकास निगम' का गठन किया जाएगा।
- •इस पहल का उद्देश्य आरईई आयात पर भारत की निर्भरता को कम करना और राजस्थान को इन रणनीतिक खनिजों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करना है, जो नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा जैसे क्षेत्रों का समर्थन करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- राजस्थान की नई नीति सिरोही, पाली और बाड़मेर जैसे जिलों में दुर्लभ मृदा तत्वों (आरईई) पर केंद्रित है।
- आरईई नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा जैसे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- इस नीति का उद्देश्य 'राजस्थान महत्वपूर्ण खनिज विकास निगम' की स्थापना करना है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- भारत की आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए दुर्लभ मृदा तत्वों के रणनीतिक महत्व पर चर्चा करें, और राजस्थान जैसी राज्य-स्तरीय नीतियाँ राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता में कैसे योगदान करती हैं।
- राजस्थान जैसे राज्य में, जो अपने नाजुक रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए जाना जाता है, आरईई खनन और प्रसंस्करण गतिविधियों के तीव्र होने से जुड़े संभावित सामाजिक-आर्थिक लाभों और पर्यावरणीय चुनौतियों का विश्लेषण करें।
पेज 90📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकापर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
89. परियोजना ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) 2.0 लॉन्च: राजस्थान और गुजरात में संरक्षण को मजबूत करना
चर्चा में क्यों? (Why in News)
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने 'परियोजना ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) 2.0' का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ किया है, जो गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों की रक्षा के लिए एक उन्नत, बहुआयामी संरक्षण पहल है, जिसमें राजस्थान और गुजरात में इसके शेष गढ़ों पर प्राथमिक ध्यान केंद्रित किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •परियोजना जीआईबी 2.0 पिछले प्रयासों पर आधारित है, जिसमें आवास निगरानी के लिए ड्रोन निगरानी और व्यक्तिगत पक्षियों के लिए जीपीएस टैगिंग जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों को एकीकृत किया गया है ताकि आंदोलन पैटर्न को ट्रैक किया जा सके और संरक्षण रणनीतियों को सूचित किया जा सके।
- •एक महत्वपूर्ण घटक में 'जीआईबी सुरक्षित क्षेत्र पहल' शामिल है, जो महत्वपूर्ण जीआईबी आवासों में मौजूदा ओवरहेड बिजली लाइनों, विशेष रूप से डेजर्ट नेशनल पार्क (राजस्थान) और कच्छ वन्यजीव अभयारण्य (गुजरात) में, को भूमिगत केबलों में बदलने पर केंद्रित है ताकि टकराव से होने वाली मृत्यु दर को कम किया जा सके।
- •यह परियोजना स्थानीय समुदायों, विशेषकर किसानों के लिए, जीआईबी-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने और घोंसले बनाने वाली जगहों की सुरक्षा के लिए प्रोत्साहन-आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी पर भी जोर देती है।
- •जैसलमेर में जीआईबी संरक्षण प्रजनन केंद्र पर कैप्टिव प्रजनन सुविधाओं और आनुवंशिक अनुसंधान कार्यक्रमों का विस्तार जनसंख्या को मजबूत करने और आनुवंशिक विविधता सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखता है।
- •जीआईबी वितरण श्रेणियों में निर्बाध संरक्षण प्रयासों को सुनिश्चित करने के लिए अंतर-राज्य समन्वय तंत्र को मजबूत किया गया है, जिसमें राज्य वन विभाग, नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन शामिल हैं।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (आर्डियोटिस नाइग्रिसेप्स) को IUCN द्वारा 'गंभीर रूप से लुप्तप्राय' के रूप में सूचीबद्ध किया गया है और इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में शामिल किया गया है।
- यह राजस्थान का राज्य पक्षी है और मुख्य रूप से राजस्थान और गुजरात के शुष्क और अर्ध-शुष्क घास के मैदानों में पाया जाता है, जिसकी छोटी आबादी महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में भी है।
- प्रमुख खतरों में आवास का नुकसान और विखंडन, बिजली लाइनों से टकराव और शिकार शामिल हैं।
- जैसलमेर, राजस्थान में डेजर्ट नेशनल पार्क, जीआईबी के लिए अंतिम शेष गढ़ों में से एक है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- जीआईबी जैसी गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण अक्सर एक बहु-हितधारक दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है, जो पारिस्थितिक संरक्षण को विकासात्मक आवश्यकताओं के साथ संतुलित करता है, विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार में।
- परियोजना जीआईबी 2.0 की सफलता प्रभावी सामुदायिक जुड़ाव और स्थानीय आबादी को वन्यजीवों और आवासों के संरक्षक के रूप में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करने पर निर्भर करती है।
- बिजली लाइनों के टकराव को कम करने की चुनौती बुनियादी ढाँचा योजना में, विशेष रूप से हरित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और शमन उपायों को प्रारंभिक रूप से एकीकृत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालती है।
- व्यापक आवास वाली प्रजातियों के लिए अंतर-राज्यीय सहयोग महत्वपूर्ण है, जिसमें समग्र संरक्षण परिणामों को सुनिश्चित करने के लिए एक एकीकृत रणनीति और संसाधन आवंटन की आवश्यकता होती है।
पेज 91📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकापर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
90. हिमालयी ग्लेशियरों का पिघलना तेज हुआ: भारत की जल सुरक्षा के लिए गंभीर निहितार्थ
चर्चा में क्यों? (Why in News)
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) और अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों के सहयोग से एक व्यापक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें हिमालयी ग्लेशियरों के पिघलने की चिंताजनक त्वरण पर प्रकाश डाला गया है, जो भारत की दीर्घकालिक जल सुरक्षा और क्षेत्रीय पारिस्थितिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण खतरा पैदा कर रहा है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •‘स्टेट ऑफ हिमालयन ग्लेशियर 2026’ नामक रिपोर्ट बताती है कि प्रमुख ग्लेशियरों के पिघलने की औसत वार्षिक दर 15-20 मीटर है, जो पिछले दशक के निष्कर्षों की तुलना में 30% अधिक है।
