मासिक समसामयिकी पत्रिका
Current Affairs Monthly Compilation
दिनांक: 21 जुलाई 2026
प्रकाशक: विक्रम ई-मित्र पोर्टल
बरौली, राजस्थान | हेल्प-लाइन: 6378811249, 6378811249
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विषय सूची (Table of Contents)
- 1. बाल संरक्षण और पुनर्वास प्रणालियों को सुदृढ़ करने हेतु 'बाल जीवन धारा' अभियान का शुभारंभपेज 3
- 2. नीति आयोग ने महिला कार्यबल भागीदारी को बढ़ावा देने हेतु 'लैंगिक समानता और आर्थिक समावेशन ढाँचा 2026' जारी कियापेज 4
- 3. समग्र वृद्धजन देखभाल और सम्मान हेतु 'वरिष्ठ सम्मान' राष्ट्रीय कार्ययोजना 2026 का अनावरणपेज 5
- 4. नीति आयोग द्वारा राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था संवर्धन योजना (NCEPS) नीति दस्तावेज जारीपेज 6
- 5. युवा कौशल नवाचार योजना (YKNY) का पायलट चरण आकांक्षी जिलों में शुरूपेज 7
- 6. ग्रामीण समग्र संपर्क अभियान (GSSA) कार्यान्वयन ढांचा अनावरणपेज 8
- 7. सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने 'मानसिक स्वास्थ्य सहायता अभियान' का शुभारंभ कियापेज 9
- 8. 'द गिग एंड प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स (सोशल सिक्योरिटी) बिल, 2026' को राष्ट्रपति की मंजूरी; कार्यान्वयन दिशानिर्देश जारीपेज 10
- 9. महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध ऑनलाइन नुकसान से निपटने हेतु राष्ट्रीय डिजिटल सुरक्षा ढाँचा 2026 का शुभारंभपेज 11
- 10. पीएमएवाई-यू ने जलवायु-लचीले और स्मार्ट किफायती आवास के लिए 'हरित गृह अभियान' की शुरुआत कीपेज 12
- 11. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन: डेरिवेटिव्स और इलेक्ट्रोलाइज़र घटकों के लिए नई पीएलआई दिशानिर्देशों की घोषणापेज 13
- 12. एबीडीएम का 'स्वास्थ्य साथी पोर्टल' नागरिक डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाने के लिए लॉन्च किया गयापेज 14
- 13. भारतीय नौसेना ने 'आईएनएस प्रहरी' को कमीशन किया – पहली स्वदेशी एआई-संचालित समुद्री डोमेन जागरूकता पोतपेज 15
- 14. उन्नत भू-स्थानिक खुफिया (GEOINT) प्रणाली 'ध्रुव' सीमा निगरानी अभियानों में एकीकृतपेज 16
- 15. भारत ने रक्षा बलों के लिए पहली एकीकृत क्वांटम-सुरक्षित संचार नेटवर्क का संचालन कियापेज 17
- 16. आर्कटिक परिषद के सदस्यों ने सतत संसाधन प्रबंधन के लिए 'ध्रुवीय शासन समझौता' पर हस्ताक्षर किएपेज 18
- 17. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 'जलवायु-प्रेरित विस्थापन के लिए वैश्विक समझौता' अपनायापेज 19
- 18. भारत-आसियान ने बढ़ी हुई क्षेत्रीय एकीकरण के लिए 'डिजिटल भारत-आसियान कनेक्ट' समझौते पर हस्ताक्षर किएपेज 20
- 19. भारत और जापान ने पोर्ट ब्लेयर में 'सागरिका' संयुक्त समुद्री सुरक्षा एवं साइबर फ्यूजन केंद्र का उद्घाटन कियापेज 21
- 20. भारत ने उन्नत अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता और मलबे के शमन के लिए 'विजिलेंस' उपग्रह तारामंडल लॉन्च कियापेज 22
- 21. भारत ने 'दक्ष' स्टील्थ यूसीएवी के पहले स्क्वाड्रन को शामिल किया, हवाई युद्ध क्षमताओं को मजबूत कियापेज 23
- 22. भारत, उज़्बेकिस्तान और जर्मनी ने 'यूरेशियन ग्रीन हाइड्रोजन कॉरिडोर' के लिए त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किएपेज 24
- 23. भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया ने ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समुद्री अभ्यास 'समुद्र रक्षा' का समापन कियापेज 25
- 24. संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक एआई शासन के लिए ऐतिहासिक 'डिजिटल ट्रस्ट फ्रेमवर्क' अपनायापेज 26
- 25. भारत ने सतत गहरे समुद्र में खनन अन्वेषण के लिए नए नियामक ढांचे का अनावरण कियापेज 27
- 26. 'हरित कृषि: एक समग्र दृष्टि' राष्ट्रीय कृषि वानिकी मिशन का शुभारंभपेज 28
- 27. राष्ट्रीय आर्द्रभूमि बहाली एवं प्रबंधन कार्यक्रम (NWRMP) चरण-II समीक्षा जारीपेज 29
- 28. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने चक्रीय अर्थव्यवस्था के लिए अगली पीढ़ी के बायो-कम्पोजिट्स पर अनुसंधान को वित्त पोषित कियापेज 30
- 29. राष्ट्रीय AI फॉर हेल्थ पहल ने सटीक निदान के लिए 'स्वास्थ्यनेत्र' लॉन्च कियापेज 31
- 30. राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत भारत ने स्वदेशी क्वांटम प्रोसेसर प्रोटोटाइप का अनावरण कियापेज 32
- 31. एमएसएमई मंत्रालय ने स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए 'जिला उद्योग संवर्धन योजना' (ZUSY) का शुभारंभ कियापेज 33
- 32. युवाओं के समग्र मानसिक स्वास्थ्य के लिए 'राष्ट्रीय युवा मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम' (RYMSK) का अनावरणपेज 34
- 33. केंद्र सरकार ने 'राष्ट्रीय शहरी जल सुरक्षा एवं हरित अधोसंरचना मिशन' (RSJSAM) का शुभारंभ कियापेज 35
- 34. भारत ने 'सामाजिक एआई नीति 2026' का अनावरण किया: सामाजिक कल्याण और शिक्षा में एआई के लिए नैतिक दिशानिर्देशपेज 36
- 35. 'ग्राम मानस स्वास्थ्य प्रहरी' पहल: ग्रामीण मानसिक स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच बढ़ानापेज 37
- 36. 'पूर्ण आहार - पूर्ण जीवन' अभियान शुरू: खाद्य सुरक्षा और पोषण के लिए एक समग्र दृष्टिकोणपेज 38
- 37. सीमावर्ती क्षेत्रों की बेहतर कनेक्टिविटी और रणनीतिक लॉजिस्टिक्स के लिए भारतमाला लॉजिस्टिक प्रहरी परियोजना (BLPP) को मंजूरीपेज 39
- 38. ग्रामीण तकनीकी कौशल उन्नयन योजना (GTKUY) ग्रामीण-शहरी डिजिटल कौशल अंतर को पाटने के लिएपेज 40
- 39. राष्ट्रीय कृषि उद्यम संवर्धन मिशन (RKUSM) कृषि-उद्यमिता और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए शुरूपेज 41
- 40. राष्ट्रीय अभियान 'सहायता': वृद्धों के साथ दुर्व्यवहार से निपटने हेतु अंतर-पीढ़ीगत एकजुटता को बढ़ावापेज 42
- 41. अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिकों के सामाजिक समावेश हेतु राष्ट्रीय ढाँचा जारीपेज 43
- 42. केंद्र सरकार ने युवा डिजिटल मानसिक स्वास्थ्य हेतु 'मानस सारथी' पहल का शुभारंभ कियापेज 44
- 43. युवाओं को हरित नौकरियों के लिए कुशल बनाने हेतु 'हरित कौशल विकास अभियान' शुरू किया गयापेज 45
- 44. मंत्रिमंडल ने चक्रीय अर्थव्यवस्था के लिए 'राष्ट्रीय चक्र अर्थव्यवस्था मिशन (RCAM) 2026' को मंजूरी दीपेज 46
- 45. केंद्र सरकार ने सार्वभौमिक डिजिटल स्वास्थ्य पहुंच के लिए 'आरोग्य सेतु अभियान' शुरू कियापेज 47
- 46. नीति आयोग ने 'विजन 2047: समावेशी शहरीकरण और स्थायी झुग्गी पुनर्विकास रिपोर्ट' जारी कीपेज 48
- 47. 'प्रोजेक्ट सक्षम' का शुभारंभ: दिव्यांग व्यक्तियों (PwDs) के डिजिटल समावेशन के लिए राष्ट्रीय ढाँचापेज 49
- 48. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा नीति 2026' को मंजूरी दीपेज 50
- 49. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रणनीतिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए उन्नत सामग्री के लिए राष्ट्रीय मिशन (एनएमएएम) को मंजूरी दीपेज 51
- 50. पीएम-विश्वकर्मा योजना का विस्तार, नए कारीगर शिल्पों का समावेश और डिजिटल बाजार पहुंच को बढ़ावापेज 52
- 51. केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शहरी लचीला अवसंरचना मिशन (नुरिम) के चरण II का शुभारंभ कियापेज 53
- 52. भारत और क्वाड भागीदारों ने 'सागर प्रहरी' संयुक्त समुद्री निगरानी पहल का शुभारंभ कियापेज 54
- 53. भारत ने राष्ट्रीय क्वांटम-प्रतिरोधी साइबर रक्षा केंद्र (NQCDC) का उद्घाटन कियापेज 55
- 54. 'दिव्य अस्त्र' स्वायत्त झुंड ड्रोन प्रणाली का उन्नत परीक्षण सफलपेज 56
- 55. संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन ने साइबर युद्ध मानदंडों और राज्य उत्तरदायित्व के लिए नए अंतर्राष्ट्रीय ढांचे को अपनायापेज 57
- 56. G20 शिखर सम्मेलन 'ग्लोबल ग्रीन इन्वेस्टमेंट फ्रेमवर्क' (GGIF) पर ऐतिहासिक समझौते के साथ समाप्तपेज 58
- 57. नई भारत-प्रशांत रणनीतिक सहयोग पहल (IPSIC) उभरती क्षेत्रीय गतिशीलता के बीच शुरूपेज 59
- 58. 'ध्रुव Mk-I': भारतीय निजी फर्म एस्ट्रस्पेस ने मध्यम-लिफ्ट कक्षीय वाहन का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण कियापेज 60
- 59. सीएसआईआर-सीईसीआरआई ने ईवी के लिए ऑल-सॉलिड-स्टेट बैटरी टेक्नोलॉजी में बड़ी सफलता हासिल कीपेज 61
- 60. भारत का नया एआई मॉडल 'वर्षा' क्षेत्रीय जलवायु पूर्वानुमान में लाएगा क्रांतिपेज 62
- 61. राजस्थान की मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना (एम.सी.एच.बी.एस.बी.वाई.) और जन आधार एकीकरण: सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और डिजिटल सशक्तिकरण के लिए एक मॉडलपेज 63
- 62. पोषण अभियान 2.0: राष्ट्रीय मूल्यांकन रिपोर्ट प्रगति पर प्रकाश डालती है, डिजिटल डेटा एकीकरण और सामुदायिक सहभागिता का आह्वान करती हैपेज 64
- 63. प्रधानमंत्री आवास सम्पन्न योजना (पीएमएएसवाई) चरण II का शुभारंभ: 'सभी के लिए आवास' की गति को बनाए रखनापेज 65
- 64. साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025 की घोषणा: प्रोफेसर अरुणोदय शर्मा को हिंदी उपन्यास 'मिट्टी का उत्सव' के लिए सम्मानित किया गयापेज 66
- 65. राजस्थान की सुश्री रिया सिंह ने विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स में विश्व रिकॉर्ड बनायापेज 67
- 66. डॉ. आनंद वर्धन यूपीएससी के नए अध्यक्ष नियुक्तपेज 68
- 67. भारत के एस-400 ट्रिम्फ वायु रक्षा प्रणालियों के पूर्ण संचालन के सामरिक निहितार्थपेज 69
- 68. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार: भारत का राजनयिक प्रयास और समान प्रतिनिधित्व के लिए जी4 की नई रणनीतिपेज 70
- 69. भारत-फ्रांस रणनीतिक संवाद संपन्न: रक्षा औद्योगिक सहयोग और हिंद-प्रशांत अभिसरण को गहरा करनापेज 71
- 70. पुरानी और जीवनशैली संबंधी बीमारियों को कवर करने के लिए 'मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना' का विस्तारपेज 72
- 71. राजस्थान ने विरासत जल संरचनाओं के संरक्षण हेतु 'पारंपरिक जल धारा पुनरुत्थान अभियान' का शुभारंभ कियापेज 73
- 72. राजस्थान ने दुर्लभ मृदा तत्वों (आरईई) के अन्वेषण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए नई नीति का अनावरण कियापेज 74
- 73. परियोजना ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) 2.0 लॉन्च: राजस्थान और गुजरात में संरक्षण को मजबूत करनापेज 75
- 74. हिमालयी ग्लेशियरों का पिघलना तेज हुआ: भारत की जल सुरक्षा के लिए गंभीर निहितार्थपेज 76
- 75. पर्यावरण मंत्रालय ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन परियोजनाओं के लिए विशेष ईआईए ढाँचे का अनावरण कियापेज 77
- 76. भारत का डेंगू के लिए पहला स्वदेशी mRNA टीका महत्वपूर्ण चरण III नैदानिक परीक्षणों में प्रवेश कियापेज 78
- 77. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को मजबूत करने के लिए 'छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) पर राष्ट्रीय नीति 2026' को मंजूरी दीपेज 79
- 78. इसरो ने गगनयान मिशन के क्रू मॉड्यूल एकीकरण और पर्यावरणीय नियंत्रण एवं जीवन रक्षक प्रणाली (ECLSS) परीक्षण में महत्वपूर्ण मील के पत्थर हासिल किएपेज 80
- 79. ग्रामीण अर्थव्यवस्था का पुनरुद्धार: एमएसपी की प्रभावशीलता, कृषि-प्रसंस्करण को बढ़ावा और राजस्थान की विकास पहलेंपेज 81
- 80. RBI की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट उभरते व्यापक-वित्तीय जोखिमों के बीच बैंकिंग क्षेत्र के लचीलेपन पर प्रकाश डालती हैपेज 82
- 81. उच्च-स्तरीय समिति ने न्यायिक नियुक्ति MoP में व्यापक सुधारों के लिए अंतरिम सिफारिशें प्रस्तुत कींपेज 83
- 82. संसद ने व्यापक राजनीतिक वित्तपोषण पारदर्शिता विधेयक 2026 पारित किया, प्रकटीकरण मानदंडों में वृद्धिपेज 84
- 83. पूंजीगत व्यय, एफडीआई/एफपीआई और पीएम गति शक्ति की सहक्रिया भारत के आर्थिक विकास पथ को आगे बढ़ा रही हैपेज 85
- 84. उच्चतम न्यायालय ने राज्यपाल के विवेकाधीन शक्तियों के दायरे को पुनः परिभाषित किया, संवैधानिक नैतिकता पर जोरपेज 86
- 85. राष्ट्रीय प्रवासी श्रमिक रजिस्ट्री (NMWR) की प्रगति और चुनौतियाँ: सामाजिक सुरक्षा लाभों की सुवाह्यता सुनिश्चित करनापेज 87
- 86. शहरी तनाव सूचकांक: जलवायु प्रवासन से भारत के शहरों पर बढ़ता दबावपेज 88
- 87. डिजिटल कमजोरियां: तकनीक-सुविधाजनित बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार में वृद्धि और नीतिगत प्रतिक्रियाएंपेज 89
- 88. भारतनेट चरण III का मूल्यांकन: डिजिटल विभाजन को पाटना और लगातार चुनौतियाँपेज 90
- 89. डॉ. विक्रम सिंह: भारत के राष्ट्रीय जल सुरक्षा एवं प्रबंधन आयोग के वास्तुकारपेज 91
- 90. राजदूत लीना पेट्रोव: डिजिटल अधिकार और एआई शासन के लिए संयुक्त राष्ट्र विशेष प्रतिवेदकपेज 92
- 91. डॉ. आन्या शर्मा: जलवायु-लचीली कृषि नवाचारों का नेतृत्वपेज 93
- 92. भारतीय खेल कूटनीति को मिला प्रोत्साहन: दिग्गज भारतीय कोच को मिला उद्घाटन 'ग्लोबल स्पोर्ट्समैनशिप अवार्ड'पेज 94
- 93. ‘समग्र खेल विकास परियोजना’: भारत ने महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय खेल विकास योजना 2.0 का अनावरण कियापेज 95
- 94. राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत का रिकॉर्ड प्रदर्शन: भविष्य की ओलंपिक आकांक्षाओं के लिए एक उत्प्रेरकपेज 96
- 95. पश्चिमी घाट खतरे में: जलवायु परिवर्तन और आवास विखंडन से बढ़ रहा जूनोटिक रोग का जोखिम – रिपोर्टपेज 97
- 96. भारत में शहरी लचीलापन: हरित अवसंरचना और जल सुरक्षा के लिए 'हरित नगर परियोजना' का शुभारंभपेज 98
- 97. भारत की 'समुद्र हरित' पहल: समुद्री संरक्षित क्षेत्रों और ब्लू कार्बन पारिस्थितिक तंत्रों का विस्तारपेज 99
- 98. भारतीय शोधकर्ताओं ने हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए सॉलिड ऑक्साइड इलेक्ट्रोलाइसिस में रिकॉर्ड दक्षता हासिल कीपेज 100
- 99. भारत ने सटीक ऑन्कोलॉजी के लिए राष्ट्रीय एकीकृत जीनोमिक्स और एआई प्लेटफॉर्म (NIGAP) लॉन्च कियापेज 101
- 100. 'विज्ञान दृष्टि' का अनावरण: बाह्य-ग्रहों के चित्रण हेतु भारत की अगली पीढ़ी की अंतरिक्ष दूरबीनपेज 102
विक्रम ई-मित्र समसामयिकी संकलन
विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकासामाजिक मुद्दे
1. बाल संरक्षण और पुनर्वास प्रणालियों को सुदृढ़ करने हेतु 'बाल जीवन धारा' अभियान का शुभारंभ
चर्चा में क्यों? (Why in News)
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने आज राष्ट्रव्यापी 'बाल जीवन धारा' अभियान का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य बाल संरक्षण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना, बाल श्रम का मुकाबला करना और भारत भर में कमजोर बच्चों के प्रभावी पुनर्वास तथा सामाजिक पुनर्एकीकरण को सुनिश्चित करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**एकीकृत बाल संरक्षण सेवाएँ:** बाल संरक्षण सेवाएँ (CPS) योजनाओं का विस्तार और सुदृढ़ीकरण, जिसमें बाल देखभाल संस्थानों (CCIs), फोस्टर केयर और गोद लेने के लिए बढ़ा हुआ समर्थन शामिल है।
- •**'शिक्षा और सुरक्षा' मॉड्यूल:** अभियान के भीतर एक विशेष मॉड्यूल का परिचय, जिसका उद्देश्य बचाए गए बाल श्रमिकों को सीधे औपचारिक शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण मार्गों से जोड़ना है, जिससे उनकी शैक्षिक निरंतरता सुनिश्चित हो सके।
- •**बाल ट्रैकिंग और निगरानी प्रणाली 2.0:** देखभाल और सुरक्षा की आवश्यकता वाले बच्चों की वास्तविक समय की ट्रैकिंग के लिए एक उन्नत डिजिटल प्लेटफॉर्म का कार्यान्वयन, बचाव और पुनर्वास के लिए अंतर-राज्य समन्वय को सुगम बनाना।
- •**सामुदायिक जागरूकता और रोकथाम:** बाल अधिकारों, बाल श्रम की बुराइयों और शोषण की रिपोर्टिंग के महत्व के बारे में समुदायों को संवेदनशील बनाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान, स्थानीय स्वशासन निकायों का लाभ उठाते हुए।
- •**पुनर्स्थापनात्मक न्याय और मनोसामाजिक समर्थन:** दुर्व्यवहार, शोषण और तस्करी के बाल पीड़ितों के लिए मनोसामाजिक परामर्श, कानूनी सहायता और पुनर्स्थापनात्मक न्याय तंत्र प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करना।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'बाल जीवन धारा' अभियान महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है।
- प्रमुख घटकों में 'शिक्षा और सुरक्षा' मॉड्यूल और बाल ट्रैकिंग और निगरानी प्रणाली 2.0 शामिल हैं।
- अभियान का उद्देश्य बाल संरक्षण को मजबूत करना, बाल श्रम का मुकाबला करना और पुनर्वास सुनिश्चित करना है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **बाल अधिकारों के लिए समग्र ढाँचा:** यह अभियान बाल अधिकारों की रक्षा के लिए भारत की प्रतिबद्धता (UNCRC और भारतीय संविधान के अनुसार) को दर्शाता है, एक व्यापक ढाँचा प्रदान करता है जो संरक्षण, शिक्षा और पुनर्वास को संबोधित करता है, दंडात्मक उपायों से हटकर बाल-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाता है।
- **बेहतर परिणामों के लिए अभिसरण और प्रौद्योगिकी:** विभिन्न बाल संरक्षण योजनाओं को एकीकृत करके, उन्नत डिजिटल ट्रैकिंग प्रणालियों का लाभ उठाकर और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देकर, 'बाल जीवन धारा' बेहतर समन्वय, पारदर्शिता और समय पर हस्तक्षेप सुनिश्चित करता है, जिससे कमजोर बच्चों के लिए परिणामों में उल्लेखनीय सुधार होता है।
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2. नीति आयोग ने महिला कार्यबल भागीदारी को बढ़ावा देने हेतु 'लैंगिक समानता और आर्थिक समावेशन ढाँचा 2026' जारी किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
नीति आयोग ने आज अपने बहुप्रतीक्षित 'लैंगिक समानता और आर्थिक समावेशन ढाँचा 2026' को जारी किया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की श्रम बल भागीदारी, उद्यमिता और नेतृत्व भूमिकाओं को बढ़ाने के लिए रणनीतिक हस्तक्षेपों की रूपरेखा तैयार की गई है। यह ढाँचा सतत विकास लक्ष्य 5 को प्राप्त करने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण पर जोर देता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**महिलाओं के रोजगार हेतु क्षेत्र-विशिष्ट लक्ष्य:** STEM क्षेत्रों, विनिर्माण और उभरती डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए सकारात्मक कार्रवाई और कौशल विकास पहलों का प्रस्ताव करता है।
- •**'महिला आर्थिक सशक्तिकरण कोष' (MESK):** महिला उद्यमियों के लिए संपार्श्विक-मुक्त ऋण, इन्क्यूबेशन सहायता और बाजार संबंध प्रदान करने हेतु नीति आयोग द्वारा प्रस्तावित एक नया समर्पित कोष।
- •**लैंगिक-संवेदनशील बजटिंग दिशानिर्देश:** सभी मंत्रालयों और राज्य सरकारों को अपने वार्षिक बजट में लिंग-विशिष्ट आवंटन और प्रभाव आकलन को एकीकृत करने का आदेश देता है, जिससे समान संसाधन वितरण को बढ़ावा मिले।
- •**लचीली कार्य व्यवस्था और बाल देखभाल अवसंरचना:** महिलाओं की करियर प्रगति का समर्थन करने के लिए लचीले काम के घंटे, दूरस्थ कार्य विकल्पों और किफायती, गुणवत्तापूर्ण बाल देखभाल सुविधाओं के विस्तार को बढ़ावा देने वाली नीतियों की सिफारिश करता है।
- •**नेतृत्व विकास और परामर्श कार्यक्रम:** सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में नेतृत्व पदों के लिए महिलाओं की पहचान करने और उन्हें तैयार करने के लिए पहल, साथ ही परामर्श नेटवर्क।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'लैंगिक समानता और आर्थिक समावेशन ढाँचा 2026' नीति आयोग द्वारा जारी किया गया है।
- 'महिला आर्थिक सशक्तिकरण कोष' (MESK) महिला उद्यमियों के लिए एक प्रस्तावित समर्पित कोष है।
- यह ढाँचा STEM क्षेत्रों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने पर जोर देता है और लैंगिक-संवेदनशील बजटिंग को बढ़ावा देता है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **आर्थिक विकास और सतत विकास लक्ष्य प्राप्ति के लिए उत्प्रेरक:** महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ाना भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को प्राप्त करने, सकल घरेलू उत्पाद को बढ़ावा देने और सतत विकास लक्ष्य 5 (लैंगिक समानता) तथा अन्य संबंधित सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में प्रगति में तेजी लाने के लिए महत्वपूर्ण है।
- **समावेशी विकास के लिए प्रणालीगत सुधार:** कौशल विकास और वित्तीय पहुँच से लेकर बाल देखभाल सहायता और लैंगिक-संवेदनशील बजटिंग तक—ढाँचे का प्रणालीगत परिवर्तनों पर जोर, गहरी जड़ें जमा चुके प्रणालीगत बाधाओं को संबोधित करता है, जिससे अधिक समावेशी और टिकाऊ आर्थिक विकास सुनिश्चित होता है।
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3. समग्र वृद्धजन देखभाल और सम्मान हेतु 'वरिष्ठ सम्मान' राष्ट्रीय कार्ययोजना 2026 का अनावरण
चर्चा में क्यों? (Why in News)
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने आज 'वरिष्ठ सम्मान' राष्ट्रीय कार्ययोजना 2026 का शुभारंभ किया, जो भारत की बढ़ती वृद्धजन आबादी के कल्याण, गरिमा और सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु एक व्यापक ढाँचा है। यह योजना वरिष्ठ नागरिकों के सामने आने वाली बहुआयामी चुनौतियों का समाधान करती है, जिसमें एकीकृत सेवाओं और अंतर-क्षेत्रीय समन्वय पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**एकीकृत जराचिकित्सा देखभाल सेवाएँ:** जिला अस्पतालों में विशेष जराचिकित्सा इकाइयों की स्थापना और डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना का लाभ उठाते हुए गृह-आधारित देखभाल मॉडल को बढ़ावा देना।
- •**डिजिटल शिकायत निवारण और जागरूकता मंच:** 'एल्डर कनेक्ट' का शुभारंभ, जो शिकायत निवारण, सरकारी योजनाओं तक पहुँच और वृद्धजनों के दुर्व्यवहार के विरुद्ध जागरूकता अभियानों के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल पोर्टल है।
- •**सक्रिय और स्वस्थ वृद्धावस्था को बढ़ावा:** वरिष्ठ नागरिकों को सशक्त बनाने और अंतर-पीढ़ीगत संबंधों को बढ़ावा देने के लिए कौशल विकास, आजीवन सीखने के अवसर और सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रमों हेतु पहल।
- •**देखभाल करने वालों हेतु क्षमता निर्माण:** औपचारिक और अनौपचारिक देखभाल करने वालों के लिए प्रशिक्षण और प्रमाणन कार्यक्रम, साथ ही गृह-आधारित देखभाल का विकल्प चुनने वाले परिवारों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन।
- •**वित्तीय सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण:** पेंशन योजनाओं, स्वास्थ्य बीमा और रिवर्स मॉर्गेज विकल्पों के लिए बढ़ी हुई पहुँच, जिससे वृद्धजनों के लिए आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित हो सके।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'वरिष्ठ सम्मान' राष्ट्रीय कार्ययोजना 2026 का शुभारंभ सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा किया गया है।
- प्रमुख पहलों में 'एल्डर कनेक्ट' डिजिटल पोर्टल और विशेष जराचिकित्सा इकाइयाँ शामिल हैं।
- यह योजना वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकीकृत जराचिकित्सा देखभाल, सक्रिय वृद्धावस्था और वित्तीय सुरक्षा पर बल देती है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **जनसांख्यिकीय संक्रमण की चुनौतियों का समाधान:** यह योजना भारत की बढ़ती वृद्धजन आबादी के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों को प्रबंधित करने, कल्याण से परे सशक्तिकरण और सक्रिय भागीदारी की ओर बढ़ने तथा एक मजबूत 'सिल्वर इकोनॉमी' में योगदान करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- **वृद्धजनों के कल्याण हेतु बहुआयामी दृष्टिकोण:** स्वास्थ्य, वित्तीय सुरक्षा, डिजिटल साक्षरता और सामाजिक समावेश को एकीकृत करके, यह योजना वृद्धजन देखभाल की जटिल चुनौतियों के लिए एक समग्र प्रतिक्रिया प्रदान करती है, निर्भरता को कम करती है और जीवन की गुणवत्ता बढ़ाती है।
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4. नीति आयोग द्वारा राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था संवर्धन योजना (NCEPS) नीति दस्तावेज जारी
चर्चा में क्यों? (Why in News)
नीति आयोग ने आज 'राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था संवर्धन योजना' (NCEPS) के लिए व्यापक नीति दस्तावेज जारी किया, जिसमें भारत को एक चक्रीय अर्थव्यवस्था मॉडल की ओर ले जाने के लिए एक बहुआयामी रणनीति की रूपरेखा दी गई है। यह दस्तावेज राज्य सरकारों, उद्योगों और शहरी स्थानीय निकायों के लिए संसाधन दक्षता, अपशिष्ट प्रबंधन और टिकाऊ उत्पादन-उपभोग पैटर्न पर विस्तृत दिशानिर्देश प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**'कम करें, पुनः उपयोग करें, पुनर्चक्रित करें, मरम्मत करें' (4R) सिद्धांत:** सभी क्षेत्रों में मौलिक 4R सिद्धांतों पर जोर देता है, उत्पाद की दीर्घायु, सामग्री दक्षता और पुनर्जनन को बढ़ावा देता है।
- •**क्षेत्र-विशिष्ट रोडमैप:** प्रमुख क्षेत्रों (जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव, वस्त्र, निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट, प्लास्टिक) की पहचान करता है और चक्रीयता के लिए अनुकूलित रोडमैप और लक्ष्य प्रदान करता है।
- •**विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) विस्तार:** अधिक उत्पाद श्रेणियों को कवर करने और कुशल संग्रह और पुनर्चक्रण तंत्र सुनिश्चित करने के लिए EPR ढाँचों को मजबूत और विस्तारित करने का प्रस्ताव करता है।
- •**नवाचार और प्रौद्योगिकी को अपनाना:** चक्रीय प्रौद्योगिकियों, सामग्री विज्ञान और अपशिष्ट ट्रैकिंग और संसाधन विनिमय के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देता है, तकनीकी अपनाने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करता है।
- •**अनौपचारिक क्षेत्र का औपचारिकरण:** अनौपचारिक अपशिष्ट बीनने वालों और पुनर्चक्रणकर्ताओं को क्षमता निर्माण, उचित मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा लाभों तक पहुंच के माध्यम से औपचारिक मूल्य श्रृंखला में एकीकृत करता है, चक्रीय अर्थव्यवस्था में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानता है।
- •**हरित सार्वजनिक खरीद:** केंद्र और राज्य स्तरों पर हरित सार्वजनिक खरीद नीतियों को अनिवार्य करता है, चक्रीय अर्थव्यवस्था सिद्धांतों के साथ उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं को प्राथमिकता देता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था संवर्धन योजना (NCEPS) नीति दस्तावेज नीति आयोग द्वारा जारी किया गया।
- यह 'कम करें, पुनः उपयोग करें, पुनर्चक्रित करें, मरम्मत करें' (4R) सिद्धांतों पर जोर देता है।
- NCEPS का उद्देश्य विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) ढांचे का विस्तार करना है।
- यह योजना अनौपचारिक अपशिष्ट बीनने वालों के औपचारिकरण को बढ़ावा देती है।
- हरित सार्वजनिक खरीद NCEPS का एक प्रमुख घटक है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **पर्यावरण स्थिरता और संसाधन सुरक्षा:** चर्चा करें कि NCEPS के माध्यम से चक्रीय अर्थव्यवस्था में परिवर्तन अपशिष्ट उत्पादन, संसाधन क्षरण और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों का कैसे समाधान कर सकता है। भारत की संसाधन सुरक्षा बढ़ाने और प्राथमिक सामग्रियों पर निर्भरता कम करने में इसकी भूमिका का विश्लेषण करें।
- **आर्थिक अवसर और सामाजिक समावेशन:** NCEPS द्वारा प्रस्तुत आर्थिक अवसरों का मूल्यांकन करें, जिसमें पुनर्चक्रण, पुनः विनिर्माण और मरम्मत क्षेत्रों में रोजगार सृजन शामिल है। अनौपचारिक अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र को औपचारिक बनाकर और उसका उत्थान करके, कमजोर समुदायों के लिए बेहतर आजीविका और काम करने की स्थिति सुनिश्चित करके सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देने की इसकी क्षमता का परीक्षण करें।
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5. युवा कौशल नवाचार योजना (YKNY) का पायलट चरण आकांक्षी जिलों में शुरू
चर्चा में क्यों? (Why in News)
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने आज 50 आकांक्षी जिलों में 'युवा कौशल नवाचार योजना' (YKNY) के पायलट चरण का आधिकारिक शुभारंभ किया। इस योजना का उद्देश्य भारत के युवाओं को अत्याधुनिक तकनीकों में भविष्य के लिए तैयार कौशल से लैस करना और नवाचार तथा उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा देना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों पर ध्यान:** YKNY विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML), रोबोटिक्स, डेटा साइंस, ब्लॉकचेन, क्वांटम कंप्यूटिंग और उन्नत विनिर्माण जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों में कौशल, पुनः कौशल और उच्च कौशल पर लक्षित है।
- •**उद्यमिता और नवाचार केंद्र:** चयनित ITI और पॉलिटेक्निक में 'युवा नवाचार केंद्रों' की स्थापना, जो होनहार युवा-नेतृत्व वाले स्टार्टअप के लिए इनक्यूबेशन सहायता, मेंटरशिप और सीड फंडिंग प्रदान करेंगे।
- •**उद्योग-अकादमिक सहयोग:** मांग-संचालित पाठ्यक्रम विकसित करने, व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने और उद्योग-प्रासंगिक प्रमाणपत्र सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी पर विशेष जोर।
- •**हरित कौशल एकीकरण:** योजना के भीतर एक समर्पित मॉड्यूल हरित कौशल पर केंद्रित है, जो युवाओं को नवीकरणीय ऊर्जा, टिकाऊ कृषि, अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण-अनुकूल विनिर्माण में नौकरियों के लिए तैयार करता है।
- •**डिजिटल क्रेडेंशियलिंग और वैश्विक गतिशीलता:** प्राप्त कौशल के लिए ब्लॉकचेन-आधारित डिजिटल क्रेडेंशियल का उपयोग करता है, पारदर्शिता बढ़ाता है और भारतीय कुशल युवाओं के लिए वैश्विक मान्यता की सुविधा प्रदान करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- युवा कौशल नवाचार योजना (YKNY) कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) द्वारा शुरू की गई है।
- यह AI, रोबोटिक्स और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में कौशल विकास पर केंद्रित है।
- पायलट चरण 50 आकांक्षी जिलों में शुरू किया गया है।
- 'युवा नवाचार केंद्र' इनक्यूबेशन सहायता प्रदान करेंगे।
- यह योजना हरित कौशल को एकीकृत करती है और डिजिटल क्रेडेंशियल के लिए ब्लॉकचेन का उपयोग करती है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **भविष्य की कार्यबल तत्परता और आर्थिक प्रतिस्पर्धा:** विश्लेषण करें कि YKNY कैसे उद्योग 4.0 की बढ़ती मांगों को पूरा करता है, भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश में योगदान देता है और एक कुशल, अनुकूलनीय और अभिनव कार्यबल बनाकर अपनी वैश्विक आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाता है।
- **क्षेत्रीय विकास और कौशल अंतर कम करना:** आकांक्षी जिलों में YKNY के शुभारंभ के महत्व का मूल्यांकन करें। चर्चा करें कि यह लक्षित दृष्टिकोण क्षेत्रीय कौशल असमानताओं को कैसे कम कर सकता है, स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को प्रोत्साहित कर सकता है और स्थानीय स्तर पर उन्नत कौशल के अवसर प्रदान करके कम विकसित क्षेत्रों से प्रतिभा पलायन को रोक सकता है।
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6. ग्रामीण समग्र संपर्क अभियान (GSSA) कार्यान्वयन ढांचा अनावरण
चर्चा में क्यों? (Why in News)
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने आज 'ग्रामीण समग्र संपर्क अभियान' (GSSA) के लिए व्यापक कार्यान्वयन ढांचा जारी किया, जो ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में एकीकृत भौतिक और डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाने के उद्देश्य से एक प्रमुख योजना है। यह ढांचा वित्त पोषण तंत्र, प्रौद्योगिकी एकीकरण और सामुदायिक भागीदारी रणनीतियों का विवरण देता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**एकीकृत दृष्टिकोण:** GSSA भौतिक अवसंरचना विकास (हर मौसम में सड़कें, अंतिम-मील रसद) को डिजिटल कनेक्टिविटी (ब्रॉडबैंड पैठ, सामान्य सेवा केंद्र) के साथ जोड़ते हुए एक समग्र रणनीति अपनाता है।
- •**बहु-हितधारक मॉडल:** कुशल निष्पादन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों, स्थानीय स्वशासन निकायों (पंचायती राज संस्थाओं), निजी क्षेत्र और नागरिक समाज संगठनों के बीच सहयोग पर जोर देता है।
- •**कम सेवा वाले क्षेत्रों पर ध्यान:** नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम द्वारा पहचाने गए क्षेत्रों और महत्वपूर्ण अवसंरचना अंतराल वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता देता है।
- •**स्थिरता और जलवायु लचीलापन:** भौतिक अवसंरचना के लिए हरित प्रौद्योगिकियों और जलवायु-लचीली निर्माण प्रथाओं के उपयोग को अनिवार्य करता है, और ऊर्जा-कुशल डिजिटल समाधानों को बढ़ावा देता है।
- •**डिजिटल साक्षरता और कौशल विकास:** इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ग्राम स्तर पर डिजिटल अवसंरचना के प्रबंधन में डिजिटल साक्षरता प्रशिक्षण और कौशल विकास के घटकों को शामिल करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- ग्रामीण समग्र संपर्क अभियान (GSSA) ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक योजना है।
- इसका उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में एकीकृत भौतिक और डिजिटल कनेक्टिविटी है।
- पंचायती राज संस्थाएं (PRIs) इसके कार्यान्वयन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- यह योजना हरित प्रौद्योगिकियों और जलवायु-लचीली अवसंरचना को बढ़ावा देती है।
- नीति आयोग के आकांक्षी जिले GSSA के लिए एक प्राथमिकता वाले क्षेत्र हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **ग्रामीण-शहरी विभाजन का शमन:** चर्चा करें कि कैसे GSSA भौतिक अवसंरचना और डिजिटल सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करके मौजूदा ग्रामीण-शहरी विभाजन को प्रभावी ढंग से पाट सकता है, जिससे समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा और प्रवासन के दबाव को कम किया जा सकेगा।
- **आर्थिक सशक्तिकरण और शासन:** उन्नत बाजार पहुंच, बेहतर ई-शासन सेवाओं और डिजिटल उद्यमिता के लिए बढ़ते अवसरों के माध्यम से ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने में GSSA की क्षमता का विश्लेषण करें। डिजिटल उपकरणों और संसाधनों के साथ पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को सक्षम करके विकेन्द्रीकृत शासन को मजबूत करने में इसकी भूमिका का मूल्यांकन करें।
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7. सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने 'मानसिक स्वास्थ्य सहायता अभियान' का शुभारंभ किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
जमीनी स्तर पर सुलभ मानसिक स्वास्थ्य देखभाल की महत्वपूर्ण आवश्यकता को संबोधित करते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने आज आधिकारिक तौर पर 'मानसिक स्वास्थ्य सहायता अभियान' का शुभारंभ किया। इस राष्ट्रीय पहल का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों में गहराई से एकीकृत करना, देखभाल का विकेंद्रीकरण करना और मानसिक बीमारी से जुड़े व्यापक कलंक का मुकाबला करना है। यह शुभारंभ आधुनिक जीवन शैली और विशेष देखभाल तक सीमित पहुँच, विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में, द्वारा बढ़ी हुई मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों के बारे में बढ़ती चिंताओं के बीच हुआ है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के साथ एकीकरण:** आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) के कर्मचारियों को सामान्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान करने और बुनियादी परामर्श प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित और सुसज्जित करना।
- •**विस्तारित टेली-मानस सेवाएँ:** व्यापक पहुँच सुनिश्चित करने और दूरस्थ मनोवैज्ञानिक सहायता और परामर्श प्रदान करने के लिए टेली-मानस डिजिटल मानसिक स्वास्थ्य मंच का महत्वपूर्ण विस्तार, जिसमें विशेष हस्तक्षेप भी शामिल हैं।
- •**सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य केंद्र:** ब्लॉक स्तर पर नए सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना, जिसे घर के करीब निदान सेवाएं, दवा प्रबंधन और मनोसामाजिक सहायता प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- •**स्कूल मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम:** किशोरों में मानसिक कल्याण को संबोधित करने और मुद्दों की शीघ्र पहचान के लिए स्कूलों में एक मानकीकृत मानसिक स्वास्थ्य पाठ्यक्रम और परामर्श सेवाओं की शुरुआत।
- •**कलंक न्यूनीकरण अभियान:** मानसिक बीमारी के बारे में गलत धारणाओं को चुनौती देने और मदद मांगने के व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न मीडिया का उपयोग करके व्यापक जन जागरूकता अभियान।
- •**मानव संसाधन विकास:** उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रमों और प्रोत्साहन के माध्यम से मनोचिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों और मनोरोग नर्सों सहित मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की संख्या बढ़ाने की पहल।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'मानसिक स्वास्थ्य सहायता अभियान' का शुभारंभ केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा किया गया।
- प्रमुख घटकों में PHC के साथ एकीकरण, टेली-मानस का विस्तार, सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य केंद्र और स्कूल कार्यक्रम शामिल हैं।
- मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के विकेंद्रीकरण और कलंक को कम करने का लक्ष्य है।
- मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 भारत में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **मानव संसाधन की कमी को दूर करना:** एक बड़ी चुनौती प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की तीव्र कमी है, जिसे अभियान अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ता प्रशिक्षण और व्यावसायिक विकास के माध्यम से कम करना चाहता है।
- **कलंक और भेदभाव से लड़ना:** अभियान की सफलता मानसिक बीमारी के आसपास के गहरे सामाजिक कलंक को प्रभावी ढंग से कम करने पर निर्भर करती है, जो अक्सर मदद और उपचार प्राप्त करने में बाधा के रूप में कार्य करता है।
- **निधि और अवसंरचना:** पर्याप्त और निरंतर वित्त पोषण, साथ ही ब्लॉक और जिला स्तरों पर आवश्यक अवसंरचना का विकास, अभियान की दीर्घकालिक व्यवहार्यता और प्रभाव के लिए महत्वपूर्ण होगा।
- **सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभाव:** प्राथमिक देखभाल में मानसिक स्वास्थ्य को एकीकृत करके, अभियान से समग्र सार्वजनिक स्वास्थ्य परिदृश्य में काफी सुधार होने, मानसिक विकारों के बोझ को कम करने और लाखों लोगों के जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने की उम्मीद है।
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8. 'द गिग एंड प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स (सोशल सिक्योरिटी) बिल, 2026' को राष्ट्रपति की मंजूरी; कार्यान्वयन दिशानिर्देश जारी
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारत में काम के भविष्य के लिए एक ऐतिहासिक विकास में, 'गिग एंड प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स (सोशल सिक्योरिटी) बिल, 2026' को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है, जो आधिकारिक तौर पर एक अधिनियम बन गया है। इसके बाद, श्रम और रोजगार मंत्रालय ने तुरंत विस्तृत कार्यान्वयन दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिससे लाखों गिग और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा लाभों तक पहुँचने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह विधायी मील का पत्थर वर्षों की वकालत और नीतिगत विचार-विमर्श का परिणाम है, जो बढ़ते डिजिटल अर्थव्यवस्था में प्रचलित अद्वितीय रोजगार मॉडल को पहचानता है और इस क्षेत्र में श्रमिकों की भेद्यता को संबोधित करता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**सार्वभौमिक पंजीकरण और पहचान:** लाभों तक पहुँच के लिए अद्वितीय पहचान संख्या उत्पन्न करते हुए, एक केंद्रीकृत राष्ट्रीय पोर्टल पर सभी गिग और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों का अनिवार्य पंजीकरण।
- •**सामाजिक सुरक्षा कोष:** एक समर्पित 'गिग और प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स सामाजिक सुरक्षा कोष' की स्थापना जिसमें श्रमिकों, प्लेटफार्मों और सरकार द्वारा योगदान दिया जाएगा।
- •**स्तरीय लाभ संरचना:** योगदान और सेवा के वर्षों के आधार पर स्तरीय तरीके से दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य और मातृत्व लाभ, वृद्धावस्था सुरक्षा और कौशल विकास सहित कई लाभों का प्रावधान।
- •**शिकायत निवारण तंत्र:** श्रमिकों और प्लेटफार्मों के बीच विवादों के त्वरित समाधान के लिए एक विशेष न्यायाधिकरण या शिकायत निवारण बोर्ड की स्थापना।
- •**प्लेटफ़ॉर्म जवाबदेही:** प्लेटफार्मों को अपने लेनदेन मूल्य का एक निश्चित प्रतिशत सामाजिक सुरक्षा कोष में योगदान करने का आदेश देता है, जिससे साझा जिम्मेदारी सुनिश्चित होती है।
- •**लाभों की सुवाह्यता:** श्रमिकों द्वारा अर्जित लाभ विभिन्न प्लेटफार्मों और रोजगार व्यवस्थाओं में सुवाह्य होंगे, जिससे सामाजिक सुरक्षा की निरंतरता सुनिश्चित होगी।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- गिग एंड प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स (सोशल सिक्योरिटी) अधिनियम, 2026 को आज राष्ट्रपति की मंजूरी मिली।
- कार्यान्वयन के लिए नोडल मंत्रालय: श्रम और रोजगार मंत्रालय।
- प्रमुख प्रावधान: सार्वभौमिक पंजीकरण, समर्पित सामाजिक सुरक्षा कोष, स्तरीय लाभ, शिकायत निवारण, प्लेटफ़ॉर्म योगदान।
- अधिनियम के अनुसार 'गिग वर्कर' और 'प्लेटफ़ॉर्म वर्कर' की परिभाषा।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **अनौपचारिक क्षेत्र का औपचारिककरण:** यह अधिनियम अनौपचारिक अर्थव्यवस्था के एक महत्वपूर्ण हिस्से को औपचारिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो तेजी से बढ़ते कार्यबल वर्ग को अत्यधिक आवश्यक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करता है।
- **प्लेटफार्मों पर आर्थिक प्रभाव:** श्रमिकों के लिए फायदेमंद होने के बावजूद, नए योगदान आदेश प्लेटफार्मों के लिए परिचालन लागत बढ़ा सकते हैं, जिससे उनके व्यावसायिक मॉडल और मूल्य निर्धारण रणनीतियों पर संभावित रूप से प्रभाव पड़ सकता है।
- **कार्यान्वयन में चुनौतियाँ:** विविध प्लेटफार्मों और भौगोलिक क्षेत्रों में सार्वभौमिक पंजीकरण, निर्बाध योगदान संग्रह और प्रभावी शिकायत निवारण सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण चुनौतियाँ होंगी।