- •यह मध्य शताब्दी तक ग्लेशियर द्रव्यमान में महत्वपूर्ण कमी का अनुमान लगाता है, जिससे गंगा, सिंधु और ब्रह्मपुद जैसी प्रमुख नदियों का बारहमासी प्रवाह प्रभावित होगा, जो 1.5 अरब से अधिक लोगों का भरण-पोषण करती हैं।
- •ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड्स (GLOFs) की बढ़ती आवृत्ति और तीव्रता देखी गई है, जो उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम में निचले इलाकों के समुदायों और बुनियादी ढाँचे को खतरे में डाल रही है।
- •रिपोर्ट हिमालयी ग्लेशियरों की भारत के 'जल मीनारों' के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देती है और कम जलविद्युत क्षमता के कारण संभावित जल संकट, कृषि व्यवधान और ऊर्जा चुनौतियों की चेतावनी देती है।
- •यह GLOFs के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, सतत जल संसाधन प्रबंधन और ट्रांसबाउंडरी नदी घाटियों पर क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ाने सहित अनुकूलन और शमन रणनीतियों के तत्काल कार्यान्वयन का आह्वान करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- हिमालयी ग्लेशियर आर्कटिक और अंटार्कटिक के बाद बर्फ का तीसरा सबसे बड़ा भंडार हैं, जिन्हें अक्सर 'तीसरा ध्रुव' कहा जाता है।
- हिमालय से निकलने वाली प्रमुख नदी प्रणालियों में सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र, सतलुज और उनकी सहायक नदियाँ शामिल हैं।
- ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) एक ग्लेशियल झील से पानी का अचानक निकलना है, जो अक्सर प्राकृतिक बांधों के टूटने के कारण होता है।
- यह रिपोर्ट पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और INCOIS के सहयोगात्मक प्रयास का परिणाम थी।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- तेजी से ग्लेशियरों का पिघलना भारत में जल संकट को बढ़ा रहा है, जिससे कृषि उत्पादकता, शहरी जल आपूर्ति और ग्लेशियर पिघलने वाले पानी पर निर्भर समुदायों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
- हिमालय में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के लिए मजबूत जलवायु अनुकूलन योजनाओं की आवश्यकता है, जिसमें लचीले बुनियादी ढांचे में निवेश करना और जलवायु-स्मार्ट कृषि को बढ़ावा देना शामिल है।
- अंतर-देशीय जल शासन महत्वपूर्ण हो जाता है, जिसके लिए साझा नदी संसाधनों को समान और स्थायी रूप से प्रबंधित करने के लिए तटवर्ती देशों के साथ कूटनीतिक जुड़ाव और सहकारी ढाँचे की आवश्यकता होती है।
- GLOFs की बढ़ती आवृत्ति कमजोर क्षेत्रों में बेहतर पूर्वानुमान, भूमि-उपयोग योजना और सामुदायिक तैयारी कार्यक्रमों सहित व्यापक आपदा जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियों की आवश्यकता पर जोर देती है।
पेज 92📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकापर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
91. पर्यावरण मंत्रालय ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन परियोजनाओं के लिए विशेष ईआईए ढाँचे का अनावरण किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने भारत के महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) के तहत परियोजनाओं के लिए एक नया, विशेष पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) ढाँचा जारी किया है, जिसका उद्देश्य पारिस्थितिक स्थिरता सुनिश्चित करते हुए पर्यावरणीय मंजूरी को सुव्यवस्थित करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •यह ढाँचा हरित हाइड्रोजन उत्पादन से जुड़ी विशिष्ट पर्यावरणीय चिंताओं को संबोधित करता है, जिसमें इलेक्ट्रोलिसिस के लिए पर्याप्त जल खपत, नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना (सौर, पवन फार्म) के लिए बड़े भूमि की आवश्यकताएं और रासायनिक उप-उत्पादों या अपशिष्ट धाराओं से संभावित प्रभाव शामिल हैं।
- •यह सभी NGHM परियोजनाओं के लिए एक व्यापक 'जल प्रबंधन योजना' अनिवार्य करता है, जिसमें विशेष रूप से जल-संकट वाले क्षेत्रों में स्थित परियोजनाओं के लिए जल स्रोतों, दक्षता उपायों और जिम्मेदार निर्वहन का विस्तृत मूल्यांकन आवश्यक है।
- •परियोजनाएं बहु-स्तरीय स्क्रीनिंग प्रक्रिया से गुजरेंगी, जिसमें पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों, तटीय क्षेत्रों में प्रस्तावित या कृषि या वन भूमि से महत्वपूर्ण भूमि-उपयोग परिवर्तन वाली परियोजनाओं के लिए कड़ी जांच की जाएगी।
- •एक 'ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर ऑफसेट' तंत्र पेश किया गया है, जिसके तहत परियोजना प्रस्तावक को अपने पर्यावरणीय पदचिह्न के अनुपात में जैव विविधता संरक्षण या पारिस्थितिक बहाली प्रयासों में निवेश करना होगा।
- •यह ढाँचा जनसुनवाई के लिए भी दिशा-निर्देश निर्धारित करता है, जिसमें पर्यावरणीय जोखिमों और लाभों के पारदर्शी प्रकटीकरण पर जोर दिया गया है, और मूल्यांकन प्रक्रिया में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाने के लिए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) शुरू किया गया था।
- हरित हाइड्रोजन नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करके पानी के इलेक्ट्रोलिसिस के माध्यम से उत्पादित किया जाता है, ग्रे हाइड्रोजन (जीवाश्म ईंधन से) या ब्लू हाइड्रोजन (कार्बन कैप्चर के साथ) के विपरीत।
- ईआईए प्रस्तावित परियोजना या विकास के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों का मूल्यांकन करने की एक प्रक्रिया है, जिसमें अंतर-संबंधित सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और मानव-स्वास्थ्य प्रभावों को ध्यान में रखा जाता है।
- MoEFCC भारत में पर्यावरणीय मंजूरी के लिए नोडल मंत्रालय है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- NGHM परियोजनाओं के लिए विशेष ईआईए ढाँचा भारत की ऊर्जा संक्रमण लक्ष्यों को स्थायी रूप से प्राप्त करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो औद्योगिक विकास को पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलित करता है।