- **कार्य और कल्याण का भविष्य:** यह कानून इस बात के लिए एक मिसाल कायम करता है कि सरकारें कार्य की बदलती प्रकृति के लिए सामाजिक सुरक्षा ढाँचे को कैसे अनुकूलित कर सकती हैं, डिजिटल युग में आर्थिक नवाचार और श्रमिक कल्याण को संतुलित कर सकती हैं।
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9. महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध ऑनलाइन नुकसान से निपटने हेतु राष्ट्रीय डिजिटल सुरक्षा ढाँचा 2026 का शुभारंभ
चर्चा में क्यों? (Why in News)
ऑनलाइन सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के तहत, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से आज 'राष्ट्रीय डिजिटल सुरक्षा ढाँचा (NDSF) 2026' का अनावरण किया। इस व्यापक ढाँचे का उद्देश्य साइबरबुलिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, डीपफेक और बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) की बढ़ती चुनौतियों का समाधान करके महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष रूप से एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण बनाना है। यह शुभारंभ नागरिक समाज संगठनों, तकनीकी कंपनियों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ कई परामर्शों के बाद हुआ है, जो उभरते डिजिटल खतरों के प्रति सरकार के सक्रिय दृष्टिकोण को उजागर करता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**बहु-हितधारक दृष्टिकोण:** NDSF 2026 सरकारी एजेंसियों, कानून प्रवर्तन, सोशल मीडिया मध्यस्थों, शैक्षणिक संस्थानों और माता-पिता को शामिल करते हुए सहयोगात्मक प्रयासों पर जोर देता है।
- •**प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान:** डिजिटल फॉरेंसिक को बढ़ावा देने के साथ-साथ हानिकारक सामग्री का सक्रिय रूप से पता लगाने और हटाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) का लाभ उठाने पर ध्यान केंद्रित।
- •**त्वरित प्रतिक्रिया और शिकायत निवारण:** शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए 24/7 राष्ट्रीय डिजिटल सुरक्षा हेल्पलाइन की स्थापना और प्लेटफार्मों के भीतर उन्नत शिकायत निवारण तंत्र।
- •**डिजिटल साक्षरता और जागरूकता अभियान:** सुरक्षित ऑनलाइन प्रथाओं, गोपनीयता सेटिंग्स और रिपोर्टिंग तंत्रों पर नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को शिक्षित करने के लिए अखिल भारतीय कार्यक्रम।
- •**अंतर्राष्ट्रीय सहयोग:** सीमा-पार डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए वैश्विक संगठनों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ साझेदारी को मजबूत करना।
- •**कानूनी और नीतिगत सुधार:** मौजूदा कानूनों और नीतियों की समीक्षा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे समकालीन डिजिटल खतरों का समाधान करने के लिए पर्याप्त मजबूत हैं, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम में संभावित संशोधनों के साथ।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- NDSF 2026 के लिए नोडल मंत्रालय: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MWCD) और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)।
- प्रमुख पहलू संबोधित: साइबरबुलिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, डीपफेक, बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM)।
- प्रासंगिक मौजूदा कानून: सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000; लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012; भारतीय दंड संहिता (IPC)।
- तंत्र: राष्ट्रीय डिजिटल सुरक्षा हेल्पलाइन (24/7) और AI/ML आधारित सामग्री मॉडरेशन।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **डिजिटल विभाजन का समाधान:** जबकि NDSF 2026 महत्वपूर्ण है, इसकी प्रभावशीलता मौजूदा डिजिटल विभाजन को पाटने पर निर्भर करेगी, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, ताकि जागरूकता और रिपोर्टिंग तंत्र तक पहुँच सुनिश्चित हो सके।
- **निजता और निगरानी का संतुलन:** ढाँचे को हानिकारक सामग्री के लिए मजबूत निगरानी और व्यक्तिगत निजता के अधिकारों की सुरक्षा के बीच नाजुक संतुलन बनाना चाहिए, डेटा के संभावित दुरुपयोग को रोकना चाहिए।
- **मध्यस्थों की जवाबदेही:** ढाँचा सोशल मीडिया प्लेटफार्मों की जवाबदेही को मजबूत करता है, लेकिन अनुपालन लागू करने और सामग्री मॉडरेशन और उपयोगकर्ता सुरक्षा में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने में चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
- **सामाजिक प्रभाव:** NDSF 2026 में अधिक जिम्मेदार डिजिटल नागरिकता को बढ़ावा देने की क्षमता है, जो उपयोगकर्ताओं को ऑनलाइन स्थानों को सुरक्षित रूप से नेविगेट करने के लिए ज्ञान और उपकरणों के साथ सशक्त बनाता है, जिससे डिजिटल नुकसान की मनोवैज्ञानिक और सामाजिक लागत कम होती है।
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10. पीएमएवाई-यू ने जलवायु-लचीले और स्मार्ट किफायती आवास के लिए 'हरित गृह अभियान' की शुरुआत की
चर्चा में क्यों? (Why in News)
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (एमओएचयूए) ने आज प्रमुख प्रधानमंत्री आवास योजना - शहरी (पीएमएवाई-यू) के तहत एक नए उप-घटक, 'हरित गृह अभियान' (ग्रीन होम्स अभियान) के शुभारंभ की घोषणा की। इस पहल का उद्देश्य शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन की दोहरी चुनौतियों का सामना करते हुए किफायती आवास परियोजनाओं में जलवायु लचीलापन और स्मार्ट जीवन सुविधाओं को एकीकृत करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**ग्रीन बिल्डिंग मानक:** प्रमाणित ग्रीन बिल्डिंग मानदंडों को अपनाने, टिकाऊ और स्थानीय स्तर पर प्राप्त सामग्री के उपयोग और निर्माण में निहित ऊर्जा को कम करने को अनिवार्य करता है।
- •**ऊर्जा दक्षता:** निष्क्रिय शीतलन तकनीकों, ऊर्जा-कुशल उपकरणों, सौर ऊर्जा एकीकरण और ऊर्जा खपत को कम करने के लिए स्मार्ट मीटरिंग को शामिल करने वाले डिजाइनों को बढ़ावा देता है।
- •**आपदा लचीलापन:** संरचनात्मक डिजाइनों पर ध्यान केंद्रित करता है जो बाढ़, भूकंप और अत्यधिक मौसम की घटनाओं जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति प्रतिरोध को बढ़ाते हैं, जिससे दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
- •**स्मार्ट होम एकीकरण:** किफायती आवास इकाइयों में संसाधन प्रबंधन (पानी, बिजली), अपशिष्ट पृथक्करण और बढ़ी हुई सुरक्षा सुविधाओं के लिए IoT-सक्षम उपकरणों को शामिल करने को प्रोत्साहित करता है।
- •**क्षमता निर्माण और जागरूकता:** ग्रीन बिल्डिंग प्रथाओं और स्मार्ट प्रौद्योगिकी परिनियोजन में शहरी स्थानीय निकायों, वास्तुकारों और निर्माण श्रमिकों के प्रशिक्षण के लिए प्रावधान शामिल हैं।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- प्रधानमंत्री आवास योजना - शहरी (पीएमएवाई-यू) 2015 में शुरू की गई थी।
- एमओएचयूए पीएमएवाई-यू के लिए नोडल मंत्रालय है।
- पीएमएवाई-यू चार कार्यक्षेत्रों के माध्यम से संचालित होता है: इन-सीटू स्लम पुनर्विकास, क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना (सीएलएसएस), साझेदारी में किफायती आवास, और लाभार्थी के नेतृत्व वाला निर्माण।
- पीएमएवाई-यू के '2022 तक सभी के लिए आवास' लक्ष्य को बढ़ाया गया है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **टिकाऊ शहरी विकास:** यह पहल जलवायु-लचीले शहरों के निर्माण की दिशा में एक प्रगतिशील कदम है, जो भारत की बढ़ती शहरी आबादी और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के प्रति इसकी प्रतिबद्धता, विशेष रूप से एसडीजी 11 (टिकाऊ शहर और समुदाय) के लिए महत्वपूर्ण है।
- **सार्वजनिक-निजी भागीदारी और नवाचार:** 'हरित गृह अभियान' के सफल कार्यान्वयन के लिए मजबूत सार्वजनिक-निजी भागीदारी, नवीन निर्माण प्रौद्योगिकियों को अपनाने और जलवायु-लचीले और स्मार्ट किफायती आवास की व्यापक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सुलभ वित्तपोषण तंत्र की आवश्यकता होगी।
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11. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन: डेरिवेटिव्स और इलेक्ट्रोलाइज़र घटकों के लिए नई पीएलआई दिशानिर्देशों की घोषणा
चर्चा में क्यों? (Why in News)
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने आज हरित हाइड्रोजन संक्रमण (साइट) कार्यक्रम के लिए रणनीतिक हस्तक्षेपों के तहत उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं की दूसरी किश्त के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए। ये दिशानिर्देश विशेष रूप से हरित हाइड्रोजन डेरिवेटिव्स (जैसे हरित अमोनिया, हरित मेथनॉल) और इलेक्ट्रोलाइज़र के लिए प्रमुख घटकों के निर्माण को लक्षित करते हैं, जिसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और आयात निर्भरता को कम करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**लक्षित प्रोत्साहन:** पीएलआई योजना हरित हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइज़र के लिए आवश्यक प्रमुख घटकों के स्वदेशी विनिर्माण और हरित अमोनिया और हरित मेथनॉल जैसे डाउनस्ट्रीम डेरिवेटिव्स के उत्पादन के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है।
- •**विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा:** एक मजबूत घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र बनाने, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और हरित हाइड्रोजन प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य है।
- •**निर्यात क्षमता:** लागत-प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाकर, यह योजना भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहती है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा में योगदान मिलेगा।
- •**चरणबद्ध कार्यान्वयन:** प्रोत्साहन एक अवधि में वितरित किए जाएंगे, जो निर्माताओं द्वारा विशिष्ट उत्पादन और स्थानीयकरण लक्ष्यों की उपलब्धि से जुड़े होंगे।
- •**हरित अर्थव्यवस्था योगदान:** कम कार्बन वाली अर्थव्यवस्था में संक्रमण को गति देकर भारत के जलवायु लक्ष्यों और 'पंचामृत' प्रतिबद्धताओं में सीधे योगदान देता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (एनजीएचएम) जनवरी 2023 में शुरू किया गया था।
- साइट कार्यक्रम (हरित हाइड्रोजन संक्रमण के लिए रणनीतिक हस्तक्षेप) एनजीएचएम का एक प्रमुख घटक है।
- एमएनआरई एनजीएचएम के लिए नोडल मंत्रालय है।
- भारत का लक्ष्य 2030 तक सालाना 5 मिलियन टन हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करना है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **ऊर्जा सुरक्षा और डीकार्बोनाइजेशन:** यह योजना भारत की जीवाश्म ईंधन आयात पर निर्भरता को कम करने और उर्वरक, रिफाइनिंग और स्टील जैसे कठिन-से-कम करने वाले क्षेत्रों को डीकार्बोनाइज करने के लिए महत्वपूर्ण है, जो जलवायु परिवर्तन शमन लक्ष्यों के साथ संरेखित है।
- **आर्थिक विकास और भू-राजनीतिक स्थिति:** एक घरेलू हरित हाइड्रोजन उद्योग को बढ़ावा देने से रोजगार सृजित होंगे, निवेश आकर्षित होंगे, और वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में भारत की रणनीतिक स्थिति बढ़ेगी, जिससे संभावित रूप से नए निर्यात बाजार खुलेंगे।
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12. एबीडीएम का 'स्वास्थ्य साथी पोर्टल' नागरिक डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाने के लिए लॉन्च किया गया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने आज आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के तहत 'स्वास्थ्य साथी पोर्टल' का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ किया। इस नए पोर्टल को नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला तक पहुँचने के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्रवेश द्वार के रूप में परिकल्पित किया गया है, जो भारत में अधिक एकीकृत और सुलभ डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**एकीकृत पहुँच:** नागरिकों को अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड प्रबंधित करने, नियुक्तियाँ बुक करने, टेली-परामर्श तक पहुँचने और डिजिटल नुस्खे प्राप्त करने के लिए एक एकल इंटरफ़ेस प्रदान करता है।
- •**एबीएचए एकीकरण:** आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खातों (एबीएचए) के साथ सहजता से एकीकृत होता है, जिससे उपयोगकर्ता विभिन्न स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं से अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को लिंक और देख सकते हैं।
- •**सुरक्षित डेटा प्रबंधन:** मजबूत डेटा गोपनीयता और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर जोर देता है, संवेदनशील स्वास्थ्य जानकारी के लिए सहमति-आधारित पहुँच और एन्क्रिप्शन सुनिश्चित करता है।
- •**अखिल भारतीय पहुँच:** डिजिटल समावेशन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा पहुँच अंतर को पाटते हुए, दूरस्थ और कम सेवा वाले क्षेत्रों तक डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने का लक्ष्य है।
- •**ई-संजीवनी जुड़ाव:** राष्ट्रीय टेली-परामर्श मंच ई-संजीवनी के साथ सीधा जुड़ाव, घर से वर्चुअल डॉक्टर परामर्श की सुविधा प्रदान करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) 2021 में शुरू किया गया था (पहले एनडीएचएम)।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) एबीडीएम के लिए कार्यान्वयन एजेंसी है।
- एबीएचए आईडी नागरिकों के लिए एक 14-अंकीय अद्वितीय स्वास्थ्य पहचान संख्या है।
- ई-संजीवनी भारत की राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को मजबूत करना:** पोर्टल का नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच को काफी बढ़ा सकता है, जेब से होने वाले खर्च को कम कर सकता है और स्वास्थ्य जानकारी को आसानी से उपलब्ध कराकर निवारक स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा दे सकता है।
- **चुनौतियाँ और अवसर:** जबकि पोर्टल में अपार क्षमता है, डिजिटल साक्षरता, निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बीच डेटा इंटरऑपरेबिलिटी और स्वास्थ्य डेटा के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने से संबंधित चुनौतियाँ महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। अवसर भविष्य कहनेवाला विश्लेषण और व्यक्तिगत स्वास्थ्य सिफारिशों के लिए एआई का लाभ उठाने में निहित हैं।
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13. भारतीय नौसेना ने 'आईएनएस प्रहरी' को कमीशन किया – पहली स्वदेशी एआई-संचालित समुद्री डोमेन जागरूकता पोत
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारतीय नौसेना ने आज नौसेना डॉकयार्ड, विशाखापत्तनम में देश का पहला स्वदेशी रूप से विकसित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)-संचालित स्वायत्त समुद्री डोमेन जागरूकता पोत 'आईएनएस प्रहरी' को कमीशन किया। यह अत्याधुनिक पोत भारत की नौसैनिक क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण छलांग का प्रतिनिधित्व करता है, विशेष रूप से विशाल हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में निगरानी और टोही को बढ़ाने में।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •आईएनएस प्रहरी एक मानवरहित सतह पोत (USV) है जिसे विस्तारित सहनशक्ति और स्टील्थ के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो मानव हस्तक्षेप के बिना हफ्तों या महीनों तक स्वायत्त संचालन में सक्षम है, जिससे परिचालन लागत और जोखिम काफी कम हो जाते हैं।
- •यह उन्नत रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड (EO/IR) कैमरे, सोनार और इलेक्ट्रॉनिक खुफिया (ELINT) प्रणालियों सहित सेंसर की एक परिष्कृत सरणी से लैस है, जो सभी एक शक्तिशाली ऑनबोर्ड एआई प्रोसेसिंग यूनिट के साथ एकीकृत हैं।
- •एआई प्रणाली वास्तविक समय के डेटा विश्लेषण, जहाजों का स्वचालित पता लगाने और वर्गीकरण, विसंगति की पहचान और भविष्य कहनेवाला ट्रैकिंग को सक्षम बनाती है, नौसेना कमांड केंद्रों को अद्वितीय समुद्री स्थितिजन्य जागरूकता प्रदान करती है।
- •गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) द्वारा DRDO और भारतीय AI स्टार्टअप्स के सहयोग से विकसित, आईएनएस प्रहरी 'मेक इन इंडिया' पहल का प्रतीक है और नौसेना प्रौद्योगिकी में एक क्षेत्रीय सुरक्षा प्रदाता और नवप्रवर्तक के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करता है।
- •इसके मिशनों में खुफिया, निगरानी, टोही (ISR), समुद्री डकैती विरोधी अभियान, संचार की समुद्री लेन (SLOCs) की निगरानी, और मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) प्रयासों के लिए संभावित समर्थन शामिल होगा।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- आईएनएस प्रहरी भारत का पहला स्वदेशी एआई-संचालित स्वायत्त समुद्री डोमेन जागरूकता पोत (मानवरहित सतह पोत - USV) है।
- इसे नौसेना डॉकयार्ड, विशाखापत्तनम में कमीशन किया गया था।
- गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) द्वारा DRDO और भारतीय AI स्टार्टअप्स के सहयोग से विकसित।
- प्रमुख क्षमताओं में लंबी सहनशक्ति वाले स्वायत्त संचालन, बहु-सेंसर एकीकरण और एआई-संचालित डेटा विश्लेषण शामिल हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में रणनीतिक महत्व:** आईएनएस प्रहरी का कमीशन वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण IOR में भारत की रणनीतिक उपस्थिति और निगरानी क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करता है। एक स्वायत्त, एआई-संचालित मंच के रूप में, यह विशाल समुद्री क्षेत्रों की लगातार और लागत प्रभावी निगरानी को सक्षम बनाता है, जो उप-सतह गतिविधियों और अवैध समुद्री यातायात सहित पारंपरिक और गैर-पारंपरिक खतरों का मुकाबला करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- **तकनीकी उन्नति और 'ब्लू वाटर' महत्वाकांक्षाएं:** आईएनएस प्रहरी एआई और स्वायत्त प्रणालियों जैसे अत्याधुनिक डोमेन में भारत की स्वदेशी तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित करता है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' रक्षा उद्देश्यों के साथ संरेखित है। नौसेना बेड़े में इसका एकीकरण पारंपरिक तरीकों से कहीं आगे निगरानी पहुंच और डेटा प्रोसेसिंग क्षमताओं का विस्तार करके भारत की 'ब्लू वाटर' नौसेना महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाता है, जिससे परिचालन गति, निर्णय लेने के चक्र और समग्र नौसैनिक शक्ति प्रक्षेपण में वृद्धि होती है।
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14. उन्नत भू-स्थानिक खुफिया (GEOINT) प्रणाली 'ध्रुव' सीमा निगरानी अभियानों में एकीकृत
चर्चा में क्यों? (Why in News)
गृह मंत्रालय ने आज महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों में 'ध्रुव' नामक एक उन्नत स्वदेशी भू-स्थानिक खुफिया (GEOINT) प्रणाली के पूर्ण एकीकरण और संचालन की घोषणा की। इस रणनीतिक तैनाती का उद्देश्य वास्तविक समय की निगरानी, भविष्य कहनेवाला विश्लेषण और बहु-संवेदक डेटा संलयन के माध्यम से भारत की सीमा प्रबंधन क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •'ध्रुव' उच्च-रिज़ॉल्यूशन उपग्रह इमेजरी, मानव रहित हवाई वाहन (UAV), भू-आधारित सेंसर और पारंपरिक मानव खुफिया सहित विभिन्न स्रोतों से डेटा को एकीकृत करता है, इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) एल्गोरिदम के साथ संसाधित करता है।
- •यह प्रणाली व्यापक स्थितिजन्य जागरूकता प्रदान करती है, असामान्य गतिविधियों की पहचान करती है, गतिविधियों को ट्रैक करती है, और वास्तविक समय में सीमा रक्षक बलों के लिए कार्रवाई योग्य खुफिया रिपोर्ट तैयार करती है।
- •इसका भविष्य कहनेवाला विश्लेषण मॉड्यूल ऐतिहासिक डेटा, इलाके के विश्लेषण और पर्यावरणीय कारकों के आधार पर संभावित घुसपैठ मार्गों या हॉटस्पॉट का पूर्वानुमान लगा सकता है, जिससे बलों की सक्रिय तैनाती सक्षम होती है।
- •भारतीय निजी तकनीकी फर्मों के योगदान के साथ ISRO और DRDO द्वारा संयुक्त रूप से विकसित, 'ध्रुव' स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर दर्शाता है और 'स्मार्ट सीमा प्रबंधन' पहल को मजबूत करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'ध्रुव' एक स्वदेशी भू-स्थानिक खुफिया (GEOINT) प्रणाली है।
- यह AI/ML द्वारा संसाधित उपग्रहों, UAV और भू-सेंसर से डेटा को एकीकृत करता है।
- ISRO और DRDO द्वारा निजी क्षेत्र के सहयोग से संयुक्त रूप से विकसित।
- प्राथमिक उद्देश्य वास्तविक समय की सीमा निगरानी और सक्रिय सुरक्षा के लिए भविष्य कहनेवाला विश्लेषण है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **सीमा सुरक्षा और परिचालन दक्षता बढ़ाना:** 'ध्रुव' सीमा प्रबंधन में लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों का समाधान करता है, जैसे कि दुर्गम इलाका, सीमा पार घुसपैठ और विविध खतरे की धारणाएं। वास्तविक समय, डेटा-संचालित खुफिया जानकारी प्रदान करके, यह मानव जोखिम को कम करता है, संसाधन आवंटन को अनुकूलित करता है, और सुरक्षा उल्लंघनों के लिए त्वरित प्रतिक्रिया को सक्षम बनाता है, जिससे सीमा रक्षक बलों की परिचालन दक्षता और प्रभावशीलता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
- **तकनीकी संप्रभुता और रणनीतिक खुफिया:** 'ध्रुव' का स्वदेशी विकास रणनीतिक खुफिया क्षमताओं में भारत की बढ़ती तकनीकी संप्रभुता को दर्शाता है। यह अद्वितीय भौगोलिक और सुरक्षा चुनौतियों के लिए अनुकूलित समाधानों की अनुमति देता है, जबकि विदेशी खुफिया प्रणालियों पर निर्भरता को कम करता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा निर्णय लेने और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण भारत के समग्र रणनीतिक खुफिया जानकारी एकत्र करने और विश्लेषण को मजबूत करता है।
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15. भारत ने रक्षा बलों के लिए पहली एकीकृत क्वांटम-सुरक्षित संचार नेटवर्क का संचालन किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए एक रणनीतिक कदम में, भारत ने रक्षा बलों के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए अपने पहले राष्ट्रव्यापी एकीकृत क्वांटम-सुरक्षित संचार नेटवर्क का सफलतापूर्वक संचालन किया है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि सुरक्षित सैन्य संचार में एक महत्वपूर्ण छलांग को चिह्नित करती है, जो उन्नत कम्प्यूटेशनल प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न होने वाले उभरते खतरों के खिलाफ एन्क्रिप्शन की एक अभेद्य परत प्रदान करती है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •यह नेटवर्क क्वांटम कुंजी वितरण (QKD) तकनीक का उपयोग क्रिप्टोग्राफिक कुंजियों को उत्पन्न और वितरित करने के लिए करता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि किसी भी छिपकर सुनने के प्रयास से क्वांटम स्थिति तुरंत बदल जाती है, जिससे संबंधित पक्षों को सतर्क किया जाता है।
- •प्रमुख अकादमिक संस्थानों और निजी क्षेत्र की संस्थाओं के सहयोग से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा मुख्य रूप से विकसित, यह परियोजना महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों में 'आत्मनिर्भर भारत' के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
- •प्रारंभिक चरण प्रमुख परिचालन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कमांड केंद्रों और रणनीतिक संपत्तियों को जोड़ता है, एक व्यापक क्वांटम-सुरक्षित रीढ़ की हड्डी के लिए आधार तैयार करता है।
- •यह शास्त्रीय और भविष्य के क्वांटम कंप्यूटर-आधारित हमलों के खिलाफ अभूतपूर्व स्तर की प्रतिरक्षा प्रदान करता है, जिससे अत्यधिक संवेदनशील सैन्य डेटा, खुफिया जानकारी साझाकरण और परिचालन निर्देशों की सुरक्षा होती है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- सुरक्षित संचार के लिए प्राथमिक तकनीक क्वांटम कुंजी वितरण (QKD) है।
- यह परियोजना 'राष्ट्रीय क्वांटम मिशन' के तहत एक प्रमुख पहल है और DRDO की तकनीकी प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
- नेटवर्क का संचालन रक्षा के लिए उन्नत क्वांटम संचार क्षमताओं वाले चुनिंदा देशों में भारत को स्थापित करता है।
- इसका उद्देश्य भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों से होने वाले क्रिप्टानिलिटिक हमलों से बचाव करना है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **रणनीतिक स्वायत्तता और साइबर लचीलापन:** क्वांटम-सुरक्षित नेटवर्क का संचालन महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता को कम करता है और राज्य-प्रायोजित हमलों और साइबर जासूसी के खिलाफ साइबर लचीलापन बढ़ाता है। यह भारत को अगली पीढ़ी के सुरक्षित संचार में एक नेता के रूप में स्थापित करता है।
- **युद्ध का भविष्य और रक्षा तैयारी:** यह विकास सूचना युद्ध के भविष्य को गहराई से प्रभावित करता है, पारंपरिक एन्क्रिप्शन विधियों को क्वांटम कंप्यूटिंग के प्रति संवेदनशील बनाता है। QKD को अपनाकर, भारत अपनी सबसे संवेदनशील संचार को भविष्य के लिए सुरक्षित करता है, एक विकसित खतरे के परिदृश्य में कमांड और नियंत्रण की अखंडता सुनिश्चित करता है और एक रणनीतिक सूचना लाभ बनाए रखता है।
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16. आर्कटिक परिषद के सदस्यों ने सतत संसाधन प्रबंधन के लिए 'ध्रुवीय शासन समझौता' पर हस्ताक्षर किए
चर्चा में क्यों? (Why in News)
एक महत्वपूर्ण राजनयिक सफलता में, आर्कटिक परिषद के आठ सदस्य देशों ने, भारत सहित प्रमुख पर्यवेक्षक राष्ट्रों के साथ, आज रेक्जाविक में 'ध्रुवीय शासन समझौता' (PGA) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता तेजी से बदलते आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक हित के बीच सतत संसाधन निष्कर्षण, पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक सहयोग के लिए नए तंत्र स्थापित करता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •कड़े पर्यावरणीय प्रभाव आकलन के साथ आर्कटिक प्राकृतिक संसाधनों (तेल, गैस, खनिज, मत्स्य पालन) के जिम्मेदार और सतत अन्वेषण और शोषण के लिए एक कानूनी रूप से बाध्यकारी ढांचा।
- •संरक्षण परियोजनाओं, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और प्रदूषण नियंत्रण पहलों का समर्थन करने के लिए एक 'आर्कटिक पर्यावरण संरक्षण कोष' की स्थापना।
- •जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और समुद्र विज्ञान पर संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रमों के माध्यम से वैज्ञानिक सहयोग में वृद्धि, डेटा साझाकरण तंत्र पर्यवेक्षक राज्यों के लिए खुले हैं।
- •सभी संसाधन प्रबंधन और विकास गतिविधियों में स्वदेशी आर्कटिक लोगों के अधिकारों और पारंपरिक आजीविका की मान्यता और संरक्षण।
- •आर्कटिक में नौवहन अधिकारों और क्षेत्रीय दावों के लिए शांतिपूर्ण विवाद समाधान तंत्र और अंतर्राष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से UNCLOS, के पालन के प्रावधान।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'ध्रुवीय शासन समझौता' (PGA) पर आठ आर्कटिक परिषद के सदस्यों और भारत सहित प्रमुख पर्यवेक्षक राज्यों द्वारा हस्ताक्षर किए गए।
- यह समझौता रेक्जाविक में हस्ताक्षरित किया गया था और एक 'आर्कटिक पर्यावरण संरक्षण कोष' स्थापित करता है।
- UNCLOS (समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन) को नौवहन अधिकारों के लिए समझौते में स्पष्ट रूप से संदर्भित किया गया है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- PGA आर्कटिक में जटिल भू-राजनीतिक गतिशीलता को संबोधित करता है, जहां पिघलती बर्फ नए शिपिंग मार्गों और विशाल प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच खोलती है, संघर्ष को रोकने और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक सहकारी शासन ढांचे की आवश्यकता होती है।
- भारत के लिए, एक पर्यवेक्षक राज्य के रूप में, समझौते में इसकी भागीदारी आर्कटिक के संसाधनों, वैज्ञानिक अनुसंधान और संभावित शिपिंग लेन में बढ़ती रणनीतिक रुचि को दर्शाती है, जिससे वैश्विक शासन और संसाधन सुरक्षा में इसकी भूमिका बढ़ती है।
- सतत संसाधन प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण पर समझौते का जोर एक नाजुक ध्रुवीय वातावरण में बढ़ती आर्थिक गतिविधि से जुड़े पारिस्थितिक जोखिमों को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है, जो वैश्विक जलवायु कार्रवाई लक्ष्यों के अनुरूप है।
- स्वदेशी अधिकारों को मान्यता देकर और UNCLOS जैसे अंतर्राष्ट्रीय कानून का पालन करके, PGA का लक्ष्य आर्थिक विकास को सामाजिक इक्विटी और कानूनी निश्चितता के साथ संतुलित करना है, जो जटिल अंतर्राष्ट्रीय शासन चुनौतियों के लिए एक मॉडल पेश करता है।
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17. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 'जलवायु-प्रेरित विस्थापन के लिए वैश्विक समझौता' अपनाया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
जलवायु-प्रेरित विस्थापन के बढ़ते वैश्विक संकट को संबोधित करते हुए, संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने आज सर्वसम्मति से 'जलवायु-प्रेरित विस्थापन के लिए वैश्विक समझौता' (GCCID) को अपनाया। यह ऐतिहासिक दस्तावेज राज्यों के लिए जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न होने वाली मानवीय गतिशीलता चुनौतियों को रोकने, तैयारी करने और प्रतिक्रिया देने के लिए एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय ढांचा प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •जलवायु परिवर्तन को जबरन विस्थापन के एक महत्वपूर्ण चालक के रूप में मान्यता, जो मौजूदा शरणार्थी और प्रवासन ढांचों से अलग फिर भी जुड़ा हुआ है।
- •संयुक्त राष्ट्र के तहत एक 'जलवायु विस्थापन प्रतिक्रिया कोष' की स्थापना, जिसका उद्देश्य अनुकूलन और पुनर्स्थापन प्रयासों के लिए प्रभावित राष्ट्रों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करना है।
- •जलवायु-प्रेरित प्रवासियों और विस्थापित आबादी के प्रबंधन के लिए मेजबान समुदायों के लिए बेहतर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, बोझ-साझाकरण और क्षमता निर्माण का आह्वान।
- •भविष्य के विस्थापन परिदृश्यों का अनुमान लगाने और उन्हें कम करने के लिए डेटा संग्रह, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और जोखिम आकलन पर जोर।
- •नियोजित पुनर्स्थापन, एकीकरण रणनीतियों को बढ़ावा देना और अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं को पार करने वाले व्यक्तियों सहित जलवायु-विस्थापित व्यक्तियों के लिए मानवाधिकार संरक्षण सुनिश्चित करना।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'जलवायु-प्रेरित विस्थापन के लिए वैश्विक समझौता' (GCCID) संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाया गया था।
- यह समझौता संयुक्त राष्ट्र के तहत एक 'जलवायु विस्थापन प्रतिक्रिया कोष' स्थापित करता है।
- GCCID का उद्देश्य विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न मानवीय गतिशीलता चुनौतियों का समाधान करना है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- GCCID अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून और पर्यावरणीय शासन में एक महत्वपूर्ण विकास का प्रतिनिधित्व करता है, जो जलवायु परिवर्तन को जबरन प्रवासन के प्रत्यक्ष कारण के रूप में स्वीकार करता है और पारंपरिक शरणार्थी ढांचों से परे एक सामूहिक वैश्विक प्रतिक्रिया की मांग करता है।
- यह 'समान लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों' के सिद्धांत को बढ़ावा देता है, विकसित राष्ट्रों से कमजोर देशों को जलवायु-प्रेरित विस्थापन का प्रबंधन करने में मदद करने के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता का आह्वान करता है, जो जलवायु न्याय के अनिवार्यताओं को दर्शाता है।
- समझौते का नियोजित पुनर्स्थापन और एकीकरण पर ध्यान केंद्रित करना अराजक बड़े पैमाने पर आंदोलनों को रोकने के लिए आवश्यक सक्रिय दृष्टिकोण को उजागर करता है, प्रभावित आबादी के लिए गरिमा और मानवाधिकारों को सुनिश्चित करते हुए लचीले समुदायों का निर्माण करता है।
- कार्यान्वयन चुनौतियों में 'जलवायु विस्थापन प्रतिक्रिया कोष' के लिए पर्याप्त धन सुरक्षित करना, संप्रभुता संबंधी विचारों को सुनिश्चित करना और सीमा पार आंदोलनों के प्रबंधन में विविध राज्य और गैर-राज्य अभिनेताओं के बीच प्रभावी समन्वय शामिल है।
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18. भारत-आसियान ने बढ़ी हुई क्षेत्रीय एकीकरण के लिए 'डिजिटल भारत-आसियान कनेक्ट' समझौते पर हस्ताक्षर किए
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारत और दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) ने आज जकार्ता में विशेष आसियान-भारत डिजिटल भागीदारी शिखर सम्मेलन के दौरान एक ऐतिहासिक 'डिजिटल भारत-आसियान कनेक्ट' समझौते को अंतिम रूप दिया। इस समझौते का उद्देश्य भारत की एक्ट ईस्ट नीति और आसियान के डिजिटल परिवर्तन एजेंडा के अनुरूप क्षेत्र में डिजिटल अवसंरचना, कनेक्टिविटी और कौशल विकास को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •डिजिटल अवसंरचना परियोजनाओं और नवाचार केंद्रों के वित्तपोषण के लिए $500 मिलियन के प्रारंभिक कोष के साथ एक संयुक्त भारत-आसियान डिजिटल परिवर्तन कोष (IDTF) की स्थापना।
- •एक सुरक्षित और लचीले क्षेत्रीय डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) इंटरऑपरेबिलिटी फ्रेमवर्क विकसित करने की प्रतिबद्धता, जो सीमा पार डेटा विनिमय और डिजिटल सेवाओं को सुविधाजनक बनाएगा।
- •अगले पांच वर्षों में एआई, ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा और डेटा एनालिटिक्स में 1 मिलियन व्यक्तियों को प्रशिक्षित करने के लिए 'आसियान-भारत डिजिटल कौशल वृद्धि पहल' का शुभारंभ।
- •डिजिटल सुरक्षा पर एक नए संयुक्त कार्य समूह के माध्यम से साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल, खतरे की खुफिया जानकारी साझा करने और साइबर अपराध से निपटने में बढ़ा हुआ सहयोग।
- •सहयोगात्मक पायलट परियोजनाओं और ज्ञान साझाकरण के माध्यम से डिजिटल व्यापार, ई-गवर्नेंस समाधान और स्मार्ट सिटी विकास को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'डिजिटल भारत-आसियान कनेक्ट' समझौता जकार्ता में आसियान-भारत डिजिटल भागीदारी शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान हस्ताक्षरित किया गया।
- भारत-आसियान डिजिटल परिवर्तन कोष (IDTF) का प्रारंभिक कोष $500 मिलियन है।
- यह समझौता 'आसियान-भारत डिजिटल कौशल वृद्धि पहल' के तहत 1 मिलियन व्यक्तियों को डिजिटल कौशल में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखता है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- यह समझौता भारत की एक्ट ईस्ट नीति के प्रति रणनीतिक प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जो हिंद-प्रशांत में भू-राजनीतिक बदलावों का मुकाबला करने और दक्षिण पूर्व एशियाई भागीदारों के साथ जुड़ाव को गहरा करने के लिए डिजिटल कूटनीति का लाभ उठाता है।
- यह डिजिटल व्यापार और सेवाओं को सुव्यवस्थित करके, क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन बढ़ाकर और भारत तथा आसियान सदस्य देशों दोनों के लिए फायदेमंद एक जीवंत डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देकर आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देता है।
- डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और साइबर सुरक्षा पर जोर 21वीं सदी में सुशासन और नागरिक सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षित और समावेशी डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए एक सक्रिय दृष्टिकोण को दर्शाता है।
- कौशल विकास और ज्ञान साझाकरण पहल डिजिटल डिवाइड को पाटने, युवाओं को सशक्त बनाने और विविध आसियान क्षेत्र में सतत मानव संसाधन विकास सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
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19. भारत और जापान ने पोर्ट ब्लेयर में 'सागरिका' संयुक्त समुद्री सुरक्षा एवं साइबर फ्यूजन केंद्र का उद्घाटन किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत के प्रति अपनी रणनीतिक साझेदारी और प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए, भारत और जापान ने आज अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पोर्ट ब्लेयर में 'सागरिका' संयुक्त समुद्री सुरक्षा एवं साइबर फ्यूजन केंद्र (JMSCC) का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। इस अग्रणी पहल का उद्देश्य महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र में पारंपरिक और उभरते गैर-पारंपरिक खतरों के खिलाफ वास्तविक समय की खुफिया जानकारी साझाकरण, क्षमता निर्माण और समन्वित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •'सागरिका' JMSCC दोनों देशों और संभावित रूप से अन्य समान विचारधारा वाले भागीदारों से समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA) डेटा और साइबर खतरे की खुफिया जानकारी को एकीकृत करने के लिए एक केंद्र के रूप में कार्य करेगा।
- •इसके प्राथमिक उद्देश्यों में समुद्री यातायात की निगरानी करना, अवैध, बिना रिपोर्ट किए गए और अनियंत्रित (IUU) मछली पकड़ने का पता लगाना, समुद्री डकैती का मुकाबला करना और महत्वपूर्ण समुद्री बुनियादी ढांचे को लक्षित करने वाले साइबर खतरों का विश्लेषण करना शामिल है।
- •यह केंद्र भारतीय और जापानी समुद्री बलों के बीच अंतरसंचालनीयता बढ़ाने के लिए संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास, कर्मियों के आदान-प्रदान और सामान्य संचालन प्रक्रियाओं के विकास की सुविधा प्रदान करेगा।
- •पोर्ट ब्लेयर में रणनीतिक रूप से स्थित, यह पूर्वी हिंद महासागर और अंडमान सागर में महत्वपूर्ण समुद्री संचार लाइनों (SLOCs) की निगरानी के लिए एक लाभप्रद दृष्टिकोण प्रदान करता है।
- •यह सहयोग भारत की एक्ट ईस्ट नीति और जापान के स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत (FOIP) दृष्टिकोण को रेखांकित करता है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और एक नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में योगदान देता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- केंद्र का नाम: 'सागरिका' संयुक्त समुद्री सुरक्षा एवं साइबर फ्यूजन केंद्र (JMSCC)।
- सहयोगी राष्ट्र: भारत और जापान।
- स्थान: पोर्ट ब्लेयर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह।
- प्राथमिक कार्य: समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA), साइबर खतरे की खुफिया जानकारी का संलयन, क्षमता निर्माण, समन्वित प्रतिक्रिया।
- रणनीतिक महत्व: हिंद-प्रशांत सुरक्षा, SLOCs की निगरानी।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **हिंद-प्रशांत सुरक्षा वास्तुकला और द्विपक्षीय सहयोग:** विश्लेषण करें कि 'सागरिका' JMSCC की स्थापना भारत-जापान की विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को कैसे मजबूत करती है और हिंद-प्रशांत में एक मजबूत सुरक्षा वास्तुकला में योगदान करती है। चीन के बढ़ते मुखरता का मुकाबला करने और नियम-आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका पर चर्चा करें।
- **21वीं सदी में गैर-पारंपरिक समुद्री खतरों का समाधान:** समुद्री खतरों की बढ़ती प्रकृति की जांच करें, जिसमें समुद्री डकैती, IUU मछली पकड़ना, समुद्री आतंकवाद और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर साइबर हमले शामिल हैं। मूल्यांकन करें कि 'सागरिका' जैसे फ्यूजन केंद्र सामूहिक समुद्री सुरक्षा और लचीलेपन को बढ़ाने के लिए एक एकीकृत और बहु-एजेंसी दृष्टिकोण के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं।
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20. भारत ने उन्नत अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता और मलबे के शमन के लिए 'विजिलेंस' उपग्रह तारामंडल लॉन्च किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
बढ़ते अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक कदम में, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आज पांच समर्पित उपग्रहों से युक्त 'विजिलेंस' तारामंडल का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। यह तारामंडल विशेष रूप से उन्नत अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता (SSA) प्रदान करने और सक्रिय अंतरिक्ष मलबे के शमन प्रयासों का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो भारत की महत्वपूर्ण अंतरिक्ष संपत्तियों की सुरक्षा और वैश्विक अंतरिक्ष सुरक्षा में योगदान के लिए महत्वपूर्ण है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •'विजिलेंस' तारामंडल में पांच छोटे, फुर्तीले उपग्रह शामिल हैं जिन्हें अंतरिक्ष वस्तुओं को ट्रैक करने के लिए व्यापक कवरेज प्रदान करने हेतु विभिन्न निम्न पृथ्वी कक्षाओं (LEO) में तैनात किया गया है।
- •यह सक्रिय उपग्रहों, खर्च किए गए रॉकेट निकायों और कक्षीय मलबे की वास्तविक समय की ट्रैकिंग, पहचान और सूचीकरण के लिए उन्नत ऑप्टिकल और रडार सेंसर का उपयोग करता है।
- •'विजिलेंस' द्वारा एकत्र किए गए डेटा संभावित टकरावों की भविष्यवाणी करने, भारतीय उपग्रहों के लिए युद्धाभ्यास योजना को अनुकूलित करने और भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों को सूचित करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
- •यह पहल जिम्मेदार अंतरिक्ष व्यवहार के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है और एक स्थायी बाहरी अंतरिक्ष पर्यावरण के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में योगदान करती है।
- •तारामंडल के दोहरे उपयोग के निहितार्थ भी हैं, जो भारत के भू-रणनीतिक अंतरिक्ष पड़ोस में गतिविधियों की निगरानी करके राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी प्रदान करते हैं।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- तारामंडल का नाम: 'विजिलेंस'।
- उपग्रहों की संख्या: पांच।
- लॉन्चिंग एजेंसी: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो)।
- प्राथमिक उद्देश्य: उन्नत अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता (SSA) और अंतरिक्ष मलबे का शमन।
- कक्षा का प्रकार: निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO)।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **अंतरिक्ष डोमेन जागरूकता के राष्ट्रीय सुरक्षा निहितार्थ:** अंतरिक्ष के बढ़ते सैन्यीकरण, उपग्रह-रोधी क्षमताओं और अंतरिक्ष संपत्तियों के प्रसार के संदर्भ में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता (SSA) के महत्वपूर्ण महत्व पर चर्चा करें। 'विजिलेंस' तारामंडल अंतरिक्ष में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को कैसे मजबूत करता है?