- 'जल प्रबंधन योजना' को लागू करना हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि जल-संकट वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जल की खपत संघर्षों को जन्म दे सकती है और स्थानीय पारिस्थितिक चुनौतियों को बढ़ा सकती है।
- 'ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर ऑफसेट' तंत्र जैव विविधता संरक्षण को सीधे औद्योगिक विकास में एकीकृत करने का एक मार्ग प्रदान करता है, जिससे संभावित रूप से 'शुद्ध सकारात्मक' पर्यावरणीय प्रभाव को बढ़ावा मिलता है।
- बड़े पैमाने की ऊर्जा परियोजनाओं के लिए सामाजिक स्वीकृति प्राप्त करने और 'ग्रीनवॉशिंग' चिंताओं को रोकने के लिए प्रभावी जनसुनवाई और पारदर्शी जोखिम संचार महत्वपूर्ण हैं, जिससे लाभों और बोझों का समान वितरण सुनिश्चित होता है।
पेज 93📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
92. भारत का डेंगू के लिए पहला स्वदेशी mRNA टीका महत्वपूर्ण चरण III नैदानिक परीक्षणों में प्रवेश किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
स्वदेशी वैक्सीन विकास के लिए एक महत्वपूर्ण छलांग में, डेंगू बुखार के लिए पहला mRNA-आधारित वैक्सीन उम्मीदवार, जिसे एक भारतीय बायोफार्मास्युटिकल कंपनी द्वारा विकसित किया गया है, ने भारत में कई साइटों पर अपने चरण III नैदानिक परीक्षण शुरू कर दिए हैं, जो उन्नत वैक्सीन प्रौद्योगिकियों में भारत की बढ़ती शक्ति को प्रदर्शित करता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**वैक्सीन उम्मीदवार:** 'डेन्गावैक-एमआरएनए' नामक यह टीका डेंगू वायरस के सभी चार सीरोटाइप (DENV-1, DENV-2, DENV-3, और DENV-4) के विशिष्ट एंटीजन के लिए mRNA अनुक्रमों को वितरित करने के लिए एक उपन्यास लिपिड नैनोपार्टिकल (LNP) डिलीवरी प्रणाली का उपयोग करता है।
- •**चरण III परीक्षण:** इन बड़े पैमाने के परीक्षणों में स्थानिक क्षेत्रों में 15 साइटों पर 18-65 वर्ष की आयु के 10,000 से अधिक प्रतिभागी शामिल हैं, जिसमें प्राथमिक समापन बिंदु वायरोलॉजिकल रूप से पुष्टि किए गए रोगसूचक डेंगू और सुरक्षा प्रोफाइल के खिलाफ वैक्सीन प्रभावकारिता पर केंद्रित हैं।
- •**स्वदेशी विकास:** 'भारत बायोजीन प्राइवेट लिमिटेड' द्वारा जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) और ICMR के सहयोग से विकसित, यह टीका भारत में प्रचलित उष्णकटिबंधीय रोगों की चुनौतियों के लिए तैयार की गई अत्याधुनिक mRNA प्रौद्योगिकी का लाभ उठाता है।
- •**संभावित प्रभाव:** यदि सफल होता है, तो DengaVac-mRNA डेंगू की रोकथाम में क्रांति ला सकता है, रुग्णता और मृत्यु दर को काफी कम कर सकता है, और भारत तथा अन्य उष्णकटिबंधीय देशों में सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत कर सकता है।
- •**तकनीकी प्रगति:** यह उपलब्धि भारत को mRNA वैक्सीन प्रौद्योगिकी में एक नेता के रूप में स्थापित करती है, पारंपरिक प्लेटफार्मों से परे इसकी वैक्सीन विनिर्माण क्षमताओं का विस्तार करती है और भविष्य के संक्रामक रोग के प्रकोपों के लिए तैयारी बढ़ाती है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- mRNA टीके: मैसेंजर आरएनए का उपयोग करते हैं जो मानव कोशिकाओं को एंटीजन उत्पन्न करने का निर्देश देते हैं, जिससे वास्तविक रोगज़नक़ को पेश किए बिना प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया ट्रिगर होती है।
- डेंगू बुखार: एडीस मच्छरों द्वारा फैलने वाला एक वायरल रोग, जो उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में प्रचलित है, जो चार अलग-अलग सीरोटाइप (DENV-1, DENV-2, DENV-3, DENV-4) के कारण होता है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारी और आत्मनिर्भरता:** डेंगू के लिए स्वदेशी mRNA वैक्सीन का विकास सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में आत्मनिर्भरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह उष्णकटिबंधीय रोगों और संभावित भविष्य की महामारियों के खिलाफ राष्ट्रीय तैयारी को बढ़ाता है, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भरता को कम करता है और उन्नत चिकित्सा समाधानों तक समान पहुंच सुनिश्चित करता है।
- **नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और बायोमेडिकल अनुसंधान:** यह सफलता भारत के बायोमेडिकल अनुसंधान और विकास पारिस्थितिकी तंत्र के परिपक्व होने पर प्रकाश डालती है। यह अत्याधुनिक जैव प्रौद्योगिकी में निवेश को मान्य करता है, शिक्षाविदों, उद्योग और सरकार के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है, और भारत को उन्नत चिकित्सा नवाचारों के केंद्र के रूप में स्थापित करता है, जिसमें राजस्थान जैसे उच्च रोग बोझ वाले क्षेत्रों के लिए भी शामिल है, जहाँ मौसमी डेंगू के प्रकोप होते हैं।
पेज 94📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
93. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को मजबूत करने के लिए 'छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) पर राष्ट्रीय नीति 2026' को मंजूरी दी
चर्चा में क्यों? (Why in News)
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) पर राष्ट्रीय नीति 2026' को अपनी मंजूरी दे दी है, जो भारत की ऊर्जा मिश्रण में विविधता लाने, शुद्ध-शून्य लक्ष्यों को प्राप्त करने और उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकी के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने की रणनीतिक प्रतिबद्धता का संकेत है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**नीति का उद्देश्य:** भारत में SMRs के अनुसंधान, विकास, परिनियोजन और नियामक निरीक्षण के लिए एक व्यापक ढांचा स्थापित करना, उन्हें 2040 तक देश की स्वच्छ ऊर्जा अवसंरचना का एक महत्वपूर्ण घटक बनाना।
- •**प्रमुख प्रावधान:** नीति SMR प्रौद्योगिकी विकास में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPPs) के लिए प्रोत्साहन, परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) द्वारा सुव्यवस्थित लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं और स्वदेशी डिजाइन और विनिर्माण क्षमताओं के लिए समर्पित धन का प्रावधान करती है।
- •**SMRs के रणनीतिक लाभ:** उनके छोटे पदचिह्न, बढ़ी हुई सुरक्षा सुविधाएँ, परिनियोजन में लचीलापन (रिमोट स्थानों और औद्योगिक अनुप्रयोगों सहित), और हाइड्रोजन और जिला हीटिंग के सह-उत्पादन की क्षमता पर जोर देती है, जो भारत के हरित हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप है।