- **अंतरिक्ष मलबे की चुनौतियां और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग:** परिचालन उपग्रहों और भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए अंतरिक्ष मलबे से उत्पन्न बढ़ते खतरे का विश्लेषण करें। अंतरिक्ष स्थिरता और मलबे के शमन के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों को बढ़ावा देने में 'विजिलेंस' जैसी पहलों के माध्यम से भारत की भूमिका और SSA में बहुपक्षीय सहयोग की क्षमता का मूल्यांकन करें।
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21. भारत ने 'दक्ष' स्टील्थ यूसीएवी के पहले स्क्वाड्रन को शामिल किया, हवाई युद्ध क्षमताओं को मजबूत किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
व्यापक विकासात्मक परीक्षणों और कठोर जांच के बाद, भारतीय वायु सेना (IAF) ने आज स्वदेशी रूप से विकसित 'दक्ष' स्टील्थ मल्टी-रोल अनमैन्ड कॉम्बैट एरियल व्हीकल्स (UCAVs) के पहले स्क्वाड्रन को औपचारिक रूप से शामिल किया। यह 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत भारत के रक्षा स्वदेशीकरण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण छलांग है और हवाई युद्ध सिद्धांतों को फिर से परिभाषित करने के लिए तैयार है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •'दक्ष' यूसीएवी, जिसे डीआरडीओ और निजी क्षेत्र के भागीदारों के नेतृत्व वाले एक संघ द्वारा विकसित किया गया है, को स्टील्थ, सटीक स्ट्राइक, खुफिया, निगरानी और टोही (ISR) मिशनों के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- •इसकी उन्नत कम-अवलोकन योग्य विशेषताएँ, एकीकृत एआई-संचालित मिशन स्वायत्तता और मॉड्यूलर पेलोड बे इसे गहरे पैठ वाले हमलों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (EW) सहित विभिन्न भूमिकाएँ निभाने में सक्षम बनाते हैं।
- •यह शामिल होना अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकी में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाता है, जिससे महत्वपूर्ण मानवरहित हवाई प्रणालियों के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम होती है।
- •यूसीएवी का परिचालन एकीकरण भारतीय वायुसेना को बढ़ी हुई स्टैंड-ऑफ क्षमताएं प्रदान करेगा, जिससे उच्च-खतरे वाले वातावरण में मानवयुक्त विमानों और कर्मियों के लिए जोखिम कम होगा।
- •अगले पांच वर्षों में और स्क्वाड्रनों को शामिल करने की योजना है, साथ ही मित्र देशों के लिए संभावित निर्यात अवसरों की भी खोज की जा रही है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'दक्ष' यूसीएवी: भारत का पहला स्वदेशी स्टील्थ मल्टी-रोल मानवरहित लड़ाकू हवाई वाहन।
- द्वारा विकसित: डीआरडीओ के नेतृत्व वाला संघ (एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट - ADE, निजी क्षेत्र की फर्मों के सहयोग से)।
- प्राथमिक उपयोगकर्ता: भारतीय वायु सेना (IAF)।
- मुख्य क्षमताएं: स्टील्थ, सटीक स्ट्राइक, खुफिया, निगरानी, टोही (ISR), इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (EW), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सक्षम मिशन स्वायत्तता।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **रणनीतिक स्वायत्तता और क्षेत्रीय शक्ति गतिशीलता:** 'दक्ष' यूसीएवी का शामिल होना भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो इसे महत्वपूर्ण हवाई प्लेटफार्मों के लिए बाहरी संस्थाओं पर निर्भर हुए बिना क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में शक्ति प्रक्षेपित करने और प्रतिरोध बनाए रखने में सक्षम बनाता है। हिंद-प्रशांत शक्ति संतुलन के लिए इसके निहितार्थों पर चर्चा करें।
- **युद्ध का भविष्य और रक्षा-औद्योगिक परिसर:** विश्लेषण करें कि 'दक्ष' जैसे यूसीएवी आधुनिक युद्ध में एक प्रतिमान बदलाव का प्रतिनिधित्व कैसे करते हैं, जो नेटवर्क-आधारित संचालन और एआई एकीकरण पर जोर देते हैं। भारत के रक्षा-औद्योगिक परिसर को बढ़ावा देने और तकनीकी आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल की भूमिका का मूल्यांकन करें।
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22. भारत, उज़्बेकिस्तान और जर्मनी ने 'यूरेशियन ग्रीन हाइड्रोजन कॉरिडोर' के लिए त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए
चर्चा में क्यों? (Why in News)
वैश्विक ऊर्जा संक्रमण प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए, आज भारत, उज़्बेकिस्तान और जर्मनी के बीच 'यूरेशियन ग्रीन हाइड्रोजन कॉरिडोर' की स्थापना के लिए एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस महत्वाकांक्षी पहल का उद्देश्य उज़्बेकिस्तान की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और भारत की बढ़ती मांग का लाभ उठाते हुए, जर्मन तकनीकी और वित्तीय सहायता से, ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, परिवहन और उपभोग को सुगम बनाना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •यह कॉरिडोर उज़्बेकिस्तान में सौर और पवन ऊर्जा द्वारा संचालित बड़े पैमाने पर ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन सुविधाओं की स्थापना को शामिल करेगा।
- •भारत ग्रीन हाइड्रोजन और उसके डेरिवेटिव के लिए एक प्राथमिक ऑफ-टेकर होगा, जो उसके औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन और ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण है।
- •जर्मनी इलेक्ट्रोलाइसिस, हाइड्रोजन भंडारण और परिवहन अवसंरचना विकास में महत्वपूर्ण तकनीकी विशेषज्ञता के साथ-साथ वित्तीय सहायता प्रदान करेगा।
- •यह समझौता मध्य एशिया को दक्षिण एशिया और यूरोप से जोड़ने के लिए पाइपलाइन, समर्पित शिपिंग मार्ग और रेल सहित एक बहु-मोडल परिवहन नेटवर्क पर जोर देता है।
- •यह पहल नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण और जीवाश्म ईंधन से दूर ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने के वैश्विक अभियान के अनुरूप है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'यूरेशियन ग्रीन हाइड्रोजन कॉरिडोर' एक त्रिपक्षीय पहल है।
- प्रतिभागी राष्ट्र भारत, उज़्बेकिस्तान और जर्मनी हैं।
- ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, परिवहन और उपभोग पर केंद्रित है।
- मध्य एशिया को दक्षिण एशिया और यूरोप से जोड़ने का लक्ष्य है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **भू-आर्थिक और भू-राजनीतिक निहितार्थ:** यह कॉरिडोर एक महत्वपूर्ण भू-आर्थिक बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है, जो उज़्बेकिस्तान को एक प्रमुख ग्रीन ऊर्जा उत्पादक में बदल रहा है और भारत की स्वच्छ ऊर्जा आयात में विविधता लाकर उसकी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर रहा है। भू-राजनीतिक परिप्रेक्ष्य से, यह भारत, मध्य एशिया और यूरोप के बीच गहरे जुड़ाव को बढ़ावा देता है, सहयोग के नए रास्ते बनाता है जो पारंपरिक ऊर्जा निर्भरताओं से परे जाते हैं और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देते हैं।
- **वैश्विक ऊर्जा संक्रमण और जलवायु लक्ष्यों को आगे बढ़ाना:** 'यूरेशियन ग्रीन हाइड्रोजन कॉरिडोर' वैश्विक ऊर्जा संक्रमण को तेज करने की दिशा में एक ठोस कदम है। ग्रीन हाइड्रोजन के लिए एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला बनाकर, यह कार्बन उत्सर्जन को कम करने, सतत विकास को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देता है, जो जलवायु कार्रवाई के लिए एक सहयोगी मॉडल को दर्शाता है।
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23. भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया ने ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समुद्री अभ्यास 'समुद्र रक्षा' का समापन किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया की नौसेनाओं को शामिल करते हुए उद्घाटन त्रिपक्षीय समुद्री अभ्यास, 'समुद्र रक्षा' (ओशन शील्ड), आज पूर्वी हिंद महासागर क्षेत्र में संपन्न हुआ। इस अभ्यास ने अंतरसंचालनीयता, समुद्री डोमेन जागरूकता और एचएडीआर (मानवीय सहायता और आपदा राहत) अभियानों को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया, जो तीनों इंडो-पैसिफिक राष्ट्रों के बीच बढ़ते रणनीतिक अभिसरण को रेखांकित करता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •इस अभ्यास में तीनों प्रतिभागी नौसेनाओं के युद्धपोतों, पनडुब्बियों, समुद्री गश्ती विमानों और हेलीकॉप्टरों सहित नौसैनिक संपत्तियों की एक विविध श्रृंखला शामिल थी।
- •मुख्य अभ्यासों में पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW), सतह रोधी युद्ध (ASuW), खोज और बचाव (SAR) अभियान और संयुक्त संचार अभ्यास शामिल थे।
- •एक महत्वपूर्ण घटक एचएडीआर परिदृश्यों के अनुकरण के लिए समर्पित था, जिसमें बड़े पैमाने पर हताहतों को निकालना और आपदा प्रतिक्रिया समन्वय शामिल था।
- •तीनों देशों के वरिष्ठ नौसेना अधिकारियों ने एक स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक को मजबूत करने में अभ्यास की भूमिका पर जोर दिया।
- •'समुद्र रक्षा' के सफल समापन से क्षेत्र में अधिक जटिल और लगातार त्रिपक्षीय जुड़ाव का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'समुद्र रक्षा' एक त्रिपक्षीय समुद्री अभ्यास है।
- प्रतिभागी भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया हैं।
- पूर्वी हिंद महासागर क्षेत्र में आयोजित किया गया।
- अंतरसंचालनीयता, समुद्री डोमेन जागरूकता और एचएडीआर पर केंद्रित है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **इंडो-पैसिफिक सुरक्षा वास्तुकला को मजबूत करना:** यह अभ्यास इंडो-पैसिफिक की गैर-गठबंधन सुरक्षा वास्तुकला को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण विकास को दर्शाता है। भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया को एक साथ लाकर, यह औपचारिक गठबंधन बनाए बिना क्षेत्रीय चुनौतियों का जवाब देने, समुद्री स्थिरता को बढ़ावा देने और संभावित वर्चस्व का मुकाबला करने के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करता है।
- **भारत की एक्ट ईस्ट नीति और समुद्री कूटनीति:** 'समुद्र रक्षा' भारत की एक्ट ईस्ट नीति के प्रति प्रतिबद्धता और समुद्री कूटनीति में उसकी बढ़ती क्षमता को रेखांकित करता है। इंडोनेशिया जैसे प्रमुख तटीय राज्यों और ऑस्ट्रेलिया जैसे रणनीतिक भागीदारों के साथ जुड़ना भारत के प्रभाव को बढ़ाता है, सामूहिक सुरक्षा के लिए उसकी क्षमताओं को मजबूत करता है, और हिंद महासागर क्षेत्र में एक शुद्ध सुरक्षा प्रदाता के रूप में उसकी भूमिका को पुष्ट करता है।
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24. संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक एआई शासन के लिए ऐतिहासिक 'डिजिटल ट्रस्ट फ्रेमवर्क' अपनाया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने न्यूयॉर्क में एक उच्च-स्तरीय शिखर सम्मेलन के बाद बहुप्रतीक्षित "डिजिटल ट्रस्ट फ्रेमवर्क (DTF)" को अपनाया है। इस फ्रेमवर्क का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रौद्योगिकियों के नैतिक विकास, परिनियोजन और शासन के लिए वैश्विक मानदंड और सिद्धांत स्थापित करना है, जो सुरक्षा, संरक्षा और मानवाधिकारों से संबंधित चिंताओं को संबोधित करेगा।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •DTF एआई शासन में सरकारों, नागरिक समाज, निजी क्षेत्र और शिक्षाविदों को शामिल करते हुए एक बहु-हितधारक दृष्टिकोण पर जोर देता है।
- •यह एआई प्रणालियों में पारदर्शिता, जवाबदेही, निष्पक्षता, गोपनीयता संरक्षण और मानवीय निगरानी जैसे सिद्धांतों को रेखांकित करता है।
- •फ्रेमवर्क विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसी वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए एआई अनुसंधान और विकास में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का आह्वान करता है।
- •कार्यान्वयन की निगरानी और दिशानिर्देशों को अद्यतन करने के लिए एक नए संयुक्त राष्ट्र सलाहकार निकाय, "ग्लोबल एआई एथिक्स काउंसिल" का प्रस्ताव किया गया है।
- •इसमें एआई अंतर को पाटने और एआई लाभों तक समावेशी पहुंच को बढ़ावा देने के लिए विकासशील राष्ट्रों में क्षमता निर्माण के प्रावधान शामिल हैं।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- "डिजिटल ट्रस्ट फ्रेमवर्क" संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाया गया था।
- यह नैतिक एआई शासन पर केंद्रित है।
- "ग्लोबल एआई एथिक्स काउंसिल" का प्रस्ताव करता है।
- भारत ने जिम्मेदार एआई की वकालत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **वैश्विक शासन के लिए महत्व:** डीटीएफ एआई शासन के लिए एक एकीकृत वैश्विक दृष्टिकोण स्थापित करने, नियामक विखंडन को रोकने और अंतर्राष्ट्रीय विश्वास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह उभरती प्रौद्योगिकियों में नवाचार और नैतिक सुरक्षा उपायों के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर बढ़ती सहमति को दर्शाता है।
- **भारत के लिए निहितार्थ:** एक उभरती एआई शक्ति और 'सभी के लिए एआई' के समर्थक के रूप में, डीटीएफ को आकार देने और लागू करने में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। यह फ्रेमवर्क भारत के लिए जिम्मेदार एआई समाधान विकसित करने, नैतिक एआई में निवेश आकर्षित करने और डिजिटल कूटनीति के माध्यम से अपनी सॉफ्ट पावर को बढ़ाने के अवसर प्रस्तुत करता है, जबकि घरेलू विनियमों को अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के साथ संरेखित करने में चुनौतियां भी पैदा करता है।
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25. भारत ने सतत गहरे समुद्र में खनन अन्वेषण के लिए नए नियामक ढांचे का अनावरण किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने भारत के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल में उसके आवंटित क्षेत्र में गहरे समुद्र में खनन अन्वेषण के लिए एक व्यापक नियामक ढाँचे का अनावरण किया है। यह ढाँचा कठोर पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और एहतियाती सिद्धांत को अपनाने पर जोर देता है, जो संसाधन आवश्यकताओं को समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण के साथ संतुलित करता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •गहरे समुद्र में कोई भी अन्वेषण या शोषण गतिविधि शुरू होने से पहले अनिवार्य पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (ईआईए)।
- •भारत के ईईजेड के भीतर पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों और कमजोर समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों (वीएमई) के पास 'नो-माइनिंग जोन' की स्थापना।
- •गहरे समुद्र में खनन कार्यों के पारिस्थितिक पदचिह्न को कम करने के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों के विकास और उपयोग पर जोर।
- •वास्तविक समय डेटा संग्रह और स्वतंत्र पर्यावरणीय ऑडिट सहित मजबूत निगरानी तंत्र के लिए प्रावधान।
- •ढाँचा गहरे समुद्र में खनन के दीर्घकालिक प्रभावों पर अनुसंधान को प्रोत्साहित करता है और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण (आईएसए) के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का समर्थन करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- भारत अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण (आईएसए) के साथ एक 'पायनियर इन्वेस्टर' है।
- अनन्य आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) आधार रेखा से 200 समुद्री मील तक फैला हुआ है।
- पॉलीमेटेलिक नोड्यूल, कोबाल्ट-समृद्ध फेरोमैंगनीज क्रस्ट्स और हाइड्रोथर्मल वेंट प्रमुख गहरे समुद्र के खनिज संसाधन हैं।
- समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (यूएनसीएलओएस) समुद्री मामलों को नियंत्रित करता है।
- 'एहतियाती सिद्धांत' कहता है कि यदि गंभीर या अपरिवर्तनीय नुकसान का खतरा है, तो पूर्ण वैज्ञानिक निश्चितता की कमी को लागत प्रभावी उपायों को स्थगित करने का कारण नहीं माना जाएगा।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **भू-राजनीतिक और आर्थिक महत्व:** गहरे समुद्र में खनन से महत्वपूर्ण खनिजों (जैसे कोबाल्ट, निकल, दुर्लभ पृथ्वी तत्व) तक पहुँच मिलती है जो नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिससे भूमि-आधारित खनन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला कमजोरियों पर निर्भरता कम होती है।
- **पर्यावरणीय जोखिम और चुनौतियाँ:** संभावित प्रभावों में निवास स्थान का विनाश, फिल्टर फीडर को प्रभावित करने वाले तलछट के गुच्छे, मशीनरी से ध्वनि प्रदूषण और दीर्घकालिक पारिस्थितिकी तंत्र का व्यवधान शामिल हैं, जिसके लिए मजबूत पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और अनुकूली प्रबंधन रणनीतियों की आवश्यकता है।
- **अंतर्राष्ट्रीय शासन और इक्विटी:** राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार से परे क्षेत्रों में गहरे समुद्र में खनन को विनियमित करने में आईएसए की भूमिका समान लाभ-साझाकरण, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और 'मानवजाति की सामान्य विरासत' के सिद्धांत पर सवाल उठाती है।
- **तकनीकी प्रगति और स्थिरता:** गहरे समुद्र में संसाधन निष्कर्षण को सतत बनाने के लिए कम आक्रामक खनन प्रौद्योगिकियों का विकास और पर्यावरणीय प्रभावों के लिए पूर्वानुमान मॉडल में सुधार महत्वपूर्ण हैं, जो नीली अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों के अनुरूप हैं।
- **विकास और संरक्षण का संतुलन:** यह ढाँचा औद्योगिक विकास का समर्थन करने के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की बढ़ती मांग को पूरा करने और नाजुक तथा अक्सर कम समझे जाने वाले गहरे समुद्र के पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा करने की अनिवार्यता के बीच आवश्यक जटिल संतुलन पर प्रकाश डालता है।
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26. 'हरित कृषि: एक समग्र दृष्टि' राष्ट्रीय कृषि वानिकी मिशन का शुभारंभ
चर्चा में क्यों? (Why in News)
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सहयोग से औपचारिक रूप से 'हरित कृषि: एक समग्र दृष्टि' - एक नया राष्ट्रीय कृषि वानिकी मिशन शुरू किया है। इस मिशन का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने, पारिस्थितिक लचीलेपन में सुधार करने और राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कृषि प्रणालियों में पेड़ों को एकीकृत करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •विविध कृषि-जलवायु क्षेत्रों में उपयुक्त प्रजाति चयन के साथ वृक्ष-आधारित कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देना।
- •कृषि वानिकी प्रथाओं के माध्यम से कार्बन पृथक्करण के लिए किसानों को प्रोत्साहन देना, संभावित रूप से कार्बन क्रेडिट बाजारों से जोड़ना।
- •कृषि परिदृश्यों में मृदा स्वास्थ्य, जल प्रतिधारण और जैव विविधता संरक्षण में सुधार पर ध्यान केंद्रित करना।
- •कृषि वानिकी उत्पादों के लिए गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री, तकनीकी ज्ञान और बाजार संबंधों तक पहुँच की सुविधा प्रदान करना।
- •आजीविका विविधीकरण और ग्रामीण विकास के लिए मौजूदा सरकारी योजनाओं के साथ एकीकरण।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति, 2014 कृषि वानिकी पर भारत की पहली समर्पित नीति थी।
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) - राष्ट्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान केंद्र (एनआरसीएएफ) एक प्रमुख अनुसंधान संस्थान है।
- कृषि वानिकी एक भूमि उपयोग प्रणाली है जहाँ फसलों या चरागाहों के आसपास या उनके बीच पेड़ या झाड़ियाँ उगाई जाती हैं।
- यह सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) जैसे एसडीजी 1 (गरीबी नहीं) और एसडीजी 15 (भूमि पर जीवन) में योगदान देता है।
- कार्बन क्रेडिट मापने योग्य, सत्यापन योग्य परमिट हैं जो धारक को एक टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर उत्सर्जन करने की अनुमति देते हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **जलवायु परिवर्तन शमन और अनुकूलन:** कृषि वानिकी प्रणालियाँ बायोमास और मिट्टी में कार्बन का पृथक्करण करती हैं, जिससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम होता है, जबकि विविध आय स्रोतों और बेहतर सूक्ष्म-जलवायु के माध्यम से जलवायु परिवर्तनशीलता के प्रति लचीलापन भी बढ़ता है।
- **किसान आय वृद्धि:** लकड़ी, जलाऊ लकड़ी, चारा, फल और औषधीय पौधों जैसे कई उत्पाद प्रदान करके, कृषि वानिकी आय के स्रोतों में विविधता लाती है और एकल फसल चक्रों पर निर्भरता कम करती है, जिससे किसानों की लाभप्रदता बढ़ती है और संकट कम होता है।
- **पर्यावरणीय स्थिरता:** यह भूमि क्षरण का मुकाबला करने, मिट्टी की उर्वरता में सुधार करने, पानी का संरक्षण करने और विभिन्न वनस्पतियों और जीवों के लिए आवास प्रदान करके जैव विविधता को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे पारिस्थितिक संतुलन को बढ़ावा मिलता है।
- **खाद्य सुरक्षा और पोषण:** फलदार वृक्षों और फलियां वाली प्रजातियों को एकीकृत करने से विशेष रूप से कमजोर ग्रामीण समुदायों में पोषण सुरक्षा और आहार विविधता में योगदान हो सकता है।
- **नीति और कार्यान्वयन चुनौतियाँ:** प्रभावी कार्यान्वयन के लिए भूमि कार्यकाल के मुद्दे, जागरूकता की कमी, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री की उपलब्धता और कृषि वानिकी उत्पादों के लिए मजबूत बाजार तंत्र जैसी चुनौतियों पर काबू पाना आवश्यक है।
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27. राष्ट्रीय आर्द्रभूमि बहाली एवं प्रबंधन कार्यक्रम (NWRMP) चरण-II समीक्षा जारी
चर्चा में क्यों? (Why in News)
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने राष्ट्रीय आर्द्रभूमि बहाली एवं प्रबंधन कार्यक्रम (NWRMP) के दूसरे चरण की मध्य-अवधि की समीक्षा रिपोर्ट जारी की है, जिसमें एकीकृत आर्द्रभूमि प्रबंधन में महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला गया है और भविष्य की रणनीतियाँ रेखांकित की गई हैं।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •समीक्षा में पारिस्थितिक बहाली प्रयासों के साथ स्थानीय आजीविका को एकीकृत करते हुए एक समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोण पर जोर दिया गया है।
- •वैज्ञानिक प्रबंधन और संरक्षण रणनीतियों के माध्यम से तटीय आर्द्रभूमियों की 'ब्लू कार्बन' क्षमता को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- •आर्द्रभूमि स्वास्थ्य और हाइड्रोलॉजिकल व्यवस्था की प्रभावी निगरानी के लिए रिमोट सेंसिंग और जीआईएस प्रौद्योगिकियों का एकीकरण।
- •राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरणों और स्थानीय समुदायों के लिए क्षमता निर्माण पहलों ने सकारात्मक परिणाम दिखाए हैं।
- •यह कार्यक्रम जल जीवन मिशन और अमृत सरोवर जैसे अन्य राष्ट्रीय मिशनों के साथ तालमेल बिठाकर समग्र जल संसाधन प्रबंधन का लक्ष्य रखता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- राष्ट्रीय आर्द्रभूमि बहाली एवं प्रबंधन कार्यक्रम (NWRMP) MoEFCC की एक पहल है।
- आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 आर्द्रभूमियों के लिए एक नियामक ढाँचा प्रदान करते हैं।
- आर्द्रभूमियों पर रामसर अभिसमय आर्द्रभूमियों के संरक्षण और सतत उपयोग के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है।
- 'ब्लू कार्बन' तटीय और समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों में संग्रहित कार्बन को संदर्भित करता है।
- मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड रामसर स्थलों का एक रजिस्टर है जहाँ पारिस्थितिक चरित्र में परिवर्तन हुए हैं, हो रहे हैं, या होने की संभावना है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **पारिस्थितिक महत्व:** आर्द्रभूमि महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र हैं जो जल शुद्धिकरण, बाढ़ नियंत्रण, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु विनियमन जैसी कई पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ प्रदान करते हैं।
- **जलवायु लचीलापन:** आर्द्रभूमि चरम मौसम की घटनाओं के खिलाफ प्राकृतिक बफर के रूप में कार्य करती हैं और कार्बन पृथक्करण के माध्यम से जलवायु परिवर्तन शमन में योगदान करती हैं।
- **आजीविका और आर्थिक लाभ:** आर्द्रभूमियों का सतत प्रबंधन मत्स्य पालन, पर्यावरण-पर्यटन और पारंपरिक संसाधन उपयोग के माध्यम से स्थानीय आजीविका का समर्थन कर सकता है, जिससे हरित अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों को बढ़ावा मिलता है।
- **प्रबंधन में चुनौतियाँ:** अतिक्रमण, कृषि अपवाह और औद्योगिक कचरे से प्रदूषण, परिवर्तित हाइड्रोलॉजिकल व्यवस्था और जन जागरूकता की कमी आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियाँ पेश करती हैं।
- **नीति एकीकरण और शासन:** प्रभावी आर्द्रभूमि प्रबंधन के लिए मजबूत नीतिगत ढाँचे, अंतर-क्षेत्रीय समन्वय और स्थानीय समुदायों तथा पंचायती राज संस्थानों को शामिल करते हुए विकेन्द्रीकृत शासन की आवश्यकता है।
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28. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने चक्रीय अर्थव्यवस्था के लिए अगली पीढ़ी के बायो-कम्पोजिट्स पर अनुसंधान को वित्त पोषित किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने आज उन्नत बायो-कम्पोजिट्स में अनुसंधान और विकास में तेजी लाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण वित्तपोषण पहल की घोषणा की। यह रणनीतिक निवेश पारंपरिक प्लास्टिक और पारंपरिक सामग्रियों के स्थायी, बायोडिग्रेडेबल विकल्पों के निर्माण को बढ़ावा देने का प्रयास करता है, जो भारत के महत्वाकांक्षी चक्रीय अर्थव्यवस्था लक्ष्यों और जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •यह पहल कृषि अपशिष्ट, वन बायोमास और समुद्री संसाधनों (जैसे काइटिन, लिग्निन, सेल्युलोज) से प्राप्त उपन्यास बायो-कम्पोजिट सामग्रियों के विकास को लक्षित करती है।
- •फोकस क्षेत्रों में पैकेजिंग, ऑटोमोटिव इंटीरियर, निर्माण और कपड़ा उद्योगों के लिए उच्च-प्रदर्शन वाले बायो-कम्पोजिट शामिल हैं, जिसमें बायोडिग्रेडेबिलिटी, पुनर्चक्रण योग्यता और कम कार्बन पदचिह्न जैसे गुणों पर जोर दिया गया है।
- •प्रयोगशाला नवाचारों को वाणिज्यिक अनुप्रयोगों में तेजी से बदलने की सुविधा के लिए प्रमुख अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों और औद्योगिक भागीदारों को जोड़ने वाला 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल अपनाया जाएगा।
- •यह वित्तपोषण स्वदेशी बायो-कम्पोजिट प्रौद्योगिकियों की स्केलेबिलिटी और बाजार स्वीकृति सुनिश्चित करने के लिए पायलट प्लांट और मानकीकरण प्रयासों का भी समर्थन करेगा।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- बायो-कम्पोजिट्स: परिभाषा, प्रकार (जैसे प्राकृतिक फाइबर प्रबलित, बायोडिग्रेडेबल पॉलिमर)।
- चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांत और सामग्री विज्ञान के लिए उनकी प्रासंगिकता।
- अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) की भूमिका।
- बायोमास स्रोतों के उदाहरण: लिग्निन, सेल्युलोज, काइटिन, कृषि अवशेष।
- अवधारणाएँ: बायोडिग्रेडेबिलिटी, पुनर्चक्रण योग्यता, कार्बन पदचिह्न।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **पर्यावरणीय स्थिरता और अपशिष्ट प्रबंधन**: विश्लेषण करें कि बायो-कम्पोजिट्स प्लास्टिक प्रदूषण, लैंडफिल बोझ और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कैसे महत्वपूर्ण रूप से कम कर सकते हैं, जिससे भारत के जलवायु कार्रवाई लक्ष्यों और स्वच्छ भारत अभियान में योगदान मिल सके।
- **आर्थिक अवसर और ग्रामीण विकास**: कृषि अपशिष्ट में मूल्यवर्धन, बायोमास प्रसंस्करण और विनिर्माण में हरित नौकरियों का सृजन, और ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं के विविधीकरण की क्षमता पर चर्चा करें।
- **वाणिज्यीकरण में चुनौतियाँ और नीतिगत समर्थन**: उत्पादन बढ़ाने, पारंपरिक सामग्रियों के साथ लागत प्रतिस्पर्धा प्राप्त करने, और व्यापक अपनाने के लिए सहायक नीतिगत ढाँचों, मानकीकरण और उपभोक्ता जागरूकता की आवश्यकता में आने वाली बाधाओं का मूल्यांकन करें।
- **नवाचार और वैश्विक नेतृत्व**: भारत को स्थायी सामग्री अनुसंधान और विनिर्माण में एक अग्रणी के रूप में स्थापित करना, वैश्विक बायो-अर्थव्यवस्था में निवेश आकर्षित करना और तकनीकी निर्यात को बढ़ावा देना।
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29. राष्ट्रीय AI फॉर हेल्थ पहल ने सटीक निदान के लिए 'स्वास्थ्यनेत्र' लॉन्च किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और नीति आयोग के सहयोग से आज 'स्वास्थ्यनेत्र' - एक अखिल भारतीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) संचालित नैदानिक मंच लॉन्च किया। इस पहल का उद्देश्य विशेष रूप से कम सेवा वाले क्षेत्रों में, तीव्र, सटीक और सुलभ स्क्रीनिंग तथा पहचान सेवाएँ प्रदान करके सार्वजनिक स्वास्थ्य निदान में क्रांति लाना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •'स्वास्थ्यनेत्र' मधुमेह संबंधी रेटिनोपैथी, तपेदिक, कुछ कैंसर (जैसे गर्भाशय ग्रीवा, मौखिक) और त्वचा संबंधी स्थितियों जैसी प्रचलित बीमारियों का शीघ्र पता लगाने के लिए विशाल डेटासेट पर प्रशिक्षित AI मॉडल को एकीकृत करता है।
- •यह मंच डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का लाभ उठाता है, जो आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) और टेली-परामर्श सेवाओं जैसी मौजूदा स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों के साथ एकीकरण को सक्षम बनाता है, जिससे निर्बाध डेटा प्रवाह और रेफरल तंत्र की सुविधा मिलती है।
- •पायलट कार्यान्वयन ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) पर केंद्रित होगा ताकि नैदानिक पहुँच में विषमताओं को दूर किया जा सके और तृतीयक देखभाल सुविधाओं पर बोझ कम किया जा सके।
- •डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 का पालन करते हुए, मजबूत डेटा गोपनीयता और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर जोर दिया गया है, जिससे रोगी की गोपनीयता और नैतिक AI परिनियोजन सुनिश्चित हो सके।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'स्वास्थ्यनेत्र' के उद्देश्य और मुख्य विशेषताएँ।
- स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, ICMR, नीति आयोग की भूमिका।
- स्वास्थ्य सेवा में AI की अवधारणा, मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग।
- आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) और इसका एकीकरण।
- स्वास्थ्य में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI)।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **स्वास्थ्य सेवा पहुँच और समानता बढ़ाना**: चर्चा करें कि कैसे AI निदान विशेष रूप से दूरस्थ आबादी के लिए स्वास्थ्य सेवा पहुँच में अंतर को पाट सकता है, शीघ्र और सटीक निदान प्रदान करके, जिससे रुग्णता और मृत्यु दर कम हो सके।
- **स्वास्थ्य में नैतिक AI और डेटा शासन**: डेटा गोपनीयता, एल्गोरिथम पूर्वाग्रह, AI-संचालित निदान में जवाबदेही से संबंधित चुनौतियों का विश्लेषण करें, और रोगी के विश्वास तथा नैतिक परिनियोजन सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नियामक ढांचे की आवश्यकता पर बल दें।
- **स्वास्थ्य सेवा कार्यबल और क्षमता निर्माण पर प्रभाव**: मूल्यांकन करें कि AI उपकरण स्वास्थ्य पेशेवरों की क्षमताओं को कैसे बढ़ा सकते हैं, जिसके लिए AI-जनित अंतर्दृष्टि के प्रभावी अपनाने और व्याख्या के लिए नए कौशल सेट और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता होगी।
- **आर्थिक निहितार्थ और सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणाम**: शीघ्र पहचान और निवारक देखभाल के माध्यम से लागत बचत की संभावना का आकलन करें, जिससे बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणाम और स्वास्थ्य सेवा संसाधनों का अधिक कुशल आवंटन हो सके।
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30. राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत भारत ने स्वदेशी क्वांटम प्रोसेसर प्रोटोटाइप का अनावरण किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने आज भारत के पहले स्वदेशी दोष-सहिष्णु क्वांटम प्रोसेसर प्रोटोटाइप के सफल विकास और प्रदर्शन की घोषणा की। यह उपलब्धि राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) के रणनीतिक उद्देश्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत को महत्वपूर्ण कंप्यूटिंग डोमेन में क्वांटम श्रेष्ठता प्राप्त करने के करीब ला रहा है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों और इनक्यूबेटेड स्टार्टअप्स के एक संघ द्वारा विकसित इस प्रोटोटाइप में 64-क्यूबिट सुपरकंडक्टिंग आर्किटेक्चर है, जो स्थिर सुसंगतता समय और उच्च निष्ठा संचालन प्रदर्शित करता है।
- •इसमें उन्नत त्रुटि सुधार तंत्र शामिल हैं, जो व्यावहारिक, बड़े पैमाने के क्वांटम कंप्यूटर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो शास्त्रीय कंप्यूटिंग सीमाओं से परे जटिल समस्याओं को हल करने में सक्षम हैं।
- •यह पहल उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में 'आत्मनिर्भर भारत' के भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है, विदेशी क्वांटम प्रौद्योगिकी पर निर्भरता कम करती है और घरेलू नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देती है।
- •भविष्य के रोडमैप में क्यूबिट संख्या को बढ़ाना, वैकल्पिक क्वांटम कंप्यूटिंग प्रतिमानों (जैसे फोटोनिक, ट्रैप्ड-आयन) की खोज करना और विशिष्ट औद्योगिक तथा रक्षा अनुप्रयोगों के लिए क्वांटम एल्गोरिदम विकसित करना शामिल है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) के उद्देश्य और वित्तीय परिव्यय।
- मुख्य अवधारणाएँ: क्यूबिट्स, सुपरपोजिशन, उलझाव (Entanglement), क्वांटम एनीलिंग, क्वांटम श्रेष्ठता, त्रुटि सुधार कोड।
- क्वांटम कंप्यूटिंग पद्धति के रूप में सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट्स।
- NQM के लिए नोडल एजेंसी के रूप में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST)।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय सुरक्षा**: चर्चा करें कि कैसे स्वदेशी क्वांटम कंप्यूटिंग क्षमताएं उन्नत क्रिप्टोग्राफी और रक्षा अनुप्रयोगों के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ाती हैं, साइबर खतरों के प्रति संवेदनशीलता को कम करती हैं।
- **आर्थिक प्रभाव और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र**: क्वांटम कंप्यूटिंग की क्षमता का विश्लेषण करें कि यह फार्मास्यूटिकल्स, सामग्री विज्ञान, वित्तीय मॉडलिंग और AI जैसे उद्योगों में क्रांति ला सकता है, जिससे भारत के प्रौद्योगिकी क्षेत्र में रोजगार सृजन होगा और वैश्विक निवेश आकर्षित होगा।
- **चुनौतियाँ और नैतिक विचार**: क्वांटम कंप्यूटरों को स्केल करने में तकनीकी बाधाओं, कुशल कार्यबल विकास की आवश्यकता और मौजूदा एन्क्रिप्शन मानकों को तोड़ने वाली क्वांटम क्रिप्टोग्राफी से जुड़े नैतिक दुविधाओं का मूल्यांकन करें।
- **वैश्विक क्वांटम दौड़**: क्वांटम लाभ प्राप्त करने के लिए राष्ट्रों के बीच वैश्विक प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में भारत के प्रयासों को रखें, राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर दें।
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31. एमएसएमई मंत्रालय ने स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए 'जिला उद्योग संवर्धन योजना' (ZUSY) का शुभारंभ किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय ने 'जिला उद्योग संवर्धन योजना' (ZUSY) शुरू की है, जो महत्वाकांक्षी जिलों और टियर-II/III शहरों में औद्योगिक विकास को उत्प्रेरित करने और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन की गई एक नई योजना है। इस पहल का उद्देश्य औद्योगिक विकास का विकेंद्रीकरण करना, रोजगार के अवसर पैदा करना और जमीनी स्तर पर 'मेक इन इंडिया' के दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**जिला-स्तरीय औद्योगिक हब:** लक्षित जिलों में विशिष्ट औद्योगिक समूहों की पहचान और विकास, जिसमें स्थानीय रूप से उपलब्ध कच्चे माल, पारंपरिक कौशल और बाजार की मांग पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
- •**वित्तीय प्रोत्साहन और सब्सिडी:** चिन्हित जिलों में इकाइयाँ स्थापित करने या उनका विस्तार करने वाले एमएसएमई के लिए ब्याज सबवेंशन, क्रेडिट गारंटी योजनाएँ और पूंजीगत सब्सिडी का प्रावधान।
- •**कौशल विकास और प्रौद्योगिकी उन्नयन:** उभरती प्रौद्योगिकियों से संबंधित उन्नत प्रशिक्षण प्रदान करने और स्थानीय उद्योगों के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और अपनाने की सुविधा के लिए 'उद्योग कौशल केंद्र' स्थापित करना।
- •**बाजार संपर्क और निर्यात संवर्धन:** व्यापार मेलों, ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों में भागीदारी और समर्पित निर्यात संवर्धन प्रकोष्ठों के निर्माण के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचने के लिए एमएसएमई को सहायता।
- •**व्यवसाय करने में आसानी:** उद्यमियों के लिए नौकरशाही बाधाओं को कम करने के लिए नियामक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना, एकल-खिड़की निकासी और जिला स्तर पर समर्पित औद्योगिक सुविधा प्रकोष्ठ।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- ZUSY का शुभारंभ एमएसएमई मंत्रालय द्वारा किया गया है।
- यह योजना महत्वाकांक्षी जिलों और टियर-II/III शहरों को लक्षित करती है।
- यह स्थानीय औद्योगिक विकास और कौशल विकास पर केंद्रित है।
- वित्तीय प्रोत्साहन, प्रौद्योगिकी उन्नयन और बाजार संपर्क प्रमुख विशेषताएँ हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **संतुलित क्षेत्रीय विकास:** ZUSY औद्योगिक विकास में क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। छोटे शहरों और महत्वाकांक्षी जिलों में विनिर्माण और नवाचार को बढ़ावा देकर, यह ग्रामीण-शहरी प्रवासन को कम कर सकता है, स्थानीय रोजगार पैदा कर सकता है और समावेशी विकास को बढ़ावा दे सकता है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
- **एमएसएमई प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि:** यह योजना एमएसएमई को महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करती है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। वित्त, प्रौद्योगिकी, कौशल और बाजारों तक पहुंच को सुविधाजनक बनाकर, ZUSY एमएसएमई की प्रतिस्पर्धात्मकता और उत्पादकता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा सकता है, जिससे वे वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत हो सकें और भारत के सकल घरेलू उत्पाद और निर्यात लक्ष्यों में अधिक पर्याप्त योगदान दे सकें।
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32. युवाओं के समग्र मानसिक स्वास्थ्य के लिए 'राष्ट्रीय युवा मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम' (RYMSK) का अनावरण
चर्चा में क्यों? (Why in News)
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने युवा मामले और खेल मंत्रालय के सहयोग से 'राष्ट्रीय युवा मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम' (RYMSK) का शुभारंभ किया है। इस व्यापक कार्यक्रम का उद्देश्य युवा आबादी के बीच मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों के बारे में बढ़ती चिंताओं को दूर करना है, जिसमें जागरूकता, शीघ्र हस्तक्षेप और सुलभ सहायता सेवाओं सहित एक बहुआयामी दृष्टिकोण पेश किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**स्कूल और कॉलेज-आधारित हस्तक्षेप:** पाठ्यक्रम में मानसिक कल्याण मॉड्यूल का एकीकरण, 'मानस मित्र' (माइंड फ्रेंड) सहकर्मी सहायता समूहों की स्थापना, और शैक्षणिक संस्थानों में प्रशिक्षित परामर्शदाताओं की उपलब्धता।
- •**डिजिटल मानसिक स्वास्थ्य मंच:** आत्म-मूल्यांकन उपकरण, टेली-परामर्श सेवाएँ, निर्देशित ध्यान और सत्यापित मानसिक स्वास्थ्य संसाधनों तक पहुँच प्रदान करने वाला एक समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन और वेब पोर्टल का विकास।
- •**सामुदायिक आउटरीच और जागरूकता अभियान:** मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को कलंक से मुक्त करने, खुले संवाद को बढ़ावा देने और माता-पिता, शिक्षकों और सामुदायिक नेताओं को शिक्षित करने के लिए राष्ट्रीय और क्षेत्रीय अभियानों का शुभारंभ।
- •**फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के लिए क्षमता निर्माण:** मानसिक परेशानी के शुरुआती लक्षणों की पहचान करने और प्रारंभिक सहायता व रेफरल प्रदान करने के लिए आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और प्राथमिक स्वास्थ्य पेशेवरों का प्रशिक्षण।
- •**अनुसंधान और डेटा संग्रह:** साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को सूचित करने और समय के साथ कार्यक्रम की प्रभावशीलता को ट्रैक करने के लिए युवा मानसिक स्वास्थ्य डेटा के लिए एक राष्ट्रीय रजिस्ट्री की स्थापना।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- RYMSK स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय तथा युवा मामले और खेल मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है।
- यह कार्यक्रम युवा आबादी के बीच मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों को लक्षित करता है।
- प्रमुख घटकों में स्कूल हस्तक्षेप, एक डिजिटल मंच और सामुदायिक आउटरीच शामिल हैं।
- इसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कलंक को दूर करना और सुलभ सहायता प्रदान करना है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दे का समाधान:** RYMSK सीधे युवाओं के बीच मानसिक स्वास्थ्य विकारों के बढ़ते बोझ को संबोधित करता है, जिसका शैक्षिक परिणामों, उत्पादकता और समग्र सामाजिक कल्याण पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। शीघ्र हस्तक्षेप और कलंक दूर करने पर ध्यान केंद्रित करके, यह बेहतर दीर्घकालिक मानसिक स्वास्थ्य प्रक्षेपवक्र और कम सामाजिक लागतों को जन्म दे सकता है।
- **समग्र विकास और जनसांख्यिकीय लाभांश:** युवा मानसिक स्वास्थ्य में निवेश भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को साकार करने के लिए महत्वपूर्ण है। मानसिक रूप से स्वस्थ युवा आबादी अधिक लचीली, उत्पादक और आर्थिक व सामाजिक विकास में प्रभावी ढंग से योगदान करने में सक्षम होती है। कार्यक्रम का बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि मानसिक स्वास्थ्य सहायता को युवा जीवन के विभिन्न पहलुओं, शिक्षा से लेकर सामुदायिक सहभागिता तक में एकीकृत किया जाए।
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33. केंद्र सरकार ने 'राष्ट्रीय शहरी जल सुरक्षा एवं हरित अधोसंरचना मिशन' (RSJSAM) का शुभारंभ किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने 'राष्ट्रीय शहरी जल सुरक्षा एवं हरित अधोसंरचना मिशन' (RSJSAM) का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ किया है। यह एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य प्रकृति-आधारित समाधानों के माध्यम से शहरी जल सुरक्षा और जलवायु लचीलेपन को बढ़ाना है। यह मिशन भारत के विभिन्न शहरों में शहरी बाढ़, जल संकट और प्राकृतिक शहरी पारिस्थितिकी प्रणालियों के क्षरण की बढ़ती चुनौतियों के बीच आया है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**एकीकृत जल प्रबंधन:** शहरी जल प्रबंधन के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है, जिसमें तूफान के पानी का संचयन, भूजल पुनर्भरण और पुन: उपयोग के लिए अपशिष्ट जल उपचार शामिल है।
- •**हरित अधोसंरचना विकास:** बाढ़ के जोखिम को कम करने और जैव विविधता को बढ़ाने के लिए शहरी वन, आर्द्रभूमि, पारगम्य फुटपाथ और हरित छत जैसी नीली-हरी अधोसंरचना के विकास पर ध्यान केंद्रित करता है।
- •**सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता:** जल सुरक्षा और हरित पहलों की योजना, कार्यान्वयन और रखरखाव में शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी पर जोर देता है।
- •**प्रौद्योगिकी एकीकरण:** शहरी जल निकायों के मानचित्रण, बाढ़ की संवेदनशीलता का आकलन और हरित अधोसंरचना परियोजनाओं के प्रभाव की निगरानी के लिए भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी का उपयोग करता है।
- •**क्षमता निर्माण:** स्थायी शहरी जल प्रबंधन प्रथाओं और प्रकृति-आधारित समाधानों में ULB अधिकारियों, इंजीनियरों और स्थानीय समुदायों के लिए प्रशिक्षण और कौशल विकास का प्रावधान।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- RSJSAM का शुभारंभ आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा किया गया है।
- यह मिशन शहरी जल सुरक्षा के लिए प्रकृति-आधारित समाधानों पर जोर देता है।
- यह नीली-हरी अधोसंरचना और एकीकृत जल प्रबंधन पर केंद्रित है।
- सामुदायिक भागीदारी और भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी प्रमुख घटक हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **शहरी लचीलेपन को संबोधित करना:** RSJSAM जलवायु परिवर्तन के प्रभावों, विशेषकर बाढ़ और सूखे जैसी अत्यधिक मौसमी घटनाओं के प्रति शहरी लचीलेपन को बढ़ाने के लिए एक व्यापक ढाँचा प्रदान करता है। हरित अधोसंरचना को एकीकृत करके, यह पारंपरिक ग्रे अधोसंरचना दृष्टिकोणों से आगे बढ़ता है, स्थायी और पारिस्थितिक रूप से सुदृढ़ समाधान प्रदान करता है।
- **सतत शहरी विकास:** यह मिशन सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के प्रति भारत की प्रतिबद्धताओं, विशेष रूप से एसडीजी 6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता) और एसडीजी 11 (स्थायी शहर और समुदाय) के साथ संरेखित है। विकेंद्रीकृत जल प्रबंधन और पारिस्थितिकी तंत्र बहाली पर इसका ध्यान अधिक रहने योग्य और पर्यावरण के प्रति जागरूक शहरी स्थानों को बढ़ावा दे सकता है, जिससे जल संसाधनों में चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
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34. भारत ने 'सामाजिक एआई नीति 2026' का अनावरण किया: सामाजिक कल्याण और शिक्षा में एआई के लिए नैतिक दिशानिर्देश
चर्चा में क्यों? (Why in News)
केंद्रीय सरकार ने आज सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय तथा शिक्षा मंत्रालय की एक संयुक्त समिति के माध्यम से 'सामाजिक एआई नीति 2026' का विमोचन किया। यह अग्रणी राष्ट्रीय ढाँचा महत्वपूर्ण सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों, सार्वजनिक सेवाओं और शिक्षा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जिम्मेदार विकास और परिनियोजन के लिए व्यापक नैतिक दिशानिर्देशों को रेखांकित करता है, जिसमें एल्गोरिथम पूर्वाग्रह, डेटा गोपनीयता और जवाबदेही पर बढ़ती चिंताओं का समाधान किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**निष्पक्षता और गैर-भेदभाव:** एआई प्रणालियों के डिजाइन और कार्यान्वयन को अनिवार्य करता है जो एल्गोरिथम पूर्वाग्रह को कम करते हैं और सभी सामाजिक समूहों, विशेष रूप से हाशिए के समुदायों के लिए समान पहुंच और परिणाम सुनिश्चित करते हैं।
- •**पारदर्शिता और व्याख्यात्मकता:** सार्वजनिक सेवाओं और शिक्षा में उपयोग की जाने वाली एआई प्रणालियों को उनकी निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में पारदर्शी होने की आवश्यकता है, जिससे एआई-जनित सिफारिशों या कार्यों की ऑडिटिंग और व्याख्या की जा सके।
- •**डेटा गोपनीयता और सुरक्षा:** राष्ट्रीय डेटा संरक्षण कानूनों का पालन करते हुए, सामाजिक क्षेत्रों में एआई अनुप्रयोगों द्वारा उपयोग किए गए किसी भी व्यक्तिगत डेटा के लिए कड़े डेटा संरक्षण प्रोटोकॉल, अनामीकरण और सहमति तंत्र पर जोर देता है।
- •**मानवीय निरीक्षण और जवाबदेही:** महत्वपूर्ण एआई-संचालित निर्णयों में मानवीय हस्तक्षेप और निरीक्षण की आवश्यकता को निर्धारित करता है, एआई प्रणालियों के परिणामों और संभावित हानियों के लिए जवाबदेही की स्पष्ट रेखाएँ स्थापित करता है।