- •**क्षमता लक्ष्य:** नीति का लक्ष्य 2035 तक 5-7 SMR इकाइयों की प्रारंभिक तैनाती है, जो राष्ट्रीय ग्रिड में लगभग 2-3 GW का योगदान करेगी, और मांग व तकनीकी प्रगति के आधार पर आगे विस्तार की योजना है।
- •**कौशल विकास:** परमाणु इंजीनियरों और तकनीशियनों के लिए शैक्षणिक संस्थानों और उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रमों के साथ सहयोग के माध्यम से एक विशेष कार्यबल बनाने पर महत्वपूर्ण ध्यान केंद्रित किया गया है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- SMRs (छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर): उन्नत परमाणु रिएक्टर जिनकी शक्ति उत्पादन क्षमता आमतौर पर 300 MWe से कम होती है, जिन्हें कारखाने में निर्माण और मॉड्यूलर परिनियोजन के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- SMR नीति के लिए नोडल प्राधिकरण: प्रधानमंत्री कार्यालय के तहत परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE), AERB द्वारा नियामक निरीक्षण के साथ।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन शमन:** SMRs एक विश्वसनीय, बेसलोड, कार्बन-मुक्त ऊर्जा स्रोत प्रदान करते हैं जो भारत की जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को काफी कम कर सकता है, पेरिस समझौते के तहत इसके राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) में योगदान कर सकता है और कम कार्बन वाली अर्थव्यवस्था में संक्रमण को तेज कर सकता है। उनकी मॉड्यूलर प्रकृति विविध ऊर्जा ग्रिडों में लचीले एकीकरण की अनुमति देती है।
- **आर्थिक विविधीकरण और क्षेत्रीय विकास:** SMR नीति एक नया विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र बनाकर, निवेश आकर्षित करके और कुशल रोजगार पैदा करके आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकती है। वितरित बिजली उत्पादन के लिए उनकी उपयुक्तता दूरदराज के क्षेत्रों, जैसे राजस्थान राज्यों में औद्योगिक विकास और ग्रिड स्थिरता को सुविधाजनक बना सकती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं का समर्थन होता है और पारेषण हानि कम होती है।
पेज 95📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
94. इसरो ने गगनयान मिशन के क्रू मॉड्यूल एकीकरण और पर्यावरणीय नियंत्रण एवं जीवन रक्षक प्रणाली (ECLSS) परीक्षण में महत्वपूर्ण मील के पत्थर हासिल किए
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने गगनयान मिशन के क्रू मॉड्यूल के एकीकरण के एक महत्वपूर्ण चरण और स्वदेशी रूप से विकसित पर्यावरणीय नियंत्रण एवं जीवन रक्षक प्रणाली (ECLSS) के व्यापक जमीनी परीक्षण के सफल समापन की घोषणा की, जो भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**क्रू मॉड्यूल एकीकरण:** क्रू मॉड्यूल (CM) की संरचनात्मक अखंडता और वायुरोधी सीलिंग का सफलतापूर्वक सत्यापन किया गया है, जिसमें एवियोनिक्स, पावर इंटरफेस और क्रू इंटरफेस के प्रारंभिक फिटमेंट सहित महत्वपूर्ण उप-प्रणालियों का एकीकरण शामिल है।
- •**पर्यावरणीय नियंत्रण एवं जीवन रक्षक प्रणाली (ECLSS):** बेंगलुरु स्थित इसरो के मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र (HSFC) में ECLSS के लिए व्यापक जमीनी सिमुलेशन और परीक्षण पूरे कर लिए गए हैं, जो नियोजित 3-दिवसीय मिशन अवधि के लिए इष्टतम केबिन दबाव, तापमान, आर्द्रता और CO2 स्तरों को बनाए रखने की इसकी क्षमता को प्रदर्शित करता है।
- •**जल पुनर्चक्रण और अपशिष्ट प्रबंधन:** ECLSS परीक्षणों में सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण में चालक दल के स्वास्थ्य और स्वच्छता को बनाए रखने के लिए डिज़ाइन किए गए एक बंद-लूप जल पुनर्चक्रण प्रणाली और प्रारंभिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रोटोकॉल का सफल सत्यापन भी शामिल था।
- •**अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण और सिमुलेशन:** समानांतर रूप से, चार भारतीय अंतरिक्ष यात्री-नामित बेंगलुरु में अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण सुविधा (ATF) में एकीकृत CM मॉक-अप और ECLSS कंसोल संचालन के साथ सिमुलेशन सहित उन्नत मिशन-विशिष्ट प्रशिक्षण से गुजर रहे हैं।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- गगनयान मिशन: भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम, जिसका लक्ष्य तीन सदस्यीय दल को 3-दिवसीय मिशन के लिए 400 किमी की कक्षा में भेजना है।
- ECLSS: पर्यावरणीय नियंत्रण एवं जीवन रक्षक प्रणाली, अंतरिक्ष में मानव जीवन को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण, जिसे इसरो द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **सामरिक स्वायत्तता और तकनीकी कौशल:** गगनयान के सफल एकीकरण और परीक्षण चरण उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों में भारत की बढ़ती क्षमताओं को रेखांकित करते हैं, जिससे विदेशी सहायता पर निर्भरता कम होती है और एक प्रमुख अंतरिक्ष राष्ट्र के रूप में इसकी स्थिति मजबूत होती है। यह 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के अनुरूप है।
- **अनुसंधान एवं विकास और आर्थिक विकास के लिए उत्प्रेरक:** यह मिशन सामग्री विज्ञान, प्रणोदन, रोबोटिक्स और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग जैसे विविध क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास के लिए एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है। यह सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में नवाचार को प्रोत्साहित करता है, एक उभरती हुई अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है और उच्च-कुशल रोजगार के अवसर पैदा करता है।
पेज 96📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाअर्थव्यवस्था एवं RBI मौद्रिक नीति
95. ग्रामीण अर्थव्यवस्था का पुनरुद्धार: एमएसपी की प्रभावशीलता, कृषि-प्रसंस्करण को बढ़ावा और राजस्थान की विकास पहलें
चर्चा में क्यों? (Why in News)
केंद्र सरकार द्वारा खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की हालिया घोषणा और कृषि अवसंरचना तथा ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने के लिए चल रहे राज्य-स्तरीय प्रयास, विशेष रूप से राजस्थान में, समावेशी आर्थिक विकास और किसान कल्याण पर चर्चा के केंद्र में हैं। इन पहलों का उद्देश्य ग्रामीण समृद्धि को बढ़ाना और कृषि आय स्रोतों में विविधता लाना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**खरीफ फसलों के लिए एमएसपी में वृद्धि:** केंद्र सरकार ने विपणन सत्र 2026-27 के लिए सभी 14 अनिवार्य खरीफ फसलों के एमएसपी में पर्याप्त वृद्धि की घोषणा की है, जिससे अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत (ए2+एफएल) पर न्यूनतम 50% रिटर्न सुनिश्चित किया जा सके। इसका उद्देश्य विशेष रूप से दालों और तिलहन की ओर फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना है, ताकि आयात निर्भरता कम हो सके।
- •**खाद्य मुद्रास्फीति में कमी:** जबकि एमएसपी में वृद्धि का उद्देश्य किसानों की आय में सुधार करना है, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के खाद्य मुद्रास्फीति घटक में कमी के संकेत मिले हैं, जो बेहतर आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और बफर स्टॉक संचालन को दर्शाता है। हालांकि, संशोधित एमएसपी से उत्पन्न होने वाले किसी भी मुद्रास्फीति के दबाव को रोकने के लिए सतर्कता बरती जा रही है।
- •**राजस्थान का कृषि-प्रसंस्करण पर जोर:** राजस्थान राज्य बजट 2026-27 ने 'मुख्यमंत्री किसान समृद्धि योजना' (एमकेएसवाई) के लिए ₹1,500 करोड़ का एक महत्वपूर्ण कोष आवंटित किया है, जो कृषि-प्रसंस्करण समूहों को बढ़ावा देने, कोल्ड चेन विकास और किसानों के लिए प्रत्यक्ष बाजार संपर्क को सुविधाजनक बनाने पर केंद्रित है। आरआईआईसीओ (राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास और निवेश निगम) ने पांच नए विशेष कृषि-खाद्य पार्कों के विकास की शुरुआत की है।
- •**मनरेगा का ग्रामीण प्रभाव:** राजस्थान में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के आंकड़ों से मजबूत प्रदर्शन का संकेत मिलता है, जिसमें वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में लगभग 45 करोड़ व्यक्ति-दिवस उत्पन्न हुए हैं। यह विशेष रूप से कृषि के कमजोर मौसमों के दौरान महत्वपूर्ण ग्रामीण रोजगार प्रदान करता है, जिससे ग्रामीण क्रय शक्ति बढ़ती है और गरीबी उन्मूलन में योगदान मिलता है।
- •**जलवायु-अनुकूल कृषि पर ध्यान:** केंद्रीय और राज्य दोनों नीतियां जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने पर तेजी से जोर दे रही हैं। एमकेएसवाई के तहत राजस्थान की पहलों में सूक्ष्म-सिंचाई, सौर पंपों के लिए सब्सिडी और कृषि स्थिरता बढ़ाने के लिए सूखा-प्रतिरोधी फसल किस्मों को बढ़ावा देना शामिल है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) गणना विधि (ए2+एफएल, सी2)।
- एमएसपी घोषणा में शामिल खरीफ फसलें (जैसे चावल, मक्का, दालें, तिलहन)।
- राजस्थान की 'मुख्यमंत्री किसान समृद्धि योजना' (एमकेएसवाई) और उसके उद्देश्य।
- आरआईआईसीओ (राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास और निवेश निगम) और कृषि-खाद्य पार्कों में इसकी भूमिका।
- राजस्थान में मनरेगा के तहत उत्पन्न व्यक्ति-दिवस (वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही: 45 करोड़)।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **आय सहायता और विविधीकरण उपकरण के रूप में एमएसपी:** हालांकि एमएसपी किसानों के लिए सुरक्षा जाल प्रदान करने और लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है, इसकी प्रभावशीलता मजबूत खरीद अवसंरचना और कुशल बाजार एकीकरण पर निर्भर करती है। रणनीतिक वृद्धि, विशेष रूप से दालों और तिलहन के लिए, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित कर सकती है, पानी की अधिक खपत वाली फसलों पर निर्भरता कम कर सकती है, और आयात घटाकर खाद्य सुरक्षा को मजबूत कर सकती है।
- **मूल्य श्रृंखला एकीकरण और ग्रामीण औद्योगीकरण:** राजस्थान में आरआईआईसीओ और एमकेएसवाई द्वारा किए गए कृषि-प्रसंस्करण और कोल्ड चेन अवसंरचना में निवेश, फसल कटाई के बाद के नुकसान को कम करने, मूल्यवर्धन बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-कृषि रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह एकीकरण किसानों को मूल्य श्रृंखला में आगे बढ़ने, उनकी मोलभाव करने की शक्ति और कुल आय में सुधार करने में मदद करता है।
- **ग्रामीण लचीलापन और मांग सृजन में मनरेगा की भूमिका:** मनरेगा एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा जाल बना हुआ है, जो गारंटीशुदा रोजगार प्रदान करता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तरलता डालता है। समय पर मजदूरी भुगतान और टिकाऊ संपत्ति बनाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए इसका प्रभावी कार्यान्वयन, ग्रामीण मांग को बनाए रखने के लिए आवश्यक है, खासकर आर्थिक मंदी के दौरान, और समावेशी विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पेज 97📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाअर्थव्यवस्था एवं RBI मौद्रिक नीति
96. RBI की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट उभरते व्यापक-वित्तीय जोखिमों के बीच बैंकिंग क्षेत्र के लचीलेपन पर प्रकाश डालती है
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल ही में अपनी अर्ध-वार्षिक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) जारी की है, जिसमें भारतीय वित्तीय प्रणाली के स्वास्थ्य और लचीलेपन का व्यापक मूल्यांकन किया गया है और संभावित जोखिमों व कमजोरियों को रेखांकित किया गया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच बैंकिंग क्षेत्र की निरंतर मजबूती पर जोर दिया।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार:** अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (जीएनपीए) अनुपात अपनी गिरावट जारी रखते हुए मार्च 2026 तक 3.2% पर आ गया, और आधारभूत परिदृश्य के तहत मार्च 2027 तक 3.0% से नीचे गिरने का अनुमान है, जो मजबूत परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार का संकेत है।
- •**मजबूत पूंजीकरण:** एससीबी का पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR) मार्च 2026 तक 16.5% पर मजबूत बना रहा, जो नियामक न्यूनतम 9% से काफी ऊपर है, जो संभावित झटकों को झेलने के लिए पर्याप्त पूंजी बफर को दर्शाता है।
- •**स्वस्थ ऋण वृद्धि:** विशेष रूप से खुदरा और सेवा क्षेत्रों में ऋण वृद्धि मजबूत बनी हुई है, जो समग्र आर्थिक गतिविधि का समर्थन कर रही है। हालांकि, आरबीआई ने असुरक्षित खुदरा ऋणों में संभावित क्षेत्रीय अतिताप के प्रति आगाह किया है, और बैंकों से विवेकपूर्ण व्यवहार करने का आग्रह किया है।