- •**जन परामर्श और सहभागिता:** विश्वास पैदा करने और सामाजिक चिंताओं को दूर करने के लिए सामाजिक कल्याण और शिक्षा में एआई समाधानों की अवधारणा और परिनियोजन में मजबूत जन संवाद और हितधारक परामर्श को प्रोत्साहित करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'सामाजिक एआई नीति 2026' भारत का एआई के लिए राष्ट्रीय नैतिक ढाँचा है।
- यह सामाजिक कल्याण, सार्वजनिक सेवाओं और शिक्षा क्षेत्रों को कवर करता है।
- MoSJE और MoE की संयुक्त समिति द्वारा जारी किया गया।
- मुख्य सिद्धांतों में निष्पक्षता, पारदर्शिता और डेटा गोपनीयता शामिल हैं।
- एल्गोरिथम पूर्वाग्रह और जवाबदेही को संबोधित करने का लक्ष्य है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **नैतिकता के साथ नवाचार को संतुलित करना:** सार्वजनिक भलाई के लिए एआई के अनुप्रयोग में नैतिक सिद्धांतों, मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करते हुए एआई नवाचार को बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण चुनौती पर चर्चा करें।
- **कमजोर समूहों पर प्रभाव:** विश्लेषण करें कि कैसे पक्षपातपूर्ण एआई प्रणालियाँ कल्याणकारी लाभों तक पहुँच, शैक्षिक अवसरों और सामाजिक न्याय जैसे क्षेत्रों में हाशिए के समुदायों को असमान रूप से प्रभावित कर सकती हैं, और 'सामाजिक एआई नीति' इन जोखिमों को कम करने का प्रयास कैसे करती है।
- **शासन और नियामक ढाँचा:** एआई के लिए एक प्रभावी शासन और नियामक ढाँचा स्थापित करने की जटिलताओं की जाँच करें, जिसमें अंतर-मंत्रालयी समन्वय, स्वतंत्र निरीक्षण निकायों और एआई-संबंधित हानियों के खिलाफ निवारण के तंत्र की भूमिका शामिल है।
- **अंतर्राष्ट्रीय तुलना और सर्वोत्तम अभ्यास:** भारत के दृष्टिकोण की वैश्विक एआई नैतिकता ढाँचों (जैसे, यूरोपीय संघ का एआई अधिनियम, यूनेस्को की एआई नैतिकता पर सिफारिश) के साथ तुलना करें, एआई मानदंडों को स्थापित करने में शक्तियों, कमजोरियों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की क्षमता की पहचान करें।
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35. 'ग्राम मानस स्वास्थ्य प्रहरी' पहल: ग्रामीण मानसिक स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच बढ़ाना
चर्चा में क्यों? (Why in News)
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निमहांस) के सहयोग से आज 'ग्राम मानस स्वास्थ्य प्रहरी' पहल का शुभारंभ किया। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के अंतर को पाटना है, जिसके तहत सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को जमीनी स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता, प्रारंभिक हस्तक्षेप प्रदान करने और उच्च देखभाल सुविधाओं के लिए रेफरल की सुविधा प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**समुदाय-आधारित प्रशिक्षण:** मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा) और सहायक नर्स दाइयों (एएनएम) के लिए सामान्य मानसिक स्वास्थ्य विकारों की पहचान करने, बुनियादी परामर्श प्रदान करने और मनोवैज्ञानिक प्राथमिक उपचार प्रदान करने के लिए व्यापक प्रशिक्षण मॉड्यूल।
- •**कलंक-उन्मूलन और जागरूकता:** मानसिक बीमारी से जुड़े कलंक को कम करने और मदद मांगने वाले व्यवहार को प्रोत्साहित करने के लिए ग्राम स्तर पर व्यापक जन जागरूकता अभियान।
- •**टेली-परामर्श एकीकरण:** प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से जुड़े टेली-परामर्श हब की स्थापना, प्रशिक्षित सामुदायिक कार्यकर्ताओं को मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ वर्चुअल परामर्श की सुविधा प्रदान करने में सक्षम बनाना।
- •**रेफरल मार्ग:** विशेष देखभाल की आवश्यकता वाले व्यक्तियों को जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों और तृतीयक देखभाल अस्पतालों से जोड़ने के लिए स्पष्ट और कुशल रेफरल तंत्र का निर्माण।
- •**डेटा संग्रह और अनुसंधान:** मानसिक स्वास्थ्य की व्यापकता, उपचार परिणामों की निगरानी करने और ग्रामीण मानसिक स्वास्थ्य रणनीतियों के लिए नीतिगत समायोजन को सूचित करने के लिए एक मजबूत डेटा संग्रह प्रणाली का कार्यान्वयन।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'ग्राम मानस स्वास्थ्य प्रहरी' MoHFW और NIMHANS की एक संयुक्त पहल है।
- यह ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच को लक्षित करता है।
- आशा और एएनएम को 'प्रहरी' (सेंटिनल्स) के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।
- टेली-परामर्श हब को पीएचसी के साथ एकीकृत किया जाएगा।
- मानसिक स्वास्थ्य कलंक को कम करने का लक्ष्य है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **ग्रामीण-शहरी मानसिक स्वास्थ्य विभाजन को संबोधित करना:** विश्लेषण करें कि यह पहल शहरी और ग्रामीण आबादी के बीच मानसिक स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच में मौजूदा असमानताओं को प्रभावी ढंग से कैसे पाट सकती है, जिसमेंBमौलिक और मानव संसाधन चुनौतियों पर विचार किया गया है।
- **सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की भूमिका:** प्रारंभिक पहचान, संकट हस्तक्षेप और अनुवर्ती देखभाल में आशा और एएनएम की अग्रिम पंक्ति के मानसिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा करें, और निरंतर प्रशिक्षण और समर्थन की आवश्यकता पर भी।
- **प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के साथ एकीकरण:** मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मौजूदा प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा संरचनाओं में एकीकृत करने के महत्व का मूल्यांकन करें, अस्पताल-केंद्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर और कल्याण के एक समग्र मॉडल को बढ़ावा देना।
- **सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ और कलंक:** जांच करें कि यह पहल ग्रामीण परिवेश में मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले सामाजिक-सांस्कृतिक कारकों और इससे जुड़े व्यापक कलंक को कैसे संबोधित करती है, जिसमें सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील हस्तक्षेपों और संचार रणनीतियों पर जोर दिया गया है।
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36. 'पूर्ण आहार - पूर्ण जीवन' अभियान शुरू: खाद्य सुरक्षा और पोषण के लिए एक समग्र दृष्टिकोण
चर्चा में क्यों? (Why in News)
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज 'पूर्ण आहार - पूर्ण जीवन' अभियान के शुभारंभ को मंजूरी दे दी है। यह एक नई व्यापक अम्ब्रेला योजना है जिसका उद्देश्य देश भर में मौजूदा खाद्य सुरक्षा और पोषण कार्यक्रमों को एकीकृत और सुदृढ़ करना है। इस पहल का लक्ष्य कुपोषण और खाद्य असुरक्षा की बहुआयामी चुनौतियों का सामना करना है, जिसमें महिलाओं, बच्चों और जनजातीय समुदायों सहित कमजोर आबादी पर विशेष जोर दिया गया है, एक समग्र और अभिसरण दृष्टिकोण के माध्यम से।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**एकीकृत ढाँचा:** बेहतर तालमेल और संसाधन उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ICDS, PDS और पोषण अभियान जैसी विभिन्न खंडित योजनाओं को एक एकल, एकीकृत परिचालन ढाँचे के तहत समेकित करता है।
- •**अंतिम-मील वितरण में वृद्धि:** पोषण सहायता के पारदर्शी और कुशल अंतिम-मील वितरण के लिए आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने, भंडारण सुविधाओं में सुधार और डिजिटल प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाने पर केंद्रित है।
- •**सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता:** संतुलित पोषण, स्वच्छता और स्थानीय खाद्य विविधता के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 'पोषण पंचायत' और 'स्वस्थ ग्राम सभाओं' के माध्यम से सक्रिय सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देता है।
- •**कमजोर समूहों के लिए विशेष प्रावधान:** गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं, किशोरियों, पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों और जनजातीय आबादी के लिए लक्षित हस्तक्षेप और विशेष रूप से तैयार किए गए फोर्टिफाइड खाद्य वितरण की शुरुआत करता है, उनकी विशिष्ट पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पहचानते हुए।
- •**निगरानी के लिए प्रौद्योगिकी एकीकरण:** गतिशील निगरानी, जोखिम वाले व्यक्तियों की प्रारंभिक पहचान और समय पर हस्तक्षेप के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं से AI-संचालित विश्लेषण और वास्तविक समय डेटा का उपयोग करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'पूर्ण आहार - पूर्ण जीवन' अभियान एक नई अम्ब्रेला योजना है।
- यह ICDS, PDS और पोषण अभियान को समेकित करता है।
- महिलाओं, बच्चों और जनजातीय समुदायों पर केंद्रित है।
- अंतिम-मील वितरण और निगरानी के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों पर जोर देता है।
- सामुदायिक जुड़ाव के लिए 'पोषण पंचायत' और 'स्वस्थ ग्राम सभाओं' की शुरुआत करता है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **बहुआयामी गरीबी का समाधान:** चर्चा करें कि एकीकृत खाद्य सुरक्षा और पोषण कार्यक्रम बहुआयामी गरीबी से निपटने, मानव विकास संकेतकों में सुधार और सतत विकास लक्ष्यों (SDG 2, 3, 4, 5) को प्राप्त करने के लिए कैसे महत्वपूर्ण हैं।
- **चुनौतियाँ और अवसर:** एक बड़े पैमाने की एकीकृत योजना को लागू करने में संभावित चुनौतियों का विश्लेषण करें, जैसे अंतर-मंत्रालयी समन्वय, संसाधन आवंटन, रिसाव को रोकना और व्यवहार परिवर्तन सुनिश्चित करना। साथ ही, मजबूत सार्वजनिक-निजी भागीदारी और समुदाय-नेतृत्व वाली पहलों के अवसरों पर प्रकाश डालें।
- **लैंगिक और इक्विटी परिप्रेक्ष्य:** लैंगिक समानता और सामाजिक इक्विटी पर अभियान के विशिष्ट प्रभाव का मूल्यांकन करें, विशेष रूप से महिलाओं और लड़कियों के लिए स्वास्थ्य और शैक्षिक परिणामों में सुधार, और कमजोर समूहों के बीच असमानताओं को कम करने में।
- **प्रौद्योगिकी की भूमिका:** खाद्य वितरण और पोषण निगरानी में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही बढ़ाने में AI और डिजिटल प्लेटफार्मों की भूमिका का गंभीर रूप से आकलन करें, साथ ही डिजिटल डिवाइड और डेटा गोपनीयता के मुद्दों पर भी विचार करें।
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37. सीमावर्ती क्षेत्रों की बेहतर कनेक्टिविटी और रणनीतिक लॉजिस्टिक्स के लिए भारतमाला लॉजिस्टिक प्रहरी परियोजना (BLPP) को मंजूरी
चर्चा में क्यों? (Why in News)
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने महत्वाकांक्षी 'भारतमाला लॉजिस्टिक प्रहरी परियोजना (BLPP)' को अपनी मंजूरी दे दी है, जो व्यापक भारतमाला परियोजना ढांचे के तहत एक नई उप-योजना है। यह पहल विशेष रूप से मजबूत मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे को विकसित करने और महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों और रणनीतिक औद्योगिक केंद्रों तक अंतिम-मील कनेक्टिविटी में सुधार पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य निर्बाध लॉजिस्टिकल एकीकरण के माध्यम से आर्थिक दक्षता और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों को बढ़ाना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •सीमावर्ती क्षेत्रों और रणनीतिक औद्योगिक क्लस्टरों के पास एकीकृत मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLPs) का विकास।
- •माल ढुलाई की दक्षता में सुधार और पारगमन समय को कम करने के लिए अंतिम-मील सड़क और रेल कनेक्टिविटी को बढ़ाना।
- •रियल-टाइम ट्रैकिंग और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन प्रणालियों सहित उन्नत लॉजिस्टिक्स प्रौद्योगिकी का एकीकरण।
- •लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे के तेजी से कार्यान्वयन और स्थायी संचालन के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPPs) को बढ़ावा देना।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- नोडल मंत्रालय: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), अन्य मंत्रालयों के समन्वय में कार्य करना।
- मुख्य उद्देश्य: आर्थिक और रणनीतिक दोनों उद्देश्यों के लिए लॉजिस्टिकल दक्षता को मजबूत करना, लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना और सीमावर्ती क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना।
- प्रमुख घटक: मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLPs), समर्पित माल गलियारे, कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स और प्रौद्योगिकी-संचालित वेयरहाउसिंग समाधान।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- BLPP दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्रों को राष्ट्रीय आर्थिक ग्रिड में एकीकृत करने, कुशल और लागत प्रभावी परिवहन समाधान प्रदान करके क्षेत्रीय व्यापार और विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है।
- यह परियोजना रणनीतिक स्थानों पर वस्तुओं और कर्मियों की निर्बाध और तीव्र आवाजाही सुनिश्चित करके राष्ट्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देती है, जिससे देश की रक्षा तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमताओं में वृद्धि होती है।
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38. ग्रामीण तकनीकी कौशल उन्नयन योजना (GTKUY) ग्रामीण-शहरी डिजिटल कौशल अंतर को पाटने के लिए
चर्चा में क्यों? (Why in News)
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सहयोग से 100 आकांक्षी जिलों में ग्रामीण तकनीकी कौशल उन्नयन योजना (GTKUY) का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ किया है। यह परिवर्तनकारी पहल ग्रामीण युवाओं, विशेषकर महिलाओं को उभरती गिग और प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था के लिए प्रासंगिक उन्नत डिजिटल और तकनीकी कौशल, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तथा डेटा एनालिटिक्स जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से सशक्त बनाने का प्रयास करती है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •उन्नत डिजिटल साक्षरता, AI, डेटा एनालिटिक्स, IoT और क्लाउड कंप्यूटिंग में संरचित प्रशिक्षण मॉड्यूल का प्रावधान।
- •प्रमुख तकनीकी कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी में विकसित उद्योग-संरेखित पाठ्यक्रम पर जोर।
- •उद्योग द्वारा मान्यता प्राप्त प्रमाणन, रोजगार क्षमता और दूरस्थ कार्य के अवसरों तक पहुंच को बढ़ाना।
- •डिजिटल व्यवसाय स्थापित करने या गिग अर्थव्यवस्था में भाग लेने के इच्छुक लाभार्थियों के लिए उद्यमिता सहायता और मार्गदर्शन।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- नोडल मंत्रालय: कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)।
- लक्षित जनसंख्या: ग्रामीण युवा, विशेष रूप से महिलाओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए, पहचाने गए आकांक्षी जिलों में।
- प्रमुख कौशल क्षेत्र: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), क्लाउड कंप्यूटिंग और उन्नत डिजिटल मार्केटिंग।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- GTKUY लगातार ग्रामीण-शहरी डिजिटल कौशल अंतर को पाटने, आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था में ग्रामीण कार्यबल की समान भागीदारी को सक्षम करने और भारत के विशाल जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाने के लिए महत्वपूर्ण है।
- ग्रामीण युवाओं को भविष्य के लिए तैयार कौशल से सशक्त करके, यह योजना समावेशी आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है, विकेन्द्रीकृत रोजगार सृजन को बढ़ावा देती है और स्थानीय रोजगार के अवसर प्रदान करके प्रवासन के दबाव को कम करती है।
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39. राष्ट्रीय कृषि उद्यम संवर्धन मिशन (RKUSM) कृषि-उद्यमिता और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए शुरू
चर्चा में क्यों? (Why in News)
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय कृषि उद्यम संवर्धन मिशन (RKUSM) का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ किया है। इस व्यापक योजना का उद्देश्य विभिन्न कृषि उत्पादों में कृषि-उद्यमिता को बढ़ावा देना और मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करना है। शुभारंभ कार्यक्रम में ग्रामीण उद्यमियों के लिए मजबूत बाजार लिंकेज, प्रौद्योगिकी एकीकरण और कौशल विकास के माध्यम से किसानों के लिए स्थायी आय स्रोत बनाने पर मिशन के फोकस पर प्रकाश डाला गया।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •सामूहिक विपणन और मूल्य संवर्धन पहलों के प्रमुख चालक के रूप में किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को बढ़ावा देना।
- •कृषि-स्टार्टअप और ग्रामीण उद्यमियों को इन्क्यूबेशन सहायता, ऋण लिंकेज और तकनीकी सहायता प्रदान करना।
- •घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों के लिए मजबूत बाजार पहुंच तंत्र का विकास।
- •उत्पाद की गुणवत्ता और बाजार प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों और स्थायी मूल्य श्रृंखला विकास पर ध्यान।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- नोडल मंत्रालय: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय।
- प्राथमिक उद्देश्य: विविधीकरण, मूल्य संवर्धन और कृषि-उद्यमिता के माध्यम से किसानों की आय को दोगुना करना।
- प्रमुख लाभार्थी: किसान उत्पादक संगठन (FPOs), व्यक्तिगत किसान, कृषि-स्टार्टअप और कृषि व्यवसाय में रुचि रखने वाले ग्रामीण युवा।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- RKUSM केवल कमोडिटी उत्पादन से हटकर मूल्य प्राप्ति और उद्यमिता पर ध्यान केंद्रित करके कृषि संकट के दीर्घकालिक मुद्दे का समाधान करता है, जिससे अधिक लचीला और लाभदायक कृषि क्षेत्र बनता है।
- यह मिशन ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करके, स्थानीय प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के आयात पर निर्भरता कम करके, साथ ही निर्यात क्षमता को बढ़ाकर 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण के साथ पूरी तरह से मेल खाता है।
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40. राष्ट्रीय अभियान 'सहायता': वृद्धों के साथ दुर्व्यवहार से निपटने हेतु अंतर-पीढ़ीगत एकजुटता को बढ़ावा
चर्चा में क्यों? (Why in News)
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 'सहायता' नामक एक राष्ट्रव्यापी अभियान और नीति ढाँचा शुरू किया है, जो अंतर-पीढ़ीगत एकजुटता और सामुदायिक सतर्कता को बढ़ावा देकर वृद्धों के साथ दुर्व्यवहार को रोकने पर केंद्रित है। यह पहल बढ़ती उपेक्षा, वित्तीय शोषण और वृद्धों के खिलाफ शारीरिक दुर्व्यवहार की बढ़ती रिपोर्टों के बीच आई है, जो सामाजिक परिवर्तनों और जनसांख्यिकीय बदलावों से exacerbated हुई हैं।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**अंतर-पीढ़ीगत एकजुटता कार्यक्रम:** ऐसी योजनाओं और गतिविधियों को बढ़ावा देना जो विभिन्न आयु समूहों, विशेषकर युवाओं और वृद्धों के बीच बातचीत, आपसी सम्मान और समर्थन को प्रोत्साहित करती हैं।
- •**सामुदायिक सतर्कता नेटवर्क:** सामुदायिक नेताओं, स्वयंसेवकों और स्थानीय पुलिस से मिलकर स्थानीय 'एल्डर वॉच' समूहों की स्थापना करना ताकि वृद्धों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाओं की निगरानी और रिपोर्ट की जा सके।
- •**राष्ट्रीय हेल्पलाइन और परामर्श सेवाएँ:** वृद्धों के लिए समर्पित राष्ट्रीय हेल्पलाइन और परामर्श केंद्रों को मजबूत और विस्तारित करना, कानूनी सहायता और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करना।
- •**जागरूकता और संवेदीकरण अभियान:** विभिन्न मीडिया के माध्यम से व्यापक जन जागरूकता अभियान शुरू करना ताकि समाज को वृद्धों के अधिकारों, दुर्व्यवहार के रूपों और रिपोर्टिंग तंत्र के प्रति संवेदनशील बनाया जा सके।
- •**देखभाल करने वालों के लिए प्रशिक्षण:** वृद्धों के लिए नैतिक और करुणामय देखभाल सुनिश्चित करने के लिए पेशेवर और अनौपचारिक देखभाल करने वालों के लिए मॉड्यूल और प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करना।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'सहायता' अभियान सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की एक पहल है।
- इसका प्राथमिक उद्देश्य अंतर-पीढ़ीगत एकजुटता को बढ़ावा देकर वृद्धों के साथ दुर्व्यवहार का मुकाबला करना है।
- अभियान में 'एल्डर वॉच' सामुदायिक सतर्कता समूह और उन्नत राष्ट्रीय हेल्पलाइन शामिल हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **जनसांख्यिकीय चुनौतियों के प्रति सक्रिय दृष्टिकोण:** 'सहायता' पहल भारत की तेजी से बढ़ती वृद्ध आबादी और संबंधित सामाजिक कमजोरियों के प्रति एक सक्रिय नीतिगत प्रतिक्रिया का प्रतिनिधित्व करती है। प्रतिक्रियात्मक हस्तक्षेपों से हटकर निवारक समुदाय-नेतृत्व वाले मॉडल की ओर बढ़ते हुए, यह अपने वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक अधिक समावेशी और सहानुभूतिपूर्ण समाज बनाने का प्रयास करती है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 41 (बुढ़ापे में सार्वजनिक सहायता का अधिकार) के अनुरूप है।
- **सामाजिक ताने-बाने और नैतिक शासन को सुदृढ़ करना:** अंतर-पीढ़ीगत एकजुटता को बढ़ावा देना पारंपरिक पारिवारिक सहायता प्रणालियों के क्षरण को सीधे संबोधित करता है और वृद्धों के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देता है। यह दृष्टिकोण न केवल वृद्धों के साथ दुर्व्यवहार को कम करने में मदद करता है, बल्कि समग्र सामाजिक ताने-बाने को भी मजबूत करता है, सम्मान और देखभाल के मूल्यों को बढ़ावा देता है, जो नैतिक शासन और एक स्वस्थ नागरिक समाज के लिए मौलिक हैं।
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41. अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिकों के सामाजिक समावेश हेतु राष्ट्रीय ढाँचा जारी
चर्चा में क्यों? (Why in News)
श्रम और रोजगार मंत्रालय ने नीति आयोग के सहयोग से 'अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिकों के सामाजिक समावेश हेतु राष्ट्रीय ढाँचा' का अनावरण किया है। इस ढाँचे का उद्देश्य भारत की विशाल अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिक आबादी के लिए सामाजिक सुरक्षा, कल्याणकारी योजनाओं और सम्मानजनक जीवन स्थितियों तक समान पहुंच सुनिश्चित करना और उनकी लंबे समय से चली आ रही कमजोरियों का समाधान करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**पोर्टेबल सामाजिक सुरक्षा लाभ:** राज्यों में सामाजिक सुरक्षा लाभों (जैसे ईएसआई, ईपीएफ, पेंशन योजनाएं) की पोर्टेबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए एक सार्वभौमिक पहचान प्रणाली और डिजिटल प्लेटफॉर्म का विकास।
- •**सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच:** राज्यों को यह सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य करना कि प्रवासी श्रमिकों को उनके मूल राज्य की परवाह किए बिना पीडीएस, स्वास्थ्य सेवाओं, बच्चों के लिए शिक्षा और किफायती आवास तक पहुंच प्राप्त हो।
- •**कौशल मानचित्रण और प्रशिक्षण:** प्रवासी श्रमिकों के कौशल मानचित्रण के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस की स्थापना, उन्हें रोजगार के अवसरों से जोड़ना और अपस्किलिंग/रीस्किलिंग कार्यक्रम प्रदान करना।
- •**शिकायत निवारण तंत्र:** शोषण या भेदभाव का सामना करने वाले प्रवासी श्रमिकों के लिए बहुभाषी सहायता के साथ एक केंद्रीकृत, सुलभ शिकायत निवारण प्रणाली का कार्यान्वयन।
- •**सामुदायिक एकीकरण और जागरूकता:** सामाजिक सामंजस्य को बढ़ावा देने और ज़ेनोफोबिया (विदेशी लोगों से डर) का मुकाबला करने के लिए स्रोत और गंतव्य दोनों राज्यों में समुदाय-नेतृत्व वाली पहलों और जागरूकता अभियानों को बढ़ावा देना।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिकों के सामाजिक समावेश हेतु राष्ट्रीय ढाँचा' श्रम और रोजगार मंत्रालय तथा नीति आयोग की एक संयुक्त पहल है।
- एक प्रमुख विशेषता एक सार्वभौमिक पहचान प्रणाली का उपयोग करके राज्यों में सामाजिक सुरक्षा लाभों की पोर्टेबिलिटी है।
- यह ढाँचा प्रवासी श्रमिकों के लिए पीडीएस, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास तक पहुंच पर जोर देता है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **संरचनात्मक असमानताओं को संबोधित करना और मानव पूंजी को बढ़ाना:** यह ढाँचा भारत की सबसे कमजोर आबादी में से एक के लिए सुरक्षा को संस्थागत बनाने में महत्वपूर्ण है। पोर्टेबल सामाजिक सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करके, यह संरचनात्मक असमानताओं को संबोधित करता है, क्षणिक गरीबी को कम करता है, और कार्यबल के इस महत्वपूर्ण खंड की मानव पूंजी क्षमता को बढ़ाता है, जिससे आर्थिक विकास में योगदान मिलता है।
- **सहकारी संघवाद और शासन चुनौतियाँ:** इस ढाँचे की सफलता प्रभावी सहकारी संघवाद पर निर्भर करती है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के बीच निर्बाध समन्वय की आवश्यकता होती है। चुनौतियों में मजबूत डिजिटल बुनियादी ढाँचे की स्थापना, डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करना और सार्वभौमिक पहुंच मानदंडों को लागू करने में स्थानीय अधिकारियों से संभावित प्रशासनिक जड़ता या प्रतिरोध को दूर करना शामिल है।
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42. केंद्र सरकार ने युवा डिजिटल मानसिक स्वास्थ्य हेतु 'मानस सारथी' पहल का शुभारंभ किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से भारत के युवाओं के बीच डिजिटल मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक व्यापक राष्ट्रीय पहल 'मानस सारथी' का शुभारंभ किया है। यह पहल डिजिटल प्रसार के किशोर और युवा मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों के संबंध में बढ़ती चिंताओं को संबोधित करती है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म:** स्व-मूल्यांकन उपकरण, निर्देशित ध्यान, संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (CBT) मॉड्यूल और क्यूरेटेड शैक्षिक सामग्री प्रदान करने वाला एक समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन और वेब पोर्टल का विकास।
- •**टेली-काउंसलिंग सेवाएँ:** मंच के माध्यम से गोपनीय टेली-काउंसलिंग और मनो-सामाजिक सहायता प्रदान करने वाले प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों का एक राष्ट्रीय नेटवर्क स्थापित करना।
- •**मानसिक स्वास्थ्य के लिए डिजिटल साक्षरता:** युवाओं में डिजिटल लचीलापन विकसित करने, जिम्मेदार इंटरनेट उपयोग को बढ़ावा देने, साइबरबुलिंग की पहचान करने और स्वस्थ ऑनलाइन इंटरैक्शन को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करना।
- •**प्रारंभिक हस्तक्षेप और रेफरल:** मानसिक स्वास्थ्य संकट के संकेतकों की प्रारंभिक पहचान और गंभीर मामलों के लिए विशेष देखभाल सेवाओं हेतु सहज रेफरल मार्गों के लिए तंत्र।
- •**सामुदायिक जुड़ाव:** डिजिटल कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य प्राथमिक उपचार पर जागरूकता अभियान और कार्यशालाएं आयोजित करने के लिए स्कूलों, कॉलेजों और युवा संगठनों के साथ सहयोग।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- ‘मानस सारथी’ केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है।
- यह पहल मुख्य रूप से किशोर और युवा डिजिटल मानसिक स्वास्थ्य को लक्षित करती है।
- इसमें संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (CBT) और टेली-काउंसलिंग सेवाओं के तत्व शामिल हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **एक बढ़ती हुई सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती का समाधान:** यह पहल युवाओं के बीच डिजिटल युग की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की बढ़ती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती को स्वीकार करने और उसका समाधान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह मानसिक स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने की वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है, विशेष रूप से संसाधन-बाधित सेटिंग्स में।
- **अंतर-मंत्रालयी अभिसरण और समग्र दृष्टिकोण:** स्वास्थ्य और प्रौद्योगिकी मंत्रालयों के बीच सहयोगात्मक प्रयास एक समग्र शासन दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह इस समझ को रेखांकित करता है कि डिजिटल युग में मानसिक स्वास्थ्य समाधानों को केवल नैदानिक हस्तक्षेपों की नहीं, बल्कि डिजिटल साक्षरता, जिम्मेदार प्रौद्योगिकी उपयोग और मजबूत डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल की भी आवश्यकता होती है।
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43. युवाओं को हरित नौकरियों के लिए कुशल बनाने हेतु 'हरित कौशल विकास अभियान' शुरू किया गया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
एक स्थायी कार्यबल के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सहयोग से, आज 'हरित कौशल विकास अभियान' का शुभारंभ किया। इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के महत्वाकांक्षी नेट-ज़ीरो लक्ष्यों और जलवायु कार्य प्रतिबद्धताओं के अनुरूप, 2030 तक विभिन्न क्षेत्रों में उभरती हरित नौकरियों के लिए 10 लाख भारतीय युवाओं को कुशल बनाना और उनका कौशल उन्नयन करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •नवीकरणीय ऊर्जा, सतत कृषि, अपशिष्ट प्रबंधन, ई-मोबिलिटी, हरित निर्माण और जल संरक्षण जैसे क्षेत्रों के लिए विशेष कौशल विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करना।
- •उद्योग-प्रासंगिक पाठ्यक्रम और प्रमाणन मानकों को विकसित करने के लिए उद्योग निकायों, शैक्षणिक संस्थानों और अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों के साथ सहयोग।
- •'हरित कौशल अकादमियों' की स्थापना और मौजूदा ITI और पॉलिटेक्निक को हरित प्रौद्योगिकी प्रयोगशालाओं के साथ उन्नत करना।
- •हरित क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता, छात्रवृत्ति और उद्यमिता सहायता का प्रावधान।
- •व्यापक पहुंच और गहन सीखने के अनुभवों के लिए डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म और वर्चुअल रियलिटी (VR) आधारित प्रशिक्षण मॉड्यूल का एकीकरण।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'हरित कौशल विकास अभियान' कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा, MoEFCC के सहयोग से शुरू किया गया है।
- इसका लक्ष्य 2030 तक 10 लाख युवाओं को हरित नौकरियों के लिए कुशल बनाना है।
- मुख्य क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा, सतत कृषि और अपशिष्ट प्रबंधन शामिल हैं।
- यह पहल भारत के नेट-ज़ीरो लक्ष्यों के अनुरूप है।
- इसमें ITI और पॉलिटेक्निक का उन्नयन और 'हरित कौशल अकादमियों' की स्थापना शामिल है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'हरित कौशल विकास अभियान' वैश्विक जलवायु कार्रवाई के बीच आर्थिक लचीलापन और नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए, निम्न-कार्बन अर्थव्यवस्था में संक्रमण के लिए भारत के कार्यबल को तैयार करने हेतु महत्वपूर्ण है।
- यह उभरते हरित क्षेत्रों में बढ़ते कौशल अंतराल को संबोधित करता है, नवाचार को बढ़ावा देता है और वैश्विक हरित अर्थव्यवस्था में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाता है।
- यह मिशन कृषि और स्थानीय अपशिष्ट प्रबंधन में स्थायी प्रथाओं को बढ़ावा देकर ग्रामीण रोजगार और आजीविका को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देने की क्षमता रखता है।
- चुनौतियों में तेजी से तकनीकी अप्रचलन, प्रशिक्षण कार्यक्रमों के उद्योग संरेखण को सुनिश्चित करना, और बुनियादी ढांचे तथा कुशल प्रशिक्षकों के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों को जुटाना शामिल है।
- प्रभावी कार्यान्वयन के लिए मजबूत अंतर-मंत्रालयी समन्वय, निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी और मजबूत निगरानी एवं मूल्यांकन तंत्र की आवश्यकता होगी।
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44. मंत्रिमंडल ने चक्रीय अर्थव्यवस्था के लिए 'राष्ट्रीय चक्र अर्थव्यवस्था मिशन (RCAM) 2026' को मंजूरी दी
चर्चा में क्यों? (Why in News)
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज 'राष्ट्रीय चक्र अर्थव्यवस्था मिशन (RCAM) 2026' के शुभारंभ को अपनी मंजूरी दे दी है। यह भारत को चक्रीय अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण में तेजी लाने के लिए एक प्रमुख राष्ट्रीय मिशन है। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में 'कम करें, पुन: उपयोग करें और पुनर्चक्रण करें' के सिद्धांतों को एकीकृत करना है, जिससे संसाधन दक्षता में वृद्धि होगी, अपशिष्ट उत्पादन कम होगा और भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप स्थायी विकास को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक, निर्माण एवं विध्वंस, और ऑटोमोटिव जैसे उच्च-प्रभाव वाले क्षेत्रों में चक्रीयता के लिए क्षेत्र-विशिष्ट रोडमैप का विकास।
- •चक्रीय अर्थव्यवस्था मॉडल और प्रौद्योगिकियों को अपनाने वाले व्यवसायों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन, सब्सिडी और अधिमान्य खरीद नीतियों का प्रावधान।
- •उन्नत पुनर्चक्रण प्रौद्योगिकियों, सामग्री नवाचार और अपशिष्ट-से-धन समाधानों के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास केंद्रों की स्थापना।
- •उद्योगों, उपभोक्ताओं और नीति निर्माताओं के लिए एक व्यापक जागरूकता अभियान और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का शुभारंभ।
- •प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान में तेजी लाने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPPs) और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'राष्ट्रीय चक्र अर्थव्यवस्था मिशन (RCAM) 2026' को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है।
- यह 'कम करें, पुन: उपयोग करें और पुनर्चक्रण करें' के सिद्धांतों को बढ़ावा देता है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक और निर्माण जैसे उच्च-प्रभाव वाले क्षेत्रों को लक्षित किया गया है।
- यह मिशन संसाधन दक्षता और अपशिष्ट कमी पर केंद्रित है।
- वित्तीय प्रोत्साहन और अनुसंधान एवं विकास केंद्र प्रमुख घटक हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- RCAM 2026 भारत के लिए आर्थिक विकास को संसाधन क्षरण और पर्यावरणीय गिरावट से अलग करने, सतत विकास लक्ष्यों के साथ संरेखित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- इसमें मरम्मत, पुनर्चक्रण और पुन: विनिर्माण जैसे नए क्षेत्रों में रोजगार सृजन की महत्वपूर्ण क्षमता है, जिससे हरित उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।
- यह मिशन नए संसाधनों और अस्थिर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भरता कम करके भारत की सामग्री सुरक्षा को बढ़ाएगा, जिससे आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
- कार्यान्वयन चुनौतियों में तकनीकी बाधाओं को दूर करना, मजबूत संग्रह और पृथक्करण बुनियादी ढांचे का विकास करना, और उपभोक्ता तथा औद्योगिक व्यवहार को बदलना शामिल है।
- भारत में चक्रीय अर्थव्यवस्था में सफल संक्रमण के लिए प्रभावी नियामक ढाँचे, मजबूत बाजार तंत्र और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग आवश्यक हैं।
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45. केंद्र सरकार ने सार्वभौमिक डिजिटल स्वास्थ्य पहुंच के लिए 'आरोग्य सेतु अभियान' शुरू किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने आज 'आरोग्य सेतु अभियान' का शुभारंभ किया। यह एक व्यापक राष्ट्रीय पहल है जिसका उद्देश्य भारत के डिजिटल स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे का पर्याप्त विस्तार करना और विशेष रूप से ग्रामीण व दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करना है। यह मिशन आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के लक्ष्यों को प्राप्त करने और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा वितरण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •प्रत्येक नागरिक के लिए आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते (ABHA IDs) के निर्माण और अपनाने में तेजी लाना।
- •प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में AI-संचालित नैदानिक उपकरणों और टेली-परामर्श सेवाओं का एकीकरण।
- •स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बीच निर्बाध अंतर-संचालनीयता सुनिश्चित करने के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय स्वास्थ्य डेटा विनिमय मंच का विकास।
- •जमीनी स्तर पर ई-फार्मेसी सेवाओं और डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड प्रबंधन को बढ़ावा देना।
- •व्यापक स्वीकृति और उपयोग को सुविधाजनक बनाने के लिए स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम और नागरिकों के लिए डिजिटल साक्षरता अभियान।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'आरोग्य सेतु अभियान' केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है।
- इसका लक्ष्य सार्वभौमिक डिजिटल स्वास्थ्य पहुंच सुनिश्चित करना है।
- मुख्य घटकों में ABHA ID निर्माण, AI निदान और टेली-परामर्श शामिल हैं।
- यह मिशन प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करने और डिजिटल बुनियादी ढांचे का विस्तार करने पर केंद्रित है।
- यह आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के लक्ष्यों का विस्तार और त्वरण है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'आरोग्य सेतु अभियान' डिजिटल माध्यमों से भौगोलिक और अवसंरचनात्मक अंतरालों को पाटकर सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- इसमें AI और डेटा एनालिटिक्स का लाभ उठाकर निवारक स्वास्थ्य सेवा और प्रारंभिक रोग पहचान को बदलने की क्षमता है, जिससे बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणाम प्राप्त होंगे।
- डिजिटल साक्षरता असमानताएँ, डेटा गोपनीयता और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ, तथा दूरदराज के क्षेत्रों में मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे को सुनिश्चित करना जैसी चुनौतियों के लिए सावधानीपूर्वक योजना और निष्पादन की आवश्यकता है।
- यह मिशन गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक समान पहुंच को बढ़ावा देता है, जेब से होने वाले खर्च को कम करता है और स्वास्थ्य सेवा वितरण में दक्षता बढ़ाता है।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी और सामुदायिक सहभागिता डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र के सफल कार्यान्वयन और दीर्घकालिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होगी।
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46. नीति आयोग ने 'विजन 2047: समावेशी शहरीकरण और स्थायी झुग्गी पुनर्विकास रिपोर्ट' जारी की
चर्चा में क्यों? (Why in News)
नीति आयोग ने आज अपनी व्यापक रिपोर्ट 'विजन 2047: समावेशी शहरीकरण और स्थायी झुग्गी पुनर्विकास रिपोर्ट' जारी की, जिसमें अगले दो दशकों में भारत में शहरी आवास चुनौतियों और झुग्गी पुनर्वास को संबोधित करने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप की रूपरेखा दी गई है। यह रिपोर्ट तेजी से शहरीकरण के बीच सभी शहरी निवासियों के लिए गरिमामय जीवन स्थितियों को सुनिश्चित करने के लिए अभिनव दृष्टिकोणों पर प्रकाश डालती है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**एकीकृत योजना दृष्टिकोण:** तदर्थ झुग्गी पुनर्वास से एकीकृत शहरी नियोजन की ओर एक प्रतिमान बदलाव की वकालत करना जो झुग्गी क्षेत्रों को औपचारिक शहर संरचना के हिस्से के रूप में शामिल करता है, मिश्रित-उपयोग विकास को बढ़ावा देता है।
- •**समुदाय-केंद्रित पुनर्विकास:** पुनर्विकास परियोजनाओं के डिजाइन, निर्णय लेने और कार्यान्वयन में झुग्गी निवासियों को शामिल करते हुए सहभागी योजना प्रक्रियाओं पर जोर देना, सामाजिक-सांस्कृतिक प्रासंगिकता और स्थिरता सुनिश्चित करना।
- •**अभिनव वित्तपोषण मॉडल:** सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी), भूमि मूल्य कैप्चर वित्तपोषण, हस्तांतरणीय विकास अधिकार (टीडीआर), और स्थायी शहरी अवसंरचना के लिए ग्रीन बॉन्ड का लाभ उठाने सहित विविध वित्तपोषण तंत्रों की सिफारिश करना।
- •**प्रौद्योगिकी एकीकरण:** सटीक झुग्गी मानचित्रण के लिए भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) का उपयोग, वास्तविक समय की निगरानी के लिए ड्रोन सर्वेक्षण, और कुशल परियोजना प्रबंधन और संसाधन आवंटन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)।
- •**कानूनी और नीतिगत सुधार:** मौजूदा भूमि अधिग्रहण कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव, अनुमोदन प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना, और पुनर्विकसित क्षेत्रों में किरायेदारों और मकान मालिकों दोनों के अधिकारों की रक्षा के लिए किरायेदारी सुधारों के लिए एक राष्ट्रीय ढाँचा।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- नीति आयोग भारत सरकार का सर्वोच्च सार्वजनिक नीति थिंक टैंक है।
- यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री आवास योजना - शहरी (पीएमएवाई-यू) और अटल मिशन फॉर रीजूवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) के सिद्धांतों पर आधारित है।
- यह सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) 11: स्थायी शहर और समुदाय पर जोर देता है।
- रिपोर्ट शहरी पुनर्विकास के लिए एक व्यवहार्य रणनीति के रूप में 'भूमि पूलिंग' का लाभ उठाने का सुझाव देती है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **समावेशी शहरी विकास और सामाजिक इक्विटी:** रिपोर्ट की सिफारिशें यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं कि भारत का तीव्र शहरीकरण समावेशी हो, स्थानिक असमानताओं के जारी रहने को रोके और शहरी गरीबों के लिए बुनियादी सेवाओं और अवसरों तक समान पहुँच प्रदान करे।
- **पर्यावरण स्थिरता और लचीलापन:** स्थायी झुग्गी पुनर्विकास शहरी पर्यावरणीय गुणवत्ता बढ़ाने, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति भेद्यता को कम करने और हरित अवसंरचना को एकीकृत करने के लिए महत्वपूर्ण है, जो समग्र शहरी लचीलेपन में योगदान देता है।
- **शासन और कार्यान्वयन चुनौतियाँ:** इन जटिल सुधारों को लागू करने के लिए महत्वपूर्ण अंतर-एजेंसी समन्वय, स्थानीय स्तर पर क्षमता निर्माण, राजनीतिक अर्थव्यवस्था की चुनौतियों पर काबू पाने और परियोजनाओं के पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त निष्पादन को सुनिश्चित करने की आवश्यकता होगी।
- **जनभागीदारी की भूमिका:** समुदाय-केंद्रित पुनर्विकास पर जोर सार्वजनिक भागीदारी के महत्व को एक लोकतांत्रिक अनिवार्यता और शहरी नवीकरण परियोजनाओं की दीर्घकालिक सफलता और स्वीकृति के लिए एक व्यावहारिक आवश्यकता के रूप में रेखांकित करता है।
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47. 'प्रोजेक्ट सक्षम' का शुभारंभ: दिव्यांग व्यक्तियों (PwDs) के डिजिटल समावेशन के लिए राष्ट्रीय ढाँचा
चर्चा में क्यों? (Why in News)
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से आज 'प्रोजेक्ट सक्षम' का शुभारंभ किया। इस राष्ट्रीय ढाँचे का उद्देश्य पूरे भारत में दिव्यांग व्यक्तियों (PwDs) के लिए डिजिटल विभाजन को पाटना है, जिससे डिजिटल संसाधनों, सेवाओं और अवसरों तक उनकी समान पहुँच सुनिश्चित हो सके, जिससे उनके सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिले।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**डिजिटल साक्षरता और कौशल विकास:** दिव्यांग व्यक्तियों को डिजिटल अर्थव्यवस्था में नौकरियों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करते हुए डिजिटल साक्षरता, कोडिंग और विशेष आईटी कौशल प्रदान करने के लिए बड़े पैमाने पर आउटरीच कार्यक्रम।
- •**सुलभ डिजिटल अवसंरचना:** सभी सरकारी वेबसाइटों, मोबाइल एप्लिकेशन और सार्वजनिक डिजिटल सेवाओं के लिए पहुँच योग्य मानकों (RPwD अधिनियम, 2016 के अनुसार) को अनिवार्य करना। सहायक प्रौद्योगिकियों के विकास को बढ़ावा देना।
- •**किफायती सहायक उपकरण:** सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते हुए पात्र दिव्यांग व्यक्तियों को सहायक डिजिटल उपकरण (स्क्रीन रीडर, आवाज पहचान सॉफ्टवेयर, सुलभ कीबोर्ड) का रियायती प्रावधान।
- •**समावेशी शिक्षा और रोजगार:** शैक्षिक पाठ्यक्रमों में डिजिटल पहुँच को एकीकृत करना और डिजिटल प्लेटफॉर्म और कौशल मिलान के माध्यम से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए दूरस्थ कार्य के अवसरों को बढ़ावा देना।
- •**जागरूकता और संवेदीकरण:** डिजिटल पहुँच के बारे में जागरूकता बढ़ाने, कलंक का मुकाबला करने और एक समावेशी डिजिटल समाज को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय अभियान।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- प्रोजेक्ट सक्षम सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है।
- यह दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD अधिनियम) के अनुरूप है।
- दिव्यांग व्यक्तियों के लिए रोजगार संवर्धन का राष्ट्रीय केंद्र (NCPEDP) एक प्रमुख कार्यान्वयन भागीदार है।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए WCAG (वेब सामग्री पहुँच दिशानिर्देश) मानकों पर जोर दिया गया है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **डिजिटल विभाजन को पाटना:** यह परियोजना यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि भारत के डिजिटल परिवर्तन के लाभ दिव्यांग व्यक्तियों तक पहुँचें, एक तेजी से डिजिटल दुनिया में उनके आगे के हाशिए पर जाने से रोकें, और सूचना और संचार के उनके अधिकार को बनाए रखें।
- **मानव अधिकार और आर्थिक सशक्तिकरण:** डिजिटल समावेशन पर ध्यान केंद्रित करके, 'प्रोजेक्ट सक्षम' दिव्यांग व्यक्तियों के मानव अधिकारों को मजबूत करता है, आर्थिक गतिविधियों, शिक्षा और नागरिक जीवन में उनकी अधिक भागीदारी को सक्षम बनाता है, इस प्रकार समावेशी राष्ट्रीय विकास में योगदान देता है।
- **चुनौतियाँ और आगे का मार्ग:** प्रमुख चुनौतियों में विकलांगताओं की विशाल विविधता, डिजिटल अवसंरचना में क्षेत्रीय असमानताएँ, सहायक प्रौद्योगिकियों की उच्च लागत, और देखभाल करने वालों और शिक्षकों के लिए निरंतर तकनीकी उन्नयन और प्रशिक्षण की आवश्यकता शामिल है।
- **प्रौद्योगिकी और एआई की भूमिका:** यह पहल व्यक्तिगत सीखने, भविष्य कहनेवाला पहुँच सुविधाओं और उपयुक्त रोजगार के अवसरों के साथ दिव्यांग व्यक्तियों के अधिक कुशल मिलान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों का लाभ उठा सकती है।
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48. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा नीति 2026' को मंजूरी दी
चर्चा में क्यों? (Why in News)
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज 'गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा नीति 2026' को मंजूरी दे दी, जिसका उद्देश्य भारत के कार्यबल के तेजी से बढ़ते वर्ग के लिए एक संरचित कल्याणकारी ढाँचा प्रदान करना है। यह ऐतिहासिक नीति गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों द्वारा सामना की जाने वाली अनूठी चुनौतियों का समाधान करती है, जिनमें आमतौर पर पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध और संबंधित लाभों का अभाव होता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**परिभाषा और दायरा:** नीति 'गिग श्रमिकों' और 'प्लेटफॉर्म श्रमिकों' के लिए स्पष्ट परिभाषाएँ प्रदान करती है, उन्हें पारंपरिक कर्मचारियों और स्व-नियोजित व्यक्तियों से अलग करती है, जिससे लक्षित नीतिगत हस्तक्षेप सुनिश्चित होता है।
- •**सामाजिक सुरक्षा कोष:** सामाजिक सुरक्षा लाभों के वित्तपोषण के लिए श्रमिकों, प्लेटफॉर्म एग्रीगेटरों और सरकार के योगदान से एक समर्पित 'गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिक सामाजिक सुरक्षा कोष' की स्थापना।
- •**सुवाह्य लाभ:** स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा, जीवन बीमा और भविष्य निधि विकल्पों सहित सुवाह्य सामाजिक सुरक्षा लाभों की शुरुआत, जो किसी एक प्लेटफॉर्म या नियोक्ता से बंधे नहीं हैं।