- •**व्यापक-वित्तीय जोखिम:** एफएसआर ने वैश्विक भू-राजनीतिक विकास, कमोडिटी मूल्य अस्थिरता और उन्नत अर्थव्यवस्थाओं की मौद्रिक नीति के सख्त होने से संभावित बाहरी प्रभावों से उत्पन्न होने वाले उभरते जोखिमों पर प्रकाश डाला, जो भारत के बाहरी क्षेत्र और घरेलू मुद्रास्फीति (सीपीआई/डब्ल्यूपीआई) को प्रभावित कर सकते हैं।
- •**मौद्रिक नीति के रुख की पुष्टि:** आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने अपने 'तटस्थ' रुख की पुष्टि की है। वर्तमान प्रमुख नीतिगत दरें हैं: रेपो दर 6.00% (जून 2025 में 25 बीपीएस की कटौती के बाद), रिवर्स रेपो दर 3.35%, नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) 4.00%, वैधानिक तरलता अनुपात (एसएलआर) 18.00%, सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) दर 6.25% और बैंक दर 6.25%। अगली एमपीसी बैठक अगस्त 2025 के लिए निर्धारित है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- आरबीआई गवर्नर: संजय मल्होत्रा। एमपीसी का रुख: तटस्थ। अगली एमपीसी बैठक: अगस्त 2025।
- प्रमुख आरबीआई दरें: रेपो दर 6.00%, रिवर्स रेपो दर 3.35%, सीआरआर 4.00%, एसएलआर 18.00%, एमएसएफ दर 6.25%, बैंक दर 6.25%।
- वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) आरबीआई का अर्ध-वार्षिक प्रकाशन है।
- मार्च 2027 तक एससीबी के लिए जीएनपीए अनुपात का अनुमान: 3.0% से नीचे।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **व्यापक-विवेकपूर्ण नीति में एफएसआर की भूमिका:** एफएसआर प्रणालीगत जोखिमों की पहचान करने और व्यापक-विवेकपूर्ण नीतिगत उपकरणों को सूचित करने के लिए महत्वपूर्ण है, जो वित्तीय क्षेत्र की स्थिरता सुनिश्चित करता है, जो सतत आर्थिक विकास के लिए एक पूर्व शर्त है। परिसंपत्ति गुणवत्ता और पूंजी पर्याप्तता पर इसके दूरंदेशी अनुमान नियामक हस्तक्षेपों का मार्गदर्शन करते हैं।
- **मौद्रिक नीति संचरण और ऋण प्रवाह:** 'तटस्थ' मौद्रिक नीति का रुख, एक लचीले बैंकिंग क्षेत्र के साथ, वास्तविक अर्थव्यवस्था में नीतिगत संकेतों के प्रभावी संचरण को सुनिश्चित करना है। बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता और पूंजी बफर बेहतर ऋण प्रवाह की सुविधा प्रदान करते हैं, जो निवेश और उपभोग के लिए महत्वपूर्ण है, पीएम गति शक्ति जैसी पहलों के तहत सरकार के पूंजीगत व्यय को बढ़ावा देने में पूरक है।
- **उभरते जोखिमों और वैश्विक संपर्कों को संबोधित करना:** जबकि घरेलू बुनियादी सिद्धांत मजबूत हैं, एफएसआर वैश्विक वित्तीय प्रणाली की परस्पर संबद्धता को रेखांकित करता है। अस्थिर एफडीआई/एफपीआई प्रवाह या व्यापार घाटे के दबाव जैसे बाहरी विपरीत परिस्थितियों से निपटने की भारत की क्षमता मजबूत घरेलू नीतियों और सतर्क नियामक ढांचे पर निर्भर करती है।
पेज 98📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाराजव्यवस्था एवं संविधान
97. उच्च-स्तरीय समिति ने न्यायिक नियुक्ति MoP में व्यापक सुधारों के लिए अंतरिम सिफारिशें प्रस्तुत कीं
चर्चा में क्यों? (Why in News)
उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायिक नियुक्तियों के लिए प्रक्रिया ज्ञापन (MoP) की समीक्षा और सुधारों का सुझाव देने हेतु उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद गठित एक उच्च-स्तरीय समिति ने अपनी अंतरिम सिफारिशें प्रस्तुत की हैं, जिससे न्यायिक स्वतंत्रता और जवाबदेही पर नए सिरे से बहस छिड़ गई है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रकाश चंद्र की अध्यक्षता वाली समिति ने न्यायिक पदों के लिए उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग और मूल्यांकन में अधिक पारदर्शिता और वस्तुनिष्ठ मानदंडों पर जोर दिया।
- •सिफारिशों में उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय के भीतर एक 'न्यायिक नियुक्ति सचिवालय' की स्थापना शामिल है, जिसमें वरिष्ठ न्यायाधीश और कानूनी विशेषज्ञ शामिल होंगे, ताकि उम्मीदवार की पहचान और पृष्ठभूमि की जांच की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जा सके।
- •उन्नयन के लिए विचाराधीन मौजूदा न्यायाधीशों के लिए एक 'प्रदर्शन मैट्रिक्स' का प्रस्ताव किया, जिसमें निर्णय की गुणवत्ता, न्यायिक स्वभाव, निपटान दर और ईमानदारी जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है, जिसका मूल्यांकन एक पारदर्शी प्रतिक्रिया तंत्र के माध्यम से किया जाएगा।
- •उम्मीदवार की पहचान के प्रारंभिक चरणों में वरिष्ठ अधिवक्ताओं और बार संघों सहित हितधारकों की एक विस्तृत श्रृंखला को शामिल करते हुए एक अनिवार्य परामर्श चरण का सुझाव दिया, जबकि कॉलेजियम के अंतिम निर्णय लेने के अधिकार को बरकरार रखा।
- •कॉलेजियम और कार्यपालिका दोनों द्वारा सिफारिशों को संसाधित करने के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा का आह्वान किया, जिसका उद्देश्य नियुक्तियों में देरी को कम करना है।
- •न्यायिक नियुक्तियों में बढ़ी हुई विविधता की वकालत की, जिसमें महिलाओं, अल्पसंख्यकों और विभिन्न क्षेत्रों सहित अल्पप्रतिनिधित्व वाले वर्गों के उम्मीदवारों पर सक्रिय रूप से विचार करने की सिफारिश की गई।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 और 217 जो उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित हैं।
- 'थ्री जजेस केसेज' के माध्यम से कॉलेजियम प्रणाली की उत्पत्ति और विकास।
- न्यायिक नियुक्तियों के लिए प्रक्रिया ज्ञापन (MoP) की प्रमुख विशेषताएं और महत्व।
- राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) की अवधारणा और उसकी संवैधानिक स्थिति (99वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम और उसके बाद उच्चतम न्यायालय द्वारा इसे निरस्त करना)।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- विश्लेषण करें कि MoP में प्रस्तावित सुधारों का उद्देश्य नियुक्ति प्रक्रिया में जवाबदेही और पारदर्शिता के साथ न्यायिक स्वतंत्रता को कैसे संतुलित करना है।
- 'न्यायिक नियुक्ति सचिवालय' की स्थापना और 'प्रदर्शन मैट्रिक्स' की शुरुआत का न्यायिक नियुक्तियों की गुणवत्ता और दक्षता पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव पर चर्चा करें।