- •**कौशल विकास और शिकायत निवारण:** गिग अर्थव्यवस्था के लिए तैयार किए गए कौशल विकास पहलों पर जोर, और श्रमिकों के लिए एक मजबूत, डिजिटल-प्रथम शिकायत निवारण तंत्र का निर्माण।
- •**डेटा-आधारित नीति निर्माण:** भविष्य के नीतिगत समायोजन को सूचित करने और लाभों के न्यायसंगत वितरण को सुनिश्चित करने के लिए गिग अर्थव्यवस्था से संबंधित डेटा संग्रह और विश्लेषण का प्रावधान।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- यह नीति श्रम और रोजगार मंत्रालय के दायरे में आती है।
- यह सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के प्रावधानों पर आधारित है, विशेष रूप से अध्याय IX जो असंगठित श्रमिकों, गिग श्रमिकों और प्लेटफॉर्म श्रमिकों से संबंधित है।
- इस कोष का प्रबंधन सरकार, श्रमिकों और एग्रीगेटरों के प्रतिनिधियों सहित एक त्रिपक्षीय बोर्ड द्वारा किया जाएगा।
- भारत की गिग अर्थव्यवस्था के 2030 तक लाखों श्रमिकों के साथ महत्वपूर्ण रूप से विस्तार होने का अनुमान है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **अनिश्चित कार्य का समाधान:** यह नीति गिग कार्य की अनौपचारिक प्रकृति को औपचारिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो एक सुरक्षा जाल प्रदान करती है और अनिश्चितता को कम करती है, जो कल्याणकारी राज्य की जिम्मेदारियों के अनुरूप है।
- **आर्थिक निहितार्थ और एग्रीगेटर की जिम्मेदारी:** कार्यकर्ता कल्याण को बढ़ावा देने के साथ-साथ, यह नीति एग्रीगेटरों पर आर्थिक बोझ और सेवा लागतों पर संभावित प्रभाव की भी जाँच करती है, जिसके लिए गिग अर्थव्यवस्था की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
- **कार्य का भविष्य और सामाजिक न्याय:** यह नीति कार्य की विकासशील प्रकृति को स्वीकार करती है और रोजगार वर्गीकरण की परवाह किए बिना सभी श्रमिकों के लिए गरिमा और अधिकार सुनिश्चित करते हुए, इन नए रोजगार रूपों को सामाजिक न्याय के व्यापक ढांचे में एकीकृत करने का लक्ष्य रखती है।
- **कार्यान्वयन चुनौतियाँ:** चुनौतियों में सार्वभौमिक पंजीकरण सुनिश्चित करना, विभिन्न प्लेटफार्मों से प्रभावी योगदान संग्रह, अंतर-राज्यीय सुवाह्यता सुनिश्चित करना, और श्रमिकों को उनके अधिकारों के बारे में शिक्षित करना शामिल है।
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49. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रणनीतिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए उन्नत सामग्री के लिए राष्ट्रीय मिशन (एनएमएएम) को मंजूरी दी
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारत की तकनीकी संप्रभुता और 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने "उन्नत सामग्री के लिए राष्ट्रीय मिशन (एनएमएएम)" को मंजूरी दे दी है। यह व्यापक नीतिगत ढांचा रक्षा, अंतरिक्ष, स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और चिकित्सा उपकरणों जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण उन्नत सामग्रियों के स्वदेशी अनुसंधान, विकास और उत्पादन को बढ़ावा देना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**रणनीतिक फोकस क्षेत्र:** मिशन स्मार्ट सामग्री (जैसे सेंसर, एक्चुएटर), उच्च-प्रदर्शन कंपोजिट, क्वांटम सामग्री, महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों और उन्नत कार्यात्मक सामग्री जैसे डोमेन में अनुसंधान और विकास तथा विनिर्माण को प्राथमिकता देगा।
- •**एकीकृत अनुसंधान और विकास पारिस्थितिकी तंत्र:** प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों और राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में उन्नत सामग्री अनुसंधान हब (एएमआरएच) के एक नेटवर्क की स्थापना, अंतर-संस्थागत सहयोग और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देना।
- •**उद्योग-अकादमिक-स्टार्टअप संबंध:** उन्नत सामग्री पर काम कर रहे स्टार्टअप और एमएसएमई के लिए एक समर्पित कोष और इनक्यूबेशन सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला में उनके एकीकरण को बढ़ावा मिलेगा और नवाचारों के व्यावसायीकरण को प्रोत्साहित किया जाएगा।
- •**कौशल विकास और आईपी संरक्षण:** उन्नत सामग्री विज्ञान और विनिर्माण में कुशल कार्यबल बनाने के लिए विशेष कौशल विकास कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। पेटेंट वाली सामग्रियों के लिए बौद्धिक संपदा (आईपी) संरक्षण और व्यावसायीकरण के लिए एक मजबूत ढांचा भी विकसित किया जाएगा।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- एनएमएएम केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित एक नया राष्ट्रीय मिशन है।
- यह उन्नत सामग्रियों के स्वदेशी अनुसंधान और विकास तथा उत्पादन पर केंद्रित है।
- प्रमुख क्षेत्रों में रक्षा, अंतरिक्ष, स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं।
- मिशन का उद्देश्य उन्नत सामग्री अनुसंधान हब (एएमआरएच) स्थापित करना है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **सामरिक स्वायत्तता और आत्मनिर्भर भारत:** एनएमएएम महत्वपूर्ण सामग्रियों के लिए विदेशी आयात पर भारत की निर्भरता को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे रक्षा, अंतरिक्ष और ऊर्जा क्षेत्रों में रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ेगी, जो 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के अनुरूप है।
- **आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता और नवाचार:** एक स्वदेशी उन्नत सामग्री पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देकर, मिशन उच्च-तकनीकी विनिर्माण में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा, उच्च-मूल्य वाली नौकरियां पैदा करेगा और विभिन्न उद्योगों में नवाचार को बढ़ावा देगा।
- **चुनौतियाँ और अवसर:** जबकि मिशन आर्थिक विकास और वैज्ञानिक उन्नति के लिए अपार अवसर प्रस्तुत करता है, चुनौतियों में महत्वपूर्ण पूंजी निवेश, विशेष मानव संसाधनों का विकास और प्रयोगशालाओं से उद्योगों तक कुशल प्रौद्योगिकी हस्तांतरण सुनिश्चित करना शामिल है।
- **वैश्विक नेतृत्व:** उन्नत सामग्रियों में निवेश भारत के लिए अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेता के रूप में उभरने के लिए महत्वपूर्ण है, जो सतत ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा और डिजिटल परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण आवश्यकताओं को संबोधित करेगा।
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50. पीएम-विश्वकर्मा योजना का विस्तार, नए कारीगर शिल्पों का समावेश और डिजिटल बाजार पहुंच को बढ़ावा
चर्चा में क्यों? (Why in News)
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों का समर्थन करने के उद्देश्य से एक प्रमुख पहल, पीएम-विश्वकर्मा योजना के महत्वपूर्ण विस्तार को मंजूरी दे दी है। इस विस्तार में मौजूदा सूची में 15 नए पारंपरिक व्यवसायों को जोड़ना और कारीगरों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच प्रदान करने के लिए एक समर्पित ई-कॉमर्स पोर्टल का शुभारंभ करना शामिल है, जिससे उनके आर्थिक अवसरों में वृद्धि होगी।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**नए व्यवसायों का समावेश:** इस योजना में अब 15 अतिरिक्त पारंपरिक शिल्प शामिल हैं, जैसे विशेष क्षेत्रीय मिट्टी के बर्तन, पारंपरिक कढ़ाई के विशिष्ट रूप, स्वदेशी खिलौना-निर्माण और विशेष धातु शिल्प, जिससे कारीगरों की एक विस्तृत श्रृंखला इसके दायरे में आ गई है।
- •**डिजिटल बाजार संपर्क:** 'विश्वकर्मा हाट' नामक एक नया, केंद्रीकृत ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया है। यह प्लेटफॉर्म कारीगर उत्पादों की सीधी बिक्री को सुविधाजनक बनाएगा, बिचौलियों को खत्म करेगा और कारीगरों के लिए बेहतर मूल्य प्राप्ति सुनिश्चित करेगा।
- •**उन्नत डिजिटल कौशल:** पारंपरिक कौशल प्रशिक्षण के साथ-साथ, कारीगरों को नए प्लेटफॉर्म का प्रभावी ढंग से उपयोग करने और अपने ग्राहक आधार का विस्तार करने के लिए उन्नत डिजिटल साक्षरता और ई-कॉमर्स मार्केटिंग प्रशिक्षण प्राप्त होगा।
- •**ब्रांड प्रचार और गुणवत्ता आश्वासन:** 'विश्वकर्मा' उत्पादों के ब्रांडिंग, गुणवत्ता प्रमाणीकरण और अद्वितीय शिल्पों के लिए बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा के लिए पहल को मजबूत किया जाएगा ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सुनिश्चित हो सके और प्रामाणिकता बनी रहे।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- पीएम-विश्वकर्मा योजना सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) के अंतर्गत आती है।
- हाल के विस्तार में 15 नए पारंपरिक व्यवसायों को जोड़ा गया है।
- 'विश्वकर्मा हाट' कारीगरों के लिए नया ई-कॉमर्स पोर्टल है।
- लाभों में कौशल प्रशिक्षण, टूलकिट प्रोत्साहन और संपार्श्विक-मुक्त ऋण शामिल हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण:** यह विस्तार भारत के समृद्ध पारंपरिक शिल्पों की निरंतरता और पुनरुद्धार सुनिश्चित करता है, जो इसकी सांस्कृतिक पहचान के अभिन्न अंग हैं और अक्सर हाशिए पर पड़े समुदायों को आजीविका प्रदान करते हैं।
- **आर्थिक सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन:** कौशल, वित्तीय सहायता और सीधे बाजार पहुंच प्रदान करके, यह योजना कारीगरों के आर्थिक सशक्तिकरण में सीधे योगदान करती है, अनौपचारिक बाजारों और बिचौलियों पर उनकी निर्भरता को कम करती है।
- **एमएसएमई के लिए डिजिटल परिवर्तन:** ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का एकीकरण पारंपरिक शिल्प क्षेत्र को डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे कारीगरों को विकास और वैश्विक पहुंच के लिए आधुनिक तकनीक का लाभ उठाने में सक्षम बनाया जा सके।
- **ग्रामीण उद्यमिता और समावेशी विकास:** यह योजना जमीनी स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देती है, विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, समावेशी आर्थिक विकास में योगदान करती है और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करती है।
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51. केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शहरी लचीला अवसंरचना मिशन (नुरिम) के चरण II का शुभारंभ किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने राष्ट्रीय शहरी लचीला अवसंरचना मिशन (नुरिम) के दूसरे चरण का औपचारिक रूप से शुभारंभ किया है। इस चरण का उद्देश्य नुरिम चरण I की सफलताओं और सीखों पर आधारित होकर, भारत के अतिरिक्त 100 शहरों में जलवायु-अनुकूल शहरी नियोजन और हरित अवसंरचना विकास पर अपना ध्यान केंद्रित करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**विस्तारित कार्यक्षेत्र:** चरण II में 100 नए शहर शामिल होंगे, जिसमें जलवायु परिवर्तन के प्रभावों और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील शहरों को एक व्यापक भेद्यता मूल्यांकन सूचकांक के आधार पर प्राथमिकता दी जाएगी।
- •**मुख्य फोकस क्षेत्र:** एकीकृत शहरी जल प्रबंधन, हरित सार्वजनिक स्थानों का विकास, लचीले परिवहन नेटवर्क, स्मार्ट अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली और शहरी खतरों के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।
- •**क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी एकीकरण:** शहरी स्थानीय निकायों और शहर योजनाकारों के लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जलवायु जोखिम मानचित्रण और अवसंरचना नियोजन के लिए भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उन्नत उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
- •**सहभागी नियोजन:** मिशन लचीली शहरी परियोजनाओं के डिजाइन और कार्यान्वयन में नागरिक भागीदारी और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) को प्रोत्साहित करता है, जिससे स्वामित्व औरF स्थिरता की भावना को बढ़ावा मिलता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- नुरिम आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) की एक पहल है।
- चरण II का लक्ष्य जलवायु-लचीले शहरी विकास के लिए 100 अतिरिक्त शहरों को लक्षित करना है।
- प्रमुख घटकों में हरित अवसंरचना, लचीला परिवहन और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियाँ शामिल हैं।
- मिशन जलवायु जोखिम मूल्यांकन के लिए जीआईएस और एआई का लाभ उठाता है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **जलवायु भेद्यता का समाधान:** नुरिम चरण II, भारत के बढ़ते जलवायु परिवर्तन प्रभावों, जैसे कि चरम मौसमी घटनाओं, समुद्र-स्तर में वृद्धि और शहरी बाढ़ के खिलाफ शहरी लचीलेपन को बढ़ाने, जीवन और आर्थिक संपत्तियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
- **सतत शहरीकरण:** हरित अवसंरचना और टिकाऊ प्रथाओं को एकीकृत करके, मिशन पर्यावरणीय रूप से सचेत शहरी विकास की दिशा में एक प्रतिमान परिवर्तन को बढ़ावा देता है, जो एसडीजी (सतत विकास लक्ष्यों) और जलवायु कार्रवाई के प्रति भारत की प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।
- **आर्थिक निहितार्थ:** लचीले अवसंरचना विकास निवेश को आकर्षित कर सकता है, आपदा के बाद की बहाली लागत को कम कर सकता है और हरित रोजगार पैदा कर सकता है, जो शहरी आर्थिक स्थिरता और विकास में योगदान देगा।
- **शासन और प्रौद्योगिकी:** मिशन प्रभावी शहरी नियोजन और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए मजबूत शहरी शासन, अंतर-एजेंसी समन्वय और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाने के महत्व को रेखांकित करता है।
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52. भारत और क्वाड भागीदारों ने 'सागर प्रहरी' संयुक्त समुद्री निगरानी पहल का शुभारंभ किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया (क्वाड देशों) ने आज हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री डोमेन जागरूकता (Maritime Domain Awareness - MDA) और प्रतिक्रिया क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक नई संयुक्त पहल 'सागर प्रहरी' (Sagar Prahari) का शुभारंभ किया। यह पहल क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने पर केंद्रित है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**वास्तविक समय सूचना साझाकरण:** 'सागर प्रहरी' हिंद-प्रशांत में समुद्री गतिविधियों पर वास्तविक समय की जानकारी साझा करने के लिए एक तंत्र स्थापित करेगा, जिसमें वाणिज्यिक शिपिंग, अवैध मछली पकड़ना, समुद्री डकैती और अन्य गैर-राज्य अभिनेताओं द्वारा खतरे शामिल हैं।
- •**समन्वित गश्त और अभ्यास:** पहल के तहत क्षेत्रीय जल में समन्वित नौसेना और तट रक्षक गश्त के साथ-साथ संयुक्त समुद्री अभ्यास आयोजित किए जाएंगे ताकि अंतरसंचालनीयता (interoperability) और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमताओं में सुधार हो सके।
- •**क्षेत्रीय भागीदारों के लिए क्षमता निर्माण:** क्वाड देश हिंद-प्रशांत में छोटे द्वीप राज्यों और तटीय देशों के लिए समुद्री सुरक्षा में क्षमता निर्माण सहायता प्रदान करेंगे, जिसमें प्रशिक्षण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण शामिल है।
- •**मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR):** 'सागर प्रहरी' समुद्री आपदाओं और मानवीय संकटों के जवाब में समन्वित मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) प्रयासों को भी सुगम बनाएगा, जिससे क्षेत्र में स्थिरता और लचीलापन बढ़ेगा।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'सागर प्रहरी' क्वाड देशों (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) की एक संयुक्त समुद्री निगरानी पहल है।
- इसका मुख्य उद्देश्य हिंद-प्रशांत में समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA) बढ़ाना है।
- इसमें वास्तविक समय सूचना साझाकरण और समन्वित गश्त शामिल हैं।
- यह मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) पर भी केंद्रित है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **भारत की 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' भूमिका:** 'सागर प्रहरी' के माध्यम से, भारत हिंद-प्रशांत में एक जिम्मेदार 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करता है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सामान्य हित में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
- **मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत को बढ़ावा:** यह पहल एक नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था को बनाए रखने और क्षेत्र में नेविगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के क्वाड के साझा दृष्टिकोण को रेखांकित करती है, जो चीन के बढ़ते मुखरता के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
- **समुद्री चुनौतियों का मुकाबला:** यह पहल अवैध, बिना रिपोर्ट वाली और अनियमित (IUU) मछली पकड़ने, समुद्री डकैती, और आतंकवाद जैसी उभरती समुद्री चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए एक बहुपक्षीय दृष्टिकोण प्रदान करती है, जो आर्थिक सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता को खतरा पैदा करती हैं।
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53. भारत ने राष्ट्रीय क्वांटम-प्रतिरोधी साइबर रक्षा केंद्र (NQCDC) का उद्घाटन किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारत ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय क्वांटम-प्रतिरोधी साइबर रक्षा केंद्र (National Quantum-Resistant Cyber Defence Centre - NQCDC) का उद्घाटन किया। यह अत्याधुनिक सुविधा क्वांटम कंप्यूटिंग से उत्पन्न होने वाले खतरों से राष्ट्रीय महत्वपूर्ण अवसंरचना और संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए है। यह केंद्र क्वांटम-सुरक्षित क्रिप्टोग्राफी अनुसंधान और विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**क्वांटम खतरों का मुकाबला:** NQCDC का प्राथमिक उद्देश्य क्वांटम कंप्यूटरों द्वारा मौजूदा एन्क्रिप्शन मानकों को तोड़ने की बढ़ती क्षमता के खिलाफ भारत की रक्षात्मक साइबर क्षमताओं को मजबूत करना है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को महत्वपूर्ण खतरा हो सकता है।
- •**अनुसंधान और विकास हब:** यह केंद्र पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) एल्गोरिदम, क्वांटम कुंजी वितरण (QKD) और क्वांटम-सुरक्षित प्रोटोकॉल के लिए एक राष्ट्रीय नोडल R&D हब के रूप में कार्य करेगा, ताकि भविष्य के डिजिटल संचार को सुरक्षित किया जा सके।
- •**क्षमता निर्माण:** NQCDC साइबर सुरक्षा पेशेवरों को क्वांटम सुरक्षा प्रौद्योगिकियों में प्रशिक्षण प्रदान करने और उद्योग, शिक्षाविदों और सरकारी एजेंसियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, ताकि एक मजबूत क्वांटम-लचीला पारिस्थितिकी तंत्र बनाया जा सके।
- •**राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्व:** यह पहल वित्तीय प्रणालियों, ऊर्जा ग्रिड, रक्षा नेटवर्क और सरकारी संचार सहित महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- NQCDC का पूर्ण रूप राष्ट्रीय क्वांटम-प्रतिरोधी साइबर रक्षा केंद्र है।
- इसका उद्घाटन नई दिल्ली में हुआ है।
- इसका उद्देश्य क्वांटम कंप्यूटिंग खतरों से रक्षा करना है।
- यह पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) और क्वांटम कुंजी वितरण (QKD) पर केंद्रित है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **राष्ट्रीय साइबर संप्रभुता:** NQCDC की स्थापना भारत को क्वांटम युग में अपनी साइबर संप्रभुता बनाए रखने में मदद करती है, जिससे महत्वपूर्ण सुरक्षा समाधानों और डेटा सुरक्षा के लिए बाहरी संस्थाओं पर निर्भरता कम होती है।
- **सामरिक स्वायत्तता:** महत्वपूर्ण डेटा और संचार के लिए क्वांटम-सुरक्षित समाधान विकसित करके, भारत अपनी सामरिक स्वायत्तता को मजबूत करता है और भविष्य के साइबर युद्ध के परिदृश्य के लिए तैयार होता है, जिससे एक विकसित तकनीकी परिदृश्य में राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
- **अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और मानकीकरण:** यह केंद्र क्वांटम सुरक्षा में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए भी एक मंच प्रदान कर सकता है, जिससे वैश्विक मानकों के विकास और इस शुरुआती लेकिन महत्वपूर्ण क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने में योगदान मिलेगा।
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54. 'दिव्य अस्त्र' स्वायत्त झुंड ड्रोन प्रणाली का उन्नत परीक्षण सफल
चर्चा में क्यों? (Why in News)
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और निजी क्षेत्र के एक कंसोर्टियम ने संयुक्त रूप से विकसित 'दिव्य अस्त्र' (Divyastra) नामक अगली पीढ़ी की स्वायत्त झुंड ड्रोन प्रणाली का सफल उन्नत परीक्षण किया। यह प्रणाली भारत की सटीकता, निगरानी और सामरिक आक्रमण क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगी।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**AI-संचालित स्वायत्तता:** कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा संचालित, यह ड्रोन प्रणाली मानव हस्तक्षेप के बिना जटिल मिशनों को स्वायत्त रूप से निष्पादित कर सकती है, जिसमें लक्ष्य पहचान और निर्णय लेना शामिल है।
- •**नेटवर्क-केंद्रित संचालन:** कई ड्रोन एक एकीकृत नेटवर्क के रूप में कार्य करते हैं, जो वास्तविक समय की डेटा साझाकरण और समन्वित पैंतरेबाज़ी की अनुमति देते हैं, जिससे एक बड़ा और अधिक प्रभावी सामरिक कवरेज मिलता है।
- •**मल्टी-टारगेट एंगेजमेंट:** प्रणाली एक साथ कई लक्ष्यों को संलग्न कर सकती है, जो इसे विरोधी की वायु रक्षा प्रणालियों और बख्तरबंद काफिलों जैसे व्यापक-क्षेत्र के खतरों के खिलाफ प्रभावी बनाती है।
- •**प्रति-जामिंग क्षमताएं:** उन्नत एन्क्रिप्शन और फ्रीक्वेंसी-होपिंग तकनीकों के साथ सुसज्जित, यह प्रणाली इलेक्ट्रॉनिक युद्ध वातावरण में भी संचार और संचालन बनाए रख सकती है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'दिव्य अस्त्र' एक स्वदेशी रूप से विकसित स्वायत्त झुंड ड्रोन प्रणाली है।
- इसे DRDO और निजी क्षेत्र के कंसोर्टियम द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।
- यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और नेटवर्क-केंद्रित संचालन पर आधारित है।
- इसके प्राथमिक अनुप्रयोग सटीक हमला, निगरानी और सामरिक आक्रमण हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा:** यह प्रणाली रक्षा प्रौद्योगिकी में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करती है, विशेष रूप से उभरती हुई दोहरी-उपयोग वाली प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में, जिससे विदेशी आयात पर निर्भरता कम होती है।
- **असममित युद्ध में सामरिक लाभ:** 'दिव्य अस्त्र' विरोधी के पारंपरिक सैन्य लाभों का मुकाबला करने के लिए भारत को असममित युद्ध में एक महत्वपूर्ण बढ़त प्रदान करता है, जिससे शत्रु के लिए प्रतिकार करना मुश्किल हो जाता है।
- **बढ़ती निर्यात क्षमता:** इस तरह की अत्याधुनिक स्वदेशी प्रणालियों का सफल विकास भारत को रक्षा निर्यात बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर सकता है, जिससे रणनीतिक और आर्थिक दोनों लाभ मिल सकते हैं।
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55. संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन ने साइबर युद्ध मानदंडों और राज्य उत्तरदायित्व के लिए नए अंतर्राष्ट्रीय ढांचे को अपनाया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
लंबी बातचीत के बाद, एक ऐतिहासिक संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन आज "साइबर युद्ध मानदंडों और राज्य उत्तरदायित्व के लिए अंतर्राष्ट्रीय ढांचा" को अपनाने के साथ संपन्न हुआ, जो साइबरस्पेस में राज्य के आचरण के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी दिशानिर्देश स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •यह ढांचा साइबरस्पेस में निषिद्ध कृत्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है, जिसमें महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमले और चुनावी प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप शामिल है।
- •यह साइबर हमलों के लिए राज्य के उत्तरदायित्व के सिद्धांतों को स्थापित करता है जो उनके क्षेत्र से उत्पन्न होते हैं, भले ही गैर-राज्य अभिकर्ताओं द्वारा किए गए हों, कुछ शर्तों के तहत।
- •दुर्भावनापूर्ण साइबर गतिविधियों के आरोप और प्रतिक्रिया में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए तंत्रों की रूपरेखा तैयार की गई है, जिससे पारदर्शिता और विश्वास को बढ़ावा मिलता है।
- •यह ढांचा साइबर अभियानों पर संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून सहित मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कानून की प्रयोज्यता पर जोर देता है।
- •यह विकासशील राष्ट्रों के लिए अपनी साइबर लचीलापन में सुधार करने और वैश्विक साइबर शासन में प्रभावी ढंग से भाग लेने के लिए बढ़ी हुई क्षमता निर्माण का आह्वान करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- यह ढांचा एक संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन द्वारा अपनाया गया था।
- यह साइबर युद्ध में राज्य के आचरण के लिए मानदंड स्थापित करता है।
- साइबर हमलों के लिए राज्य उत्तरदायित्व और आरोप पर केंद्रित है।
- संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून की प्रयोज्यता पर जोर देता है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- यह संयुक्त राष्ट्र ढांचा एक ऐसे क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण राजनयिक उपलब्धि का प्रतिनिधित्व करता है जो पहले अस्पष्टता और आम सहमति की कमी की विशेषता थी, जिससे वृद्धि के जोखिम को संभावित रूप से कम किया जा सकता है और वैश्विक साइबर स्थिरता में सुधार हो सकता है।
- हालांकि, सार्वभौमिक पालन, सत्यापन और प्रवर्तन में चुनौतियां बनी हुई हैं, विशेष रूप से साइबर प्रौद्योगिकियों की दोहरी-उपयोग प्रकृति और सूचना युद्ध क्षमताओं में विभिन्न राष्ट्रीय हितों को देखते हुए।
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56. G20 शिखर सम्मेलन 'ग्लोबल ग्रीन इन्वेस्टमेंट फ्रेमवर्क' (GGIF) पर ऐतिहासिक समझौते के साथ समाप्त
चर्चा में क्यों? (Why in News)
ब्रासीलिया में आज संपन्न हुए G20 नेताओं के शिखर सम्मेलन ने 'ग्लोबल ग्रीन इन्वेस्टमेंट फ्रेमवर्क (GGIF)' की स्थापना की घोषणा की, जो विशेष रूप से विकासशील देशों में स्थायी बुनियादी ढांचे और हरित प्रौद्योगिकियों की ओर अभूतपूर्व स्तर पर निजी और सार्वजनिक पूंजी जुटाने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक पहल है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •GGIF मिश्रित वित्त तंत्र और बढ़ी हुई क्रेडिट गारंटी के माध्यम से उभरते बाजारों में हरित निवेश के जोखिम को कम करना चाहता है।
- •यह पारदर्शिता में सुधार और संस्थागत निवेशकों को आकर्षित करने के लिए हरित परिसंपत्तियों और परियोजनाओं के लिए एक मानकीकृत वर्गीकरण का प्रस्ताव करता है।
- •इस ढांचे में विकासशील देशों के साथ हरित प्रौद्योगिकियों के साझाकरण को सुविधाजनक बनाने के लिए एक 'प्रौद्योगिकी हस्तांतरण त्वरक' शामिल है।
- •सदस्य देशों के बीच निरंतर नीति समन्वय और नियामक संरेखण को बढ़ावा देने के लिए एक नया 'G20 हरित वित्त संवाद' स्थापित किया जाएगा।
- •यह वैश्विक वित्तीय बाजारों का लाभ उठाते हुए, हरित बांड और स्थिरता-लिंक्ड ऋण सहित अभिनव वित्तपोषण उपकरणों की खोज के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- GGIF एक G20 पहल है।
- इसका उद्देश्य हरित बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकियों के लिए पूंजी जुटाना है।
- यह मिश्रित वित्त और मानकीकृत हरित वर्गीकरण पर जोर देता है।
- एक 'प्रौद्योगिकी हस्तांतरण त्वरक' एक घटक है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- GGIF वित्तीय तंत्रों के माध्यम से जलवायु कार्रवाई में तेजी लाने, प्रतिज्ञाओं से ठोस निवेश ढांचे की ओर बढ़ने, और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए जलवायु वित्त में महत्वपूर्ण अंतर को संबोधित करने की वैश्विक मान्यता को दर्शाता है।
- हालांकि आशाजनक, GGIF की सफलता मजबूत शासन, न्यायसंगत बोझ-साझाकरण और प्रभावी कार्यान्वयन तंत्रों पर निर्भर करेगी ताकि G20 सदस्यों के बीच मौजूदा भू-राजनीतिक और आर्थिक भिन्नताओं को दूर किया जा सके।
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57. नई भारत-प्रशांत रणनीतिक सहयोग पहल (IPSIC) उभरती क्षेत्रीय गतिशीलता के बीच शुरू
चर्चा में क्यों? (Why in News)
आज एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय राजधानी में एक उच्च-स्तरीय शिखर सम्मेलन संपन्न हुआ, जिसमें भारत-प्रशांत रणनीतिक सहयोग पहल (IPSIC) का औपचारिक शुभारंभ हुआ, जो भारत-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, आर्थिक लचीलापन और आपदा प्रतिक्रिया क्षमताओं को बढ़ाने के उद्देश्य से एक नया बहुपक्षीय ढांचा है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •IPSIC का लक्ष्य समुद्री डोमेन जागरूकता पर भागीदार देशों के बीच अधिक अंतःक्रियाशीलता और सूचना साझाकरण को बढ़ावा देना है।
- •यह पहल समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने और पर्यावरणीय क्षरण जैसे गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों से निपटने में सहयोगात्मक प्रयासों पर जोर देती है।
- •छोटे द्वीप विकासशील राज्यों (SIDS) में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और क्षमता निर्माण का समर्थन करने के लिए एक समर्पित कोष, 'भारत-प्रशांत लचीलापन कोष' स्थापित किया गया है।
- •इस ढांचे में संयुक्त मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) अभ्यासों के प्रावधान शामिल हैं, जिससे क्षेत्रीय प्रतिक्रिया तंत्र मजबूत होते हैं।
- •यह क्षेत्रीय विवादों को सुलझाने में संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) सहित अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन को स्पष्ट रूप से बढ़ावा देता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- IPSIC भारत-प्रशांत क्षेत्र के लिए एक नया बहुपक्षीय ढांचा है।
- यह समुद्री सुरक्षा, आर्थिक लचीलापन और आपदा प्रतिक्रिया पर केंद्रित है।
- UNCLOS का पालन एक मुख्य सिद्धांत है।
- SIDS के लिए 'भारत-प्रशांत लचीलापन कोष' एक प्रमुख घटक है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- IPSIC पारंपरिक सैन्य गठबंधनों से परे एक अधिक समावेशी और व्यापक दृष्टिकोण की ओर बढ़ते हुए, साझा चुनौतियों और सामूहिक समृद्धि पर जोर देते हुए, क्षेत्रीय सुरक्षा वास्तुकला में एक विकास का प्रतिनिधित्व करता है।
- ऐसे पहलों में भारत की भूमिका एक शुद्ध सुरक्षा प्रदाता और एक स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित भारत-प्रशांत के प्रस्तावक के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करती है, जो बहुपक्षीय जुड़ाव के साथ रणनीतिक स्वायत्तता को संतुलित करती है।
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58. 'ध्रुव Mk-I': भारतीय निजी फर्म एस्ट्रस्पेस ने मध्यम-लिफ्ट कक्षीय वाहन का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
एक प्रमुख भारतीय निजी एयरोस्पेस कंपनी, एस्ट्रस्पेस ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) से अपने स्वदेशी रूप से विकसित मध्यम-लिफ्ट लॉन्च वाहन, 'ध्रुव एमके-I' का पहला कक्षीय प्रक्षेपण सफलतापूर्वक पूरा किया। यह भारत के बढ़ते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो पूर्ण-स्टैक अंतरिक्ष क्षमताओं को प्रदर्शित करता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •'ध्रुव एमके-I' को 500 किलोग्राम तक के पेलोड को निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में तैनात करने के लिए डिज़ाइन किया गया है और इसमें उन्नत 3डी-प्रिंटेड सेमी-क्रायोजेनिक इंजनों का उपयोग करते हुए एक आंशिक रूप से पुन: प्रयोज्य पहला चरण शामिल है।
- •मिशन ने दूरसंवेदी और IoT संचार तारामंडल के लिए नैनो-उपग्रहों के एक समूह को सफलतापूर्वक स्थापित किया, जो पूरी तरह से भारतीय स्टार्टअप्स द्वारा विकसित किए गए थे।
- •यह प्रक्षेपण अंतरिक्ष में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने, इसरो के रणनीतिक मिशनों को पूरक करने और वाणिज्यिक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- •वाहन का मॉड्यूलर डिज़ाइन और तीव्र विनिर्माण क्षमताएं वैश्विक स्तर पर छोटे उपग्रह ऑपरेटरों के लिए प्रक्षेपण लागत को कम करने और प्रक्षेपण आवृत्ति को बढ़ाने की उम्मीद है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- एस्ट्रस्पेस: (काल्पनिक, स्काईरूट, अग्निकुल जैसे निजी खिलाड़ियों का प्रतिनिधित्व करता है)।
- 'ध्रुव एमके-I': मध्यम-लिफ्ट लॉन्च वाहन।
- सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी): भारत का प्राथमिक अंतरिक्ष केंद्र।
- निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO): कई संचार और दूरसंवेदी उपग्रहों के लिए कक्षा।
- सेमी-क्रायोजेनिक इंजन: RP-1 (परिष्कृत केरोसिन) और तरल ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं।
- एयरोस्पेस में 3डी प्रिंटिंग: तीव्र प्रोटोटाइपिंग और जटिल घटकों के विनिर्माण के लिए।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **अंतरिक्ष का लोकतंत्रीकरण और आर्थिक अवसर:** एस्ट्रस्पेस जैसे निजी खिलाड़ियों का प्रवेश अंतरिक्ष तक पहुंच का लोकतंत्रीकरण करता है, नवाचार को बढ़ावा देता है, और अंतरिक्ष-तकनीक स्टार्टअप के लिए एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र बनाता है। इससे महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर पैदा होंगे, रोजगार सृजन में योगदान होगा और भारत की वैश्विक अंतरिक्ष केंद्र के रूप में स्थिति मजबूत होगी।
- **सामरिक स्वायत्तता और दोहरे उपयोग की क्षमताएं:** हालांकि मुख्य रूप से वाणिज्यिक, स्वदेशी निजी प्रक्षेपण क्षमताएं अंतरिक्ष पहुंच में भारत की सामरिक स्वायत्तता को बढ़ाती हैं, जिससे विदेशी प्रक्षेपण प्रदाताओं पर निर्भरता कम होती है। अंतर्निहित प्रौद्योगिकियों में दोहरे उपयोग के अनुप्रयोग भी हो सकते हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी।
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59. सीएसआईआर-सीईसीआरआई ने ईवी के लिए ऑल-सॉलिड-स्टेट बैटरी टेक्नोलॉजी में बड़ी सफलता हासिल की
चर्चा में क्यों? (Why in News)
वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद - केंद्रीय विद्युत रासायनिक अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीईसीआरआई), कराईकुडी ने एक नई पीढ़ी की ऑल-सॉलिड-स्टेट बैटरी (ASSB) विकसित करने में एक महत्वपूर्ण सफलता की घोषणा की है, जिसमें बढ़ी हुई ऊर्जा घनत्व, तेज चार्जिंग क्षमता और बेहतर सुरक्षा प्रोफाइल है, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहन (EV) अनुप्रयोगों को लक्षित करते हुए।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •नए ASSB प्रोटोटाइप में एक उपन्यास सल्फाइड-आधारित ठोस इलेक्ट्रोलाइट का उपयोग किया गया है जिसमें एक मालिकाना पॉलिमर कोटिंग है, जो इंटरफेशियल प्रतिरोध और डेंड्राइट गठन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को संबोधित करता है जो पारंपरिक डिजाइनों को प्रभावित करते हैं।
- •यह 500 Wh/kg से अधिक ऊर्जा घनत्व और 15 मिनट से कम समय में 80% क्षमता तक अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग प्रदर्शित करता है, जो वर्तमान लिथियम-आयन बैटरी को बहुत पीछे छोड़ देता है।
- •यह ज्वलनशील तरल इलेक्ट्रोलाइट्स के उपयोग को समाप्त करता है, जिससे सुरक्षा और थर्मल स्थिरता में नाटकीय रूप से वृद्धि होती है, जिससे यह अत्यधिक परिचालन स्थितियों के लिए उपयुक्त हो जाता है।
- •अनुसंधान से विनिर्माण लागत में कमी और लंबी चक्र जीवन की संभावना का संकेत मिलता है, जो बड़े पैमाने के ईवी और ग्रिड भंडारण के लिए एक स्थायी विकल्प का वादा करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- सीएसआईआर-सीईसीआरआई: कराईकुडी, तमिलनाडु में स्थित, भारत का प्रमुख विद्युत रासायनिक अनुसंधान संस्थान।
- ऑल-सॉलिड-स्टेट बैटरी (ASSB): मुख्य घटकों में ठोस इलेक्ट्रोलाइट, एनोड और कैथोड शामिल हैं।
- इलेक्ट्रोलाइट प्रकार: तरल (लिथियम-आयन) बनाम ठोस (सल्फाइड, ऑक्साइड, पॉलिमर)।
- ऊर्जा घनत्व: Wh/kg (वाट-घंटे प्रति किलोग्राम) में मापा जाता है।
- डेंड्राइट गठन: लिथियम-धातु बैटरी में एक समस्या।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **भारत के ईवी परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा में तेजी लाना:** यह सफलता भारत के महत्वाकांक्षी इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लक्ष्यों और ऊर्जा भंडारण बुनियादी ढांचे के लिए एक गेम-चेंजर हो सकती है, जिससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। स्वदेशी विकास महत्वपूर्ण बैटरी घटकों के लिए आयात निर्भरता को भी कम करता है।
- **'मेक इन इंडिया' और अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना:** सफल व्यावसायीकरण वैश्विक उन्नत बैटरी विनिर्माण परिदृश्य में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा, निवेश को आकर्षित करेगा और सामग्री विज्ञान और इलेक्ट्रोकेमिस्ट्री में एक मजबूत अनुसंधान और विकास पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देगा।
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60. भारत का नया एआई मॉडल 'वर्षा' क्षेत्रीय जलवायु पूर्वानुमान में लाएगा क्रांति
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) और आईआईटी के एक संघ ने 'वर्षा 2.0' का अनावरण किया है, जो एक अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मॉडल है। यह मॉडल दक्षिण एशियाई मानसून पैटर्न और अत्यधिक मौसम की घटनाओं का दो ऋतुओं तक के अग्रिम समय के लिए अभूतपूर्व सटीकता के साथ पूर्वानुमान लगाने की क्षमता रखता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •'वर्षा 2.0' गहन शिक्षण तंत्रिका नेटवर्क और भौतिकी-सूचित एआई का लाभ उठाता है, जिसमें उपग्रह इमेजरी, वायुमंडलीय सेंसर और समुद्र संबंधी अवलोकनों से विशाल डेटासेट को एकीकृत किया गया है।
- •पारंपरिक संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान (NWP) मॉडल की तुलना में पूर्वानुमान के अग्रिम समय और स्थानिक संकल्प में उल्लेखनीय सुधार करता है।
- •स्थानीयकृत अत्यधिक मौसम की घटनाओं जैसे अचानक बाढ़, सूखे और हीटवेव के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन पूर्वानुमान प्रदान करता है, जो कृषि योजना और आपदा प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है।
- •यह मॉडल कृषि और जल संसाधनों पर संभावित प्रभावों का अनुमान लगाने के लिए सामाजिक-आर्थिक डेटा को भी शामिल करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM): पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्थान।
- जलवायु विज्ञान में एआई/एमएल: गहन शिक्षण, तंत्रिका नेटवर्क, भौतिकी-सूचित एआई का अनुप्रयोग।
- मानसून पूर्वानुमान मॉडल: पारंपरिक NWP बनाम एआई/एमएल मॉडल।
- अत्यधिक मौसम की घटनाएँ: अचानक बाढ़, सूखा, हीटवेव।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **जलवायु लचीलेपन के लिए निहितार्थ:** उन्नत पूर्वानुमान क्षमताएं भारत को जलवायु परिवर्तन अनुकूलन के लिए सक्रिय रणनीतियाँ विकसित करने की अनुमति देंगी, विशेष रूप से कृषि, जल संसाधन प्रबंधन और शहरी नियोजन में, जिससे आर्थिक नुकसान और मानवीय हताहतों को कम किया जा सकेगा।
- **तकनीकी संप्रभुता और सहयोग:** यह स्वदेशी विकास एआई और जलवायु विज्ञान में भारत की बढ़ती दक्षता को प्रदर्शित करता है, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है और वैश्विक जलवायु मॉडलिंग प्रयासों में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए रास्ते खोलता है।
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61. राजस्थान की मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना (एम.सी.एच.बी.एस.बी.वाई.) और जन आधार एकीकरण: सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और डिजिटल सशक्तिकरण के लिए एक मॉडल
चर्चा में क्यों? (Why in News)
राजस्थान सरकार ने मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना (एम.सी.एच.बी.एस.बी.वाई.) पर एक व्यापक प्रभाव आकलन रिपोर्ट जारी की, जिसमें सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्राप्त करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका और कुशल लाभार्थी पहचान और कैशलेस सेवाओं के लिए राजस्थान जन आधार मंच के साथ इसके निर्बाध एकीकरण पर प्रकाश डाला गया।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •एम.सी.एच.बी.एस.बी.वाई. वर्तमान में 1.4 करोड़ (14 मिलियन) से अधिक परिवारों को कवर करती है, जो राज्य की लगभग 70% आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, विभिन्न बीमारियों और अंग प्रत्यारोपण के लिए ₹25 लाख तक का कैशलेस उपचार प्रदान करती है।
- •राजस्थान जन आधार मंच ने अपनी स्थापना के बाद से एम.सी.एच.बी.एस.बी.वाई. के तहत 1.2 करोड़ (12 मिलियन) से अधिक सफल कैशलेस दावों को सुविधाजनक बनाया है, जिससे लाभार्थियों के लिए अनुमानित 60-70% तक जेब से खर्च (OOPE) में भारी कमी आई है।
- •प्रभाव आकलन रिपोर्ट बताती है कि नामांकित परिवारों के लिए विनाशकारी स्वास्थ्य व्यय में 50% की कमी आई है, जिससे पूरे राज्य में वित्तीय सुरक्षा और स्वास्थ्य-seeking व्यवहार में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
- •इस योजना ने 100 से अधिक नए निजी अस्पतालों और क्लीनिकों को पैनल में शामिल करने को प्रोत्साहित करके स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा दिया है, विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में, गुणवत्तापूर्ण देखभाल तक पहुंच में सुधार किया है।
- •एक अभिनव 'चिरंजीवी मित्र' नेटवर्क स्थापित किया गया है, जिसमें सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता शामिल हैं जो लाभार्थियों को योजना को समझने और सेवाओं तक पहुंचने में सहायता करते हैं, जिससे अंतिम-मील वितरण में और सुधार होता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना (एम.सी.एच.बी.एस.बी.वाई.) राजस्थान सरकार द्वारा 2021 में शुरू की गई थी।
- यह योजना प्रति परिवार ₹25 लाख तक का स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करती है (शुरुआत में ₹5 लाख, बाद में बढ़ाकर ₹10 लाख और फिर ₹25 लाख किया गया)।
- राजस्थान जन आधार इस योजना के लिए प्राथमिक डिजिटल पहचान और लाभार्थी प्रबंधन मंच है।
- एम.सी.एच.बी.एस.बी.वाई. का लक्ष्य सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के करीब पहुंचना है, जिसमें राजस्थान की लगभग 70% आबादी शामिल है।
- एम.सी.एच.बी.एस.बी.वाई. के तहत सरकारी और सूचीबद्ध निजी दोनों अस्पतालों में कैशलेस उपचार उपलब्ध है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यू.एच.सी.) के लिए मॉडल:** एम.सी.एच.बी.एस.बी.वाई. यू.एच.सी. प्राप्त करने के लिए एक मजबूत राज्य-नेतृत्व वाला मॉडल है, जो बड़ी आबादी को व्यापक स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रदान करने की व्यवहार्यता को प्रदर्शित करता है, स्वास्थ्य सेवा तक वित्तीय बाधाओं को काफी कम करता है और समान पहुंच को बढ़ावा देता है।
- **शासन में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डी.पी.आई.):** राजस्थान जन आधार का एम.सी.एच.बी.एस.बी.वाई. के साथ निर्बाध एकीकरण सरकारी सेवाओं को सुव्यवस्थित करने, पारदर्शिता बढ़ाने और कल्याणकारी लाभों के कुशल, रिसाव-मुक्त वितरण को सुनिश्चित करने में डी.पी.आई. की परिवर्तनकारी शक्ति को दर्शाता है, जो अन्य राज्यों के लिए एक बेंचमार्क स्थापित करता है।
- **सामाजिक-आर्थिक प्रभाव और गरीबी उन्मूलन:** विनाशकारी स्वास्थ्य व्यय को कम करके और जेब से होने वाले खर्च को कम करके, यह योजना लाखों परिवारों को स्वास्थ्य झटकों के कारण गरीबी में गिरने से प्रभावी ढंग से रोकती है, जिससे गरीबी में कमी, आर्थिक स्थिरता और कमजोर वर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा में पर्याप्त योगदान होता है।
- **चुनौतियाँ और भविष्य का दायरा:** चुनौतियों में सभी सूचीबद्ध सुविधाओं में देखभाल की सुसंगत गुणवत्ता सुनिश्चित करना, मजबूत ऑडिट तंत्र के माध्यम से संभावित धोखाधड़ी वाले दावों को संबोधित करना और विशेष उपचारों और निवारक स्वास्थ्य देखभाल पैकेजों का विस्तार करना शामिल है। भविष्य का दायरा टेलीमेडिसिन, एआई-संचालित निदान और एक समग्र स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता नेटवर्क को और मजबूत करने में निहित है।
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62. पोषण अभियान 2.0: राष्ट्रीय मूल्यांकन रिपोर्ट प्रगति पर प्रकाश डालती है, डिजिटल डेटा एकीकरण और सामुदायिक सहभागिता का आह्वान करती है
चर्चा में क्यों? (Why in News)
नीति आयोग ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमडब्ल्यूसीडी) के सहयोग से "पोषण अभियान 2.0 पर राष्ट्रीय मूल्यांकन रिपोर्ट" जारी की, जो मिशन की प्रगति (2021-2026) की समीक्षा करती है और अगले चरण के लिए रणनीतियों को रेखांकित करती है, जिसमें मजबूत डिजिटल डेटा एकीकरण और बढ़ी हुई सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •रिपोर्ट में 2021 में पोषण 2.0 के शुभारंभ के बाद से 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में स्टंटिंग में 4 प्रतिशत अंक और वेस्टिंग में 3 प्रतिशत अंक की महत्वपूर्ण कमी का संकेत दिया गया है, जिसका श्रेय बेहतर सेवा वितरण और आंगनवाड़ी कार्यप्रणालियों को दिया गया है।
- •पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन के माध्यम से प्रौद्योगिकी के सफल एकीकरण पर प्रकाश डाला गया है, जो अब देश भर के 14 लाख (1.4 मिलियन) से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों (एडब्ल्यूसी) से वास्तविक समय डेटा रिकॉर्ड करता है, जिसमें 8.5 करोड़ (85 मिलियन) लाभार्थी (गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं, बच्चे) शामिल हैं।
- •लक्षित हस्तक्षेपों के लिए डेटा एनालिटिक्स को मजबूत करने, अधिक अंतर-क्षेत्रीय अभिसरण को बढ़ावा देने और उन्नत डिजिटल साक्षरता और डेटा व्याख्या के लिए फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं की क्षमता निर्माण की सिफारिश करता है।
- •विशेष रूप से उच्च-भार वाले जिलों और आदिवासी क्षेत्रों में अभिनव समुदाय-नेतृत्व वाली पहलों और स्थानीयकृत व्यवहार परिवर्तन संचार (बीसीसी) अभियानों के लिए समर्पित बजटीय आवंटन की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर जोर देता है।
- •बेहतर परिणामों के लिए भविष्य कहनेवाला विश्लेषण और व्यक्तिगत पोषण हस्तक्षेपों के लिए 'पोषण डिजिटल ट्विन' पहल का प्रस्ताव करता है, जो एआई और मशीन लर्निंग का लाभ उठाता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- पोषण अभियान (राष्ट्रीय पोषण मिशन) 2018 में शुरू किया गया था, जिसके बाद 2021 में एकीकृत पोषण सहायता कार्यक्रम के लिए पोषण 2.0 शुरू किया गया था।
- पोषण अभियान 2.0 पर राष्ट्रीय मूल्यांकन रिपोर्ट नीति आयोग और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमडब्ल्यूसीडी) द्वारा संयुक्त रूप से जारी की गई थी।
- पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन आंगनवाड़ी केंद्रों से वास्तविक समय की निगरानी और डेटा संग्रह के लिए प्राथमिक डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
- रिपोर्ट पोषण 2.0 के शुभारंभ के बाद से 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में स्टंटिंग में 4% और वेस्टिंग में 3% की कमी का संकेत देती है।
- पोषण अभियान द्वारा लक्षित प्रमुख संकेतकों में स्टंटिंग, वेस्टिंग, महिलाओं और बच्चों में एनीमिया, और कम जन्म के वजन में कमी शामिल है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **बहु-क्षेत्रीय अभिसरण और शासन:** रिपोर्ट समग्र पोषण परिणामों को प्राप्त करने और कुपोषण के सामाजिक निर्धारकों को संबोधित करने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय, जनजातीय कार्य मंत्रालय और अन्य हितधारकों को शामिल करने वाले मजबूत अभिसरण तंत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है। प्रभावी शासन और जवाबदेही ढांचे महत्वपूर्ण हैं।
- **सार्वजनिक स्वास्थ्य वितरण में डिजिटल परिवर्तन:** पोषण ट्रैकर की सफलता दर्शाती है कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) वास्तविक समय की निगरानी, कुशल आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और डेटा-संचालित निर्णय लेने को सक्षम करके सार्वजनिक स्वास्थ्य वितरण में क्रांति कैसे ला सकता है, जिससे कार्यक्रम की प्रभावकारिता और पहुंच में काफी सुधार होता है।
- **सामुदायिक स्वामित्व और सतत व्यवहार परिवर्तन:** पोषण संबंधी लाभों की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए समुदायों को सशक्त बनाना, पोषण, स्वच्छता और शिशु एवं छोटे बच्चे के आहार (आईवाईसीएफ) प्रथाओं से संबंधित सकारात्मक व्यवहार परिवर्तनों को स्थानीयकृत, सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील व्यवहार परिवर्तन संचार (बीसीसी) अभियानों के माध्यम से बढ़ावा देना आवश्यक है।
- **लगातार असमानताओं और इक्विटी को संबोधित करना:** समग्र प्रगति के बावजूद, रिपोर्ट इस बात पर प्रकाश डालती है कि कुपोषण में क्षेत्रीय, सामाजिक-आर्थिक और लैंगिक असमानताएं बनी हुई हैं। इसके लिए इक्विटी-केंद्रित रणनीतियों की आवश्यकता है, जिसमें आदिवासी आबादी, शहरी गरीब और किशोर लड़कियों जैसे कमजोर समूहों पर विशेष ध्यान दिया जाए, यह सुनिश्चित करते हुए कि पोषण अभियान में कोई भी पीछे न छूटे।
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63. प्रधानमंत्री आवास सम्पन्न योजना (पीएमएएसवाई) चरण II का शुभारंभ: 'सभी के लिए आवास' की गति को बनाए रखना
चर्चा में क्यों? (Why in News)
आवास और शहरी कार्य मंत्रालय तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय ने संयुक्त रूप से "प्रधानमंत्री आवास सम्पन्न योजना (पीएमएएसवाई) चरण II" का शुभारंभ किया, जो पीएमएवाई-शहरी और पीएमएवाई-ग्रामीण की महत्वपूर्ण उपलब्धियों पर आधारित, 2030 तक 'सभी के लिए आवास' के दृष्टिकोण को प्राप्त करने की दिशा में अगला महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •2030 तक अतिरिक्त 2.5 करोड़ (25 मिलियन) घरों के निर्माण का लक्ष्य, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के लिए किफायती आवास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
- •उन्नत हरित भवन प्रौद्योगिकियों, टिकाऊ शहरी और ग्रामीण नियोजन सिद्धांतों, और जलवायु-लचीली निर्माण पद्धतियों को एकीकृत करता है ताकि दीर्घकालिक स्थायित्व और पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
- •सभी परियोजना चरणों में वास्तविक समय निर्माण प्रगति ट्रैकिंग, बढ़ी हुई पारदर्शिता और कठोर गुणवत्ता आश्वासन के लिए भू-टैगिंग और उपग्रह निगरानी का लाभ उठाता है।
- •पीएमएवाई-यू के तहत लाभार्थी-नेतृत्व निर्माण (बीएलसी) और यथास्थान झुग्गी पुनर्विकास (आईएसएसआर) घटकों पर बढ़ा हुआ जोर, समुदायों को सशक्त बनाना और समावेशी शहरी विकास को बढ़ावा देना।
- •अगले पांच वर्षों (2026-2031) के लिए पीएमएएसवाई चरण II हेतु ₹5 लाख करोड़ का बजटीय आवंटन, जो बड़े पैमाने पर आवास अवसंरचना के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- पीएमएएसवाई चरण II प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू) और प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) की एक उत्तराधिकारी पहल है।
- पीएमएएसवाई चरण II का व्यापक दृष्टिकोण '2030 तक सभी के लिए आवास' है।
- जुलाई 2026 तक, पीएमएवाई-यू ने 90 लाख (9 मिलियन) पूर्णता के साथ 1.15 करोड़ (11.5 मिलियन) स्वीकृत घर हासिल किए हैं, जबकि पीएमएवाई-जी ने 3.0 करोड़ (30 मिलियन) से अधिक घर पूरे किए हैं।
- मुख्य कार्यान्वयन मंत्रालय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (शहरी घटक के लिए) और ग्रामीण विकास मंत्रालय (ग्रामीण घटक के लिए) हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **आवास घाटे और असमानता का समाधान:** पीएमएएसवाई चरण II विशेष रूप से कमजोर आबादी के लिए लगातार आवास घाटे को संबोधित करने के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे सामाजिक समानता को बढ़ावा मिलेगा और बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच में स्थानिक असमानताओं को कम किया जा सकेगा। इसका लक्ष्य 2028 तक शेष कच्चे घरों को खत्म करना भी है, जिससे गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित हो सके।
- **आर्थिक गुणक प्रभाव और रोजगार सृजन:** पीएमएएसवाई चरण II के तहत बड़े पैमाने पर आवास निर्माण से विभिन्न क्षेत्रों (निर्माण, विनिर्माण, रसद) में महत्वपूर्ण प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है, जिससे आर्थिक विकास में पर्याप्त योगदान मिलेगा और 'आत्मनिर्भर भारत' के उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सकेगा।
- **सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) संरेखण:** यह योजना कई एसडीजी में सीधे योगदान करती है, जिसमें एसडीजी 1 (कोई गरीबी नहीं), एसडीजी 3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण), एसडीजी 11 (टिकाऊ शहर और समुदाय), और एसडीजी 10 (असमानता में कमी) शामिल हैं, जो सस्ती, सुरक्षित और लचीली आवास प्रदान करके बुनियादी सेवाओं तक पहुंच के साथ है।
- **चुनौतियाँ और आगे का मार्ग:** प्रमुख चुनौतियों में भूमि अधिग्रहण के मुद्दे, बढ़ती सामग्री लागत, त्वरित मंजूरी सुनिश्चित करना, और नागरिक अवसंरचना (पानी, स्वच्छता, बिजली) को एकीकृत करना शामिल है। अभिनव वित्तपोषण तंत्र, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी), और जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं के साथ अभिसरण का लाभ उठाना प्रभावी कार्यान्वयन के लिए महत्वपूर्ण होगा।
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64. साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025 की घोषणा: प्रोफेसर अरुणोदय शर्मा को हिंदी उपन्यास 'मिट्टी का उत्सव' के लिए सम्मानित किया गया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
साहित्य अकादमी, भारत की राष्ट्रीय साहित्य अकादमी, ने 2025 के प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार के प्राप्तकर्ताओं की घोषणा की है। उल्लेखनीय पुरस्कार विजेताओं में, प्रोफेसर अरुणोदय शर्मा को उनके गहन हिंदी उपन्यास 'मिट्टी का उत्सव' (Festival of Soil) के लिए सम्मानित किया गया है, जो समकालीन ग्रामीण जीवन और पर्यावरणीय विषयों पर प्रकाश डालता है। 19 जुलाई, 2026 को घोषित ये पुरस्कार 24 भारतीय भाषाओं में साहित्यिक उत्कृष्टता का सम्मान करते हैं।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •प्रोफेसर अरुणोदय शर्मा, एक प्रख्यात हिंदी लेखक और साहित्य आलोचक, को उनके उपन्यास 'मिट्टी का उत्सव' के लिए पुरस्कार मिला, जो ग्रामीण भारत में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों और स्थायी मानव-प्रकृति संबंध की आलोचनात्मक जांच करता है।
- •2024 के अंत में प्रकाशित इस उपन्यास की आलोचकों द्वारा इसकी भावुक गद्य, गहन शोध किए गए सांस्कृतिक अंतर्दृष्टि और मार्मिक कथा शैली के लिए सराहना की गई है, जो आधुनिक हिंदी साहित्य में एक महत्वपूर्ण योगदान है।
- •2025 के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार 24 लेखकों को प्रदान किया गया, जो अकादमी द्वारा मान्यता प्राप्त 24 भारतीय भाषाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनमें भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 22 भाषाओं के अलावा अंग्रेजी और राजस्थानी भी शामिल हैं।
- •पुरस्कारों में एक उत्कीर्ण तांबे की पट्टिका वाला एक ताबूत, एक शॉल और ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) का नकद पुरस्कार शामिल है, जो एक विशेष समारोह में प्रदान किया जाता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- साहित्य अकादमी पुरस्कार भारत में एक साहित्यिक सम्मान है, जो भारत की राष्ट्रीय साहित्य अकादमी, साहित्य अकादमी द्वारा प्रदान किया जाता है।
- इसकी स्थापना 1954 में हुई थी और यह ज्ञानपीठ पुरस्कार के बाद भारत का दूसरा सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है।
- पुरस्कार प्रतिवर्ष 24 प्रमुख भारतीय भाषाओं में प्रकाशित उत्कृष्ट पुस्तकों के लेखकों को दिए जाते हैं, जिनमें भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 22 भाषाओं के अलावा अंग्रेजी और राजस्थानी भी शामिल हैं।
- अकादमी साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार, बाल साहित्य पुरस्कार (बाल साहित्य पुरस्कार) और युवा पुरस्कार (युवा पुरस्कार) भी प्रदान करती है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **भाषाई विविधता और राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा देना:** साहित्य अकादमी पुरस्कार भारतीय भाषाओं के व्यापक स्पेक्ट्रम में साहित्यिक कृतियों को मान्यता देकर भाषाई विविधता और राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह साझा सांस्कृतिक विरासत की भावना को बढ़ावा देता है और अंतर-सांस्कृतिक समझ को प्रोत्साहित करता है।
- **समाज के दर्पण के रूप में साहित्य:** प्रोफेसर शर्मा का उपन्यास 'मिट्टी का उत्सव' यह दर्शाता है कि साहित्य कैसे समकालीन सामाजिक मुद्दों, जैसे पर्यावरणीय गिरावट और ग्रामीण विकास चुनौतियों को प्रतिबिंबित करने के लिए एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में कार्य कर सकता है। ऐसी कृतियां सार्वजनिक विमर्श में योगदान करती हैं और नीतिगत विचारों को प्रेरित कर सकती हैं।
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65. राजस्थान की सुश्री रिया सिंह ने विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स में विश्व रिकॉर्ड बनाया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
राजस्थान की एक विलक्षण पैरा-एथलीट सुश्री रिया सिंह ने हाल ही में पेरिस में संपन्न विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स में महिला भाला फेंक F46 श्रेणी में नया विश्व रिकॉर्ड बनाकर भारत को अपार गौरव दिलाया है। यह उपलब्धि भारतीय पैरा-खेलों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और राजस्थान राज्य के एथलीटों की क्षमता को उजागर करती है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •सुश्री रिया सिंह ने 45.28 मीटर की उल्लेखनीय दूरी तक भाला फेंककर, पिछले विश्व रिकॉर्ड 44.90 मीटर को पार किया, जो उनकी असाधारण प्रतिभा और कठोर प्रशिक्षण को दर्शाता है।
- •उनके प्रदर्शन ने प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत के लिए स्वर्ण पदक सुरक्षित किया, जिससे देश की पदक तालिका और पैरा-एथलेटिक्स में वैश्विक स्थिति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
- •राजस्थान के बाड़मेर के ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली रिया सिंह की यात्रा प्रतिकूल परिस्थितियों के खिलाफ दृढ़ता का प्रतीक है, और वह 'खेलो इंडिया पैरा गेम्स' पहल के माध्यम से समर्थन प्राप्तकर्ता रही हैं।
- •F46 वर्गीकरण कोहनी के ऊपर या नीचे एक हाथ के विच्छेदन वाले एथलीटों के लिए है, जो इस स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए आवश्यक अविश्वसनीय ताकत और कौशल को प्रदर्शित करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स विश्व पैरा एथलेटिक्स द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय पैरा-एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं की एक श्रृंखला है, जो पैरा-एथलेटिक्स के लिए अंतरराष्ट्रीय महासंघ है।
- भाला फेंक में F46 वर्गीकरण ऊपरी अंग की कमी वाले एथलीटों के लिए है, जहाँ 'F' फील्ड इवेंट के लिए है।
- खेलो इंडिया कार्यक्रम में विकलांग व्यक्तियों के बीच खेलों को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित घटक है, जिसमें 'खेलो इंडिया पैरा गेम्स' भी शामिल है।
- सुश्री रिया सिंह राजस्थान के बाड़मेर जिले से हैं, जो अपनी चुनौतीपूर्ण जलवायु परिस्थितियों के लिए जाना जाता है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **खेलों में समावेशिता को बढ़ावा देना:** रिया सिंह की उपलब्धि समावेशी खेल नीतियों और बुनियादी ढांचे के विकास के महत्वपूर्ण महत्व को रेखांकित करती है। खेलो इंडिया जैसी सरकारी पहल, जमीनी स्तर पर प्रतिभा पहचान कार्यक्रमों के साथ मिलकर, पैरा-एथलीटों को पोषित करने और उन्हें विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- **खेल विकास में राज्यों की भूमिका (आरएएस विशिष्ट):** राजस्थान का ग्रामीण प्रतिभाओं की पहचान और समर्थन पर ध्यान केंद्रित करना, विशेष रूप से बाड़मेर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में, राज्य-स्तरीय खेल संवर्धन के लिए एक मॉडल प्रदर्शित करता है। ऐसी सफलताएं न केवल सम्मान लाती हैं बल्कि एक नई पीढ़ी को भी प्रेरित करती हैं, जिससे खेलों के माध्यम से सामाजिक समावेश और सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलता है।
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66. डॉ. आनंद वर्धन यूपीएससी के नए अध्यक्ष नियुक्त
चर्चा में क्यों? (Why in News)
केंद्र सरकार ने हाल ही में प्रसिद्ध शिक्षाविद् और पूर्व कुलपति, डॉ. आनंद वर्धन को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के नए अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया है, जो निवर्तमान अध्यक्ष, डॉ. राजेश कुमार का स्थान लेंगे। राष्ट्र के लिए शीर्ष सिविल सेवकों की भर्ती में यूपीएससी की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए यह नियुक्ति महत्वपूर्ण है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •डॉ. आनंद वर्धन की यूपीएससी के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति 18 जुलाई, 2026 से प्रभावी है, जिसका कार्यकाल छह वर्ष का होगा या 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, जो भी पहले हो।
- •इससे पहले, डॉ. वर्धन एक प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में कार्यरत थे और उनका सार्वजनिक प्रशासन और संवैधानिक कानून में विशेषज्ञता के साथ तीन दशकों से अधिक का विशिष्ट शैक्षणिक करियर रहा है।
- •यह नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 316 के प्रावधानों के अनुसार, उनकी प्रशासनिक दूरदर्शिता और सार्वजनिक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद की गई।
- •उनकी तत्काल प्राथमिकताओं में भर्ती प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना, परीक्षाओं के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचे को बढ़ाना और चयन में अधिक पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करना शामिल होने की उम्मीद है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- यूपीएससी भारतीय संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत स्थापित एक संवैधानिक निकाय है।
- यूपीएससी के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- उनका कार्यकाल छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, जो भी पहले हो, होता है।
- उन्हें अनुच्छेद 317 के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान विशिष्ट परिस्थितियों में राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **यूपीएससी नियुक्तियों का महत्व:** यूपीएससी अध्यक्ष की नियुक्ति सिविल सेवाओं की निष्पक्षता, अखंडता और दक्षता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। एक मजबूत और विश्वसनीय नेतृत्व यह सुनिश्चित करता है कि योग्यता-आधारित चयन प्रक्रिया बाहरी दबावों के खिलाफ मजबूत बनी रहे।
- **चुनौतियाँ और सुधार:** नए अध्यक्ष को तेजी से विकसित हो रहे नौकरी बाजार की मांगों के अनुकूलन, परीक्षा प्रक्रियाओं में उन्नत प्रौद्योगिकियों (जैसे एआई) को एकीकृत करने, और समावेशिता तथा क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के मुद्दों को संबोधित करने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। सुधारों में सिविल सेवकों के लिए निरंतर कौशल उन्नयन और तेज भर्ती चक्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है।
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67. भारत के एस-400 ट्रिम्फ वायु रक्षा प्रणालियों के पूर्ण संचालन के सामरिक निहितार्थ
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारतीय वायु सेना ने रूसी-मूल के एस-400 ट्रिम्फ वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली के सभी पांच रेजिमेंटों को रणनीतिक स्थानों पर पूरी तरह से चालू घोषित कर दिया है, जिससे उन्नत हवाई खतरों के खिलाफ राष्ट्र की स्तरीय वायु रक्षा क्षमताओं में काफी वृद्धि हुई है। यह भारत के रक्षा आधुनिकीकरण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**उन्नत वायु रक्षा कवच:** एस-400 एक बहुस्तरीय वायु रक्षा कवच प्रदान करता है, जो 400 किमी तक के व्यापक परिचालन क्षेत्र में बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों, लड़ाकू जेट विमानों और ड्रोनों सहित कई लक्ष्यों को एक साथ ट्रैक करने और संलग्न करने में सक्षम है।
- •**सामरिक प्रतिरोध:** पूर्ण संचालन भारत की सामरिक प्रतिरोधक क्षमता को काफी मजबूत करता है, विशेष रूप से इसकी उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर, एक अभेद्य वायु रक्षा बुलबुला बनाकर, जिससे संभावित विरोधी हवाई अभियानों को जटिल बनाया जा सके।
- •**स्वदेशी प्रणालियों के साथ एकीकरण:** एस-400 के उन्नत रडार और कमांड और कंट्रोल सिस्टम को भारत के स्वदेशी इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) और आकाश-एनजी+ जैसे अन्य प्लेटफार्मों के साथ सहजता से एकीकृत करने के प्रयास जारी हैं ताकि अनुकूलित नेटवर्क-केंद्रित युद्ध के लिए।
- •**भू-राजनीतिक संतुलन कार्य:** संयुक्त राज्य अमेरिका से CAATSA (काउंटरिंग अमेरिका'स एडवरसरीज थ्रू सैंक्शन एक्ट) के संभावित निहितार्थों (जिन्हें अंततः माफ कर दिया गया) के बावजूद अधिग्रहण, भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और विविध भू-राजनीतिक संबंधों (रक्षा के लिए रूस, सामरिक साझेदारी के लिए अमेरिका) को संतुलित करने की उसकी क्षमता को रेखांकित करता है।
- •**तकनीकी श्रेष्ठता:** एस-400 की उन्नत विशेषताएं, जिसमें इसका शक्तिशाली रडार (ग्रेव स्टोन), विविध मिसाइल प्रकार (48N6DM, 9M96E, 9M96E2) और त्वरित प्रतिक्रिया समय शामिल हैं, भारत की वायु रक्षा संपत्तियों को एक गुणात्मक बढ़त प्रदान करते हैं, जिससे यह विश्व स्तर पर सबसे परिष्कृत विमान भेदी प्रणालियों में से एक बन जाता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- एस-400 ट्रिम्फ रूस द्वारा विकसित एक उन्नत लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एलआर-एसएएम) प्रणाली है।
- भारत ने अक्टूबर 2018 में रूस के साथ पांच एस-400 रेजिमेंटों के लिए 5.43 बिलियन डॉलर का सौदा किया, जिसकी डिलीवरी 2021 में शुरू हुई।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **वायु रक्षा का आधुनिकीकरण:** एस-400 प्रणाली भारत की वायु रक्षा स्थिति में एक प्रतिमान बदलाव का प्रतिनिधित्व करती है, जो परिष्कृत हवाई खतरों को रोकने और उनका मुकाबला करने के लिए महत्वपूर्ण क्षमताएं प्रदान करती है, जिससे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसंरचना और सामरिक संपत्तियों को संभावित हवाई हमलों से सुरक्षित किया जा सके।
- **एकीकरण और रखरखाव की चुनौतियाँ:** शक्तिशाली होने के बावजूद, एस-400 के प्रभावी उपयोग के लिए मौजूदा भारतीय वायु रक्षा नेटवर्क के साथ जटिल एकीकरण और दीर्घकालिक परिचालन तत्परता सुनिश्चित करने और विदेशी सहायता पर निर्भरता को कम करने के लिए मजबूत स्वदेशी रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (MRO) क्षमताओं की आवश्यकता है।
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68. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार: भारत का राजनयिक प्रयास और समान प्रतिनिधित्व के लिए जी4 की नई रणनीति
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारत ने जी4 राष्ट्रों (ब्राजील, जर्मनी, जापान) के साथ मिलकर संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर एक उच्च-स्तरीय बैठक में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के व्यापक सुधारों के लिए अपने राजनयिक प्रयासों को तेज किया। इस नए अभियान में अधिक प्रतिनिधिक और प्रभावी वैश्विक शासन निकाय की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**जी4 का एकीकृत रुख:** जी4 समूह ने यूएनएससी की स्थायी और गैर-स्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार की अपनी मांग को दोहराया, इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान संरचना, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की वास्तविकताओं को दर्शाती है, 21वीं सदी की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के लिए पुरातनपंथी और अप्रतिनिधिक है।
- •**पाठ-आधारित वार्ता:** संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने अंतरसरकारी वार्ता (आईजीएन) ढांचे के भीतर पाठ-आधारित वार्ताओं को तत्काल शुरू करने का आग्रह किया, जो प्रक्रियात्मक चर्चाओं से आगे बढ़कर एक ठोस सुधार दस्तावेज की ओर बढ़े।
- •**समान भौगोलिक प्रतिनिधित्व:** जी4 द्वारा प्रस्तुत एक महत्वपूर्ण तर्क समान भौगोलिक प्रतिनिधित्व की महत्वपूर्ण आवश्यकता है, विशेष रूप से स्थायी सदस्य श्रेणी में अफ्रीकी, लैटिन अमेरिकी और एशियाई देशों के कम प्रतिनिधित्व को उजागर करते हुए।
- •**सामान्य अफ्रीकी स्थिति (इज़ुलविनी सर्वसम्मति):** भारत और जी4 ने इज़ुलविनी सर्वसम्मति और सिर्ते घोषणा के लिए मजबूत समर्थन व्यक्त किया, जो अफ्रीकी देशों के लिए वीटो शक्ति के साथ दो स्थायी सीटों की मांग करता है, अफ्रीका के ऐतिहासिक अन्याय और वैश्विक शांति और सुरक्षा में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करते हुए।
- •**'यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस' (यूएफसी) से चुनौतियाँ:** इटली और पाकिस्तान के नेतृत्व वाले यूएफसी समूह ने स्थायी सीटों के विस्तार का विरोध जारी रखा, इसके बजाय लंबी अवधि के साथ गैर-स्थायी श्रेणी में वृद्धि की वकालत की, जिससे सुधार प्रक्रिया में लगातार गतिरोध बना रहा।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- जी4 समूह में भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान शामिल हैं, जो यूएनएससी में स्थायी सीटों की वकालत करते हैं।
- इज़ुलविनी सर्वसम्मति अंतरराष्ट्रीय संबंधों और यूएनएससी सुधार पर एक स्थिति है जिसे अफ्रीकी संघ ने 2005 में अपनाया था।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **वैधता और प्रभावशीलता:** एक सुधारित यूएनएससी, जो समकालीन वैश्विक शक्ति गतिशीलता को दर्शाता है और भारत जैसी उभरती शक्तियों को शामिल करता है, जटिल वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने में इसकी वैधता और प्रभावशीलता को बढ़ाएगा, जिससे इसके प्रस्तावों के साथ अधिक स्वामित्व और अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा।
- **भारत की वैश्विक आकांक्षाएं:** यूएनएससी में स्थायी सीट प्राप्त करना भारत की विदेश नीति का एक आधारशिला है, जो एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में उसकी बढ़ती स्थिति और उसकी जनसांख्यिकीय, आर्थिक और रणनीतिक शक्ति के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा में योगदान करने की उसकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
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69. भारत-फ्रांस रणनीतिक संवाद संपन्न: रक्षा औद्योगिक सहयोग और हिंद-प्रशांत अभिसरण को गहरा करना
चर्चा में क्यों? (Why in News)
पेरिस में 39वां वार्षिक भारत-फ्रांस रणनीतिक संवाद संपन्न हुआ, जिसमें विकसित भू-राजनीतिक गतिशीलता के बीच रक्षा औद्योगिक साझेदारी को और मजबूत करने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक अभिसरण को बढ़ाने की प्रतिबद्धता पर जोर दिया गया। चर्चा उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों के सह-विकास और सह-उत्पादन पर केंद्रित रही।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**रक्षा औद्योगिक रोडमैप 2035:** दोनों राष्ट्रों ने अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान इंजनों, पनडुब्बी प्रणोदन प्रणालियों और उन्नत साइबर रक्षा समाधानों के लिए संयुक्त परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार करते हुए एक नया दीर्घकालिक रोडमैप अपनाया, जो पारंपरिक खरीददार-विक्रेता संबंधों से आगे बढ़ता है।
- •**समुद्री डोमेन जागरूकता और सुरक्षा:** हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में संयुक्त गश्त और खुफिया जानकारी साझा करने के माध्यम से सहयोग बढ़ाने पर सहमति हुई, जिसमें भारत के 'सागर' (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) विजन और फ्रांस की व्यापक हिंद-प्रशांत रणनीति का लाभ उठाया गया। 'वरुण' जैसे बहुपक्षीय अभ्यासों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
- •**सामरिक अनुप्रयोगों के लिए अंतरिक्ष सहयोग:** समुद्री निगरानी और पृथ्वी अवलोकन के लिए एक संयुक्त उपग्रह तारामंडल पर चर्चा आगे बढ़ी, जिसका उद्देश्य साझा अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता में सुधार करना और महत्वपूर्ण अंतरिक्ष संपत्तियों को सुरक्षित करना है। यह अंतरिक्ष सुरक्षा संबंधी पिछले समझौतों पर आधारित है।
- •**बहुपक्षीय जुड़ाव और वैश्विक शासन:** भारत और फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) सहित बहुपक्षीय संस्थानों के सुधार पर जोर देते हुए एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और G20 और क्वाड (फ्रांस के लिए एक विस्तारित भागीदार के रूप में) के भीतर अपने मजबूत समन्वय को दोहराया।
- •**महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी विनिमय:** सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम कंप्यूटिंग पर ध्यान केंद्रित करते हुए सुरक्षित और विश्वसनीय महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए एक ढांचा स्थापित किया गया, जो आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों के खिलाफ लचीलेपन के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- भारत और फ्रांस 1998 में स्थापित वार्षिक रणनीतिक संवाद करते हैं, जिसमें रक्षा, सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी और परमाणु सहयोग शामिल हैं।
- फ्रांस भारत की 'मेक इन इंडिया' रक्षा पहल में एक प्रमुख भागीदार है, जिसमें राफेल जेट और स्कॉर्पीन-श्रेणी की पनडुब्बियों (परियोजना 75) जैसे महत्वपूर्ण रक्षा प्लेटफार्मों का अधिग्रहण या सह-उत्पादन किया जा रहा है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **सामरिक स्वायत्तता और विविधीकरण:** फ्रांस के साथ गहराता रक्षा औद्योगिक सहयोग भारत के सामरिक स्वायत्तता के लक्ष्य के अनुरूप है, जो अपनी रक्षा खरीद आधार में विविधता ला रहा है और सह-विकास के माध्यम से स्वदेशी क्षमताओं को बढ़ावा दे रहा है, जिससे एकल आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम हो रही है।
- **हिंद-प्रशांत सुरक्षा वास्तुकला:** भारत की एक्ट ईस्ट नीति और फ्रांस की हिंद-प्रशांत रणनीति (अपने विदेशी क्षेत्रों सहित) का अभिसरण क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक मजबूत ढांचा बनाता है, एकतरफा दावों का मुकाबला करता है और विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा में एक नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बढ़ावा देता है।
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70. पुरानी और जीवनशैली संबंधी बीमारियों को कवर करने के लिए 'मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना' का विस्तार
चर्चा में क्यों? (Why in News)
सार्वजनिक स्वास्थ्य पहुंच बढ़ाने और गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के बढ़ते बोझ को संबोधित करने के एक महत्वपूर्ण कदम के तहत, राजस्थान सरकार ने अपनी प्रमुख 'मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना' के एक बड़े विस्तार की घोषणा की है, जिसमें विशेष रूप से पुरानी और जीवनशैली से संबंधित बीमारियों की एक विस्तृत श्रृंखला को शामिल किया जाएगा।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •विस्तारित योजना अब क्रोनिक किडनी रोग (सीकेडी) जिसके लिए डायलिसिस या प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है, जटिल सर्जरी सहित उन्नत हृदय संबंधी स्थितियाँ, और निर्दिष्ट न्यूरोलॉजिकल विकारों जैसी महत्वपूर्ण पुरानी बीमारियों के उपचार के लिए बढ़ी हुई बीमा राशि के साथ बेहतर वित्तीय कवरेज प्रदान करती है।
- •उपचार के बाद की व्यापक देखभाल के लिए प्रावधान किए गए हैं, जिसमें विशेष निदान, पुनर्वास उपचार और नई कवर की गई स्थितियों के लिए दवाओं के समर्थन की एक परिभाषित अवधि शामिल है।
- •पैनल में शामिल अस्पतालों के नेटवर्क को और विस्तृत किया जाएगा, विशेष रूप से अधिक सुपर-स्पेशियलिटी और मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पतालों को शामिल किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पुरानी बीमारियों के लिए विशेष देखभाल सभी क्षेत्रों में आसानी से उपलब्ध हो।
- •प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य देखभाल स्तरों पर एकीकृत 'चिरंजीवी एनसीडी निवारण और कल्याण कार्यक्रम' की शुरुआत, जो मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कुछ कैंसर जैसी बीमारियों के लिए प्रारंभिक जांच, निवारक उपायों और जीवनशैली में बदलाव पर केंद्रित है।
- •इस योजना का उद्देश्य पुरानी बीमारियों के दीर्घकालिक, उच्च लागत वाले प्रबंधन से जूझ रहे परिवारों के लिए जेब से होने वाले खर्च को काफी कम करना है, जिससे विनाशकारी स्वास्थ्य व्यय और चिकित्सा दरिद्रता को रोका जा सके।
- •यह विस्तार एक समग्र स्वास्थ्य सेवा दृष्टिकोण के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो प्रचलित स्वास्थ्य चुनौतियों के निवारक और दीर्घकालिक प्रबंधन को शामिल करने के लिए तीव्र देखभाल से आगे बढ़ रहा है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना' राजस्थान की एक प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना है।
- हालिया विस्तार में क्रोनिक किडनी रोग, उन्नत हृदय संबंधी स्थितियों और न्यूरोलॉजिकल विकारों के लिए बढ़ाया गया कवरेज शामिल है।
- विस्तार के हिस्से के रूप में 'चिरंजीवी एनसीडी निवारण और कल्याण कार्यक्रम' शुरू किया गया है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- राजस्थान में कमजोर आबादी पर स्वास्थ्य देखभाल के वित्तीय बोझ को कम करने और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) प्राप्त करने में 'मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना' जैसी राज्य-प्रायोजित स्वास्थ्य बीमा योजनाओं की भूमिका का विश्लेषण करें।
- विस्तारित स्वास्थ्य योजनाओं के दीर्घकालिक स्थायित्व और प्रभावी कार्यान्वयन से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा करें, विशेष रूप से संसाधन आवंटन, गुणवत्ता आश्वासन और ग्रामीण बनाम शहरी क्षेत्रों में समान पहुंच के संबंध में।
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71. राजस्थान ने विरासत जल संरचनाओं के संरक्षण हेतु 'पारंपरिक जल धारा पुनरुत्थान अभियान' का शुभारंभ किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
अपनी पारंपरिक जल संचयन संरचनाओं के ऐतिहासिक महत्व और पारिस्थितिक प्रासंगिकता को पहचानते हुए, राजस्थान सरकार ने इन अमूल्य विरासत संपत्तियों को व्यवस्थित रूप से बहाल और संरक्षित करने के लिए 'पारंपरिक जल धारा पुनरुत्थान अभियान' का शुभारंभ किया है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •यह अभियान राज्य भर में बावड़ियों (सीढ़ीदार कुओं), कुंडों (जलाशयों), झालरों (सीढ़ीदार तालाबों) और नाड़ियों (गाँव के तालाबों) सहित विभिन्न पारंपरिक जल निकायों के व्यापक मानचित्रण, दस्तावेजीकरण और जीर्णोद्धार पर केंद्रित है।
- •एक चरणबद्ध दृष्टिकोण ऐतिहासिक महत्व, वर्तमान जीर्ण-शीर्ण स्थिति और स्थायी जल पुनर्भरण की क्षमता के आधार पर संरचनाओं को प्राथमिकता देगा।
- •सामुदायिक भागीदारी अभियान का आधारशिला है, जिसमें स्थानीय स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), गैर-सरकारी संगठनों और पारंपरिक कारीगरों को बहाली और दीर्घकालिक रखरखाव प्रक्रियाओं में शामिल किया जा रहा है, जिससे स्वामित्व की भावना को बढ़ावा मिल रहा है।
- •परियोजना में पारंपरिक स्थापत्य विधियों और स्थानीय सामग्रियों को शामिल किया गया है, जिन्हें आधुनिक हाइड्रोलॉजिकल और इंजीनियरिंग विशेषज्ञता द्वारा संवर्धित किया गया है, ताकि प्रामाणिकता और संरचनात्मक अखंडता दोनों सुनिश्चित हो सकें।
- •शैक्षिक घटकों में राजस्थान की जल प्रबंधन की समृद्ध विरासत के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने और जिम्मेदार जल उपयोग को बढ़ावा देने के लिए बहाल किए गए स्थलों पर 'जल स्मृति केंद्र' (जल विरासत केंद्र) की स्थापना शामिल है।
- •यह पहल राजस्थान के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में जल सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो विरासत संरक्षण और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन रणनीतियों के बीच तालमेल प्रदर्शित करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'पारंपरिक जल धारा पुनरुत्थान अभियान' पारंपरिक जल संरचनाओं के लिए राजस्थान सरकार की एक पहल है।
- यह बावड़ियों, कुंडों, झालरों और नाड़ियों के जीर्णोद्धार पर केंद्रित है।
- अभियान सामुदायिक भागीदारी पर जोर देता है और पारंपरिक तथा आधुनिक तकनीकों को एकीकृत करता है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- राजस्थान के 'पारंपरिक जल धारा पुनरुत्थान अभियान' को एक केस स्टडी के रूप में उपयोग करते हुए, शुष्क क्षेत्रों में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने और जलवायु लचीलेपन को बढ़ाने में पारंपरिक जल संचयन प्रणालियों की भूमिका का मूल्यांकन करें।
- चर्चा करें कि पारंपरिक जल संरचनाओं जैसे सांस्कृतिक विरासत स्थलों का पुनरुत्थान स्थानीय आर्थिक विकास, सामुदायिक सशक्तिकरण और पर्यावरणीय स्थिरता में कैसे योगदान कर सकता है।
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72. राजस्थान ने दुर्लभ मृदा तत्वों (आरईई) के अन्वेषण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए नई नीति का अनावरण किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
राजस्थान सरकार ने हाल ही में राज्य के भीतर दुर्लभ मृदा तत्वों (आरईई) के अन्वेषण, खनन और मूल्य संवर्धन में तेजी लाने के उद्देश्य से एक व्यापक नीतिगत ढांचा प्रस्तुत किया है, जो महत्वपूर्ण खनिजों में भारत की आत्मनिर्भरता के रणनीतिक अभियान के अनुरूप है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •नई नीति सिरोही, पाली और बाड़मेर जैसे जिलों में प्रमुख भूवैज्ञानिक क्षेत्रों को दुर्लभ मृदा तत्वों के महत्वपूर्ण भंडार के रूप में पहचानती है, जो उच्च-तकनीकी उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- •यह अन्वेषण लाइसेंस और खनन पट्टों के लिए एकल-खिड़की मंजूरी सहित एक सुव्यवस्थित नियामक वातावरण प्रदान करती है, ताकि घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों निवेशकों को आकर्षित किया जा सके।
- •यह नीति स्वदेशी प्रसंस्करण और शोधन क्षमताओं पर जोर देती है, राजस्थान के भीतर आरईई पृथक्करण और धातुकर्म इकाइयों की स्थापना के लिए प्रोत्साहन प्रदान करती है, जिससे स्थानीय मूल्य संवर्धन और रोजगार को बढ़ावा मिलता है।
- •वित्तीय प्रोत्साहन, जैसे पूंजीगत सब्सिडी, ब्याज सबवेंशन और कर छूट, आरईई मूल्य श्रृंखला में निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदान किए जाएंगे, जिसमें पूर्वेक्षण से लेकर अंतिम उत्पाद निर्माण तक शामिल है।
- •नीति कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाने, भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण करने और आरईई निष्कर्षण और प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित 'राजस्थान महत्वपूर्ण खनिज विकास निगम' का गठन किया जाएगा।
- •इस पहल का उद्देश्य आरईई आयात पर भारत की निर्भरता को कम करना और राजस्थान को इन रणनीतिक खनिजों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करना है, जो नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा जैसे क्षेत्रों का समर्थन करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- राजस्थान की नई नीति सिरोही, पाली और बाड़मेर जैसे जिलों में दुर्लभ मृदा तत्वों (आरईई) पर केंद्रित है।
- आरईई नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा जैसे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- इस नीति का उद्देश्य 'राजस्थान महत्वपूर्ण खनिज विकास निगम' की स्थापना करना है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- भारत की आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए दुर्लभ मृदा तत्वों के रणनीतिक महत्व पर चर्चा करें, और राजस्थान जैसी राज्य-स्तरीय नीतियाँ राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता में कैसे योगदान करती हैं।
- राजस्थान जैसे राज्य में, जो अपने नाजुक रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए जाना जाता है, आरईई खनन और प्रसंस्करण गतिविधियों के तीव्र होने से जुड़े संभावित सामाजिक-आर्थिक लाभों और पर्यावरणीय चुनौतियों का विश्लेषण करें।
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73. परियोजना ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) 2.0 लॉन्च: राजस्थान और गुजरात में संरक्षण को मजबूत करना
चर्चा में क्यों? (Why in News)
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने 'परियोजना ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) 2.0' का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ किया है, जो गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों की रक्षा के लिए एक उन्नत, बहुआयामी संरक्षण पहल है, जिसमें राजस्थान और गुजरात में इसके शेष गढ़ों पर प्राथमिक ध्यान केंद्रित किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •परियोजना जीआईबी 2.0 पिछले प्रयासों पर आधारित है, जिसमें आवास निगरानी के लिए ड्रोन निगरानी और व्यक्तिगत पक्षियों के लिए जीपीएस टैगिंग जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों को एकीकृत किया गया है ताकि आंदोलन पैटर्न को ट्रैक किया जा सके और संरक्षण रणनीतियों को सूचित किया जा सके।
- •एक महत्वपूर्ण घटक में 'जीआईबी सुरक्षित क्षेत्र पहल' शामिल है, जो महत्वपूर्ण जीआईबी आवासों में मौजूदा ओवरहेड बिजली लाइनों, विशेष रूप से डेजर्ट नेशनल पार्क (राजस्थान) और कच्छ वन्यजीव अभयारण्य (गुजरात) में, को भूमिगत केबलों में बदलने पर केंद्रित है ताकि टकराव से होने वाली मृत्यु दर को कम किया जा सके।
- •यह परियोजना स्थानीय समुदायों, विशेषकर किसानों के लिए, जीआईबी-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने और घोंसले बनाने वाली जगहों की सुरक्षा के लिए प्रोत्साहन-आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी पर भी जोर देती है।
- •जैसलमेर में जीआईबी संरक्षण प्रजनन केंद्र पर कैप्टिव प्रजनन सुविधाओं और आनुवंशिक अनुसंधान कार्यक्रमों का विस्तार जनसंख्या को मजबूत करने और आनुवंशिक विविधता सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखता है।
- •जीआईबी वितरण श्रेणियों में निर्बाध संरक्षण प्रयासों को सुनिश्चित करने के लिए अंतर-राज्य समन्वय तंत्र को मजबूत किया गया है, जिसमें राज्य वन विभाग, नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन शामिल हैं।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (आर्डियोटिस नाइग्रिसेप्स) को IUCN द्वारा 'गंभीर रूप से लुप्तप्राय' के रूप में सूचीबद्ध किया गया है और इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में शामिल किया गया है।
- यह राजस्थान का राज्य पक्षी है और मुख्य रूप से राजस्थान और गुजरात के शुष्क और अर्ध-शुष्क घास के मैदानों में पाया जाता है, जिसकी छोटी आबादी महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में भी है।
- प्रमुख खतरों में आवास का नुकसान और विखंडन, बिजली लाइनों से टकराव और शिकार शामिल हैं।
- जैसलमेर, राजस्थान में डेजर्ट नेशनल पार्क, जीआईबी के लिए अंतिम शेष गढ़ों में से एक है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- जीआईबी जैसी गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण अक्सर एक बहु-हितधारक दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है, जो पारिस्थितिक संरक्षण को विकासात्मक आवश्यकताओं के साथ संतुलित करता है, विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार में।
- परियोजना जीआईबी 2.0 की सफलता प्रभावी सामुदायिक जुड़ाव और स्थानीय आबादी को वन्यजीवों और आवासों के संरक्षक के रूप में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करने पर निर्भर करती है।
- बिजली लाइनों के टकराव को कम करने की चुनौती बुनियादी ढाँचा योजना में, विशेष रूप से हरित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और शमन उपायों को प्रारंभिक रूप से एकीकृत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालती है।
- व्यापक आवास वाली प्रजातियों के लिए अंतर-राज्यीय सहयोग महत्वपूर्ण है, जिसमें समग्र संरक्षण परिणामों को सुनिश्चित करने के लिए एक एकीकृत रणनीति और संसाधन आवंटन की आवश्यकता होती है।
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74. हिमालयी ग्लेशियरों का पिघलना तेज हुआ: भारत की जल सुरक्षा के लिए गंभीर निहितार्थ
चर्चा में क्यों? (Why in News)
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) और अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों के सहयोग से एक व्यापक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें हिमालयी ग्लेशियरों के पिघलने की चिंताजनक त्वरण पर प्रकाश डाला गया है, जो भारत की दीर्घकालिक जल सुरक्षा और क्षेत्रीय पारिस्थितिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण खतरा पैदा कर रहा है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •‘स्टेट ऑफ हिमालयन ग्लेशियर 2026’ नामक रिपोर्ट बताती है कि प्रमुख ग्लेशियरों के पिघलने की औसत वार्षिक दर 15-20 मीटर है, जो पिछले दशक के निष्कर्षों की तुलना में 30% अधिक है।
- •यह मध्य शताब्दी तक ग्लेशियर द्रव्यमान में महत्वपूर्ण कमी का अनुमान लगाता है, जिससे गंगा, सिंधु और ब्रह्मपुद जैसी प्रमुख नदियों का बारहमासी प्रवाह प्रभावित होगा, जो 1.5 अरब से अधिक लोगों का भरण-पोषण करती हैं।
- •ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड्स (GLOFs) की बढ़ती आवृत्ति और तीव्रता देखी गई है, जो उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम में निचले इलाकों के समुदायों और बुनियादी ढाँचे को खतरे में डाल रही है।
- •रिपोर्ट हिमालयी ग्लेशियरों की भारत के 'जल मीनारों' के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देती है और कम जलविद्युत क्षमता के कारण संभावित जल संकट, कृषि व्यवधान और ऊर्जा चुनौतियों की चेतावनी देती है।
- •यह GLOFs के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, सतत जल संसाधन प्रबंधन और ट्रांसबाउंडरी नदी घाटियों पर क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ाने सहित अनुकूलन और शमन रणनीतियों के तत्काल कार्यान्वयन का आह्वान करता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- हिमालयी ग्लेशियर आर्कटिक और अंटार्कटिक के बाद बर्फ का तीसरा सबसे बड़ा भंडार हैं, जिन्हें अक्सर 'तीसरा ध्रुव' कहा जाता है।
- हिमालय से निकलने वाली प्रमुख नदी प्रणालियों में सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र, सतलुज और उनकी सहायक नदियाँ शामिल हैं।
- ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) एक ग्लेशियल झील से पानी का अचानक निकलना है, जो अक्सर प्राकृतिक बांधों के टूटने के कारण होता है।
- यह रिपोर्ट पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और INCOIS के सहयोगात्मक प्रयास का परिणाम थी।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- तेजी से ग्लेशियरों का पिघलना भारत में जल संकट को बढ़ा रहा है, जिससे कृषि उत्पादकता, शहरी जल आपूर्ति और ग्लेशियर पिघलने वाले पानी पर निर्भर समुदायों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
- हिमालय में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के लिए मजबूत जलवायु अनुकूलन योजनाओं की आवश्यकता है, जिसमें लचीले बुनियादी ढांचे में निवेश करना और जलवायु-स्मार्ट कृषि को बढ़ावा देना शामिल है।
- अंतर-देशीय जल शासन महत्वपूर्ण हो जाता है, जिसके लिए साझा नदी संसाधनों को समान और स्थायी रूप से प्रबंधित करने के लिए तटवर्ती देशों के साथ कूटनीतिक जुड़ाव और सहकारी ढाँचे की आवश्यकता होती है।
- GLOFs की बढ़ती आवृत्ति कमजोर क्षेत्रों में बेहतर पूर्वानुमान, भूमि-उपयोग योजना और सामुदायिक तैयारी कार्यक्रमों सहित व्यापक आपदा जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियों की आवश्यकता पर जोर देती है।
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75. पर्यावरण मंत्रालय ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन परियोजनाओं के लिए विशेष ईआईए ढाँचे का अनावरण किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने भारत के महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) के तहत परियोजनाओं के लिए एक नया, विशेष पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) ढाँचा जारी किया है, जिसका उद्देश्य पारिस्थितिक स्थिरता सुनिश्चित करते हुए पर्यावरणीय मंजूरी को सुव्यवस्थित करना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •यह ढाँचा हरित हाइड्रोजन उत्पादन से जुड़ी विशिष्ट पर्यावरणीय चिंताओं को संबोधित करता है, जिसमें इलेक्ट्रोलिसिस के लिए पर्याप्त जल खपत, नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना (सौर, पवन फार्म) के लिए बड़े भूमि की आवश्यकताएं और रासायनिक उप-उत्पादों या अपशिष्ट धाराओं से संभावित प्रभाव शामिल हैं।
- •यह सभी NGHM परियोजनाओं के लिए एक व्यापक 'जल प्रबंधन योजना' अनिवार्य करता है, जिसमें विशेष रूप से जल-संकट वाले क्षेत्रों में स्थित परियोजनाओं के लिए जल स्रोतों, दक्षता उपायों और जिम्मेदार निर्वहन का विस्तृत मूल्यांकन आवश्यक है।
- •परियोजनाएं बहु-स्तरीय स्क्रीनिंग प्रक्रिया से गुजरेंगी, जिसमें पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों, तटीय क्षेत्रों में प्रस्तावित या कृषि या वन भूमि से महत्वपूर्ण भूमि-उपयोग परिवर्तन वाली परियोजनाओं के लिए कड़ी जांच की जाएगी।
- •एक 'ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर ऑफसेट' तंत्र पेश किया गया है, जिसके तहत परियोजना प्रस्तावक को अपने पर्यावरणीय पदचिह्न के अनुपात में जैव विविधता संरक्षण या पारिस्थितिक बहाली प्रयासों में निवेश करना होगा।
- •यह ढाँचा जनसुनवाई के लिए भी दिशा-निर्देश निर्धारित करता है, जिसमें पर्यावरणीय जोखिमों और लाभों के पारदर्शी प्रकटीकरण पर जोर दिया गया है, और मूल्यांकन प्रक्रिया में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाने के लिए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) शुरू किया गया था।
- हरित हाइड्रोजन नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करके पानी के इलेक्ट्रोलिसिस के माध्यम से उत्पादित किया जाता है, ग्रे हाइड्रोजन (जीवाश्म ईंधन से) या ब्लू हाइड्रोजन (कार्बन कैप्चर के साथ) के विपरीत।
- ईआईए प्रस्तावित परियोजना या विकास के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों का मूल्यांकन करने की एक प्रक्रिया है, जिसमें अंतर-संबंधित सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और मानव-स्वास्थ्य प्रभावों को ध्यान में रखा जाता है।