- न्यायिक नियुक्तियों के ऐतिहासिक संदर्भ को ध्यान में रखते हुए, MoP को अंतिम रूप देने पर न्यायपालिका और कार्यपालिका के विचारों में सामंजस्य स्थापित करने में चुनौतियों और अवसरों का मूल्यांकन करें।
- न्यायिक नियुक्तियों में बढ़ी हुई विविधता की वकालत के महत्व और न्यायपालिका के भीतर सार्वजनिक विश्वास और समान प्रतिनिधित्व के लिए इसके निहितार्थों की जांच करें।
पेज 99📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाराजव्यवस्था एवं संविधान
98. संसद ने व्यापक राजनीतिक वित्तपोषण पारदर्शिता विधेयक 2026 पारित किया, प्रकटीकरण मानदंडों में वृद्धि
चर्चा में क्यों? (Why in News)
चुनावी लोकतंत्र में अधिक जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, संसद ने हाल ही में 'राजनीतिक वित्तपोषण पारदर्शिता (संशोधन) विधेयक, 2026' पारित किया, जिसका उद्देश्य राजनीतिक दान और स्वतंत्र चुनावी व्यय के लिए मौजूदा प्रकटीकरण मानदंडों में सुधार करना है। यह कदम स्वच्छ चुनावी वित्त के लिए नागरिक समाज की लगातार मांगों के बीच आया है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •यह विधेयक राजनीतिक वित्तपोषण के लिए एक एकीकृत ढांचा तैयार करने हेतु लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951, आयकर अधिनियम, 1961, और कंपनी अधिनियम, 2013 में संशोधन करता है।
- •यह राजनीतिक दलों द्वारा अपने ऑडिट रिपोर्ट में सभी दान की अनिवार्य घोषणा को अनिवार्य करता है, चाहे राशि कितनी भी हो, जो पूर्व के ₹20,000 की सीमा से आगे बढ़कर है।
- •तीसरे पक्ष के संगठनों और व्यक्तियों द्वारा 'स्वतंत्र चुनावी व्यय' की अवधारणा पेश करता है, जिसके लिए उन्हें भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के साथ पंजीकरण करने और राजनीतिक दल द्वारा सीधे प्रबंधित न की गई अभियान गतिविधियों के लिए धन के स्रोतों का खुलासा करने की आवश्यकता होती है।
- •राजनीतिक दलों के वित्त और चुनावी खर्चों की जांच करने के लिए भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) के तहत एक स्वतंत्र 'चुनावी लेखा परीक्षा प्राधिकरण' की स्थापना करता है, जो नए पारदर्शिता मानदंडों का अनुपालन सुनिश्चित करेगा।
- •गैर-प्रकटीकरण, झूठी घोषणाओं और अपारदर्शी वित्तपोषण प्रथाओं के लिए दंड बढ़ाता है, जिसमें बार-बार गैर-अनुपालन के लिए ECI द्वारा राजनीतिक दलों की मान्यता रद्द करना शामिल है।
- •यह विधेयक ECI द्वारा प्रबंधित एक समर्पित पोर्टल का भी प्रावधान करता है, जिसमें सभी घोषित राजनीतिक दान और व्यय का वास्तविक समय में खुलासा किया जाएगा, जिससे डेटा सार्वजनिक रूप से सुलभ हो सकेगा।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- राजनीतिक वित्तपोषण के लिए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951; आयकर अधिनियम, 1961; और कंपनी अधिनियम, 2013 में संशोधन।
- राजनीतिक दलों और चुनावी वित्त को विनियमित करने में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की भूमिका और शक्तियाँ।
- नए 'चुनावी लेखा परीक्षा प्राधिकरण' की स्थापना में नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) (अनुच्छेद 148-151) की भूमिका।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- भारत की राजनीतिक व्यवस्था में चुनावी लोकतंत्र को मजबूत करने, काले धन के प्रभाव को कम करने और जवाबदेही बढ़ाने में राजनीतिक वित्तपोषण पारदर्शिता विधेयक 2026 के महत्व पर चर्चा करें।
- विधेयक के प्रभावी कार्यान्वयन में संभावित चुनौतियों का विश्लेषण करें, विशेष रूप से 'स्वतंत्र चुनावी व्यय' की निगरानी और दंड के प्रवर्तन के संबंध में।
- मूल्यांकन करें कि विधेयक दानदाताओं की गोपनीयता और राजनीतिक दलों के लिए व्यावहारिक निहितार्थों से संबंधित संभावित चिंताओं के साथ अधिक पारदर्शिता की आवश्यकता को कैसे संतुलित करता है।
- नए ढांचे के तहत चुनावी प्रक्रियाओं में वित्तीय शुचिता और अखंडता सुनिश्चित करने में ECI और CAG जैसे संवैधानिक निकायों की बढ़ी हुई भूमिका की जांच करें।
पेज 100📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाअर्थव्यवस्था एवं RBI मौद्रिक नीति
99. पूंजीगत व्यय, एफडीआई/एफपीआई और पीएम गति शक्ति की सहक्रिया भारत के आर्थिक विकास पथ को आगे बढ़ा रही है
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारत का आर्थिक विकास, बढ़े हुए सरकारी पूंजीगत व्यय, मजबूत विदेशी निवेश प्रवाह और पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बहु-मॉडल अवसंरचना विकास के परिवर्तनकारी प्रभाव के रणनीतिक संयोजन से लगातार मजबूत हो रहा है। औद्योगिक उत्पादन और रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह पर हालिया डेटा इस सकारात्मक गति को रेखांकित करता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**सतत पूंजीगत व्यय:** केंद्रीय बजट 2026-27 में पूंजीगत व्यय के लिए महत्वाकांक्षी आवंटन, जो सकल घरेलू उत्पाद का 3.3% तक पहुंचने का अनुमान है, 2025-26 में 2.9% से बढ़कर, एक प्राथमिक चालक बना हुआ है, जो प्रमुख विकास क्षेत्रों में निजी क्षेत्र के निवेश को प्रभावी ढंग से बढ़ावा दे रहा है।
- •**मजबूत विदेशी निवेश:** वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में सालाना आधार पर 12% की स्वस्थ वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें महत्वपूर्ण हिस्से हरित ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में निर्देशित थे। विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) ने भी इसी तिमाही में 5 अरब डॉलर से अधिक का शुद्ध प्रवाह देखा, जो सकारात्मक बाजार भावना और भारत के स्थिर व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण से प्रेरित था।
- •**पीएम गति शक्ति का प्रभाव:** पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान ने रसद दक्षता बढ़ाने, परियोजना कार्यान्वयन की समय-सीमा को कम करने और एकीकृत आर्थिक गलियारों और रसद केंद्रों के विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विशेष रूप से, राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्रों का पश्चिमी समर्पित फ्रेट कॉरिडोर के साथ एकीकरण तेज हो गया है, जिससे नए निवेश के अवसर पैदा हुए हैं।
- •**रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह:** जून 2026 के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह अभूतपूर्व ₹1.95 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 14% की महत्वपूर्ण वृद्धि दर्शाता है। यह मजबूत उपभोग मांग, अर्थव्यवस्था के बढ़ते औपचारिकीकरण और बेहतर कर अनुपालन को दर्शाता है।