- MoEFCC भारत में पर्यावरणीय मंजूरी के लिए नोडल मंत्रालय है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- NGHM परियोजनाओं के लिए विशेष ईआईए ढाँचा भारत की ऊर्जा संक्रमण लक्ष्यों को स्थायी रूप से प्राप्त करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो औद्योगिक विकास को पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलित करता है।
- 'जल प्रबंधन योजना' को लागू करना हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि जल-संकट वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जल की खपत संघर्षों को जन्म दे सकती है और स्थानीय पारिस्थितिक चुनौतियों को बढ़ा सकती है।
- 'ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर ऑफसेट' तंत्र जैव विविधता संरक्षण को सीधे औद्योगिक विकास में एकीकृत करने का एक मार्ग प्रदान करता है, जिससे संभावित रूप से 'शुद्ध सकारात्मक' पर्यावरणीय प्रभाव को बढ़ावा मिलता है।
- बड़े पैमाने की ऊर्जा परियोजनाओं के लिए सामाजिक स्वीकृति प्राप्त करने और 'ग्रीनवॉशिंग' चिंताओं को रोकने के लिए प्रभावी जनसुनवाई और पारदर्शी जोखिम संचार महत्वपूर्ण हैं, जिससे लाभों और बोझों का समान वितरण सुनिश्चित होता है।
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76. भारत का डेंगू के लिए पहला स्वदेशी mRNA टीका महत्वपूर्ण चरण III नैदानिक परीक्षणों में प्रवेश किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
स्वदेशी वैक्सीन विकास के लिए एक महत्वपूर्ण छलांग में, डेंगू बुखार के लिए पहला mRNA-आधारित वैक्सीन उम्मीदवार, जिसे एक भारतीय बायोफार्मास्युटिकल कंपनी द्वारा विकसित किया गया है, ने भारत में कई साइटों पर अपने चरण III नैदानिक परीक्षण शुरू कर दिए हैं, जो उन्नत वैक्सीन प्रौद्योगिकियों में भारत की बढ़ती शक्ति को प्रदर्शित करता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**वैक्सीन उम्मीदवार:** 'डेन्गावैक-एमआरएनए' नामक यह टीका डेंगू वायरस के सभी चार सीरोटाइप (DENV-1, DENV-2, DENV-3, और DENV-4) के विशिष्ट एंटीजन के लिए mRNA अनुक्रमों को वितरित करने के लिए एक उपन्यास लिपिड नैनोपार्टिकल (LNP) डिलीवरी प्रणाली का उपयोग करता है।
- •**चरण III परीक्षण:** इन बड़े पैमाने के परीक्षणों में स्थानिक क्षेत्रों में 15 साइटों पर 18-65 वर्ष की आयु के 10,000 से अधिक प्रतिभागी शामिल हैं, जिसमें प्राथमिक समापन बिंदु वायरोलॉजिकल रूप से पुष्टि किए गए रोगसूचक डेंगू और सुरक्षा प्रोफाइल के खिलाफ वैक्सीन प्रभावकारिता पर केंद्रित हैं।
- •**स्वदेशी विकास:** 'भारत बायोजीन प्राइवेट लिमिटेड' द्वारा जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) और ICMR के सहयोग से विकसित, यह टीका भारत में प्रचलित उष्णकटिबंधीय रोगों की चुनौतियों के लिए तैयार की गई अत्याधुनिक mRNA प्रौद्योगिकी का लाभ उठाता है।
- •**संभावित प्रभाव:** यदि सफल होता है, तो DengaVac-mRNA डेंगू की रोकथाम में क्रांति ला सकता है, रुग्णता और मृत्यु दर को काफी कम कर सकता है, और भारत तथा अन्य उष्णकटिबंधीय देशों में सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत कर सकता है।
- •**तकनीकी प्रगति:** यह उपलब्धि भारत को mRNA वैक्सीन प्रौद्योगिकी में एक नेता के रूप में स्थापित करती है, पारंपरिक प्लेटफार्मों से परे इसकी वैक्सीन विनिर्माण क्षमताओं का विस्तार करती है और भविष्य के संक्रामक रोग के प्रकोपों के लिए तैयारी बढ़ाती है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- mRNA टीके: मैसेंजर आरएनए का उपयोग करते हैं जो मानव कोशिकाओं को एंटीजन उत्पन्न करने का निर्देश देते हैं, जिससे वास्तविक रोगज़नक़ को पेश किए बिना प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया ट्रिगर होती है।
- डेंगू बुखार: एडीस मच्छरों द्वारा फैलने वाला एक वायरल रोग, जो उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में प्रचलित है, जो चार अलग-अलग सीरोटाइप (DENV-1, DENV-2, DENV-3, DENV-4) के कारण होता है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारी और आत्मनिर्भरता:** डेंगू के लिए स्वदेशी mRNA वैक्सीन का विकास सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में आत्मनिर्भरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह उष्णकटिबंधीय रोगों और संभावित भविष्य की महामारियों के खिलाफ राष्ट्रीय तैयारी को बढ़ाता है, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भरता को कम करता है और उन्नत चिकित्सा समाधानों तक समान पहुंच सुनिश्चित करता है।
- **नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और बायोमेडिकल अनुसंधान:** यह सफलता भारत के बायोमेडिकल अनुसंधान और विकास पारिस्थितिकी तंत्र के परिपक्व होने पर प्रकाश डालती है। यह अत्याधुनिक जैव प्रौद्योगिकी में निवेश को मान्य करता है, शिक्षाविदों, उद्योग और सरकार के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है, और भारत को उन्नत चिकित्सा नवाचारों के केंद्र के रूप में स्थापित करता है, जिसमें राजस्थान जैसे उच्च रोग बोझ वाले क्षेत्रों के लिए भी शामिल है, जहाँ मौसमी डेंगू के प्रकोप होते हैं।
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77. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को मजबूत करने के लिए 'छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) पर राष्ट्रीय नीति 2026' को मंजूरी दी
चर्चा में क्यों? (Why in News)
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) पर राष्ट्रीय नीति 2026' को अपनी मंजूरी दे दी है, जो भारत की ऊर्जा मिश्रण में विविधता लाने, शुद्ध-शून्य लक्ष्यों को प्राप्त करने और उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकी के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने की रणनीतिक प्रतिबद्धता का संकेत है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**नीति का उद्देश्य:** भारत में SMRs के अनुसंधान, विकास, परिनियोजन और नियामक निरीक्षण के लिए एक व्यापक ढांचा स्थापित करना, उन्हें 2040 तक देश की स्वच्छ ऊर्जा अवसंरचना का एक महत्वपूर्ण घटक बनाना।
- •**प्रमुख प्रावधान:** नीति SMR प्रौद्योगिकी विकास में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPPs) के लिए प्रोत्साहन, परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) द्वारा सुव्यवस्थित लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं और स्वदेशी डिजाइन और विनिर्माण क्षमताओं के लिए समर्पित धन का प्रावधान करती है।
- •**SMRs के रणनीतिक लाभ:** उनके छोटे पदचिह्न, बढ़ी हुई सुरक्षा सुविधाएँ, परिनियोजन में लचीलापन (रिमोट स्थानों और औद्योगिक अनुप्रयोगों सहित), और हाइड्रोजन और जिला हीटिंग के सह-उत्पादन की क्षमता पर जोर देती है, जो भारत के हरित हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप है।
- •**क्षमता लक्ष्य:** नीति का लक्ष्य 2035 तक 5-7 SMR इकाइयों की प्रारंभिक तैनाती है, जो राष्ट्रीय ग्रिड में लगभग 2-3 GW का योगदान करेगी, और मांग व तकनीकी प्रगति के आधार पर आगे विस्तार की योजना है।
- •**कौशल विकास:** परमाणु इंजीनियरों और तकनीशियनों के लिए शैक्षणिक संस्थानों और उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रमों के साथ सहयोग के माध्यम से एक विशेष कार्यबल बनाने पर महत्वपूर्ण ध्यान केंद्रित किया गया है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- SMRs (छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर): उन्नत परमाणु रिएक्टर जिनकी शक्ति उत्पादन क्षमता आमतौर पर 300 MWe से कम होती है, जिन्हें कारखाने में निर्माण और मॉड्यूलर परिनियोजन के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- SMR नीति के लिए नोडल प्राधिकरण: प्रधानमंत्री कार्यालय के तहत परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE), AERB द्वारा नियामक निरीक्षण के साथ।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन शमन:** SMRs एक विश्वसनीय, बेसलोड, कार्बन-मुक्त ऊर्जा स्रोत प्रदान करते हैं जो भारत की जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को काफी कम कर सकता है, पेरिस समझौते के तहत इसके राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) में योगदान कर सकता है और कम कार्बन वाली अर्थव्यवस्था में संक्रमण को तेज कर सकता है। उनकी मॉड्यूलर प्रकृति विविध ऊर्जा ग्रिडों में लचीले एकीकरण की अनुमति देती है।
- **आर्थिक विविधीकरण और क्षेत्रीय विकास:** SMR नीति एक नया विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र बनाकर, निवेश आकर्षित करके और कुशल रोजगार पैदा करके आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकती है। वितरित बिजली उत्पादन के लिए उनकी उपयुक्तता दूरदराज के क्षेत्रों, जैसे राजस्थान राज्यों में औद्योगिक विकास और ग्रिड स्थिरता को सुविधाजनक बना सकती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं का समर्थन होता है और पारेषण हानि कम होती है।
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78. इसरो ने गगनयान मिशन के क्रू मॉड्यूल एकीकरण और पर्यावरणीय नियंत्रण एवं जीवन रक्षक प्रणाली (ECLSS) परीक्षण में महत्वपूर्ण मील के पत्थर हासिल किए
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने गगनयान मिशन के क्रू मॉड्यूल के एकीकरण के एक महत्वपूर्ण चरण और स्वदेशी रूप से विकसित पर्यावरणीय नियंत्रण एवं जीवन रक्षक प्रणाली (ECLSS) के व्यापक जमीनी परीक्षण के सफल समापन की घोषणा की, जो भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**क्रू मॉड्यूल एकीकरण:** क्रू मॉड्यूल (CM) की संरचनात्मक अखंडता और वायुरोधी सीलिंग का सफलतापूर्वक सत्यापन किया गया है, जिसमें एवियोनिक्स, पावर इंटरफेस और क्रू इंटरफेस के प्रारंभिक फिटमेंट सहित महत्वपूर्ण उप-प्रणालियों का एकीकरण शामिल है।
- •**पर्यावरणीय नियंत्रण एवं जीवन रक्षक प्रणाली (ECLSS):** बेंगलुरु स्थित इसरो के मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र (HSFC) में ECLSS के लिए व्यापक जमीनी सिमुलेशन और परीक्षण पूरे कर लिए गए हैं, जो नियोजित 3-दिवसीय मिशन अवधि के लिए इष्टतम केबिन दबाव, तापमान, आर्द्रता और CO2 स्तरों को बनाए रखने की इसकी क्षमता को प्रदर्शित करता है।
- •**जल पुनर्चक्रण और अपशिष्ट प्रबंधन:** ECLSS परीक्षणों में सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण में चालक दल के स्वास्थ्य और स्वच्छता को बनाए रखने के लिए डिज़ाइन किए गए एक बंद-लूप जल पुनर्चक्रण प्रणाली और प्रारंभिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रोटोकॉल का सफल सत्यापन भी शामिल था।
- •**अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण और सिमुलेशन:** समानांतर रूप से, चार भारतीय अंतरिक्ष यात्री-नामित बेंगलुरु में अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण सुविधा (ATF) में एकीकृत CM मॉक-अप और ECLSS कंसोल संचालन के साथ सिमुलेशन सहित उन्नत मिशन-विशिष्ट प्रशिक्षण से गुजर रहे हैं।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- गगनयान मिशन: भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम, जिसका लक्ष्य तीन सदस्यीय दल को 3-दिवसीय मिशन के लिए 400 किमी की कक्षा में भेजना है।
- ECLSS: पर्यावरणीय नियंत्रण एवं जीवन रक्षक प्रणाली, अंतरिक्ष में मानव जीवन को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण, जिसे इसरो द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **सामरिक स्वायत्तता और तकनीकी कौशल:** गगनयान के सफल एकीकरण और परीक्षण चरण उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों में भारत की बढ़ती क्षमताओं को रेखांकित करते हैं, जिससे विदेशी सहायता पर निर्भरता कम होती है और एक प्रमुख अंतरिक्ष राष्ट्र के रूप में इसकी स्थिति मजबूत होती है। यह 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के अनुरूप है।
- **अनुसंधान एवं विकास और आर्थिक विकास के लिए उत्प्रेरक:** यह मिशन सामग्री विज्ञान, प्रणोदन, रोबोटिक्स और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग जैसे विविध क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास के लिए एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है। यह सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में नवाचार को प्रोत्साहित करता है, एक उभरती हुई अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है और उच्च-कुशल रोजगार के अवसर पैदा करता है।
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79. ग्रामीण अर्थव्यवस्था का पुनरुद्धार: एमएसपी की प्रभावशीलता, कृषि-प्रसंस्करण को बढ़ावा और राजस्थान की विकास पहलें
चर्चा में क्यों? (Why in News)
केंद्र सरकार द्वारा खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की हालिया घोषणा और कृषि अवसंरचना तथा ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने के लिए चल रहे राज्य-स्तरीय प्रयास, विशेष रूप से राजस्थान में, समावेशी आर्थिक विकास और किसान कल्याण पर चर्चा के केंद्र में हैं। इन पहलों का उद्देश्य ग्रामीण समृद्धि को बढ़ाना और कृषि आय स्रोतों में विविधता लाना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**खरीफ फसलों के लिए एमएसपी में वृद्धि:** केंद्र सरकार ने विपणन सत्र 2026-27 के लिए सभी 14 अनिवार्य खरीफ फसलों के एमएसपी में पर्याप्त वृद्धि की घोषणा की है, जिससे अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत (ए2+एफएल) पर न्यूनतम 50% रिटर्न सुनिश्चित किया जा सके। इसका उद्देश्य विशेष रूप से दालों और तिलहन की ओर फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना है, ताकि आयात निर्भरता कम हो सके।
- •**खाद्य मुद्रास्फीति में कमी:** जबकि एमएसपी में वृद्धि का उद्देश्य किसानों की आय में सुधार करना है, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के खाद्य मुद्रास्फीति घटक में कमी के संकेत मिले हैं, जो बेहतर आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और बफर स्टॉक संचालन को दर्शाता है। हालांकि, संशोधित एमएसपी से उत्पन्न होने वाले किसी भी मुद्रास्फीति के दबाव को रोकने के लिए सतर्कता बरती जा रही है।
- •**राजस्थान का कृषि-प्रसंस्करण पर जोर:** राजस्थान राज्य बजट 2026-27 ने 'मुख्यमंत्री किसान समृद्धि योजना' (एमकेएसवाई) के लिए ₹1,500 करोड़ का एक महत्वपूर्ण कोष आवंटित किया है, जो कृषि-प्रसंस्करण समूहों को बढ़ावा देने, कोल्ड चेन विकास और किसानों के लिए प्रत्यक्ष बाजार संपर्क को सुविधाजनक बनाने पर केंद्रित है। आरआईआईसीओ (राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास और निवेश निगम) ने पांच नए विशेष कृषि-खाद्य पार्कों के विकास की शुरुआत की है।
- •**मनरेगा का ग्रामीण प्रभाव:** राजस्थान में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के आंकड़ों से मजबूत प्रदर्शन का संकेत मिलता है, जिसमें वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में लगभग 45 करोड़ व्यक्ति-दिवस उत्पन्न हुए हैं। यह विशेष रूप से कृषि के कमजोर मौसमों के दौरान महत्वपूर्ण ग्रामीण रोजगार प्रदान करता है, जिससे ग्रामीण क्रय शक्ति बढ़ती है और गरीबी उन्मूलन में योगदान मिलता है।
- •**जलवायु-अनुकूल कृषि पर ध्यान:** केंद्रीय और राज्य दोनों नीतियां जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने पर तेजी से जोर दे रही हैं। एमकेएसवाई के तहत राजस्थान की पहलों में सूक्ष्म-सिंचाई, सौर पंपों के लिए सब्सिडी और कृषि स्थिरता बढ़ाने के लिए सूखा-प्रतिरोधी फसल किस्मों को बढ़ावा देना शामिल है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) गणना विधि (ए2+एफएल, सी2)।
- एमएसपी घोषणा में शामिल खरीफ फसलें (जैसे चावल, मक्का, दालें, तिलहन)।
- राजस्थान की 'मुख्यमंत्री किसान समृद्धि योजना' (एमकेएसवाई) और उसके उद्देश्य।
- आरआईआईसीओ (राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास और निवेश निगम) और कृषि-खाद्य पार्कों में इसकी भूमिका।
- राजस्थान में मनरेगा के तहत उत्पन्न व्यक्ति-दिवस (वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही: 45 करोड़)।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **आय सहायता और विविधीकरण उपकरण के रूप में एमएसपी:** हालांकि एमएसपी किसानों के लिए सुरक्षा जाल प्रदान करने और लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है, इसकी प्रभावशीलता मजबूत खरीद अवसंरचना और कुशल बाजार एकीकरण पर निर्भर करती है। रणनीतिक वृद्धि, विशेष रूप से दालों और तिलहन के लिए, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित कर सकती है, पानी की अधिक खपत वाली फसलों पर निर्भरता कम कर सकती है, और आयात घटाकर खाद्य सुरक्षा को मजबूत कर सकती है।
- **मूल्य श्रृंखला एकीकरण और ग्रामीण औद्योगीकरण:** राजस्थान में आरआईआईसीओ और एमकेएसवाई द्वारा किए गए कृषि-प्रसंस्करण और कोल्ड चेन अवसंरचना में निवेश, फसल कटाई के बाद के नुकसान को कम करने, मूल्यवर्धन बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-कृषि रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह एकीकरण किसानों को मूल्य श्रृंखला में आगे बढ़ने, उनकी मोलभाव करने की शक्ति और कुल आय में सुधार करने में मदद करता है।
- **ग्रामीण लचीलापन और मांग सृजन में मनरेगा की भूमिका:** मनरेगा एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा जाल बना हुआ है, जो गारंटीशुदा रोजगार प्रदान करता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तरलता डालता है। समय पर मजदूरी भुगतान और टिकाऊ संपत्ति बनाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए इसका प्रभावी कार्यान्वयन, ग्रामीण मांग को बनाए रखने के लिए आवश्यक है, खासकर आर्थिक मंदी के दौरान, और समावेशी विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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80. RBI की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट उभरते व्यापक-वित्तीय जोखिमों के बीच बैंकिंग क्षेत्र के लचीलेपन पर प्रकाश डालती है
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल ही में अपनी अर्ध-वार्षिक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) जारी की है, जिसमें भारतीय वित्तीय प्रणाली के स्वास्थ्य और लचीलेपन का व्यापक मूल्यांकन किया गया है और संभावित जोखिमों व कमजोरियों को रेखांकित किया गया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच बैंकिंग क्षेत्र की निरंतर मजबूती पर जोर दिया।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार:** अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (जीएनपीए) अनुपात अपनी गिरावट जारी रखते हुए मार्च 2026 तक 3.2% पर आ गया, और आधारभूत परिदृश्य के तहत मार्च 2027 तक 3.0% से नीचे गिरने का अनुमान है, जो मजबूत परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार का संकेत है।
- •**मजबूत पूंजीकरण:** एससीबी का पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR) मार्च 2026 तक 16.5% पर मजबूत बना रहा, जो नियामक न्यूनतम 9% से काफी ऊपर है, जो संभावित झटकों को झेलने के लिए पर्याप्त पूंजी बफर को दर्शाता है।
- •**स्वस्थ ऋण वृद्धि:** विशेष रूप से खुदरा और सेवा क्षेत्रों में ऋण वृद्धि मजबूत बनी हुई है, जो समग्र आर्थिक गतिविधि का समर्थन कर रही है। हालांकि, आरबीआई ने असुरक्षित खुदरा ऋणों में संभावित क्षेत्रीय अतिताप के प्रति आगाह किया है, और बैंकों से विवेकपूर्ण व्यवहार करने का आग्रह किया है।
- •**व्यापक-वित्तीय जोखिम:** एफएसआर ने वैश्विक भू-राजनीतिक विकास, कमोडिटी मूल्य अस्थिरता और उन्नत अर्थव्यवस्थाओं की मौद्रिक नीति के सख्त होने से संभावित बाहरी प्रभावों से उत्पन्न होने वाले उभरते जोखिमों पर प्रकाश डाला, जो भारत के बाहरी क्षेत्र और घरेलू मुद्रास्फीति (सीपीआई/डब्ल्यूपीआई) को प्रभावित कर सकते हैं।
- •**मौद्रिक नीति के रुख की पुष्टि:** आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने अपने 'तटस्थ' रुख की पुष्टि की है। वर्तमान प्रमुख नीतिगत दरें हैं: रेपो दर 6.00% (जून 2025 में 25 बीपीएस की कटौती के बाद), रिवर्स रेपो दर 3.35%, नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) 4.00%, वैधानिक तरलता अनुपात (एसएलआर) 18.00%, सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) दर 6.25% और बैंक दर 6.25%। अगली एमपीसी बैठक अगस्त 2025 के लिए निर्धारित है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- आरबीआई गवर्नर: संजय मल्होत्रा। एमपीसी का रुख: तटस्थ। अगली एमपीसी बैठक: अगस्त 2025।
- प्रमुख आरबीआई दरें: रेपो दर 6.00%, रिवर्स रेपो दर 3.35%, सीआरआर 4.00%, एसएलआर 18.00%, एमएसएफ दर 6.25%, बैंक दर 6.25%।
- वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) आरबीआई का अर्ध-वार्षिक प्रकाशन है।
- मार्च 2027 तक एससीबी के लिए जीएनपीए अनुपात का अनुमान: 3.0% से नीचे।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **व्यापक-विवेकपूर्ण नीति में एफएसआर की भूमिका:** एफएसआर प्रणालीगत जोखिमों की पहचान करने और व्यापक-विवेकपूर्ण नीतिगत उपकरणों को सूचित करने के लिए महत्वपूर्ण है, जो वित्तीय क्षेत्र की स्थिरता सुनिश्चित करता है, जो सतत आर्थिक विकास के लिए एक पूर्व शर्त है। परिसंपत्ति गुणवत्ता और पूंजी पर्याप्तता पर इसके दूरंदेशी अनुमान नियामक हस्तक्षेपों का मार्गदर्शन करते हैं।
- **मौद्रिक नीति संचरण और ऋण प्रवाह:** 'तटस्थ' मौद्रिक नीति का रुख, एक लचीले बैंकिंग क्षेत्र के साथ, वास्तविक अर्थव्यवस्था में नीतिगत संकेतों के प्रभावी संचरण को सुनिश्चित करना है। बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता और पूंजी बफर बेहतर ऋण प्रवाह की सुविधा प्रदान करते हैं, जो निवेश और उपभोग के लिए महत्वपूर्ण है, पीएम गति शक्ति जैसी पहलों के तहत सरकार के पूंजीगत व्यय को बढ़ावा देने में पूरक है।
- **उभरते जोखिमों और वैश्विक संपर्कों को संबोधित करना:** जबकि घरेलू बुनियादी सिद्धांत मजबूत हैं, एफएसआर वैश्विक वित्तीय प्रणाली की परस्पर संबद्धता को रेखांकित करता है। अस्थिर एफडीआई/एफपीआई प्रवाह या व्यापार घाटे के दबाव जैसे बाहरी विपरीत परिस्थितियों से निपटने की भारत की क्षमता मजबूत घरेलू नीतियों और सतर्क नियामक ढांचे पर निर्भर करती है।
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81. उच्च-स्तरीय समिति ने न्यायिक नियुक्ति MoP में व्यापक सुधारों के लिए अंतरिम सिफारिशें प्रस्तुत कीं
चर्चा में क्यों? (Why in News)
उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायिक नियुक्तियों के लिए प्रक्रिया ज्ञापन (MoP) की समीक्षा और सुधारों का सुझाव देने हेतु उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद गठित एक उच्च-स्तरीय समिति ने अपनी अंतरिम सिफारिशें प्रस्तुत की हैं, जिससे न्यायिक स्वतंत्रता और जवाबदेही पर नए सिरे से बहस छिड़ गई है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रकाश चंद्र की अध्यक्षता वाली समिति ने न्यायिक पदों के लिए उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग और मूल्यांकन में अधिक पारदर्शिता और वस्तुनिष्ठ मानदंडों पर जोर दिया।
- •सिफारिशों में उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय के भीतर एक 'न्यायिक नियुक्ति सचिवालय' की स्थापना शामिल है, जिसमें वरिष्ठ न्यायाधीश और कानूनी विशेषज्ञ शामिल होंगे, ताकि उम्मीदवार की पहचान और पृष्ठभूमि की जांच की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जा सके।
- •उन्नयन के लिए विचाराधीन मौजूदा न्यायाधीशों के लिए एक 'प्रदर्शन मैट्रिक्स' का प्रस्ताव किया, जिसमें निर्णय की गुणवत्ता, न्यायिक स्वभाव, निपटान दर और ईमानदारी जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है, जिसका मूल्यांकन एक पारदर्शी प्रतिक्रिया तंत्र के माध्यम से किया जाएगा।
- •उम्मीदवार की पहचान के प्रारंभिक चरणों में वरिष्ठ अधिवक्ताओं और बार संघों सहित हितधारकों की एक विस्तृत श्रृंखला को शामिल करते हुए एक अनिवार्य परामर्श चरण का सुझाव दिया, जबकि कॉलेजियम के अंतिम निर्णय लेने के अधिकार को बरकरार रखा।
- •कॉलेजियम और कार्यपालिका दोनों द्वारा सिफारिशों को संसाधित करने के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा का आह्वान किया, जिसका उद्देश्य नियुक्तियों में देरी को कम करना है।
- •न्यायिक नियुक्तियों में बढ़ी हुई विविधता की वकालत की, जिसमें महिलाओं, अल्पसंख्यकों और विभिन्न क्षेत्रों सहित अल्पप्रतिनिधित्व वाले वर्गों के उम्मीदवारों पर सक्रिय रूप से विचार करने की सिफारिश की गई।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 और 217 जो उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित हैं।
- 'थ्री जजेस केसेज' के माध्यम से कॉलेजियम प्रणाली की उत्पत्ति और विकास।
- न्यायिक नियुक्तियों के लिए प्रक्रिया ज्ञापन (MoP) की प्रमुख विशेषताएं और महत्व।
- राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) की अवधारणा और उसकी संवैधानिक स्थिति (99वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम और उसके बाद उच्चतम न्यायालय द्वारा इसे निरस्त करना)।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- विश्लेषण करें कि MoP में प्रस्तावित सुधारों का उद्देश्य नियुक्ति प्रक्रिया में जवाबदेही और पारदर्शिता के साथ न्यायिक स्वतंत्रता को कैसे संतुलित करना है।
- 'न्यायिक नियुक्ति सचिवालय' की स्थापना और 'प्रदर्शन मैट्रिक्स' की शुरुआत का न्यायिक नियुक्तियों की गुणवत्ता और दक्षता पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव पर चर्चा करें।
- न्यायिक नियुक्तियों के ऐतिहासिक संदर्भ को ध्यान में रखते हुए, MoP को अंतिम रूप देने पर न्यायपालिका और कार्यपालिका के विचारों में सामंजस्य स्थापित करने में चुनौतियों और अवसरों का मूल्यांकन करें।
- न्यायिक नियुक्तियों में बढ़ी हुई विविधता की वकालत के महत्व और न्यायपालिका के भीतर सार्वजनिक विश्वास और समान प्रतिनिधित्व के लिए इसके निहितार्थों की जांच करें।
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82. संसद ने व्यापक राजनीतिक वित्तपोषण पारदर्शिता विधेयक 2026 पारित किया, प्रकटीकरण मानदंडों में वृद्धि
चर्चा में क्यों? (Why in News)
चुनावी लोकतंत्र में अधिक जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, संसद ने हाल ही में 'राजनीतिक वित्तपोषण पारदर्शिता (संशोधन) विधेयक, 2026' पारित किया, जिसका उद्देश्य राजनीतिक दान और स्वतंत्र चुनावी व्यय के लिए मौजूदा प्रकटीकरण मानदंडों में सुधार करना है। यह कदम स्वच्छ चुनावी वित्त के लिए नागरिक समाज की लगातार मांगों के बीच आया है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •यह विधेयक राजनीतिक वित्तपोषण के लिए एक एकीकृत ढांचा तैयार करने हेतु लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951, आयकर अधिनियम, 1961, और कंपनी अधिनियम, 2013 में संशोधन करता है।
- •यह राजनीतिक दलों द्वारा अपने ऑडिट रिपोर्ट में सभी दान की अनिवार्य घोषणा को अनिवार्य करता है, चाहे राशि कितनी भी हो, जो पूर्व के ₹20,000 की सीमा से आगे बढ़कर है।
- •तीसरे पक्ष के संगठनों और व्यक्तियों द्वारा 'स्वतंत्र चुनावी व्यय' की अवधारणा पेश करता है, जिसके लिए उन्हें भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के साथ पंजीकरण करने और राजनीतिक दल द्वारा सीधे प्रबंधित न की गई अभियान गतिविधियों के लिए धन के स्रोतों का खुलासा करने की आवश्यकता होती है।
- •राजनीतिक दलों के वित्त और चुनावी खर्चों की जांच करने के लिए भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) के तहत एक स्वतंत्र 'चुनावी लेखा परीक्षा प्राधिकरण' की स्थापना करता है, जो नए पारदर्शिता मानदंडों का अनुपालन सुनिश्चित करेगा।
- •गैर-प्रकटीकरण, झूठी घोषणाओं और अपारदर्शी वित्तपोषण प्रथाओं के लिए दंड बढ़ाता है, जिसमें बार-बार गैर-अनुपालन के लिए ECI द्वारा राजनीतिक दलों की मान्यता रद्द करना शामिल है।
- •यह विधेयक ECI द्वारा प्रबंधित एक समर्पित पोर्टल का भी प्रावधान करता है, जिसमें सभी घोषित राजनीतिक दान और व्यय का वास्तविक समय में खुलासा किया जाएगा, जिससे डेटा सार्वजनिक रूप से सुलभ हो सकेगा।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- राजनीतिक वित्तपोषण के लिए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951; आयकर अधिनियम, 1961; और कंपनी अधिनियम, 2013 में संशोधन।
- राजनीतिक दलों और चुनावी वित्त को विनियमित करने में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की भूमिका और शक्तियाँ।
- नए 'चुनावी लेखा परीक्षा प्राधिकरण' की स्थापना में नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) (अनुच्छेद 148-151) की भूमिका।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- भारत की राजनीतिक व्यवस्था में चुनावी लोकतंत्र को मजबूत करने, काले धन के प्रभाव को कम करने और जवाबदेही बढ़ाने में राजनीतिक वित्तपोषण पारदर्शिता विधेयक 2026 के महत्व पर चर्चा करें।
- विधेयक के प्रभावी कार्यान्वयन में संभावित चुनौतियों का विश्लेषण करें, विशेष रूप से 'स्वतंत्र चुनावी व्यय' की निगरानी और दंड के प्रवर्तन के संबंध में।
- मूल्यांकन करें कि विधेयक दानदाताओं की गोपनीयता और राजनीतिक दलों के लिए व्यावहारिक निहितार्थों से संबंधित संभावित चिंताओं के साथ अधिक पारदर्शिता की आवश्यकता को कैसे संतुलित करता है।
- नए ढांचे के तहत चुनावी प्रक्रियाओं में वित्तीय शुचिता और अखंडता सुनिश्चित करने में ECI और CAG जैसे संवैधानिक निकायों की बढ़ी हुई भूमिका की जांच करें।
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83. पूंजीगत व्यय, एफडीआई/एफपीआई और पीएम गति शक्ति की सहक्रिया भारत के आर्थिक विकास पथ को आगे बढ़ा रही है
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारत का आर्थिक विकास, बढ़े हुए सरकारी पूंजीगत व्यय, मजबूत विदेशी निवेश प्रवाह और पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बहु-मॉडल अवसंरचना विकास के परिवर्तनकारी प्रभाव के रणनीतिक संयोजन से लगातार मजबूत हो रहा है। औद्योगिक उत्पादन और रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह पर हालिया डेटा इस सकारात्मक गति को रेखांकित करता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •**सतत पूंजीगत व्यय:** केंद्रीय बजट 2026-27 में पूंजीगत व्यय के लिए महत्वाकांक्षी आवंटन, जो सकल घरेलू उत्पाद का 3.3% तक पहुंचने का अनुमान है, 2025-26 में 2.9% से बढ़कर, एक प्राथमिक चालक बना हुआ है, जो प्रमुख विकास क्षेत्रों में निजी क्षेत्र के निवेश को प्रभावी ढंग से बढ़ावा दे रहा है।
- •**मजबूत विदेशी निवेश:** वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में सालाना आधार पर 12% की स्वस्थ वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें महत्वपूर्ण हिस्से हरित ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में निर्देशित थे। विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) ने भी इसी तिमाही में 5 अरब डॉलर से अधिक का शुद्ध प्रवाह देखा, जो सकारात्मक बाजार भावना और भारत के स्थिर व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण से प्रेरित था।
- •**पीएम गति शक्ति का प्रभाव:** पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान ने रसद दक्षता बढ़ाने, परियोजना कार्यान्वयन की समय-सीमा को कम करने और एकीकृत आर्थिक गलियारों और रसद केंद्रों के विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विशेष रूप से, राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्रों का पश्चिमी समर्पित फ्रेट कॉरिडोर के साथ एकीकरण तेज हो गया है, जिससे नए निवेश के अवसर पैदा हुए हैं।
- •**रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह:** जून 2026 के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह अभूतपूर्व ₹1.95 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 14% की महत्वपूर्ण वृद्धि दर्शाता है। यह मजबूत उपभोग मांग, अर्थव्यवस्था के बढ़ते औपचारिकीकरण और बेहतर कर अनुपालन को दर्शाता है।
- •**विनिर्माण और औद्योगिक उत्पादन:** औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) ने मई 2026 में 6.8% की वृद्धि दर्ज की, जो मुख्य रूप से विनिर्माण और बिजली उत्पादन में मजबूत प्रदर्शन से प्रेरित है, जो औद्योगिक गतिविधि में व्यापक सुधार का संकेत है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- केंद्रीय बजट 2026-27 पूंजीगत व्यय लक्ष्य (उदाहरण के लिए, सकल घरेलू उत्पाद का 3.3%)।
- पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान और उसके उद्देश्य।
- वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के लिए एफडीआई और एफपीआई रुझान, निवेश आकर्षित करने वाले प्रमुख क्षेत्र।
- जून 2026 के लिए जीएसटी संग्रह: ₹1.95 लाख करोड़।
- मई 2026 के लिए औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) वृद्धि।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **सार्वजनिक निवेश की उत्प्रेरक भूमिका:** सरकार का बढ़ा हुआ पूंजीगत व्यय एक महत्वपूर्ण प्रतिचक्रीय भूमिका निभाता है, कुल मांग को प्रोत्साहित करता है, रोजगार पैदा करता है और उत्पादकता बढ़ाता है। यह 'क्राउडिंग-इन' प्रभाव निजी निवेश को प्रोत्साहित करता है, जो भारत के महत्वाकांक्षी विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने और एक प्रतिस्पर्धी विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।
- **रणनीतिक क्षेत्रों के लिए वैश्विक पूंजी आकर्षित करना:** सतत एफडीआई/एफपीआई प्रवाह भारत की दीर्घकालिक विकास गाथा में वैश्विक निवेशकों के विश्वास को इंगित करता है। हरित ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना और उन्नत विनिर्माण की ओर बदलाव सतत विकास और तकनीकी प्रगति के लिए भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप है, पारंपरिक क्षेत्रों पर निर्भरता कम करता है और वैश्विक झटकों के खिलाफ लचीलापन बढ़ाता है।
- **प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए एकीकृत अवसंरचना:** पीएम गति शक्ति का एकीकृत नियोजन और बहु-मॉडल कनेक्टिविटी पर जोर भारत के रसद परिदृश्य को बदल रहा है। पारगमन समय और लागत को कम करके, यह भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाता है, 'मेक इन इंडिया' पहल का समर्थन करता है, और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अधिक एकीकरण की सुविधा प्रदान करता है, अंततः अनुकूल व्यापार संतुलन और बाहरी क्षेत्र की स्थिरता में योगदान देता है।
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84. उच्चतम न्यायालय ने राज्यपाल के विवेकाधीन शक्तियों के दायरे को पुनः परिभाषित किया, संवैधानिक नैतिकता पर जोर
चर्चा में क्यों? (Why in News)
संघीय टकराव को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया, जिसमें राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियों की संवैधानिक सीमाओं को स्पष्ट किया गया, विशेष रूप से राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों पर सहमति और विधानसभा सत्र बुलाने के संबंध में।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •न्यायालय ने फैसला सुनाया कि अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल की विधेयक पर सहमति रोकने या उसे राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित करने की शक्ति पूर्ण नहीं है और संवैधानिक औचित्य द्वारा निर्देशित 'उचित समय-सीमा' के भीतर इसका प्रयोग किया जाना चाहिए।
- •इसने निर्दिष्ट किया कि विधेयक को विधायिका को वापस भेजना (अनुच्छेद 200 का परंतुक) स्पष्ट, वस्तुनिष्ठ कारणों के साथ होना चाहिए, और वैध आधार के बिना बार-बार सहमति रोकना लोकतांत्रिक विधायी प्रक्रिया को कमजोर करता है।
- •निर्णय में दोहराया गया कि राज्यपाल की भूमिका मुख्य रूप से संविधान की रक्षा और संरक्षण करना है, जो मंत्रिपरिषद (अनुच्छेद 163) की सहायता और सलाह पर कार्य करता है, सिवाय स्पष्ट रूप से परिभाषित विवेकाधीन कार्यों के।
- •न्यायालय ने राज्यपाल के विवेकाधीन कार्यों की संवैधानिक वैधता निर्धारित करने के लिए एक 'त्रिविध परीक्षण' की रूपरेखा तैयार की: (1) क्या संविधान स्पष्ट रूप से विवेक प्रदान करता है; (2) क्या कार्रवाई संघीय ढांचे और संसदीय लोकतंत्र के अनुरूप है; और (3) क्या कार्रवाई तर्कसंगत, गैर-मनमानी और वस्तुनिष्ठ सामग्री पर आधारित है।
- •विधानसभा को बुलाने, सत्रावसान करने या भंग करने के लिए, न्यायालय ने जोर दिया कि राज्यपाल को आम तौर पर मुख्यमंत्री और उनकी मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करना चाहिए, विवेकाधीन शक्ति उन स्थितियों तक सीमित है जैसे कि सत्तारूढ़ सरकार द्वारा विश्वास का स्पष्ट नुकसान, जिसके लिए फ्लोर टेस्ट की आवश्यकता होती है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- संविधान के अनुच्छेद 153, 154, 163, 174, 200, 201 जो राज्यपाल के पद और शक्तियों से संबंधित हैं।
- सरकारिया आयोग (1988) और पुंछी आयोग (2010) की राज्यपाल की भूमिका और विवेकाधीन शक्तियों पर प्रमुख सिफारिशें।
- राज्यपाल के विवेकाधीन कार्यों की संवैधानिक वैधता का आकलन करने के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रस्तुत 'त्रिविध परीक्षण'।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- इस निर्णय के भारत में केंद्र-राज्य संबंधों और सहकारी तथा प्रतिस्पर्धी संघवाद के सिद्धांतों पर पड़ने वाले प्रभाव का परीक्षण करें।
- संवैधानिक नैतिकता की विकसित हो रही अवधारणा और राज्यपाल जैसे संवैधानिक पदाधिकारियों की विवेकाधीन शक्तियों की व्याख्या में इसके अनुप्रयोग पर चर्चा करें।
- विश्लेषण करें कि उच्चतम न्यायालय के निर्देश किस प्रकार राज्यपाल के संवैधानिक कर्तव्यों को संविधान के संरक्षक के रूप में संसदीय लोकतंत्र में एक निर्वाचित राज्य सरकार के जनादेश के साथ संतुलित करते हैं।
- इस निर्णय से सीख लेते हुए राज्यपाल की भूमिका को और स्पष्ट करने तथा शक्तियों के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए विधायी सुधारों या एक विशिष्ट आचार संहिता की आवश्यकता का मूल्यांकन करें।
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85. राष्ट्रीय प्रवासी श्रमिक रजिस्ट्री (NMWR) की प्रगति और चुनौतियाँ: सामाजिक सुरक्षा लाभों की सुवाह्यता सुनिश्चित करना
चर्चा में क्यों? (Why in News)
श्रम और रोजगार मंत्रालय ने संसद में राष्ट्रीय प्रवासी श्रमिक रजिस्ट्री (NMWR) की मध्यावधि समीक्षा प्रस्तुत की, जिसमें पंजीकरण में हुई प्रगति और आंतरिक प्रवासी श्रमिकों के लिए राज्यों में सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी लाभों की निर्बाध सुवाह्यता सुनिश्चित करने में बनी रहने वाली चुनौतियों का विस्तृत विवरण दिया गया।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •एनएमडब्ल्यूआर, जिसे 2024 में लॉन्च किया गया था, का उद्देश्य अंतर-राज्य और अंतर-राज्य प्रवासी श्रमिकों का एक केंद्रीकृत डेटाबेस बनाना है ताकि नीति निर्माण और लाभ वितरण को सुविधाजनक बनाया जा सके।
- •ई-श्रम पोर्टल एकीकरण और समर्पित पंजीकरण अभियानों के माध्यम से 150 मिलियन से अधिक प्रवासी श्रमिकों का पंजीकरण किया गया है।
- •पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) और स्वास्थ्य सेवा जैसी राज्य-विशिष्ट कल्याणकारी योजनाओं के साथ एनएमडब्ल्यूआर डेटा को जोड़ने में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है, जिससे कुछ सुवाह्यता संभव हुई है।
- •अंतर-राज्यीय प्रशासनिक जटिलताओं और विभिन्न पात्रता मानदंडों के कारण आवास, व्यावसायिक प्रशिक्षण और कुछ भविष्य निधि योगदान जैसी योजनाओं की सार्वभौमिक सुवाह्यता में चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
- •आगे विधायी सामंजस्य और मजबूत अंतर-राज्यीय समन्वय तंत्र की मांग।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- श्रम और रोजगार मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय प्रवासी श्रमिक रजिस्ट्री (NMWR)।
- उद्देश्य: प्रवासी श्रमिकों के लिए केंद्रीकृत डेटाबेस।
- ई-श्रम पोर्टल से जुड़ा हुआ।
- उद्देश्य: सामाजिक सुरक्षा लाभों की सुवाह्यता।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **प्रवासी कमजोरियों को संबोधित करना:** चर्चा करें कि एनएमडब्ल्यूआर जैसी एक व्यापक रजिस्ट्री अनौपचारिक क्षेत्र के योगदान को पहचानने और प्रवासी श्रमिकों की सामाजिक-आर्थिक कमजोरियों को संबोधित करने के लिए कितनी महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से संकट के दौरान। आवास, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा के लिए डेटा-संचालित नीति निर्माण में इसकी भूमिका का विश्लेषण करें।
- **संघवाद और कल्याण वितरण की चुनौतियाँ:** एक संघीय ढांचे में कल्याणकारी लाभों की सार्वभौमिक सुवाह्यता सुनिश्चित करने में शामिल जटिलताओं की जांच करें। प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने और सामाजिक सुरक्षा के लिए "वन नेशन, वन कार्ड" दृष्टिकोण सुनिश्चित करने के लिए विधायी सुधारों, अंतर-राज्यीय समझौतों और तकनीकी समाधानों की आवश्यकता पर चर्चा करें।
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86. शहरी तनाव सूचकांक: जलवायु प्रवासन से भारत के शहरों पर बढ़ता दबाव
चर्चा में क्यों? (Why in News)
शहरी नियोजन एवं विकास थिंक टैंक (यूपीडीटीटी) ने आज अपना वार्षिक 'शहरी तनाव सूचकांक 2026' जारी किया, जिसमें भारत के टियर-1 और टियर-2 शहरों में सामाजिक अवसंरचना (आवास, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा) पर तनाव में उल्लेखनीय वृद्धि का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट इस दबाव का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरणीय क्षरण और चरम मौसम की घटनाओं से प्रेरित आंतरिक जलवायु प्रवासन की बढ़ती घटना के लिए जिम्मेदार ठहराती है, जिससे सतत शहरी नियोजन पर नई बहस छिड़ गई है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •शहरी तनाव सूचकांक ने एक दशक में अपना उच्चतम मूल्य दर्ज किया, जो अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि और संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण प्रमुख शहरी केंद्रों में महत्वपूर्ण दबाव बिंदुओं का संकेत देता है।
- •रिपोर्ट ने सूखाग्रस्त क्षेत्रों, बाढ़ प्रभावित डेल्टाओं और तटीय क्षेत्रों को जलवायु प्रवासियों के लिए प्राथमिक स्रोत क्षेत्रों के रूप में पहचाना है जो शहरी वातावरण में आजीविका और सुरक्षित आवास की तलाश कर रहे हैं।
- •प्रवासियों का तीव्र प्रवाह मौजूदा शहरी सेवाओं पर असंगत रूप से दबाव डालता है, जिससे अनौपचारिक बस्तियों का प्रसार, स्वच्छता संकट, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों का अतिभार और शैक्षिक पहुंच में कमी आती है।
- •यूपीडीटीटी रिपोर्ट जलवायु लचीलापन, किफायती और समावेशी आवास समाधान, प्रवासियों के लिए मजबूत सामाजिक सुरक्षा जाल और हरित बुनियादी ढांचे के विकास को एकीकृत करने वाले सक्रिय शहरी नियोजन का आह्वान करती है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- जलवायु प्रवासन: उन व्यक्तियों के आवागमन को संदर्भित करता है जो पर्यावरण में अचानक या प्रगतिशील परिवर्तनों के बाध्यकारी कारणों से, जो उनके जीवन या रहने की स्थिति को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करते हैं, अपने आदतन घरों को छोड़ने के लिए मजबूर होते हैं।
- सतत विकास लक्ष्य 11: शहरों और मानव बस्तियों को समावेशी, सुरक्षित, लचीला और टिकाऊ बनाने का लक्ष्य रखता है, जो शहरीकरण और प्रवासन द्वारा उत्पन्न चुनौतियों का सीधे समाधान करता है।
- राष्ट्रीय शहरी आवास और पर्यावास नीति (एनयूएचएचपी) 2007: देश में आवास और पर्यावास के सतत विकास का मार्गदर्शन करने वाला एक नीतिगत ढांचा, जो किफायती आवास और मलिन बस्तियों में सुधार पर जोर देता है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **जलवायु परिवर्तन, प्रवासन और शहरी शासन के बीच अंतर्संबंध:** विश्लेषण करें कि जलवायु-प्रेरित विस्थापन शहरी नीति-निर्माताओं के लिए जटिल और व्यापक चुनौतियाँ कैसे पैदा करता है, जिससे संसाधन आवंटन प्रभावित होता है, सामाजिक असमानताएं बढ़ती हैं, नगरपालिका सेवाओं पर दबाव पड़ता है और शहरी पारिस्थितिक तंत्रों की समग्र स्थिरता खतरे में पड़ती है। जलवायु अनुकूलन रणनीतियों में ग्रामीण-शहरी विभाजन को पाटने वाले एकीकृत शासन ढांचे की आवश्यकता पर चर्चा करें।
- **अनुकूल शहरी नियोजन और प्रवासी एकीकरण के लिए रणनीतियाँ:** आगे की सोच वाले शहरी विकास रणनीतियों की अनिवार्यता पर चर्चा करें जिसमें लचीला बुनियादी ढांचा, समावेशी और किफायती आवास नीतियां, प्रवासियों के लिए कौशल विकास और आजीविका सहायता, उन्नत सार्वजनिक सेवाएं और सहभागी नियोजन प्रक्रियाएं शामिल हैं। बढ़ते जलवायु-प्रेरित जनसांख्यिकीय बदलावों के संदर्भ में सामाजिक सामंजस्य को बढ़ावा देने और सामाजिक विखंडन को रोकने के महत्व पर जोर दें।
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87. डिजिटल कमजोरियां: तकनीक-सुविधाजनित बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार में वृद्धि और नीतिगत प्रतिक्रियाएं
चर्चा में क्यों? (Why in News)
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ जेरियाट्रिक हेल्थ (एनआईजीएच) की एक हालिया व्यापक रिपोर्ट ने देश भर में तकनीक-सुविधाजनित बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार में खतरनाक वृद्धि पर प्रकाश डाला है, जिसमें ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, पहचान की चोरी और डिजिटल उत्पीड़न शामिल हैं। यह रिपोर्ट एक वरिष्ठ नागरिक के एक परिष्कृत फ़िशिंग घोटाले में अपनी पर्याप्त जीवन भर की बचत खोने के एक हाई-प्रोफाइल मामले के साथ मेल खाती है, जो बुजुर्गों के लिए तैयार की गई उन्नत डिजिटल साक्षरता और मजबूत साइबर सुरक्षा सुरक्षा उपायों की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •एनआईजीएच की रिपोर्ट पिछले वर्ष में 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को लक्षित करने वाले साइबर अपराधों में 30% की चिंताजनक वृद्धि का संकेत देती है, जिसमें वित्तीय शोषण प्रमुख रूप है।
- •पहचानी गई सामान्य युक्तियों में परिष्कृत फ़िशिंग योजनाएँ, तकनीकी सहायता घोटाले, प्रतिरूपण घोटाले (जैसे, सरकारी अधिकारियों का प्रतिरूपण), और डिजिटल संपत्ति की चोरी शामिल हैं।
- •कमजोरी में योगदान देने वाले कारकों में सीमित डिजिटल साक्षरता, महामारी के बाद सामाजिक अलगाव में वृद्धि, और सत्ता के आंकड़ों और ऑनलाइन अनुरोधों पर भरोसा करने की उच्च प्रवृत्ति शामिल है।
- •रिपोर्ट में बुजुर्गों के लिए डिजिटल सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करने वाले एक राष्ट्रीय जागरूकता अभियान, जराचिकित्सा संवेदनशीलता के साथ विशेष साइबर अपराध इकाइयों की स्थापना, और मौजूदा बुजुर्ग कल्याण कार्यक्रमों के भीतर अनिवार्य डिजिटल साक्षरता मॉड्यूल की सिफारिश की गई है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार: डब्ल्यूएचओ द्वारा परिभाषित, यह एक एकल या बार-बार होने वाला कार्य, या उचित कार्रवाई की कमी है, जो किसी भी ऐसे रिश्ते के भीतर होता है जहां विश्वास की अपेक्षा होती है और जो एक वृद्ध व्यक्ति को नुकसान या संकट पहुंचाता है।
- माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007: माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के लिए भरण-पोषण सुनिश्चित करने और उनके कल्याण के लिए प्रावधान करने हेतु भारत में एक विधायी ढांचा।
- वरिष्ठ नागरिकों के लिए राष्ट्रीय नीति, 2011: भारत में वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य, वित्तीय सुरक्षा, आवास और सामाजिक समावेशन के लिए व्यापक सहायता की परिकल्पना करती है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **डिजिटल युग में बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार के सामाजिक-नैतिक आयाम:** विश्लेषण करें कि कैसे तीव्र तकनीकी प्रगति, जबरदस्त लाभ प्रदान करते हुए, साथ ही साथ शोषण के लिए नई कमजोरियां और रास्ते बनाती है, जो बुजुर्गों के प्रति सम्मान और देखभाल के स्थापित सामाजिक मूल्यों को चुनौती देती है। विकसित हो रहे डिजिटल परिदृश्य में कमजोर आबादी की सुरक्षा में सक्रिय राज्य और सामुदायिक हस्तक्षेप के लिए नैतिक अनिवार्यता पर चर्चा करें।
- **सुरक्षा, सशक्तिकरण और न्याय के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण:** परिष्कृत साइबर अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए कानूनी सुधारों, वरिष्ठ नागरिकों के लिए बेहतर और अनुरूप डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों, सुलभ मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक सहायता प्रणालियों, सामुदायिक जुड़ाव पहलों और बुजुर्ग उपयोगकर्ताओं के लिए एआई-आधारित धोखाधड़ी का पता लगाने और सुरक्षित डिजिटल इंटरफेस जैसे सुरक्षात्मक उपायों के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने सहित एक व्यापक रणनीति की आवश्यकता पर चर्चा करें।
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88. भारतनेट चरण III का मूल्यांकन: डिजिटल विभाजन को पाटना और लगातार चुनौतियाँ
चर्चा में क्यों? (Why in News)
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने आज भारतनेट परियोजना के तीसरे चरण पर एक अंतरिम मूल्यांकन रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट ग्रामीण ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी में महत्वपूर्ण प्रगति का संकेत देती है, लेकिन डिजिटल साक्षरता और डिवाइस तक पहुंच में लगातार असमानताओं की ओर भी इशारा करती है, खासकर वंचित समुदायों के बीच, जो 'डिजिटल उपयोग अंतर' की निरंतर चुनौती को उजागर करता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •भारतनेट चरण III ने ग्राम पंचायतों तक 85% से अधिक ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) रोलआउट हासिल कर लिया है, जिससे मूलभूत कनेक्टिविटी में काफी वृद्धि हुई है।
- •रिपोर्ट में बुनियादी ढांचे की उपलब्धता के बावजूद एक गंभीर 'डिजिटल उपयोग अंतर' पर प्रकाश डाला गया है, जिसका मुख्य कारण ग्रामीण आबादी के बीच कम डिजिटल साक्षरता स्तर और डिजिटल उपकरणों के लिए सामर्थ्य संबंधी मुद्दे हैं।
- •प्रमुख सिफारिशों में सामुदायिक डिजिटल साक्षरता केंद्रों की स्थापना और मजबूती पर नए सिरे से ध्यान देना तथा किफायती डिवाइस वितरण के लिए योजनाएं लागू करना शामिल है।
- •यह अपनाने और उपयोगिता को बढ़ाने के लिए स्थानीयकृत डिजिटल सामग्री और विशेष ई-सेवाएं विकसित करने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- भारतनेट परियोजना: भारत में सभी ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करने और ग्रामीण-शहरी डिजिटल विभाजन को पाटने के उद्देश्य से एक प्रमुख मिशन।
- सार्वभौमिक सेवा दायित्व कोष (यूएसओएफ): दूरसंचार विभाग के तहत एक कोष जिसका उपयोग भारतनेट सहित ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में दूरसंचार बुनियादी ढांचे और सेवाओं को सब्सिडी देने के लिए किया जाता है।
- राष्ट्रीय डिजिटल साक्षरता मिशन (एनडीएलएम): प्रत्येक घर में कम से कम एक व्यक्ति को आईटी प्रशिक्षण प्रदान करके डिजिटल रूप से साक्षर बनाने की एक पहल।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **लगातार डिजिटल विभाजन के सामाजिक-आर्थिक निहितार्थ:** विश्लेषण करें कि कैसे न्यायसंगत डिजिटल पहुंच की कमी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, वित्तीय समावेशन और सहभागी शासन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मौजूदा सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को बढ़ाती है, जिससे समावेशी विकास और प्रगति बाधित होती है। हाशिए पर धकेले जाने और सामाजिक गतिशीलता पर इसके प्रभाव पर चर्चा करें।
- **समग्र डिजिटल समावेशन के लिए व्यापक नीतिगत हस्तक्षेप:** केवल बुनियादी ढांचे के प्रावधान से परे आवश्यक बहुआयामी दृष्टिकोण का मूल्यांकन करें, जिसमें डिजिटल साक्षरता बढ़ाने, सामग्री के स्थानीयकरण को बढ़ावा देने, डिवाइस की सामर्थ्य सुनिश्चित करने, साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करने और 'डिजिटल इंडिया' और 'डिजिटल सशक्तिकरण' के दृष्टिकोण को सही मायने में साकार करने के लिए मानव-केंद्रित डिजिटल सेवा डिजाइन को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण घटकों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
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89. डॉ. विक्रम सिंह: भारत के राष्ट्रीय जल सुरक्षा एवं प्रबंधन आयोग के वास्तुकार
चर्चा में क्यों? (Why in News)
डॉ. विक्रम सिंह को नवगठित 'राष्ट्रीय जल सुरक्षा एवं प्रबंधन आयोग' (NCWSM) के पहले अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है। इस सर्वोच्च निकाय को भारत भर में बढ़ती जल-कमी और अंतर-राज्यीय जल विवादों को संबोधित करते हुए जल शासन के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय ढांचा विकसित करने का जनादेश दिया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •NCWSM की प्राथमिक भूमिका एक व्यापक राष्ट्रीय जल नीति तैयार करना है, जो स्थायी जल संसाधन प्रबंधन, जलवायु लचीलापन और न्यायसंगत वितरण पर केंद्रित है।
- •डॉ. सिंह के जनादेश में अंतर-राज्यीय जल विवादों में मध्यस्थता करना, मांग-पक्ष प्रबंधन को बढ़ावा देना और पारंपरिक जल संचयन प्रणालियों को आधुनिक दृष्टिकोणों के साथ एकीकृत करना शामिल है।
- •आयोग भूजल पुनर्भरण और नदी-जोड़ परियोजना की व्यवहार्यता सहित प्रमुख जल संरक्षण और अवसंरचना परियोजनाओं के कार्यान्वयन की देखरेख करेगा।
- •उनकी नियुक्ति बहु-क्षेत्रीय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के माध्यम से भारत की जटिल जल चुनौतियों का समाधान करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
- •डॉ. सिंह, एक प्रसिद्ध जलविज्ञानी और नीति विशेषज्ञ, ने पहले सूखा प्रबंधन और वाटरशेड विकास में महत्वपूर्ण पहलों का नेतृत्व किया था।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'राष्ट्रीय जल सुरक्षा एवं प्रबंधन आयोग' (NCWSM) एक नया सांविधिक निकाय है।
- भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत जल मुख्य रूप से एक राज्य विषय है, जिसमें केंद्र को अंतर-राज्यीय नदियों के विनियमन और विकास की शक्तियां प्राप्त हैं।
- प्रमुख पहलों में जल जीवन मिशन (JJM), अटल भूजल योजना (ABHY), और राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना शामिल हैं।
- भूजल की कमी और संदूषण भारत की जल सुरक्षा के लिए प्रमुख चिंताएँ हैं।
- नदी-जोड़ परियोजनाओं का उद्देश्य जल-समृद्ध बेसिनों से जल-अभाव वाले बेसिनों में अतिरिक्त जल का स्थानांतरण करना है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **भारत का जल संकट और बहुआयामी चुनौतियाँ:** जल-कमी की गंभीरता, भूजल की कमी, प्रदूषण और भारत के जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पर चर्चा करें।
- **संघवाद और अंतर-राज्यीय जल विवाद:** जल प्रबंधन के लिए संवैधानिक ढांचे, अंतर-राज्यीय विवादों की चुनौतियों और संघर्ष समाधान व सहकारी संघवाद में NCWSM जैसे नए संस्थानों की भूमिका का विश्लेषण करें।
- **एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन (IWRM):** IWRM के सिद्धांतों का परीक्षण करें, जिसमें मांग-पक्ष प्रबंधन, सहभागी शासन और सभी के लिए जल सुरक्षा प्राप्त करने के लिए पारंपरिक और आधुनिक जल प्रबंधन प्रथाओं का एकीकरण शामिल है।
- **जल सुरक्षा के लिए नीति और शासन सुधार:** एक समग्र राष्ट्रीय जल नीति की आवश्यकता, डेटा-संचालित निर्णय लेने की भूमिका और सभी के लिए जल सुरक्षा प्राप्त करने में सामुदायिक जुड़ाव का मूल्यांकन करें।
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90. राजदूत लीना पेट्रोव: डिजिटल अधिकार और एआई शासन के लिए संयुक्त राष्ट्र विशेष प्रतिवेदक
चर्चा में क्यों? (Why in News)
राजदूत लीना पेट्रोव को डिजिटल युग में मानवाधिकारों के संवर्धन और संरक्षण के लिए संयुक्त राष्ट्र की नई विशेष प्रतिवेदक नियुक्त किया गया है, जिन्हें मौलिक स्वतंत्रताओं के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) द्वारा उत्पन्न जटिल चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक विशिष्ट और विस्तारित जनादेश दिया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •उनका जनादेश पारंपरिक डिजिटल अधिकारों से परे एआई प्रणालियों के नैतिक, कानूनी और मानवाधिकार प्रभावों की जाँच करने तक विस्तृत है, जिसमें एल्गोरिथम पूर्वाग्रह, निगरानी और निर्णय लेने शामिल हैं।
- •उन्हें मानवाधिकार-अनुकूल एआई विकास और परिनियोजन की वकालत करने के लिए देशों का दौरा करने, रिपोर्ट जारी करने और राज्यों, नागरिक समाज और तकनीकी कंपनियों के साथ जुड़ने का काम सौंपा गया है।
- •पेट्रोव ने पारदर्शिता, जवाबदेही और गैर-भेदभाव के सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित करते हुए एआई शासन के लिए मानवाधिकार-आधारित दृष्टिकोण की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।
- •उनकी नियुक्ति एआई के अनियमित प्रसार और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, गोपनीयता और सामाजिक-आर्थिक समानता पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चिंता के बीच हुई है।
- •वह मौजूदा मानवाधिकार ढांचों के आधार पर एआई के लिए अंतरराष्ट्रीय मानदंडों और मानकों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक (Special Rapporteurs) मानवाधिकार परिषद द्वारा विशिष्ट देश स्थितियों या विषयगत मुद्दों की जांच के लिए नियुक्त स्वतंत्र विशेषज्ञ होते हैं।
- मानवाधिकार परिषद (HRC) संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के भीतर एक अंतरसरकारी निकाय है जो दुनिया भर में मानवाधिकारों के संवर्धन और संरक्षण को मजबूत करने के लिए जिम्मेदार है।
- प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार उपकरणों में मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (UDHR) और नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिज्ञापत्र (ICCPR) शामिल हैं।
- एल्गोरिथम पूर्वाग्रह (Algorithmic bias) एक कंप्यूटर प्रणाली में व्यवस्थित और दोहराने योग्य त्रुटियों को संदर्भित करता है जो अनुचित परिणाम बनाती हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **डिजिटल युग में मानवाधिकार:** उभरती प्रौद्योगिकियों के संदर्भ में मानवाधिकारों के विकास पर चर्चा करें, जिसमें एआई-संचालित समाजों में गोपनीयता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और गैर-भेदभाव के अधिकार पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- **एआई का वैश्विक शासन:** विभिन्न राष्ट्रीय हितों और तकनीकी प्रगति पर विचार करते हुए एआई के लिए अंतरराष्ट्रीय मानदंड और नियामक ढांचे विकसित करने में चुनौतियों और अवसरों का विश्लेषण करें।
- **नैतिक एआई और एल्गोरिथम पूर्वाग्रह:** पक्षपाती एल्गोरिदम के सामाजिक प्रभावों, पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष और न्यायसंगत परिणाम सुनिश्चित करने के लिए व्याख्या योग्य एआई (Explainable AI) की आवश्यकता का परीक्षण करें।
- **अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों की भूमिका:** तेजी से तकनीकी परिवर्तन के सामने वैश्विक मानक स्थापित करने और मानवाधिकारों की वकालत करने में मानवाधिकार परिषद और विशेष प्रतिवेदकों जैसे संयुक्त राष्ट्र निकायों के महत्व का मूल्यांकन करें।
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91. डॉ. आन्या शर्मा: जलवायु-लचीली कृषि नवाचारों का नेतृत्व
चर्चा में क्यों? (Why in News)
डॉ. आन्या शर्मा को वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण, आनुवंशिक रूप से उन्नत, सूखा-प्रतिरोधी और पोषक तत्वों से भरपूर बाजरा की एक नई किस्म विकसित करने में उनके अग्रणी शोध के लिए प्रतिष्ठित 'ग्लोबल फूड इनोवेशन प्राइज' 2026 से सम्मानित किया गया।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •उन्नत जीन-संपादन तकनीकों का उपयोग करके 'धर्म बाजरा 2.0' (Dharma Millet 2.0) नामक एक जैव-फोर्टिफाइड और जलवायु-लचीली किस्म विकसित की।
- •उनका शोध बाजरा में जल-उपयोग दक्षता और सूक्ष्म पोषक तत्व अवशोषण (लौह, जिंक) बढ़ाने पर केंद्रित था।
- •उनके काम में स्थायी कृषि पद्धतियों को एकीकृत किया गया है, जो छोटे किसानों के लिए कृषि-पारिस्थितिक दृष्टिकोणों को बढ़ावा देता है।
- •यह नवाचार विशेष रूप से शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में कुपोषण को कम करने और कृषि को बदलते जलवायु पैटर्न के अनुकूल बनाने के लिए महत्वपूर्ण वादा करता है।
- •यह पुरस्कार खाद्य प्रणालियों के परिवर्तन और अनुप्रयुक्त अनुसंधान के प्रति उनकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को मान्यता देता है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'ग्लोबल फूड इनोवेशन प्राइज' (Global Food Innovation Prize) प्रतिवर्ष ग्लोबल फूड सिक्योरिटी इनिशिएटिव (GFSI) द्वारा अग्रणी योगदानों के लिए प्रदान किया जाता है।
- CRISPR-Cas9 जैसी जीन-संपादन तकनीकों का उपयोग सटीक आनुवंशिक संशोधनों के लिए किया जाता है।
- बाजरा को 'पोषक-अनाज' (nutri-cereals) के रूप में मान्यता प्राप्त है और यह खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर भारत में (अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष 2023)।
- जैव-फोर्टिफिकेशन (Biofortification) का उद्देश्य पारंपरिक प्रजनन या जैव प्रौद्योगिकी के माध्यम से फसलों के पोषण मूल्य को बढ़ाना है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **खाद्य सुरक्षा और कुपोषण का समाधान:** SDG 2 (भूखमुक्ति) प्राप्त करने और जैव-फोर्टिफाइड फसलों के माध्यम से छिपी हुई भूख से लड़ने में जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका पर चर्चा करें।
- **कृषि में जलवायु परिवर्तन अनुकूलन:** विश्लेषण करें कि अप्रत्याशित मौसम पैटर्न और जल-कमी के सामने टिकाऊ कृषि के लिए जलवायु-लचीली फसल किस्में कैसे आवश्यक हैं।
- **आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों (GMOs) के लिए नैतिक और नियामक ढाँचे:** आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों से संबंधित बहसों, मजबूत नियामक ढाँचों की आवश्यकता और सार्वजनिक स्वीकृति की चुनौतियों का परीक्षण करें।
- **स्थायी कृषि को बढ़ावा देना:** मूल्यांकन करें कि धर्म बाजरा 2.0 जैसे नवाचार किसानों की आजीविका और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ाने के लिए कृषि-पारिस्थितिक सिद्धांतों के साथ कैसे एकीकृत हो सकते हैं।
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92. भारतीय खेल कूटनीति को मिला प्रोत्साहन: दिग्गज भारतीय कोच को मिला उद्घाटन 'ग्लोबल स्पोर्ट्समैनशिप अवार्ड'
चर्चा में क्यों? (Why in News)
एक ऐतिहासिक अंतर्राष्ट्रीय आयोजन में, नवगठित 'वर्ल्ड अलायंस फॉर एथिकल स्पोर्ट्स' (WAES) ने अपने उद्घाटन 'ग्लोबल स्पोर्ट्समैनशिप अवार्ड' से दिग्गज भारतीय एथलेटिक्स कोच, श्री राकेश शर्मा को मरणोपरांत सम्मानित किया, जो निष्पक्ष खेल, अखंडता और वैश्विक खेल मूल्यों के पोषण के प्रति उनके आजीवन समर्पण को मान्यता देता है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •'ग्लोबल स्पोर्ट्समैनशिप अवार्ड' वैश्विक मंच पर नैतिक प्रथाओं और खेल भावना की वकालत करने में भारत के बढ़ते प्रभाव की एक महत्वपूर्ण पहचान है।
- •श्री राकेश शर्मा, भारतीय एथलेटिक्स कोचिंग में एक अग्रदूत, को एथलीटों की पीढ़ियों को प्रशिक्षित करने और उनमें केवल जीतने से परे मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता जगाने के लिए सम्मानित किया गया।
- •जेनेवा स्थित वर्ल्ड अलायंस फॉर एथिकल स्पोर्ट्स (WAES) ने सभी अंतरराष्ट्रीय खेलों में अखंडता, डोपिंग-रोधी उपायों, लैंगिक समानता और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के अपने जनादेश की रूपरेखा तैयार की।
- •भारत के युवा मामले और खेल मंत्रालय ने इस अंतरराष्ट्रीय मान्यता की सराहना की, और खेल के क्षेत्र में 'वसुधैव कुटुम्बकम' (दुनिया एक परिवार है) के भारत के पारंपरिक मूल्यों के साथ इसके संरेखण पर जोर दिया।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'ग्लोबल स्पोर्ट्समैनशिप अवार्ड' एक नव स्थापित अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार है।
- इसे 'वर्ल्ड अलायंस फॉर एथिकल स्पोर्ट्स' (WAES) द्वारा प्रदान किया गया था।
- WAES जिनेवा में स्थित एक नया अंतरराष्ट्रीय निकाय है, जो खेल अखंडता और मूल्यों पर ध्यान केंद्रित करता है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- एक भारतीय व्यक्तित्व को इस तरह के अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार का प्रदान किया जाना भारत की सॉफ्ट पावर और वैश्विक स्थिति को बढ़ाने, सद्भावना और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में खेल कूटनीति के बढ़ते महत्व को रेखांकित करता है।
- WAES जैसे निकायों की स्थापना अंतरराष्ट्रीय खेलों में नैतिक शासन और अखंडता को बनाए रखने, डोपिंग, भ्रष्टाचार और भेदभाव जैसे मुद्दों से निपटने की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर वैश्विक सहमति को दर्शाती है।
- भारत, अपने एथलीटों और प्रशिक्षकों के अनुकरणीय आचरण के माध्यम से, वैश्विक खेल मूल्यों को आकार देने, निष्पक्ष खेल को बढ़ावा देने और सभी देशों के लिए समान अवसर की वकालत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
- खेलों की अखंडता बनाए रखने से संबंधित चुनौतियाँ, जैसे कि परिष्कृत डोपिंग के तरीके और सट्टेबाजी के घोटाले, बहुपक्षीय सहयोग और मजबूत कानूनी ढाँचे की मांग करती हैं, एक ऐसा क्षेत्र जहाँ भारत महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
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93. ‘समग्र खेल विकास परियोजना’: भारत ने महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय खेल विकास योजना 2.0 का अनावरण किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
युवा मामले और खेल मंत्रालय ने आज 'समग्र खेल विकास परियोजना' (SKVP) का शुभारंभ किया, जो खेल के बुनियादी ढांचे को विकेंद्रीकृत करने और अगले दशक के लिए एक मजबूत, प्रौद्योगिकी-संचालित प्रतिभा पहचान पाइपलाइन बनाने के उद्देश्य से एक व्यापक राष्ट्रीय खेल विकास योजना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •SKVP प्रत्येक जिले में कम से कम एक बहु-खेल जिला खेल केंद्र (District Sports Hub) स्थापित करने पर जोर देती है, जो आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं और योग्य प्रशिक्षकों से सुसज्जित होगा।
- •यह विभिन्न आयु समूहों में वैज्ञानिक प्रतिभा स्काउटिंग, एथलीट प्रदर्शन निगरानी और चोट की रोकथाम के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बड़े डेटा एनालिटिक्स के एकीकरण का प्रस्ताव करता है।
- •यह योजना खेल के बुनियादी ढांचे और एथलीट कल्याण में सरकारी निवेश को बढ़ाने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPPs) और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) वित्तपोषण को प्रोत्साहित करती है।
- •व्यापक भागीदारी और शारीरिक साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में स्वदेशी खेलों और पारंपरिक मार्शल आर्ट पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक अनिवार्य खेल पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- 'समग्र खेल विकास परियोजना' (SKVP) एक नई राष्ट्रीय खेल विकास योजना है।
- युवा मामले और खेल मंत्रालय SKVP के लिए कार्यान्वयन मंत्रालय है।
- प्रमुख घटकों में 'जिला खेल केंद्र' (District Sports Hubs) और AI का उपयोग करने वाली 'राष्ट्रीय डिजिटल प्रतिभा रजिस्ट्री' शामिल हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- SKVP का उद्देश्य खेल विकास में लगातार बनी हुई भौगोलिक विषमताओं को दूर करना है, जिससे शहरी और ग्रामीण भारत में सुविधाओं और प्रशिक्षण तक समान पहुंच सुनिश्चित हो सके, जिससे प्रतिभा पूल का विस्तार होगा।
- खेल विकास में प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से AI और डेटा एनालिटिक्स का लाभ उठाने से प्रतिभा पहचान और प्रदर्शन वृद्धि में क्रांति आ सकती है, जबकि मजबूत डेटा गोपनीयता और नैतिक दिशानिर्देशों की भी आवश्यकता होगी।
- PPP और CSR पर जोर महत्वपूर्ण निजी पूंजी और विशेषज्ञता को अनलॉक कर सकता है, लेकिन राष्ट्रीय खेल उद्देश्यों के साथ पारदर्शिता, जवाबदेही और संरेखण सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी नियामक ढाँचे महत्वपूर्ण हैं।
- अनिवार्य पाठ्यक्रमों के माध्यम से स्वदेशी खेलों और शारीरिक साक्षरता को बढ़ावा देने से सांस्कृतिक पहचान मजबूत हो सकती है और सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों में सुधार हो सकता है, जो राष्ट्रीय विकास के व्यापक उद्देश्यों के अनुरूप है।
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94. राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत का रिकॉर्ड प्रदर्शन: भविष्य की ओलंपिक आकांक्षाओं के लिए एक उत्प्रेरक
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारतीय दल ने अपने सबसे सफल राष्ट्रमंडल खेल अभियान का समापन किया, जिसमें अभूतपूर्व पदक संख्या हासिल की और विविध विषयों में उभरती प्रतिभाओं का प्रदर्शन किया, जिससे भविष्य की ओलंपिक चुनौतियों के लिए भारत की तैयारी पर एक राष्ट्रीय विमर्श छिड़ गया है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •भारत ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 में अपना अब तक का सबसे अधिक पदक जीता, जो उसके पिछले सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों को पार कर गया।
- •जिमनास्टिक, साइकिलिंग और तलवारबाजी जैसे गैर-पारंपरिक खेलों में महत्वपूर्ण सफलताएं दर्ज की गईं, जो खेल उत्कृष्टता के एक विस्तृत आधार का संकेत देती हैं।
- •पदक विजेताओं की एक बड़ी संख्या दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों से उभरी, जो जमीनी स्तर पर प्रतिभा पहचान कार्यक्रमों की सफलता को रेखांकित करती है।
- •एथलीट प्रशिक्षण व्यवस्था में उन्नत खेल विज्ञान, पोषण और डेटा एनालिटिक्स के एकीकरण को बेहतर प्रदर्शन और कम चोट दरों का श्रेय दिया गया।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- राष्ट्रमंडल खेल 2026 कनाडा के कई शहरों में आयोजित किए गए थे।
- राष्ट्रमंडल खेल महासंघ (CGF) राष्ट्रमंडल खेलों के लिए शासी निकाय है।
- 'टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम' (TOPS) और 'खेलो इंडिया' भारत में विशिष्ट एथलीटों और जमीनी स्तर के खेल विकास का समर्थन करने वाली प्रमुख सरकारी पहलें हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- राष्ट्रमंडल खेल 2026 में उल्लेखनीय प्रदर्शन वैश्विक 'खेल राष्ट्र' के रूप में उभरने की भारत की आकांक्षाओं के लिए एक महत्वपूर्ण प्रेरणा प्रदान करता है और आगामी ओलंपिक चक्रों के लिए आत्मविश्वास बढ़ाता है।
- यह सफलता खेलो इंडिया और TOPS जैसी सरकारी योजनाओं के तहत किए गए रणनीतिक निवेशों को मान्य करती है, जो खेल अवसंरचना और प्रतिभा पोषण में निरंतर वित्तपोषण और नीतिगत निरंतरता की आवश्यकता पर प्रकाश डालती है।
- लाभ के बावजूद, राष्ट्रमंडल सफलता को ओलंपिक पदकों में बदलने में चुनौतियां बनी हुई हैं, विशेष रूप से उच्च वैश्विक प्रतिस्पर्धा वाले खेलों में, जिसके लिए गहन विश्लेषण और लक्षित हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
- प्रमुख खेल उपलब्धियां राष्ट्रीय गौरव, युवा जुड़ाव में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं, और खेल पर्यटन तथा आर्थिक लाभ के लिए संभावित रास्ते प्रदान करती हैं, जिसके लिए एकीकृत नीतिगत दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है।
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विक्रम ई-मित्र मासिक पत्रिकापर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
95. पश्चिमी घाट खतरे में: जलवायु परिवर्तन और आवास विखंडन से बढ़ रहा जूनोटिक रोग का जोखिम – रिपोर्ट
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा आज जारी एक सहयोगी रिपोर्ट में पश्चिमी घाट जैव विविधता हॉटस्पॉट में जूनोटिक रोग के उद्भव और स्पिलओवर घटनाओं के जोखिम में उल्लेखनीय वृद्धि पर प्रकाश डाला गया है। रिपोर्ट इस बढ़ते खतरे का मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन, आवास विखंडन और मानव-वन्यजीव इंटरफ़ेस में वृद्धि के सहक्रियात्मक प्रभावों को मानती है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •पश्चिमी घाट के भीतर विशिष्ट 'रोग हॉटस्पॉट' की पहचान जहाँ वनों की कटाई और भूमि-उपयोग परिवर्तनों ने वन्यजीवों, पशुधन और मानव आबादी के बीच निकटता बढ़ा दी है।
- •बदले हुए वर्षा पैटर्न, बढ़ते तापमान और वेक्टर जनसंख्या गतिशीलता (जैसे मच्छर, टिक) को क्यसानूर वन रोग (KFD) और नए वायरल उपभेदों जैसी बीमारियों की बढ़ती घटनाओं से जोड़ने वाला विश्लेषण।
- •तेजी से मानवजनित परिवर्तनों से गुजर रहे क्षेत्रों में वन्यजीव जलाशयों में नए रोगजनकों की खोज के प्रमाण।
- •सार्वजनिक स्वास्थ्य, पशु चिकित्सा और पर्यावरण एजेंसियों को सक्रिय निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए एक साथ लाने वाले एक एकीकृत 'वन हेल्थ' निगरानी ढांचे के लिए सिफारिशें।
- •पर्यावास क्षरण को कम करने के लिए पर्यावरण संरक्षण कानूनों के सख्त प्रवर्तन और टिकाऊ भूमि-उपयोग नियोजन का आह्वान।
- •जूनोटिक जोखिमों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए सामुदायिक जुड़ाव और शिक्षा कार्यक्रमों पर जोर।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- पश्चिमी घाट दुनिया के आठ 'सबसे गर्म हॉटस्पॉट' में से एक है, जिसे यूनेस्को विश्व विरासत स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है।
- जूनोटिक रोग वे संक्रमण हैं जो बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी या कवक के कारण जानवरों से मनुष्यों में फैल सकते हैं।
- क्यसानूर वन रोग (KFD), जिसे 'मंकी फीवर' के नाम से भी जाना जाता है, कर्नाटक के पश्चिमी घाट क्षेत्र में स्थानिक एक टिक-जनित वायरल रक्तस्रावी बुखार है।
- 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण यह पहचानता है कि लोगों का स्वास्थ्य जानवरों के स्वास्थ्य और हमारे साझा पर्यावरण से निकटता से जुड़ा हुआ है।
- आवास विखंडन उस प्रक्रिया को संदर्भित करता है जिसके द्वारा बड़े, निरंतर आवासों को छोटे, अलग-अलग टुकड़ों में विभाजित किया जाता है, अक्सर मानवीय गतिविधियों द्वारा।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **पर्यावरणीय क्षरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य का अंतर्संबंध:** रिपोर्ट पारिस्थितिक अखंडता और मानव स्वास्थ्य के बीच महत्वपूर्ण संबंध को रेखांकित करती है। वनों की कटाई, आवास का नुकसान और जलवायु परिवर्तन प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों को बाधित करते हैं, जिससे वन्यजीवों को मनुष्यों और पशुधन के साथ निकट संपर्क में आने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे जूनोटिक स्पिलओवर के अवसर बढ़ते हैं।
- **संरक्षण और विकास में चुनौतियाँ:** पश्चिमी घाट जैसे नाजुक पारिस्थितिक तंत्र में जैव विविधता संरक्षण की अनिवार्यता के साथ स्थानीय आबादी की विकासात्मक जरूरतों (कृषि, अवसंरचना) को संतुलित करना एक जटिल चुनौती है। रोग जोखिमों को कम करने के लिए टिकाऊ भूमि-उपयोग नियोजन और पारिस्थितिक बहाली महत्वपूर्ण हैं।
- **भविष्य की तैयारी के लिए 'वन हेल्थ' अनिवार्यता:** 'वन हेल्थ' ढांचे के लिए सिफारिश सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक अंतःविषय दृष्टिकोण की आवश्यकता पर प्रकाश डालती है। उभरते संक्रामक रोगों की भविष्यवाणी, रोकथाम और प्रतिक्रिया के लिए पर्यावरण विज्ञान, पशु चिकित्सा और मानव स्वास्थ्य से विशेषज्ञता को एकीकृत करना महत्वपूर्ण है।
- **नीतिगत निहितार्थ और शासन:** निष्कर्षों के लिए एक मजबूत नीतिगत प्रतिक्रिया की आवश्यकता है, जिसमें पर्यावरणीय नियमों (जैसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, वन संरक्षण अधिनियम) का सख्त कार्यान्वयन, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में निवेश, और वन संसाधनों पर दबाव कम करने वाली टिकाऊ आजीविका को बढ़ावा देना शामिल है। यह पश्चिमी घाट को साझा करने वाले राज्यों के बीच अंतर-राज्यीय सहयोग बढ़ाने का भी आह्वान करता है।
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96. भारत में शहरी लचीलापन: हरित अवसंरचना और जल सुरक्षा के लिए 'हरित नगर परियोजना' का शुभारंभ
चर्चा में क्यों? (Why in News)
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने आज 'हरित नगर परियोजना' का अनावरण किया, जो भारतीय शहरों में शहरी लचीलेपन को बढ़ाने के उद्देश्य से एक नई राष्ट्रीय पहल है। यह कार्यक्रम विशेष रूप से शहरी ताप द्वीप प्रभाव का मुकाबला करने, प्रकृति-आधारित समाधानों (NBS) के माध्यम से जल सुरक्षा में सुधार करने और शहरी नियोजन में हरित अवसंरचना को एकीकृत करने पर केंद्रित है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •नई अवसंरचना परियोजनाओं और मौजूदा शहरी क्षेत्रों के नवीनीकरण के लिए हरी छतें, पारगम्य फुटपाथ, बायोस्वाल्स और शहरी वन जैसे प्रकृति-आधारित समाधानों (NBS) को अपनाना अनिवार्य करना।
- •संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने और हस्तक्षेपों को प्राथमिकता देने के लिए प्रमुख शहरों के लिए 'शहरी ताप लचीलापन सूचकांक' का विकास।
- •जल संवेदनशील शहरी डिजाइन (WSUD) सिद्धांतों को बढ़ावा देना, जिसमें विकेन्द्रीकृत अपशिष्ट जल उपचार, वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण तंत्र शामिल हैं।
- •शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को हरित अवसंरचना परियोजनाओं को लागू करने में सहायता करने के लिए एक राष्ट्रीय कोष और तकनीकी सहायता इकाइयों की स्थापना।
- •पारिस्थितिक शहरी डिजाइन और NBS कार्यान्वयन पर शहरी योजनाकारों, वास्तुकारों और इंजीनियरों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम।
- •शहरी हरियाली और जल संरक्षण प्रयासों में सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए जन जागरूकता अभियान और नागरिक भागीदारी ढाँचे।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- शहरी ताप द्वीप (UHI) प्रभाव शहरी क्षेत्रों को संदर्भित करता है जो मानवीय गतिविधियों और निर्मित अवसंरचना के कारण आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में काफी गर्म होते हैं।
- प्रकृति-आधारित समाधान (NBS) प्राकृतिक या संशोधित पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा, स्थायी रूप से प्रबंधन और बहाली के लिए की गई कार्रवाई है, जो प्रभावी ढंग से और अनुकूल रूप से सामाजिक चुनौतियों का समाधान करते हैं, साथ ही मानव कल्याण और जैव विविधता लाभ प्रदान करते हैं।
- जल संवेदनशील शहरी डिजाइन (WSUD) शहरी नियोजन और डिजाइन के लिए एक दृष्टिकोण है जो जल चक्र को निर्मित पर्यावरण में एकीकृत करता है।
- 'स्पंज सिटी' की अवधारणा, जो चीन से उत्पन्न हुई है, पारगम्य सतहों और हरित अवसंरचना के माध्यम से शहरी तूफानी जल के प्रबंधन पर केंद्रित एक समान दृष्टिकोण है।
- अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (AMRUT) और स्मार्ट सिटी मिशन जैसी केंद्रीय योजनाएँ पहले से ही हरित अवसंरचना के कुछ पहलुओं को एकीकृत करती हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **जलवायु परिवर्तन प्रभावों का शमन:** 'हरित नगर परियोजना' सीधे भारतीय शहरों की जलवायु परिवर्तन के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता, विशेष रूप से बढ़ते शहरी ताप द्वीप प्रभाव और जल संकट को संबोधित करती है। NBS परिवेश के तापमान को काफी कम कर सकते हैं, वायु गुणवत्ता में सुधार कर सकते हैं और भूजल पुनर्भरण को बढ़ा सकते हैं, जिससे अधिक रहने योग्य शहर बन सकते हैं।
- **शहरी पारिस्थितिकी तंत्रों और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए सह-लाभ:** जलवायु लचीलेपन से परे, हरित अवसंरचना शहरी जैव विविधता को बढ़ावा देती है, मनोरंजक स्थान प्रदान करती है, और शहरवासियों के मानसिक और शारीरिक कल्याण में योगदान करती है। बेहतर जल प्रबंधन जलजनित बीमारियों के जोखिम को भी कम करता है और सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों को बढ़ाता है।
- **कार्यान्वयन और शासन में चुनौतियाँ:** भूमि की कमी, उच्च प्रारंभिक लागत, अंतर-विभागीय समन्वय के मुद्दे और तकनीकी विशेषज्ञता की कमी हरित अवसंरचना को व्यापक रूप से अपनाने में महत्वपूर्ण चुनौतियाँ पैदा करती हैं। प्रभावी शासन, सहभागी नियोजन और टिकाऊ वित्तपोषण मॉडल सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- **शहरी नियोजन में प्रतिमान परिवर्तन:** यह पहल पारंपरिक ग्रे अवसंरचना-केंद्रित विकास से अधिक समग्र, पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील दृष्टिकोण की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है। यह एक ऐसे प्रतिमान को बढ़ावा देता है जहाँ शहरी विकास को प्राकृतिक प्रणालियों के साथ सामंजस्य बिठाया जाता है, जो सतत विकास लक्ष्यों (SDG 11: स्थायी शहर और समुदाय; SDG 6: स्वच्छ जल और स्वच्छता) के प्रति भारत की प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।
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97. भारत की 'समुद्र हरित' पहल: समुद्री संरक्षित क्षेत्रों और ब्लू कार्बन पारिस्थितिक तंत्रों का विस्तार
चर्चा में क्यों? (Why in News)
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने आज विस्तारित 'समुद्र हरित' पहल की शुरुआत की घोषणा की। यह एक व्यापक राष्ट्रीय कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य भारत के समुद्री संरक्षित क्षेत्रों (MPAs) के नेटवर्क में उल्लेखनीय वृद्धि करना और इसकी व्यापक तटरेखा के साथ ब्लू कार्बन पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण एवं बहाली को मजबूत करना है। यह पहल पिछले प्रयासों पर आधारित है और जलवायु लचीलेपन के लक्ष्यों को जैव विविधता संरक्षण के साथ एकीकृत करती है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •मौजूदा अभयारण्यों के विस्तार और महत्वपूर्ण तटीय एवं अपतटीय क्षेत्रों में नए बहु-उपयोग क्षेत्रों के प्रस्तावों सहित, MPAs के रूप में पदनाम के लिए 10 नए प्राथमिकता वाले स्थलों की पहचान।
- •मैंग्रोव, नमक के दलदल और समुद्री घास के बिस्तरों के लिए अनुसंधान, बहाली और टिकाऊ प्रबंधन प्रथाओं का समर्थन करने हेतु एक समर्पित 'ब्लू कार्बन फंड' का शुभारंभ।
- •वैज्ञानिक संस्थानों के सहयोग से एक राष्ट्रीय ब्लू कार्बन लेखांकन ढाँचे का विकास ताकि कार्बन पृथक्करण क्षमता को सटीक रूप से मापा जा सके और इसे भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) में एकीकृत किया जा सके।
- •समुद्री संरक्षित क्षेत्रों (MPAs) और बहाली परियोजनाओं के सह-प्रबंधन में स्थानीय मछली पकड़ने वाले समुदायों और स्वदेशी समूहों को शामिल करते हुए, समुदाय-आधारित संरक्षण मॉडल पर जोर।
- •ड्रोन प्रौद्योगिकी और उपग्रह निगरानी सहित, MPAs के भीतर बेहतर निगरानी और प्रवर्तन के लिए तकनीकी तैनाती।
- •ब्लू कार्बन पहलों में अनुभवी प्रमुख वैश्विक समुद्री संरक्षण संगठनों और राष्ट्रों के साथ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और ज्ञान का आदान-प्रदान।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- समुद्री संरक्षित क्षेत्र (MPAs) भौगोलिक रूप से परिभाषित क्षेत्र होते हैं जो जैव विविधता और प्राकृतिक एवं संबंधित सांस्कृतिक संसाधनों की सुरक्षा और रखरखाव के लिए समर्पित होते हैं।
- ब्लू कार्बन तटीय और समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों, मुख्य रूप से मैंग्रोव, ज्वारीय दलदल और समुद्री घास के मैदानों में अनुक्रमित कार्बन को संदर्भित करता है।
- भारत के मौजूदा MPAs में मन्नार की खाड़ी मरीन नेशनल पार्क, महात्मा गांधी मरीन नेशनल पार्क (अंडमान), और गहिरमाथा समुद्री वन्यजीव अभयारण्य (ओडिशा) शामिल हैं।
- वेटलैंड्स पर रामसर कन्वेंशन भी तटीय वेटलैंड्स के पारिस्थितिक महत्व को पहचानता है, जिसमें कई ब्लू कार्बन पारिस्थितिक तंत्र शामिल हैं।
- राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) पेरिस समझौते के तहत देशों द्वारा वैश्विक तापन को सीमित करने के लिए प्रस्तुत की गई जलवायु कार्य योजनाएँ हैं।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **जैव विविधता संरक्षण और जलवायु लचीलापन:** MPAs का विस्तार भारत की समृद्ध समुद्री जैव विविधता की रक्षा करने, गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों को बचाने और समुद्र के स्तर में वृद्धि तथा अत्यधिक मौसमी घटनाओं जैसे जलवायु परिवर्तन प्रभावों के खिलाफ तटीय पारिस्थितिक तंत्रों के लचीलेपन को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। ब्लू कार्बन पारिस्थितिक तंत्र तटीय सुरक्षा और मत्स्य पालन सहायता जैसी महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ भी प्रदान करते हैं।
- **आर्थिक अवसर और सतत विकास:** यह पहल स्थायी ब्लू इकोनॉमी प्रथाओं को बढ़ावा दे सकती है, जिसमें इको-टूरिज्म, स्थायी मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर शामिल हैं, जो पारिस्थितिक अखंडता सुनिश्चित करते हुए तटीय समुदायों के लिए आजीविका का सृजन करते हैं। NDCs में ब्लू कार्बन का एकीकरण अंतर्राष्ट्रीय जलवायु वित्त और कार्बन क्रेडिट बाजारों के लिए भी संभावनाएँ खोल सकता है।
- **कार्यान्वयन में चुनौतियाँ:** प्रभावी कार्यान्वयन के लिए स्थानीय समुदायों की सामाजिक-आर्थिक चिंताओं को संबोधित करना, अवैध गतिविधियों के खिलाफ मजबूत प्रवर्तन सुनिश्चित करना, सीमा-पार के मुद्दों का प्रबंधन करना और वित्तीय एवं तकनीकी बाधाओं को दूर करना आवश्यक है। संरक्षण लक्ष्यों को विकासात्मक आकांक्षाओं के साथ संतुलित करना एक प्रमुख नीतिगत चुनौती बनी हुई है।
- **महासागर शासन में भारत का नेतृत्व:** भारत द्वारा उठाया गया यह सक्रिय कदम वैश्विक पर्यावरणीय समझौतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुष्ट करता है और इसे विशेष रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में महासागर संरक्षण और जलवायु कार्रवाई में एक अग्रणी के रूप में स्थापित करता है। यह सतत विकास लक्ष्यों (SDG 14: जल के नीचे जीवन) के व्यापक उद्देश्यों के साथ भी संरेखित है।
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98. भारतीय शोधकर्ताओं ने हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए सॉलिड ऑक्साइड इलेक्ट्रोलाइसिस में रिकॉर्ड दक्षता हासिल की
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के नेतृत्व में भारतीय वैज्ञानिक संस्थानों के एक संघ ने सॉलिड ऑक्साइड इलेक्ट्रोलाइसिस सेल (SOEC) तकनीक में एक महत्वपूर्ण सफलता की घोषणा की है। उन्होंने हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए ऊर्जा रूपांतरण दक्षता में एक नया प्रतिमान स्थापित किया है, जिससे उत्पादन लागत में संभावित कमी आएगी और भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के लक्ष्यों में तेजी आएगी।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •अनुसंधान दल ने नए इलेक्ट्रोड सामग्री विकसित की और सेल आर्किटेक्चर को अनुकूलित किया, जिसके परिणामस्वरूप औद्योगिक परिचालन तापमान पर 90% से अधिक ऊर्जा रूपांतरण दक्षता प्राप्त हुई।
- •SOEC तकनीक उच्च तापमान (500-850°C) पर संचालित होती है, जो इसे औद्योगिक प्रक्रियाओं या परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से निकलने वाली अपशिष्ट गर्मी का उपयोग करने की अनुमति देती है, जिससे समग्र हाइड्रोजन उत्पादन प्रक्रिया अधिक ऊर्जा-कुशल बनती है।
- •यह उन्नति विशेष रूप से लागत में कमी को लक्षित करती है, जिसका उद्देश्य हरित हाइड्रोजन की समेकित लागत को प्रतिस्पर्धी स्तरों पर लाना है, जो उर्वरक, रिफाइनिंग और परिवहन जैसे क्षेत्रों में व्यापक अपनाव के लिए महत्वपूर्ण है।
- •यह सफलता भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा उद्देश्यों और डीकार्बोनाइजेशन के प्रति उसकी प्रतिबद्धता के अनुरूप है, जो देश को हरित हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी में एक अग्रणी के रूप में स्थापित करती है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- हरित हाइड्रोजन: नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करके पानी के इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा उत्पादित हाइड्रोजन।
- सॉलिड ऑक्साइड इलेक्ट्रोलाइसिस सेल (SOEC): हाइड्रोजन उत्पादन के लिए एक उच्च तापमान इलेक्ट्रोलिसिस तकनीक।
- इलेक्ट्रोलिसिस: पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित करने के लिए बिजली का उपयोग करने की प्रक्रिया।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **ऊर्जा संक्रमण और औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन:** SOEC तकनीक में यह सफलता भारत के ऊर्जा संक्रमण को एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन प्रदान करती है, जो हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए एक अधिक कुशल और लागत प्रभावी मार्ग प्रदान करती है। यह स्टील, सीमेंट और रसायन जैसे कठिन-से-डीकार्बोनाइज क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, और हरित हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात के लिए भारत को एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए भी आवश्यक है।
- **तकनीकी एकीकरण और अवसंरचना विकास:** SOEC प्रौद्योगिकी के सफल विस्तार के लिए इसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों और औद्योगिक अपशिष्ट ताप पुनर्प्राप्ति प्रणालियों के साथ एकीकृत करने में महत्वपूर्ण निवेश की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, इस उन्नति का पूरी तरह से लाभ उठाने और अर्थव्यवस्था भर में इसके व्यापक अनुप्रयोग को सुनिश्चित करने के लिए मजबूत हाइड्रोजन परिवहन, भंडारण और वितरण अवसंरचना का विकास आवश्यक होगा।
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99. भारत ने सटीक ऑन्कोलॉजी के लिए राष्ट्रीय एकीकृत जीनोमिक्स और एआई प्लेटफॉर्म (NIGAP) लॉन्च किया
चर्चा में क्यों? (Why in News)
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों के सहयोग से राष्ट्रीय एकीकृत जीनोमिक्स और एआई प्लेटफॉर्म (NIGAP) का औपचारिक रूप से शुभारंभ किया है। इस महत्वाकांक्षी पहल का उद्देश्य व्यक्तिगत जीनोमिक प्रोफाइल के आधार पर व्यक्तिगत चिकित्सा दृष्टिकोण को सक्षम करके और निदान तथा चिकित्सीय निर्णय लेने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लाभ उठाकर भारत में कैंसर उपचार में क्रांति लाना है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •NIGAP भारत भर के कैंसर रोगियों के जीनोमिक अनुक्रमण डेटा को नैदानिक जानकारी, इमेजिंग और पैथोलॉजिकल रिपोर्ट के साथ एक केंद्रीकृत, सुरक्षित डेटाबेस में एकीकृत करेगा।
- •यह प्लेटफॉर्म विशिष्ट आनुवंशिक उत्परिवर्तन की पहचान करने, दवा प्रतिक्रियाओं की भविष्यवाणी करने और व्यक्तिगत उपचार प्रोटोकॉल की सिफारिश करने के लिए उन्नत एआई और मशीन लर्निंग एल्गोरिदम का उपयोग करता है।
- •इसका उद्देश्य एक व्यापक भारतीय कैंसर जीनोमिक्स एटलस बनाना है, जो भारतीय आबादी में प्रचलित विभिन्न कैंसर के आनुवंशिक परिदृश्य में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा।
- •ऑन्कोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट और बायोइनफॉरमैटिशियन के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम NIGAP का अभिन्न अंग हैं, जो सटीक ऑन्कोलॉजी कार्यान्वयन के लिए कुशल मानव संसाधनों को सुनिश्चित करते हैं।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- सटीक ऑन्कोलॉजी: किसी व्यक्ति के आनुवंशिक बनावट और ट्यूमर विशेषताओं के अनुरूप कैंसर उपचार।
- जीनोमिक अनुक्रमण: किसी जीव के जीनोम के संपूर्ण डीएनए अनुक्रम का निर्धारण करना।
- स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई): चिकित्सा डेटा का विश्लेषण करने, निदान में सहायता करने और उपचारों को व्यक्तिगत बनाने के लिए एआई का उपयोग।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **स्वास्थ्य सेवा इक्विटी और डेटा गोपनीयता चुनौतियां:** जबकि NIGAP कैंसर देखभाल में क्रांतिकारी प्रगति का वादा करता है, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में समान पहुंच सुनिश्चित करना, विशेष रूप से उन्नत जीनोमिक परीक्षण के लिए, महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, संवेदनशील रोगी जीनोमिक जानकारी की सुरक्षा और दुरुपयोग को रोकने के लिए मजबूत डेटा गोपनीयता ढांचा और नैतिक दिशानिर्देश स्थापित किए जाने चाहिए।
- **अनुसंधान एवं विकास उत्प्रेरक और आर्थिक प्रभाव:** NIGAP द्वारा बनाया गया व्यापक कैंसर जीनोमिक्स एटलस कैंसर अनुसंधान और दवा खोज में तेजी लाने के लिए एक अमूल्य संसाधन होगा, जो भारत के जैव प्रौद्योगिकी और फार्मास्युटिकल क्षेत्रों के भीतर नवाचार को बढ़ावा देगा। इससे नए निदान और उपचारों का विकास हो सकता है, जिससे लंबी अवधि में स्वास्थ्य देखभाल लागत कम हो सकती है और जैव-अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सकता है।
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100. 'विज्ञान दृष्टि' का अनावरण: बाह्य-ग्रहों के चित्रण हेतु भारत की अगली पीढ़ी की अंतरिक्ष दूरबीन
चर्चा में क्यों? (Why in News)
इसरो ने राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से 'विज्ञान दृष्टि' के वैचारिक डिजाइन और प्रारंभिक वित्तपोषण की घोषणा की है। यह भारत की महत्वाकांक्षी अगली पीढ़ी की अंतरिक्ष दूरबीन है जिसे बाह्य-ग्रहों के वायुमंडलीय चित्रण और प्रारंभिक ब्रह्मांडीय प्रेक्षणों में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह वैश्विक खगोल भौतिकी में भारत के योगदान में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण (Key Highlights)
- •विज्ञान दृष्टि में उन्नत अनुकूली प्रकाशिकी और कोरोनोग्राफी क्षमताएं होंगी ताकि बाह्य-ग्रहों का सीधे चित्रण किया जा सके और बायोमार्कर की तलाश में उनकी वायुमंडलीय संरचनाओं का विश्लेषण किया जा सके।
- •यह मिशन पराबैंगनी, दृश्यमान और निकट-अवरक्त स्पेक्ट्रा में संचालित होने का लक्ष्य रखता है, जो पिछली भारतीय अंतरिक्ष दूरबीनों की तुलना में व्यापक अवलोकन रेंज प्रदान करेगा।
- •यह तारा निर्माण, आकाशगंगा विकास और ब्रह्मांडीय प्रभात की जांच के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में काम करेगा, जो जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) जैसे अंतर्राष्ट्रीय वेधशालाओं का पूरक होगा।
- •यह परियोजना विशिष्ट डिटेक्टरों और उन्नत डेटा प्रसंस्करण एल्गोरिदम सहित महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के स्वदेशी विकास पर जोर देती है, जो अंतरिक्ष विज्ञान में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देती है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण:
- विज्ञान दृष्टि: भारत की प्रस्तावित अगली पीढ़ी की बहु-तरंगदैर्ध्य अंतरिक्ष दूरबीन।
- कोरोनोग्राफी: एक ऐसी तकनीक जिसका उपयोग तारे से आने वाली सीधी रोशनी को रोकने के लिए किया जाता है ताकि पास की वस्तुओं, जैसे बाह्य-ग्रहों को देखा जा सके।
- बायोमार्कर: जीवन का संकेत देने वाले पदार्थ, जिनकी बाह्य-ग्रहों के वायुमंडल में तलाश की जाती है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण:
- **सामरिक महत्व और वैश्विक सहयोग:** विज्ञान दृष्टि पहल अत्याधुनिक खगोल भौतिकी अनुसंधान में भारत की प्रतिष्ठा को बढ़ाती है, इसे ब्रह्मांडीय उत्पत्ति और अलौकिक जीवन की क्षमता को समझने के वैश्विक प्रयासों में एक प्रमुख भागीदार के रूप में स्थापित करती है। यह अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग और डेटा साझाकरण के लिए रास्ते खोलता है।
- **तकनीकी स्पिन-ऑफ और मानव पूंजी:** ऐसी उन्नत दूरबीन के विकास के लिए उच्च-परिशुद्धता विनिर्माण, उन्नत कंप्यूटिंग और ऑप्टिकल प्रौद्योगिकियों में महत्वपूर्ण निवेश की आवश्यकता होती है। इससे अन्य क्षेत्रों को लाभान्वित करने वाले तकनीकी स्पिन-ऑफ होंगे और एक अत्यधिक कुशल कार्यबल का पोषण होगा, जो भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता में योगदान देगा।
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