- •**विनिर्माण और औद्योगिक उत्पादन:** औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) ने मई 2026 में 6.8% की वृद्धि दर्ज की, जो मुख्य रूप से विनिर्माण और बिजली उत्पादन में मजबूत प्रदर्शन से प्रेरित है, जो औद्योगिक गतिविधि में व्यापक सुधार का संकेत है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- केंद्रीय बजट 2026-27 पूंजीगत व्यय लक्ष्य (उदाहरण के लिए, सकल घरेलू उत्पाद का 3.3%)।
- पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान और उसके उद्देश्य।
- वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के लिए एफडीआई और एफपीआई रुझान, निवेश आकर्षित करने वाले प्रमुख क्षेत्र।
- जून 2026 के लिए जीएसटी संग्रह: ₹1.95 लाख करोड़।
- मई 2026 के लिए औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) वृद्धि।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **सार्वजनिक निवेश की उत्प्रेरक भूमिका:** सरकार का बढ़ा हुआ पूंजीगत व्यय एक महत्वपूर्ण प्रतिचक्रीय भूमिका निभाता है, कुल मांग को प्रोत्साहित करता है, रोजगार पैदा करता है और उत्पादकता बढ़ाता है। यह 'क्राउडिंग-इन' प्रभाव निजी निवेश को प्रोत्साहित करता है, जो भारत के महत्वाकांक्षी विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने और एक प्रतिस्पर्धी विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।
- **रणनीतिक क्षेत्रों के लिए वैश्विक पूंजी आकर्षित करना:** सतत एफडीआई/एफपीआई प्रवाह भारत की दीर्घकालिक विकास गाथा में वैश्विक निवेशकों के विश्वास को इंगित करता है। हरित ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना और उन्नत विनिर्माण की ओर बदलाव सतत विकास और तकनीकी प्रगति के लिए भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप है, पारंपरिक क्षेत्रों पर निर्भरता कम करता है और वैश्विक झटकों के खिलाफ लचीलापन बढ़ाता है।
- **प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए एकीकृत अवसंरचना:** पीएम गति शक्ति का एकीकृत नियोजन और बहु-मॉडल कनेक्टिविटी पर जोर भारत के रसद परिदृश्य को बदल रहा है। पारगमन समय और लागत को कम करके, यह भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाता है, 'मेक इन इंडिया' पहल का समर्थन करता है, और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अधिक एकीकरण की सुविधा प्रदान करता है, अंततः अनुकूल व्यापार संतुलन और बाहरी क्षेत्र की स्थिरता में योगदान देता है।
पेज 101📞 हेल्प-लाइन: 6378811249
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकाराजव्यवस्था एवं संविधान
100. उच्चतम न्यायालय ने राज्यपाल के विवेकाधीन शक्तियों के दायरे को पुनः परिभाषित किया, संवैधानिक नैतिकता पर जोर
चर्चा में क्यों? (Why in News)
संघीय टकराव को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया, जिसमें राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियों की संवैधानिक सीमाओं को स्पष्ट किया गया, विशेष रूप से राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों पर सहमति और विधानसभा सत्र बुलाने के संबंध में।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •न्यायालय ने फैसला सुनाया कि अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल की विधेयक पर सहमति रोकने या उसे राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित करने की शक्ति पूर्ण नहीं है और संवैधानिक औचित्य द्वारा निर्देशित 'उचित समय-सीमा' के भीतर इसका प्रयोग किया जाना चाहिए।
- •इसने निर्दिष्ट किया कि विधेयक को विधायिका को वापस भेजना (अनुच्छेद 200 का परंतुक) स्पष्ट, वस्तुनिष्ठ कारणों के साथ होना चाहिए, और वैध आधार के बिना बार-बार सहमति रोकना लोकतांत्रिक विधायी प्रक्रिया को कमजोर करता है।
- •निर्णय में दोहराया गया कि राज्यपाल की भूमिका मुख्य रूप से संविधान की रक्षा और संरक्षण करना है, जो मंत्रिपरिषद (अनुच्छेद 163) की सहायता और सलाह पर कार्य करता है, सिवाय स्पष्ट रूप से परिभाषित विवेकाधीन कार्यों के।
- •न्यायालय ने राज्यपाल के विवेकाधीन कार्यों की संवैधानिक वैधता निर्धारित करने के लिए एक 'त्रिविध परीक्षण' की रूपरेखा तैयार की: (1) क्या संविधान स्पष्ट रूप से विवेक प्रदान करता है; (2) क्या कार्रवाई संघीय ढांचे और संसदीय लोकतंत्र के अनुरूप है; और (3) क्या कार्रवाई तर्कसंगत, गैर-मनमानी और वस्तुनिष्ठ सामग्री पर आधारित है।
- •विधानसभा को बुलाने, सत्रावसान करने या भंग करने के लिए, न्यायालय ने जोर दिया कि राज्यपाल को आम तौर पर मुख्यमंत्री और उनकी मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करना चाहिए, विवेकाधीन शक्ति उन स्थितियों तक सीमित है जैसे कि सत्तारूढ़ सरकार द्वारा विश्वास का स्पष्ट नुकसान, जिसके लिए फ्लोर टेस्ट की आवश्यकता होती है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- संविधान के अनुच्छेद 153, 154, 163, 174, 200, 201 जो राज्यपाल के पद और शक्तियों से संबंधित हैं।
- सरकारिया आयोग (1988) और पुंछी आयोग (2010) की राज्यपाल की भूमिका और विवेकाधीन शक्तियों पर प्रमुख सिफारिशें।
- राज्यपाल के विवेकाधीन कार्यों की संवैधानिक वैधता का आकलन करने के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रस्तुत 'त्रिविध परीक्षण'।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- इस निर्णय के भारत में केंद्र-राज्य संबंधों और सहकारी तथा प्रतिस्पर्धी संघवाद के सिद्धांतों पर पड़ने वाले प्रभाव का परीक्षण करें।
- संवैधानिक नैतिकता की विकसित हो रही अवधारणा और राज्यपाल जैसे संवैधानिक पदाधिकारियों की विवेकाधीन शक्तियों की व्याख्या में इसके अनुप्रयोग पर चर्चा करें।
- विश्लेषण करें कि उच्चतम न्यायालय के निर्देश किस प्रकार राज्यपाल के संवैधानिक कर्तव्यों को संविधान के संरक्षक के रूप में संसदीय लोकतंत्र में एक निर्वाचित राज्य सरकार के जनादेश के साथ संतुलित करते हैं।
- इस निर्णय से सीख लेते हुए राज्यपाल की भूमिका को और स्पष्ट करने तथा शक्तियों के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए विधायी सुधारों या एक विशिष्ट आचार संहिता की आवश्यकता का मूल्यांकन करें।
पेज 102📞 हेल्प-लाइन: 6378811249